वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

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  • प्रतिभावान उदीयमान सूर्य होते हैं

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 8वीं पुस्तक के दूसरे लेख में चर्चा की गयी है कि प्रतिभावान उदीयमान सूर्य होते हैं जिसके दर्शन होते ही सर्वत्र चेतना का एक नया माहौल उमड़ पड़ता है। आज के ज्ञानप्रसाद लेख के अमृतपान के लिए  सभी गुरु शिष्यों को सादर आमंत्रण है,आइए इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाएं एवं…

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  • पात्रता विकसित करना एक निजी पुरुषार्थ है

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 8वीं पुस्तिका का शीर्षक “महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण” है। इस दिव्य पुस्तकमाला की अन्य 23 पुस्तकों की तरह यह लघु पुस्तिका  भी केवल 35 पन्नों  और 9000 से भी कम शब्दों में जिस ज्ञान को अपने गर्भ में संजोए हुए हैं उसे गुरुदेव ने अपने जीवन भर के साहित्य का…

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  • युग के मत्स्यावतार का क्या अर्थ है ? समापन लेख

    आज “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” लघु पुस्तिका का समापन 12वें लेख के साथ हो रहा है, कितना सौभाग्य है कि वर्तमान लेख श्रृंखला में गुरुदेव द्वारा मथे गए मक्खन का अमृतपान हो रहा है। आज प्रस्तुत किये गए लेख के दो भाग हैं। पहले भाग में युग के मत्स्यावतार (भगवान विष्णु के पहले अवतार-मछली)…

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  • अब भगवान की पुकार पर ध्यान देने का अवसर है

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ तो नाम जप,ध्यान एवं प्राणयाम से हुआ है जिसे लगभग सभी पाठक जानते ही हैं। गुरुदेव बता रहे हैं कि यह सभी कर्मकांडों के पीछे मुख्य उद्देश्य आत्मविकास एवं  उत्कर्ष है न कि सभी कर रहे हैं तो हम भी करते जाएँ,लकीर पीटते जाएँ। गुरुदेव बता रहे हैं कि …

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  • कर्मकाण्ड, प्रतीक पूजा की फिलॉसॉफी क्या है ?

    परम पूज्य गुरुदेव ने कर्मकांडों को समझने,उनके पीछे छिपे तथ्यों को समझने के लिए बार -बार बल दिया है, संसार में अंधविश्वास का तो  पहले ही बोलबाला है, यदि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से इस दिशा में कोई सार्थक परिणाम निकल पाते हैं, गुरूसाहित्य को समझा जाता है तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।…

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  • मानवी काया का “नौलखा हार” सभी को उपलब्ध है

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” की 9वीं कक्षा में समर्पित गुरुशिष्यों का स्वागत है। त्रय शताब्दी वर्ष में लिया गया संकल्प सुपर हाई स्पीड से आगे बढ़ता जा रहा है जिसके लिए साथी बधाई के पात्र हैं। आज के ज्ञानप्रसाद लेख में चर्चा की गयी है कि भगवान को…

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  • भारतीय संस्कृति में “9” के विशेष महत्व का क्या आधार है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की सातवीं पुस्तिका पर आधारित 8वें ज्ञानप्रसाद लेख के अध्ययन के लिए सभी गुरुशिष्यों का स्वागत है। पहली 6 पुस्तिकाओं की भांति इस पुस्तिका को भी सभी उपलब्ध स्रोतों की सहायता से समझने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ने गुरुकृपा से 23 पुस्तिकाओं के दिव्य संग्रह की…

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  • शालीनता बिना मोल मिलती है,लेकिन उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख ऐसे मानवीय मूल्यों की चर्चा कर रहा है जिनका पालन करके आज के युग की अनेकों समस्याओं का निवारण हो सकता है। समाज में मची त्राहि-त्राहि का एक कारण मानवीय मूल्यों का ह्रास ही है। जब ऐसा होता है तो मानवता का लुप्त होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में युगनिर्माण और…

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  • नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधरित लेख श्रृंखला के आज के ज्ञानप्रसाद लेख में गुरुदेव पूर्ण विश्वास से समझा रहे हैं कि नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा। कोई भी नया  प्रोडक्ट बनाने के लिए फैक्ट्री लगानी  पड़ती है, मशीनें इंसटाल करनी होती हैं,और न जाने कौन-कौन सी प्रक्रियाएं करने के बाद ही फिनिश्ड…

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  • क्या दुर्गति से भरी दुर्दशा ही मानव जीवन की नियति है?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” 23 छोटी-छोटी पुस्तिकाओं का एक ऐसा संग्रह है जिसे परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा जी ने अपने जीवन भर के साहित्य का मक्खन कहा है। इन 23 पुस्तकों को मात्र 23 दिनों में पढ़ा जा सकता है लेकिन ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से पिछले तीन माह से इस संग्रह…

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  • क्या मंदिरों में प्रतिमाओं के स्थान पर विशालकाय दर्पण होने चाहिएं?

    पिछले लेख में दर्पण प्रक्रिया के बारे में चर्चा की गयी थी,आज का लेख उसी सिद्धांत की एक्सटेंशन है। वर्तमान लेख में इस एक्सटेंशन को ऐसे स्तर तक बढ़ा  दिया गया है कि मंदिर में प्रतिमा के स्थान पर एक विशालकाय दर्पण का सुझाव भी आन पड़ा है। लेख में इस उदाहरण का आनंद तो…

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  • अंतःकरण में झाँकने की दर्पण प्रक्रिया 

    आज के लेख में अंतकरण को समझने का प्रयास किया गया है। “अंतःकरण” शब्द न जाने हज़ारों बार सुन चुके हैं,पढ़ चुके हैं। आज मन में विचार उतरा कि शरीर का कौन सा भाग है जिसे अंतःकरण कहा जाए? दिल, दिमाग,फेफड़े आदि तो शरीर के भाग हैं ही,क्या इन्हीं की तरह अंतःकरण भी शरीर का…

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  • परिस्थितियां कभी भी, किसी के लिए भी अनुकूल नहीं थीं 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तक “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख इतना प्रैक्टिकल है कि लेख में वर्णित किए कंटेंट से लगभग सभी पाठक भलीभांति परिचित हैं। जीवन से जुड़े सभी तथ्य इतने सरल हैं कि इन्हें कोई भी बड़ी ही आसानी से समझ सकता है लेकिन प्रश्न तो यह उठता…

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  • दिवास्वप्न (Daydreaming) के मायाजाल से बाहिर निकलें 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार की सर्वप्रिय बिटिया, देव संस्कृति विश्वविद्यालय में MA साइकोलॉजी की विद्यार्थी,संजना के सुझाव पर आरम्भ किये गए एक विशाल प्रोजेक्ट के अंतर्गत “क्रांतिधर्मी साहित्य” की 23 पुस्तकों के क्रमवार अध्ययन में 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का शुभारम्भ करते जिस प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है उसे शब्दों में…

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  • जो पुकारेगा,उसे हम सामने खड़े दिखेंगें 

    साथिओ “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका पर आधारित श्रृंखला का नौंवा एवं  समापन लेख गुरुदेव का आश्वासन एवं भविष्यवाणी को वर्णन कर रहा है। मात्र 35 पन्नों की छोटी सी पुस्तिका ने गुरुदेव के मार्गदर्शन में हमसे 9 लेख लिखवा लिए,यह सब कैसे हुआ केवल गुरुवर ही जानते हैं।  आइए, सभी गुरुशिष्यों के स्वागत के…

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  • भक्ति और शक्ति दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं 

    अगर साधक की भक्ति सच्ची एवं निस्वार्थ है तो ईश्वर भी उसमें साथ देने से पीछे नहीं हटते हैं। परम पूज्य गुरुदेव की जीवन झांकी पर दृष्टि दौड़ाने पर यह तथ्य इतना सार्थक दिखता है कि शंका की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती। 15 वर्ष की आयु में दादागुरु द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूर्ण…

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  • सच्चे अध्यात्मवाद में विलक्षण शक्ति समाई हुई है 

    दादागुरु ने परम पूज्य गुरुदेव को अध्यात्म का कार्य सौंपते हुए अध्यात्म की असाधारण शक्ति का भी बता दिया था लेकिन जिज्ञासु होने के कारण गुरुदेव कहाँ मानने वाले थे, वोह तो इस तथ्य को साबित करने में लगे हुए थे कि क्या भक्ति में  सचमुच शक्ति समाई हुई है। यदि ऐसा नहीं है तो…

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  • गुरुदेव की सिद्धियां,गुरुदेव के ही शब्दों में 

    आज के लेख के बारे में गुरुदेव लिखते हैं कि इस चर्चा को अप्रासंगिक, अनावश्यक और अहंकार स्तर का उल्लेख न समझा जाए क्योंकि कहने को तो बहुत कुछ है इसीलिए जीवन भर के लम्बे प्रसंग को ऐसे जिज्ञासु बच्चों के लिए छोड़ दिया है जो शरीर न रहने पर कुछ और खोजने-जानने  के लिए…

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  • विज्ञान (शरीर) और अध्यात्म (प्राणचेतना) को मिलकर कार्य करना होगा 

    “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका में  “लेखक का निजी अनुभव” शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुए कंटेंट पर आज का ज्ञानप्रसाद लेख आधरित है। कहाँ मिलेगा ऐसा गुरु जिसने अपनी संतान के लिए,अपने शरीर को ही प्रयोगशाला बना लिया और जो भी रिजल्ट्स मिले उन्हें हम सबको (बिना किसी कोर्ट पेपर,कोर्ट फीस के) वसीयत के तौर…

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  • वर्तमान असमंजस की स्थिति का क्या समाधान है ?  

    हम सब जानते हैं कि आजकल ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की  23 छोटी-छोटी पुस्तिकाओं को आधार बना कर ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं। परिवारजनों द्वारा लिए गए संकल्प के अंतर्गत पहली 5 पुस्तिकाओं के  समापन के बाद कुछ दिन पहले ही छठी पुस्तक “परिवर्तन के महान क्षण”…

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  • क्या मनुष्य तेज़ी से सामूहिक आत्महत्या की ओर  बढ़ रहा है।?

    परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य रचना “परिवर्तन के महान क्षण” पर आधारित लेख श्रृंखला का आज तीसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है, सभी साथिओं को ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के ज्ञानकलश से निकले अमृत को ग्रहण करने के लिए  सादर निमंत्रण है। हमारे अनेकों साथिओं ने यह पुस्तिका एक बार नहीं,कई बार पढ़ी होगी लेकिन जिस…

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  • क्या दिख रही प्रगति सच में प्रगति ही है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की छठी पुस्तिका  “परिवर्तन के महान” है। आज  इस पुस्तिका पर आधारित लेख श्रृंखला के दूसरे लेख का अमृतपान करने के लिए साथिओं को सादर निमंत्रण है।  सभी जानते हैं कि परिवर्तन एक शाश्वत नियम है, इस तथ्य को कोई भी नकार नहीं सकता। प्रश्न यह उठता है कि एक शताब्दी से…

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  • “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका पर आधरित लेख श्रृंखला का प्रथम लेख

    “परिवर्तन के महान क्षण” मात्र 35 पन्नों की एक बहुत ही छोटी सी पुस्तिका है। 23 पुस्तकों के अद्भुत संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की यह छठी पुस्तिका है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ने इन सभी 23 पुस्तकों को,एक-एक करके, एक-एक शब्द को पढ़ कर,समझ कर ज्ञानप्रसाद लेखों के रूप में प्रस्तुत करने का संकल्प लिया…

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  • एक ही प्रवाह में लिखी गयी थी “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला”

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समर्पित साथिओं को बताना चाहेंगें  कि आज का ज्ञानप्रसाद लेख बहुत ही छोटा है लेकिन बहुत ही बड़ा ज्ञान लिए हुए है। 23 पुस्तकों का  संग्रह जिसे “क्रांतिधर्मी साहित्य” का टाइटल दिया गया है, आज का लेख इस विषय पर चर्चा कर रहा है कि “एक ही प्रवाह में” लिखे…

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  • “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तक के शुभारम्भ से पूर्व गुरुदेव के सन्देश एक बार फिर से रिवीजन 

    वर्ष 2026 गायत्री परिवार के लिए एक अविस्मरणीय वर्ष स्मरण किया जायेगा। यह वर्ष परम वंदनीय वंदनीय माता जी के जन्म दिवस के 100 वर्ष,अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समर्पित साथिओं ने इस त्रय शताब्दी वर्ष…

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  • 260926 अर्थात 26 सितम्बर 2026 का विशेष विशेषांक-हमारे अंतर्मन की वाणी 

    जून 2026 के अंतिम शनिवार के बाद आज सितम्बर 2026 के अंतिम शनिवार का सेगमेंट साथिओं के समक्ष प्रस्तुत है। जुलाई,अगस्त के सेगमेंट प्रस्तुत न होने के कारणों पर चर्चा किये बिना सीधा आज के सेगमेंट की और रुख करना उचित होगा।  अपने ह्रदय से भी निकट,हमारे अंतर्मन में विराजमान,हमारे प्रिय साथिओं का आज के…

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  • सतयुग की वापसी के लिए भाव-सम्वेदना ही एकमात्र विकल्प है

    वर्तमान लेख श्रृंखला का 8वां समापन लेख बता रहा है कि  इक्कीसवीं सदी भाव-सम्वेदनाओं के उभरने-उभारने की अवधि है। हमें इस उपेक्षित क्षेत्र को ही हरा-भरा बनाने में निष्ठावान माली,ईश्वर की संतान की भूमिका निभानी चाहिए। यह विश्व उद्यान इसी आधार पर हरा-भरा,फला-फूला एवं सुषमा-सम्पन्न बन सकेगा। आश्चर्य नहीं कि वह स्वर्गलोक वाले नन्दन वन…

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  • दानव नहीं, देवता बनें, सतयुग स्वतः ही अवतरित हो जायेगा 

    Fortune knocks at your door at least once. भाग्य एक बार अवश्य ही हर मनुष्य का द्वार खटखटाता है, सफलता हर किसी के लिए उपलब्ध है उसका वरन करने के लिए उचित समय और अवसर का नाम ही संयोग है। एक बार यह संयोग क्लिक हो गया, आपने उस दिव्य शक्ति के लिए द्वार खोल…

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  • माँ प्रकृति अपने बच्चों का विनाश कदापि नहीं होने देगी

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का तीसरा  ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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  • सतयुग की वापसी मनुष्य में देवत्व के अवतरण से ही संभव है 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 23 पुस्तकों के बारे में गुरुदेव कह चुके हैं कि यह हमारे जीवन भर के साहित्य का मक्खन है, हमारे विशाल साहित्य को न  पढ़ सको तो कोई बात नहीं लेकिन इन 23 पुस्तकों को बार-बार पढ़ना,100 बार पढ़ना, एक-एक शब्द पढ़ना। गुरुदेव ऐसा भी कह रहे हैं कि  गायत्री महाविज्ञान…

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  • समस्या अभावग्रस्तता की नहीं है, प्राप्त साधनों के सुनियोजन की है 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख में इस विषय पर चर्चा की गयी है कि समाज में दिख रही समस्याओं का आधार “साधनों का अभाव” है लेकिन ऐसा नहीं है। साधन-सम्पन्न अमीरों को देख कर दरिद्रों को भी उलटे-सीधे मार्ग अपनाकर अमीर होने की ललक लगती जा रही है। जब उलटे-सीधे मार्ग की बात हो रही है…

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  • सम्वेदना का सरोवर सूखने न दें

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का सन्देश, “जो उसकी सुनता है,गुरुदेव की सुनता है उसे अन्य किसी की भी सुनने का आवश्यकता नहीं पड़ती है।”  “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी”  में गुरुदेव जिस सतयुग की बात कर रहे हैं उसे हम सबने इक्क्ठे होकर,अपनी आँखों के ऊपर चढ़े हुए चश्मे को बदल…

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  • अदृश्य सत्ता के महान् कार्य में  श्रेय के अधिकारी बनें  

    युग परिवर्तन के आधार को यदि एक शब्द में व्यक्त करना हो तो इतना कहने भर से भी काम चल सकता है कि अगले दिनों “निष्ठुर स्वार्थपरता” को निरस्त करके उसके स्थान पर “उदार भाव-सम्वेदनाओं” को अन्त:करण की गहराई में प्रतिष्ठित करने की, उभारने की, खोद निकालने की आवश्यकता पड़ेगी। परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम…

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  • इतनी प्रगति के बावजूद लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?  

    कल वाले अति विस्तृत लेख में गुरुदेव बता रहे थे कि सतयुग  कोई बाहरी समय या स्थान नहीं है, यह मनुष्य की आंतरिक स्थिति है। गुरुदेव इतनी प्रगति को देखते हुए, चिंतित होते हुए पूछ रहे हैं कि इतना सब कुछ होने के बावजूद “लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?” ऐसी स्थिति से…

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  • अवश्य ही सतयुग की वापसी हो रही है !!!

    आज के लेख का मुख्य सन्देश :  “20वीं सदी ने हमें ‘दिमाग’ (Intelligence quotient-IQ ) दिया, लेकिन 21वीं सदी हमसे ‘दिल’ (Emotional quotient-EQ) की मांग रही है। मशीनें तब तक इंसान की जगह नहीं ले सकतीं, जब तक इंसान खुद मशीन की तरह सोचना बंद न कर दे।” ********************* परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा…

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  • “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी” के शुभारम्भ से पहले की भूमिका 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की आज की गुरुकक्षा में सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन करते हैं। मात्र 1500 शब्दों का बहुत ही संक्षिप्त, आज का लेख कुछ ऐसा कह रहा है जिसे रेगुलर लेख के दौरान कहना कठिन रहता है। ज्ञानप्रसाद लेखों के दौरान,अनेकों प्रकार की ज़ंजीरों (शब्द सीमा,साथिओं की समय सीमा, ग्रहण करने…

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  • प्रतिभा परिष्कार के 10 प्रयोगों में से बाकी 8  का संक्षिप्त वर्णन 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” गुरुदेव द्वारा रची गयी 23 छोटी-छोटी पुस्तकों की एक अद्भुत प्रस्तुति है। इस पुस्तकमाला  की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित लेख श्रृंखला का आज समापन हो रहा है। हमारा विश्वास है कि अनेकों  लेखों की इस दिव्य श्रृंखला को आत्मसात करके पाठकों के अनेकों भ्र्म,शंकाओं का…

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  • प्रतिभा परिष्कार के 10 प्रयोगों में से 2 का संक्षिप्त वर्णन 

    आज के लेख का शुभारम्भ करने से पहले सभी साथिओं से करबद्ध क्षमाप्रार्थी  हैं कि कल हम दिव्य सन्देश प्रकाशित करना ही भूल गए। आदरणीय मंजू मिश्रा बहिन जी ने मैसेज करके पूछा, तब कहीं याद आया। आदरणीय नीरा जी अक्सर पूछ लेती हैं लेकिन आज वोह भी भूल गईं ।  23 छोटी-छोटी पुस्तकों की…

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  • मनुष्य को दैवी अनुदान/वरदान कैसे प्राप्त होते हैं 

    23 छोटी-छोटी पुस्तकों की “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज के ज्ञानप्रसाद के अमृतपान के लिए आपको सादर आमंत्रण है।  आज के लेख में मार्गदर्शन मिल रहा है कि अनेकों सम्पदाओं से लैस मनुष्य अपनेआप को भवसागर में धँसाता ही क्यों जाता है, क्यों नहीं…

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  • ईश्वर का राजकुमार इतना भटका हुआ क्यों है?

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से मनुष्य को अनेकों बार ईश्वर का राजकुमार, वरद पुत्र अर्थात वरदान लेकर जन्मा पुत्र, असीमित प्रतिभाओं और सम्पदाओं से लैस ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना जैसे विशेषण प्रयोग करके गौरवान्वित किया जाता रहा है लेकिन इतनी समृद्धि होने के बावजूद भी अपने आस पास जिसे भी देखो दुःखी, भटका…

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  • गुरुदेव की उलटे को उल्ट कर सीधा करने की प्रक्रिया

       मनुष्य ने अपनी संकल्पशक्ति एवं ईश्वर की अनंत कृपा से अग्नि के आविष्कार से अपनी जीवन यात्रा का शुभारम्भ किया,आज वोह आकाश को छूने की क्षमता रखता है। जब कोई संतान अति शक्तिशाली हो जाती है,पिता के विचारों का विरोध करना उसकी आदत बन जाती है। स्थिति इस हद तक पंहुच जाती है कि…

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  • क्या इस संसार में सबको सब कुछ मिल जाता है?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है, स्वाध्याय द्वारा इसी मक्खन को समझकर, चिंतन करके, अन्य स्रोतों से ज्ञान शामिल करके,सरल करके वर्तमान ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं, हमारे साथी इन लेखों को पढ़कर, कमेंट और काउंटर कमेंट से हमारा उत्साहवर्धन कर रहे हैं जिसके लिए हम सभी का…

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  • क्या भगवान की रचना मनुष्य ने की है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित लेख श्रृंखला के अगले लेख को लिखने के लिए जब स्वाध्याय करना शुरू किया तो एक पॉइंट ऐसा आया जिसने हमारी आज की दिशाधारा ही बदल डाली। यह पॉइंट था, “ईश्वर को मनुष्य ने ही बनाया है।” हालाँकि इस पॉइंट में कोई विशेष बात नहीं लगती लेकिन हमारा माथा तो…

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  • ईश्वर के अनुदानों की प्लानिंग करना मनुष्य की ही ज़िम्मेदारी है 

    23 पुस्तकों के दिव्य संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य” की चौथी पुस्तक “युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज का ज्ञानप्रसाद लेख बता रहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदान की गयी प्रतिभा का नियोजन करना मनुष्य की अपनी ही ज़िम्मेदारी है। इस मंच से आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार,आत्मकल्याण और आत्मविकास जैसे शब्दों की बार-बार चर्चा की…

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  • मनुष्य की 93% प्रतिभा प्रसुप्त ही पड़ी रहती है 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है। आज इसी मक्खन की चौथी पुस्तक “ युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधरित लेख श्रृंखला का चौथा लेख मनुष्य की उस 93% शक्ति के बारे में जानकारी दे रहा है जो सोई पड़ी रहती है।   एक कहावत है कि ‘‘ईश्वर…

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  • प्रतिभा संवर्धन(Talent development) के लिए भारत के पास कौनसी जादू की छड़ी है ?

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ हमारी मातृभूमि “भारत” के लिए प्रयोग किये गए  अनेकों विशेषणों से हो रहा है। जगतगुरु,विश्वगुरु,चक्रवर्ती,सोने की चिड़िया, स्वर्गादपि गरीयसी जैसे विशेषणों से हमारे (कैनेडियन होने के भावजूद) समेत प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। लेख का अमृतपान करने से, इन विशेषणों की सार्थकता होना सुनिश्चित है। इन्हीं विशेषणों ने …

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  • प्रसुप्त प्राणाग्नि के प्रज्जवलन के लिए कोई प्रेरक भी तो मिले !!!

    Every human is loaded with immense potential,प्रत्येक मनुष्य असीमित क्षमताओं से ओतप्रोत है,उसे तो ज्ञान ही नहीं है कि ईश्वर ने उसे क्या कुछ देकर इस धरती पर अवतरित किया है।  आज का लेख उन्हीं प्रसुप्त प्रतिभाओं को जागृत करने का सरल सा मार्ग प्रदान कर रहा है, बता रहा है कि वैभव,पराक्रम,विभूतियाँ आदि ईश्वर…

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  • क्या  मानव शरीर सच में एक Vehicle है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक,“युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार भाग 2 ” के  प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख का अमृतपान करने के लिए सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन है।  गुरुदेव बता रहे हैं:  गाड़ी  का ढाँचा लोहे का बना होता है। उसके पहियों में रबड़, सीटों पर रेक्सीन, खिड़कियों में काँच आदि लगे होते हैं लेकिन गाड़ी का…

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  • शालीनता ही प्रतिभा का आधार है -तीसरी पुस्तक का समापन लेख  

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” 23 पुस्तकों का एक ऐसा अद्भुत साहित्य है जिसे पूज्यवर ने स्वयं अपने जीवन भर के “साहित्य का मक्खन” कहा है। उन्होंने कहा है कि मेरे द्वारा रचित विशाल साहित्य न भी पढ़ो तो कोई बात नहीं है लेकिन इस मक्खन को कभी भी मिस न करना।  गुरुदेव के  निर्देश एवं हमारी…

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  • 21वीं सदी प्रतिभावानों का प्ले ग्राउंड है !!

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शीर्षक बहुत ही आकर्षक है और उससे भी आकर्षक इसका कंटेंट है जहाँ हम आधुनिक रिसर्च के उदाहरणों से  देखेंगें कि 21वीं सदी, जिसके 26वें वर्ष में से हम इस समय गुज़र रहे हैं, प्रतिभावानों की क्रीड़ास्थली कैसे है।  लेख का शुभारम्भ करने से पहले  पाठकों को बताना अपना कर्तव्य…

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  • उच्चस्तरीय प्रतिभाएं हमारे आस-पास ही हैं

    शुक्रवार वाले लेख में “उच्चस्तरीय प्रतिभाएं कहाँ से आएंगीं ?” पर चर्चा हुई थी, आज चर्चा का विषय है  “उच्चस्तरीय प्रतिभाएं हमारे आस-पास ही हैं”, प्रत्येक पाठक को अपना मूल्यांकन करके समझ जाना चाहिए कि  “हम किसी से कम नहीं।” ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार एक ऐसा मंच है जहाँ असम्भव तो सम्भव करने का जादुई…

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  • उच्चस्तरीय प्रतिभाएं कहाँ से आएंगीं ?

    परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष  एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…

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  • प्रतिभा परिष्कार (Talent enhancement) की आरंभिक शर्त क्या है?

    परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष  एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…

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  • मानव शरीर में व्याप्त असीम शक्ति (Bioelectricity) ही प्रतिभा परिष्कार का आधार है

    परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष  एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…

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  • 18 अगस्त 2026 का दैनिक दिव्य संदेश

    अगर इन मूल्यों में से केवल कुछ एक का पालन हो जाए तो सतयुग की वापसी सुनिश्चित है, यही है आज का दिव्य संदेश।

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  • गुरुदेव के “सतयुग की वापसी” का क्या आधार है ?

    वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1989–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार भाग 1” में गुरुदेव ने उस समय, वर्षों पहले लिख दिया था कि हम “संधिकाल” से गुज़र रहे हैं। इस संधिकाल में दो शताब्दियों का मिलन हो रहा है। 20वीं…

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  • युगसृजन के लिए प्रतिभाओं को प्रेरित करता एक लेख

    कहने को तो हमारे गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी केवल पांचवीं कक्षा तक ही स्कूली शिक्षा प्राप्त किये थे लेकिन उनके द्वारा रचित विशाल साहित्य देखकर आँखें खुली की खुली रह जाती हैं।  प्रतिभा जैसे विषय पर (जिससे लगभग सभी पाठक परिचित हैं) एक नहीं दो पुस्तकें लिख कर गुरुदेव ने जो उपकार किया…

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  • प्रतिभा परिवर्धन (Talent development) समझने के लिए एक सरल सा लेख

    Personality development, वर्तमान युग की बहुत बड़ी मांग बन चुकी है,कंपनियों में मैनेजर लेवल के लोगों के लिए कोर्सेज डिज़ाइन किये हुए हैं जिन्हें करना आवश्यक समझा जाता है। कॉलेज, यूनिवर्सिटीज में भी इस कोर्स का बड़ा महत्व है। इसी तरह  Talent development के भी कुछ कोर्स उपलब्ध हैं जिन्हें पर्सनालिटी डेवलपमेंट के साथ ही…

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  • युगपरिवर्तन के लिए उत्कृष्ट प्रतिभाएं कहाँ से मिलेंगीं ?

    23 उत्कृष्ट पुस्तिकाओं का अद्भुत संग्रह जिसे गुरुदेव ने आज से लगभग 36 वर्ष पूर्व “क्रांतिधर्मी सहित्य पुस्तकमाला” टाइटल से रच कर हम सब पर जो उपकार किया है उसे शब्दों में वर्णन लगभग असंभव है। गुरुदेव ने इस पुस्तकमाला को अपने सारे साहित्य का मक्खन कहा है,उसी मक्खन की तीसरी रचना “युग की मांग-प्रतिभा…

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  • कहीं अगले दिनों महाविनाश तो नहीं घटने वाला? 

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख इतना सरल और प्रेरणादायक है कि शायद ही कोई पाठक यह न कह उठे,“गुरुदेव हम तैयार हैं,बताइए क्या करना है?” गुरुदेव एक  Fully-trained  गोताखोर की तरह प्राणवानों को खारे समुद्र में से मणिमुक्तकों की तरह ढूँढ़ निकालने में लगे हुए हैं। आइए, 11 अगस्त 2026 की गुरुकक्षा में स्वयं को समर्पित…

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  • चार प्रकार की प्रतिभाओं का संक्षेप में वर्णन 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार-भाग 1” के पहले  ज्ञानप्रसाद लेख का अमृतपान करने के लिए ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा में आपका स्वागत है।  56 पन्नों की इस लघु पुस्तिका को समझाने के लिए गुरुवर ने हम शिष्यों  के लिए आरम्भ में ही सारांश प्रकाशित कर दिया…

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  • परम पूज्य गुरुदेव के पाँच स्थूल शरीरों का संक्षिप्त सा वर्णन 

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख परम पूज्य गुरुदेव के पांच स्थूल शरीरों का संक्षिप्त सा वर्णन प्रस्तुत कर रहा है। अखंड ज्योति के जुलाई 1997 अंक में प्रकाशित हुए लेख पर आधरित आज के   कि लगभग 30 वर्ष में सभी संस्थानों का इतना विकास एवं विस्तार हो चुका  है कि क्या कहा जाए। साथिओं से…

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  • परम पूज्य गुरुदेव पांच शरीरों से जीते थे-परम वंदनीय माता जी द्वारा दिया गया  दिव्य वर्णन 

    जुलाई 1997 की अखंड ज्योति में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था “विराट प्रज्ञापुरुष गुरुदेव जिनके पांच स्थूल शरीर अभी भी हमारे बीच हैं।” इन पंक्तियों के लेखक ने मात्र 4 पन्नों के लेख को जब देखा तो उसकी आँखें ही चुंधियाँ सी गयीं। लेख में समाहित अद्भुत,विस्तृत ज्ञान, अनेकों Cross references के बारे…

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  • गुरुदेव की सूक्ष्मीकरण साधना के विश्व्यापी सामूहिक एवं व्यक्तिगत प्रमाण 

    अखंड ज्योति जुलाई 1997, गुरुसत्ता के पाँच सूक्ष्मशरीर – वीरभद्र जो हम सबकी रक्षा में जुटे हुए हैं आज के ज्ञानप्रसाद लेख में हमारे साथी देखेंगें कि गुरुदेव की सूक्ष्मीकरण साधना की शक्ति ने विश्व भर में क्या-क्या कुछ करवा डाला। अवश्य ही गुरुदेव की तरह अनेकों दिव्य आत्माएं विश्व को बचाने में प्रयासरत है,…

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  • सूक्ष्म की असीमित शक्ति को समझने का सरल सा प्रयास

    हम अक्सर कहते रहते हैं कि “ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार” जैसा छोटा सा परिवार केवल समर्पित साथिओं के निस्वार्थ समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा से ही चल रहा है। हर कोई समर्पित साथी यथासंभव योगदान कर रहा है जिसके लिए हम सदैव आभारी हैं।  इसी योगदान ने आज के लेख को जन्म दिया है।  हमारी आदरणीय पुष्पा…

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  • परम पूज्य गुरुदेव द्वारा 1971 वाली हिमालय यात्रा  से पहले बनाई गयी व्यवस्था   

    29 जुलाई 2026, गुरुपूर्णिमा के दिन आरम्भ हुए इस लघु ज्ञानप्रसाद लेख श्रृंखला का आज चौथा एवं समापन लेख गुरुचरणों में समर्पित हैं। अखंड ज्योति के मई 1971 अंक में प्रकाशित 6 पन्नों में समाहित एक  लेख का प्रकट होना मात्र संयोग तो नहीं हो सकता, साक्षात् गुरु आदेश कहें तो शायद गलत न हो। …

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  • मथुरा से विदाई के समय परम पूज्य गुरुदेव के मार्मिक भाव  

    अखंड ज्योति मई 1971 में प्रकाशित “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ इतना विस्तृत और मार्मिक है कि किसी की भी आँखों में आंसू ला सकता है।पाठक स्वयं अनुभव कर सकते हैं कि इतना भावुक,इतना प्रेम करने वाला गुरु,मार्गदर्शक कहाँ मिल पायेगा। आज का ज्ञानप्रसाद लेख अपने बच्चों के प्रति स्नेह एवं अपने गुरु के प्रति…

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  • कौन है आत्मदेवता,एवं उसकी आराधना कैसे की जाए?

    अखंड ज्योति मई 1971 के “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ में परम पूज्य गुरुदेव ने आधुनिक युग के मानव की प्रवृति को समझते हुए कहा कि प्राचीनकाल की शारीरिक, मानसिक,भौतिक एवं तात्त्विक परिस्थितियाँ अब बदल चुकी हैं। साधना तपश्चर्या का जो क्रम भूतकाल में अपनाया जाता रहा है, वह आज की परिस्थितियों से मेल नहीं…

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  • परम पूज्य गुरुदेव की 1971 हिमालय यात्रा का उद्देश्य 

    आज 29 जुलाई 2026,बुधवार का वोह पावन दिन है जिसे हम सब गुरुपूर्णिमा, व्यासपूर्णिमा कह कर मना रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा साथी होगा जिसे इस दिन के महत्व का ज्ञान न होगा, लेकिन हमारे लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब परम पूज्य गुरुदेव स्वयं आकर अखंड ज्योति मई 1971…

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  • परिवर्तन प्रक्रिया का सार-संक्षेप 

    उन्नीसवीं शताब्दी(1801-1900) से आरम्भ होकर बीसवीं(1901-2000) सदी के अन्तिम चरण तक, 200 वर्षों में  कालचक्र अत्यन्त तीव्रगति से घूमा है। जितना भला-बुरा पिछले हजारों वर्षों में नहीं बन पड़ा, वह इस 200 वर्ष की अवधि में हो चला है।  इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित है: —प्रगति के नाम पर असाधारण महत्त्व के आविष्कार, बुद्धि तीक्ष्णता के…

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  • ‘‘इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य’’ का उद्घोष मात्र नारा नहीं है

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की दूसरी पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का 9वां लेख प्रस्तुत है। परम पूज्य गुरुदेव ने युगसंधि के 12 वर्षों (1989-2000) की बात बार-बार की है,अनेकों पुस्तकों, अखंड ज्योति लेखों में गुरुदेव में विश्व भर में घटित आश्चर्यजनक परिवर्तनों के रिफरेन्स दिए हैं लेकिन हम तो ठहरे तर्कशील,शंकाग्रस्त; ऐसे कैसे बिना किसी…

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  • सूर्य विज्ञान और गायत्री मंत्र के महत्वपूर्ण तथ्य  

    परम पूज्य गुरुदेव ने हम सबके लिए “क्रंतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की रचना करते समय अवश्य सोचा होगा कि आने वाले दिनों में मेरे बच्चे बहुत व्यस्त हो जायेंगें,उनके पास मेरे द्वारा रचा गया विशाल साहित्य पढ़ने और समझने का कहाँ समय होगा !!!  ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्ष 2026 के संकल्प का…

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  • भूलोक, स्वर्गलोक से भी बढ़कर कैसे है? 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख को समझने के लिए संक्षिप्त सी भूमिका देने की आवश्यकता पड़ रही है।  “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2” पर आधरित वर्तमान लेख श्रृंखला के सातवें चैप्टर का शीर्षक “अगली शताब्दी का अधिष्ठाता-सूर्य” जितना आकर्षक है उतना ही जिज्ञासापूर्ण भी है। बार-बार पूरे चैप्टर को पढ़ने के बाद भी हम…

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  • इक्क्सवीं सदी का धर्म “समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी” का चार चरण वाला युगधर्म ही होगा। 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शीर्षक देखकर कर प्रश्न कर सकता है कि ऐसा कौन सा व्यक्ति है जिसे “समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी” जैसे शब्दों का ज्ञान नहीं है। इन शब्दों का किताबी ज्ञान तो अनेकों को होगा, प्रचार भी खूब हो रहा है, लेकिन यदि सब कुछ समझ में आ रहा है तो…

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  • चौथी शक्ति का अभिनव उद्भव अर्थात नया जन्म

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख एक ऐसी शक्ति का वर्णन कर रहा है जिसे “नवयुग की अधिष्ठात्री” कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। तो आइए गुरुचरणों में समर्पित हो,आज के ज्ञानरूपी अमृत का पयपान करें और जीवन को सफल बनायें।   लगभग सभी को निम्नलिखित तीन शक्तियाें की प्रभुता और महत्ता सर्वविदित है: (1) बुद्धिबल, जिसमें…

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  • अनिश्चतता ही आज के युग की  सबसे बड़ी समस्या है

    आज का लेख तथ्यों के साथ,ऐतिहासिक प्रमाण दे रहा है कि विनाश और सृजन की प्रक्रिया पौराणिक काल से चली आ रही है। यदि ज्ञानप्रसाद लेख जनसाधारण की मनस्थिति को ठीक राह में चलाने में सफल हो पाएं तो बहुत बड़ी उपलब्धि समझी जानी चाहिए, Misguide करने में,अन्धविश्वास फैलाने में,अंधी गुरुभक्ति का प्रचार करने में…

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  • निराशावादिओं (Pessimists) के लिए गुरुदेव का मार्गदर्शन 

    आज के समय में अधिकतर मनुष्य नकारात्मकता एवं निराशा की बीमारी से ग्रस्त हैं,सभी एक ही धारणा लिए बैठे हैं कि कुछ नहीं हो सकता,सब कुछ ही उल्टा-पुलटा हो चुका है। ऐसी स्थिति में हम किस उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं? क्या गुरुदेव अकेले ही सब कुछ कर लेंगें? अपने अंग-अवयवों को श्रेय…

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  • विनाश के लिए दुर्बुद्धि को ही ज़िम्मेदार क्यों न ठहराएं ?

    सद्बुद्धि की देवी, माँ गायत्री की उपासना साधक को सन्मार्ग की ओर चलने को प्रेरित करती है, यह एक शाश्वत सत्य है। आज का ज्ञानप्रसाद इतना प्रैक्टिकल है कि इसे समझने में ज़रा भी कठिनाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह तो घर-घर की कहानी है,मनुष्य-मनुष्य की कहानी है।  ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर…

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  • क्या हम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं ?

    क्रांतिधर्मी साहित्य की 23 रचनाओं की पुस्तकमाला की दूसरी दिव्य पुस्तक इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2 का प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है।  आज के लेख को Compile करते हुए जिन अलग-अलग स्रोतों की सहायता ली गयी है उन्हें भी संक्षेप में यथास्थान शामिल किया गया है।  आइए ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल…

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  • Wrap up, “अपने अंग अवयवों से”, एवं आगे की रणनीति 

    “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य-भाग 1” पुस्तक के 60 पन्नें, लगभग 16000 शब्द,24 चैप्टर्स में समाहित ज्ञान को समझने के लिए गुरुदेव ने न केवल ऊँगली पकड़ कर पग-पग पर मार्गदर्शन प्रदान  किया बल्कि जहाँ-वहां बिखरे अनेकों अमूल्य रत्न भी हमारी झोली में डाल दिए। सभी संगृहीत ज्ञानपुष्पों को यथासंभव, अपनी बुद्धि एवं योग्यता के…

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  • शांतिकुंज की कार्यप्रणाली Tried,tested and certified है

    “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य-भाग 1” पर आधारित वर्तमान लेख श्रृंखला का आज समापन लेख प्रस्तुत किया गया है। लेख छोटा अवश्य है,लेख के कंटेंट से कहीं अधिक जानकरी अनेकों को होगी क्योंकि यह जानकारी 36 वर्ष पूर्व की है। आज के लेख का मुख्य सन्देश गुरुदेव द्वारा स्थापित किया गया प्रमाणिक तंत्र है जिसे…

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  • विचारक्रान्ति का एक छोटा मॉडल है शांतिकुंज 

    लगन, श्रद्धा और प्रामाणिकता के साथ यदि उच्चस्तरीय उद्देश्यों के लिए इन दिनों कोई सामान्य स्तर का तंत्र भी खड़ा हो,तो उसे असाधारण सफलता मिलेगी। गुरुदेव ने इसी सूत्र को अपनाया और विचार क्रांति के एक छोटे मॉडल के रूप में शांतिकुंज की रचना कर डाली। इस तथ्य को अंगीकार करने वाली अनेक प्रतिभाएँ समग्र…

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  • युगतीर्थ शांतिकुंज को उज्जवल भविष्य की गंगोत्री क्यों कहा जाता है?

    वर्तमान में पनपी हुई यां पनप रही दुष्प्रवृत्तियों का निराकरण होना एवं  उनके स्थान पर सत्प्रवृत्तियों का संस्थापन एक बहुत ही बड़ा एवं  महत्वपूर्ण कार्य है। यह एक दोहरा कार्य है,महान परिवर्तन के लिए जहाँ प्रत्यक्ष पुरुषार्थ की आवश्यकता है,वहीँ उसके साथ अदृश्य संकल्प, साहस और दूरदर्शी कौशल भी जुड़ा रहना बहुत आवश्यक है। “विश्वव्यापी…

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  • दिव्य दृष्टि से अदृश्य जगत में झाँका जा सकता है 

    सुप्रसिद्ध फ़्रांसिसी भविष्यवक्ता नोस्ट्राडेमस ने कहा था कि युगसंधि की अवधि में एक नयी अध्यात्मिक चेतना का उदय होगा और सतयुग का श्रीगणेश होगा। महर्षि अरविंद ने सुपरचेतना युक्त विभूतियों की बात की है। विचारों के सामूहिक प्रयास को ही प्रज्ञावतार का अवतरण कहा है। स्वामी विवेकानंद, इजरायल के प्रोफेसर हरार और अमेरिका की जीन…

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  • युग परिवर्तन का यही समय क्यों है ?

    वर्तमान समय को “प्रज्ञा युग” अर्थात विवेक और बुद्धि का युग कहा गया है। जिस स्तर की लॉजिकल थिंकिंग आज के समय में हो रही है, शायद ही किसी अन्य युगों में हुई होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग,सतयुग आदि की अवधि लाखों वर्ष बताई गयी है,इन पर आज का मानव कहाँ विश्वास करेगा? लॉजिकल…

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  • ध्वंस और  सृजन, सन्धिवेला की दो अनिवार्य प्रक्रियाएँ हैं

    सृष्टि का शाश्वत नियम है कि विनाश और विकास का चोली दामन का साथ है।नए भवन के निर्माण के लिए पुरानी जर्जर इमारत को गिरना ही पड़ता है। परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधारित लेख श्रृंखला का चौथा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है।  ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा में,गुरुचरणों में…

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  • माँ प्रकृति अपने बच्चों का विनाश कदापि नहीं होने देगी

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का तीसरा  ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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  • उलटे हुए को उल्ट कर सीधा करना पूर्णतः संभव है 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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  • युगपरिवर्तन का क्या अर्थ है ? 

    कल प्रस्तुत हुए  ज्ञानप्रसाद लेख के अमृतपान के बाद कुछ कमेंट इतने विस्तृत थे कि लेखकों के प्रति हम नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सकते। हमारी सबकी प्रिय बेटी संजना,समर्पित साथी चंद्रेश जी,नीरा जी,कोकिला जी, सुमनलता जी,रेणु श्रीवास्तव जी,संध्या जी,सुजाता जी और विदुषी जी ने इतने विस्तृत और ज्ञानवर्धक कमेंट किये कि हम किसी को…

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  • क्या हमें जीवन की कोई दिशा नहीं मिल रही ?

    शांतिकुंज के गेट नंबर 1 पर बड़े-बड़े शब्दों में अंकित किया हुआ है “इक्क्सवीं शताब्दी उज्जवल भविष्य की गंगोत्री”, इसे देख कर कोई भी पूछ सकता है कि क्या युग परिवर्तन हो गया है? हम किस उज्जवल भविष्य की गंगोत्री की बात कर रहे हैं ? कल प्रकाशित किये गए लेख में  “किंकर्तव्यविमूढ़ता” को समझने…

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  • “क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधरित लेख श्रृंखला का शुभारंभ कल  ही हो पायेगा। बिखराव को समेटना अति आवश्यक है।   

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधारित लेख श्रृंखला लिखने का साहस करना ही अपनेआप में एक चुनौतीपूर्ण कदम है। इस परिवार की नियमित,समर्पित एवं सबकी प्रिय बेटी आदरणीय संजना कुमारी द्वारा इस प्रयास के लिए इच्छा व्यक्त करना ही गुरुदेव के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण…

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  • “हमारे अंतर्मन की वाणी”, 27 जून 2026 का विशेष सेगमेंट 

    हर माह के अंतिम शनिवार को प्रकाशित होने वाले इस विशेष सेगमेंट का सभी साथिओं को इंतज़ार होता है,कोई न कोई साथी कमेंट करके इस भावना को प्रकट कर ही देता है।कल हमारी बड़ी बहिन जी आद रेणु श्रीवास्तव जी ने इस प्रकार की भावना व्यक्त की थी।  हमारी एक और आद बहिन सुमनलता जी…

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  • क्या आत्मज्ञानी हमेशा सुखी होते हैं ?

    100 वर्षीय पुरातन “अखंड दीप” पर आधारित लेख  श्रृंखला का पंचम एवं अंतिम लेख  फरवरी 1971 के जिस लेख पर वर्तमान लेख श्रृंखला आधारित है उसका शीर्षक “अपनों से अपनी बात, हमारे दृश्य जीवन की अदृश्य  अनुभूतियाँ” है। शीर्षक स्वयं ही बता रहा है कि गुरुदेव के  जिस जीवन को हम सब देख रहे हैं…

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  • परम पूज्य गुरुदेव के महाप्रयाण को समर्पित 24 जून 2026 का विशेष ज्ञानप्रसाद लेख 

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख 1990 का एक लाइव टेलीकास्ट दिखा रहा है।   आज 24 जून 2026, बुधवार वाले दिन दो महान पर्व (गायत्री जयंती और गंगा दशहरा) के साथ ही तीसरा पर्व हमारे गुरुदेव का महाप्रयाण दिवस भी है।   इस पावन दिन पर प्रत्येक गायत्री परिजन अति उत्साहित होता है,हर वर्ष, हर कोई बढ़…

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  • 100 वर्षीय पुरातन “अखंड दीप” विवेक की आँख खोलने के लिए स्थापित किया गया था। 

    अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष को समर्पित तृतीय ज्ञानप्रसाद लेख  लगभग 2400 शब्दों का,कल प्रकाशित हुआ ज्ञानप्रसाद लेख “दीपक के प्रकाश” से सम्बंधित था जिसमें प्रकाश का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विश्लेषण किया गया था। इस लेख के प्रकाशन के पीछे मुख्य उद्देश्य था कि पूजास्थली में रोज़ाना प्रज्वलित किये जाने वाले  नन्हें से…

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  • दीप प्रज्वलन में छिपा है अद्भुत विज्ञान एवं अध्यात्म 

    22 जून 2026 का ज्ञानप्रसाद  आज प्रस्तुत किया गया ज्ञानप्रसाद इस समय चल रही लेख श्रृंखला  से थोड़ा हटकर तो है लेकिन इसे लिखने की प्रेरणा भी वर्तमान लेख श्रृंखला से ही प्राप्त  हुई हुई है।  अखंड दीप,दीप प्रजव्लन,दीप प्रज्वलन से प्राप्त होने वाली अदृश्य ऊर्जा, दीप प्रज्वलन से मिलने वाला मार्गदर्शन, दीप प्रज्वलन के…

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  • अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष को समर्पित द्वितीय  ज्ञानप्रसाद लेख- आदरणीय चंद्रेश जी के सहयोग से  

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख के लिए यदि कहा जाए कि यह लेख आदरणीय डॉ चंद्रेश बहादुर जी का ही लेख है तो शायद गलत न हो। लेख में प्रस्तुत किया गया, दो भागों का कंटेंट कल ही चंद्रेश जी ने हमें व्हाट्सप्प पर भेजा था।  पहले भाग में ScoopWhoop मीडिया में 9 सितम्बर 2022 में…

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  • अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष को समर्पित प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख

      ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का प्रत्येक सदस्य भलीभांति परिचित है कि वर्ष 2026 त्रिवेणी शताब्दी लेकर आया है। परम वंदनीय माता जी का अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य के वर्ष 2026 में 100 वर्ष पूरे होना हम सबके लिए सौभाग्य का अवसर है। इसी सौभाग्य को मनाते हुए हमने…

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