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ईश्वर के अनुदानों की प्लानिंग करना मनुष्य की ही ज़िम्मेदारी है
23 पुस्तकों के दिव्य संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य” की चौथी पुस्तक “युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज का ज्ञानप्रसाद लेख बता रहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदान की गयी प्रतिभा का नियोजन करना मनुष्य की अपनी ही ज़िम्मेदारी है। इस मंच से आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार,आत्मकल्याण और आत्मविकास जैसे शब्दों की बार-बार चर्चा की…
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मनुष्य की 93% प्रतिभा प्रसुप्त ही पड़ी रहती है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है। आज इसी मक्खन की चौथी पुस्तक “ युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधरित लेख श्रृंखला का चौथा लेख मनुष्य की उस 93% शक्ति के बारे में जानकारी दे रहा है जो सोई पड़ी रहती है। एक कहावत है कि ‘‘ईश्वर…
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प्रतिभा संवर्धन(Talent development) के लिए भारत के पास कौनसी जादू की छड़ी है ?
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ हमारी मातृभूमि “भारत” के लिए प्रयोग किये गए अनेकों विशेषणों से हो रहा है। जगतगुरु,विश्वगुरु,चक्रवर्ती,सोने की चिड़िया, स्वर्गादपि गरीयसी जैसे विशेषणों से हमारे (कैनेडियन होने के भावजूद) समेत प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। लेख का अमृतपान करने से, इन विशेषणों की सार्थकता होना सुनिश्चित है। इन्हीं विशेषणों ने …
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प्रसुप्त प्राणाग्नि के प्रज्जवलन के लिए कोई प्रेरक भी तो मिले !!!
Every human is loaded with immense potential,प्रत्येक मनुष्य असीमित क्षमताओं से ओतप्रोत है,उसे तो ज्ञान ही नहीं है कि ईश्वर ने उसे क्या कुछ देकर इस धरती पर अवतरित किया है। आज का लेख उन्हीं प्रसुप्त प्रतिभाओं को जागृत करने का सरल सा मार्ग प्रदान कर रहा है, बता रहा है कि वैभव,पराक्रम,विभूतियाँ आदि ईश्वर…
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क्या मानव शरीर सच में एक Vehicle है ?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक,“युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार भाग 2 ” के प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख का अमृतपान करने के लिए सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन है। गुरुदेव बता रहे हैं: गाड़ी का ढाँचा लोहे का बना होता है। उसके पहियों में रबड़, सीटों पर रेक्सीन, खिड़कियों में काँच आदि लगे होते हैं लेकिन गाड़ी का…
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शालीनता ही प्रतिभा का आधार है -तीसरी पुस्तक का समापन लेख
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” 23 पुस्तकों का एक ऐसा अद्भुत साहित्य है जिसे पूज्यवर ने स्वयं अपने जीवन भर के “साहित्य का मक्खन” कहा है। उन्होंने कहा है कि मेरे द्वारा रचित विशाल साहित्य न भी पढ़ो तो कोई बात नहीं है लेकिन इस मक्खन को कभी भी मिस न करना। गुरुदेव के निर्देश एवं हमारी…
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21वीं सदी प्रतिभावानों का प्ले ग्राउंड है !!
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शीर्षक बहुत ही आकर्षक है और उससे भी आकर्षक इसका कंटेंट है जहाँ हम आधुनिक रिसर्च के उदाहरणों से देखेंगें कि 21वीं सदी, जिसके 26वें वर्ष में से हम इस समय गुज़र रहे हैं, प्रतिभावानों की क्रीड़ास्थली कैसे है। लेख का शुभारम्भ करने से पहले पाठकों को बताना अपना कर्तव्य…
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उच्चस्तरीय प्रतिभाएं हमारे आस-पास ही हैं
शुक्रवार वाले लेख में “उच्चस्तरीय प्रतिभाएं कहाँ से आएंगीं ?” पर चर्चा हुई थी, आज चर्चा का विषय है “उच्चस्तरीय प्रतिभाएं हमारे आस-पास ही हैं”, प्रत्येक पाठक को अपना मूल्यांकन करके समझ जाना चाहिए कि “हम किसी से कम नहीं।” ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार एक ऐसा मंच है जहाँ असम्भव तो सम्भव करने का जादुई…
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उच्चस्तरीय प्रतिभाएं कहाँ से आएंगीं ?
परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…
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प्रतिभा परिष्कार (Talent enhancement) की आरंभिक शर्त क्या है?
परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…
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मानव शरीर में व्याप्त असीम शक्ति (Bioelectricity) ही प्रतिभा परिष्कार का आधार है
परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…
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18 अगस्त 2026 का दैनिक दिव्य संदेश
अगर इन मूल्यों में से केवल कुछ एक का पालन हो जाए तो सतयुग की वापसी सुनिश्चित है, यही है आज का दिव्य संदेश।
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गुरुदेव के “सतयुग की वापसी” का क्या आधार है ?
वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1989–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार भाग 1” में गुरुदेव ने उस समय, वर्षों पहले लिख दिया था कि हम “संधिकाल” से गुज़र रहे हैं। इस संधिकाल में दो शताब्दियों का मिलन हो रहा है। 20वीं…
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युगसृजन के लिए प्रतिभाओं को प्रेरित करता एक लेख
कहने को तो हमारे गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी केवल पांचवीं कक्षा तक ही स्कूली शिक्षा प्राप्त किये थे लेकिन उनके द्वारा रचित विशाल साहित्य देखकर आँखें खुली की खुली रह जाती हैं। प्रतिभा जैसे विषय पर (जिससे लगभग सभी पाठक परिचित हैं) एक नहीं दो पुस्तकें लिख कर गुरुदेव ने जो उपकार किया…
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प्रतिभा परिवर्धन (Talent development) समझने के लिए एक सरल सा लेख
Personality development, वर्तमान युग की बहुत बड़ी मांग बन चुकी है,कंपनियों में मैनेजर लेवल के लोगों के लिए कोर्सेज डिज़ाइन किये हुए हैं जिन्हें करना आवश्यक समझा जाता है। कॉलेज, यूनिवर्सिटीज में भी इस कोर्स का बड़ा महत्व है। इसी तरह Talent development के भी कुछ कोर्स उपलब्ध हैं जिन्हें पर्सनालिटी डेवलपमेंट के साथ ही…
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युगपरिवर्तन के लिए उत्कृष्ट प्रतिभाएं कहाँ से मिलेंगीं ?
23 उत्कृष्ट पुस्तिकाओं का अद्भुत संग्रह जिसे गुरुदेव ने आज से लगभग 36 वर्ष पूर्व “क्रांतिधर्मी सहित्य पुस्तकमाला” टाइटल से रच कर हम सब पर जो उपकार किया है उसे शब्दों में वर्णन लगभग असंभव है। गुरुदेव ने इस पुस्तकमाला को अपने सारे साहित्य का मक्खन कहा है,उसी मक्खन की तीसरी रचना “युग की मांग-प्रतिभा…
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कहीं अगले दिनों महाविनाश तो नहीं घटने वाला?
आज का ज्ञानप्रसाद लेख इतना सरल और प्रेरणादायक है कि शायद ही कोई पाठक यह न कह उठे,“गुरुदेव हम तैयार हैं,बताइए क्या करना है?” गुरुदेव एक Fully-trained गोताखोर की तरह प्राणवानों को खारे समुद्र में से मणिमुक्तकों की तरह ढूँढ़ निकालने में लगे हुए हैं। आइए, 11 अगस्त 2026 की गुरुकक्षा में स्वयं को समर्पित…
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चार प्रकार की प्रतिभाओं का संक्षेप में वर्णन
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार-भाग 1” के पहले ज्ञानप्रसाद लेख का अमृतपान करने के लिए ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा में आपका स्वागत है। 56 पन्नों की इस लघु पुस्तिका को समझाने के लिए गुरुवर ने हम शिष्यों के लिए आरम्भ में ही सारांश प्रकाशित कर दिया…
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परम पूज्य गुरुदेव के पाँच स्थूल शरीरों का संक्षिप्त सा वर्णन
आज का ज्ञानप्रसाद लेख परम पूज्य गुरुदेव के पांच स्थूल शरीरों का संक्षिप्त सा वर्णन प्रस्तुत कर रहा है। अखंड ज्योति के जुलाई 1997 अंक में प्रकाशित हुए लेख पर आधरित आज के कि लगभग 30 वर्ष में सभी संस्थानों का इतना विकास एवं विस्तार हो चुका है कि क्या कहा जाए। साथिओं से…
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परम पूज्य गुरुदेव पांच शरीरों से जीते थे-परम वंदनीय माता जी द्वारा दिया गया दिव्य वर्णन
जुलाई 1997 की अखंड ज्योति में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था “विराट प्रज्ञापुरुष गुरुदेव जिनके पांच स्थूल शरीर अभी भी हमारे बीच हैं।” इन पंक्तियों के लेखक ने मात्र 4 पन्नों के लेख को जब देखा तो उसकी आँखें ही चुंधियाँ सी गयीं। लेख में समाहित अद्भुत,विस्तृत ज्ञान, अनेकों Cross references के बारे…
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गुरुदेव की सूक्ष्मीकरण साधना के विश्व्यापी सामूहिक एवं व्यक्तिगत प्रमाण
अखंड ज्योति जुलाई 1997, गुरुसत्ता के पाँच सूक्ष्मशरीर – वीरभद्र जो हम सबकी रक्षा में जुटे हुए हैं आज के ज्ञानप्रसाद लेख में हमारे साथी देखेंगें कि गुरुदेव की सूक्ष्मीकरण साधना की शक्ति ने विश्व भर में क्या-क्या कुछ करवा डाला। अवश्य ही गुरुदेव की तरह अनेकों दिव्य आत्माएं विश्व को बचाने में प्रयासरत है,…
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सूक्ष्म की असीमित शक्ति को समझने का सरल सा प्रयास
हम अक्सर कहते रहते हैं कि “ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार” जैसा छोटा सा परिवार केवल समर्पित साथिओं के निस्वार्थ समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा से ही चल रहा है। हर कोई समर्पित साथी यथासंभव योगदान कर रहा है जिसके लिए हम सदैव आभारी हैं। इसी योगदान ने आज के लेख को जन्म दिया है। हमारी आदरणीय पुष्पा…
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परम पूज्य गुरुदेव द्वारा 1971 वाली हिमालय यात्रा से पहले बनाई गयी व्यवस्था
29 जुलाई 2026, गुरुपूर्णिमा के दिन आरम्भ हुए इस लघु ज्ञानप्रसाद लेख श्रृंखला का आज चौथा एवं समापन लेख गुरुचरणों में समर्पित हैं। अखंड ज्योति के मई 1971 अंक में प्रकाशित 6 पन्नों में समाहित एक लेख का प्रकट होना मात्र संयोग तो नहीं हो सकता, साक्षात् गुरु आदेश कहें तो शायद गलत न हो। …
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मथुरा से विदाई के समय परम पूज्य गुरुदेव के मार्मिक भाव
अखंड ज्योति मई 1971 में प्रकाशित “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ इतना विस्तृत और मार्मिक है कि किसी की भी आँखों में आंसू ला सकता है।पाठक स्वयं अनुभव कर सकते हैं कि इतना भावुक,इतना प्रेम करने वाला गुरु,मार्गदर्शक कहाँ मिल पायेगा। आज का ज्ञानप्रसाद लेख अपने बच्चों के प्रति स्नेह एवं अपने गुरु के प्रति…
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कौन है आत्मदेवता,एवं उसकी आराधना कैसे की जाए?
अखंड ज्योति मई 1971 के “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ में परम पूज्य गुरुदेव ने आधुनिक युग के मानव की प्रवृति को समझते हुए कहा कि प्राचीनकाल की शारीरिक, मानसिक,भौतिक एवं तात्त्विक परिस्थितियाँ अब बदल चुकी हैं। साधना तपश्चर्या का जो क्रम भूतकाल में अपनाया जाता रहा है, वह आज की परिस्थितियों से मेल नहीं…
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परम पूज्य गुरुदेव की 1971 हिमालय यात्रा का उद्देश्य
आज 29 जुलाई 2026,बुधवार का वोह पावन दिन है जिसे हम सब गुरुपूर्णिमा, व्यासपूर्णिमा कह कर मना रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा साथी होगा जिसे इस दिन के महत्व का ज्ञान न होगा, लेकिन हमारे लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब परम पूज्य गुरुदेव स्वयं आकर अखंड ज्योति मई 1971…
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परिवर्तन प्रक्रिया का सार-संक्षेप
उन्नीसवीं शताब्दी(1801-1900) से आरम्भ होकर बीसवीं(1901-2000) सदी के अन्तिम चरण तक, 200 वर्षों में कालचक्र अत्यन्त तीव्रगति से घूमा है। जितना भला-बुरा पिछले हजारों वर्षों में नहीं बन पड़ा, वह इस 200 वर्ष की अवधि में हो चला है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित है: —प्रगति के नाम पर असाधारण महत्त्व के आविष्कार, बुद्धि तीक्ष्णता के…
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‘‘इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य’’ का उद्घोष मात्र नारा नहीं है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की दूसरी पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का 9वां लेख प्रस्तुत है। परम पूज्य गुरुदेव ने युगसंधि के 12 वर्षों (1989-2000) की बात बार-बार की है,अनेकों पुस्तकों, अखंड ज्योति लेखों में गुरुदेव में विश्व भर में घटित आश्चर्यजनक परिवर्तनों के रिफरेन्स दिए हैं लेकिन हम तो ठहरे तर्कशील,शंकाग्रस्त; ऐसे कैसे बिना किसी…
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सूर्य विज्ञान और गायत्री मंत्र के महत्वपूर्ण तथ्य
परम पूज्य गुरुदेव ने हम सबके लिए “क्रंतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की रचना करते समय अवश्य सोचा होगा कि आने वाले दिनों में मेरे बच्चे बहुत व्यस्त हो जायेंगें,उनके पास मेरे द्वारा रचा गया विशाल साहित्य पढ़ने और समझने का कहाँ समय होगा !!! ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्ष 2026 के संकल्प का…
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भूलोक, स्वर्गलोक से भी बढ़कर कैसे है?
आज के ज्ञानप्रसाद लेख को समझने के लिए संक्षिप्त सी भूमिका देने की आवश्यकता पड़ रही है। “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2” पर आधरित वर्तमान लेख श्रृंखला के सातवें चैप्टर का शीर्षक “अगली शताब्दी का अधिष्ठाता-सूर्य” जितना आकर्षक है उतना ही जिज्ञासापूर्ण भी है। बार-बार पूरे चैप्टर को पढ़ने के बाद भी हम…
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इक्क्सवीं सदी का धर्म “समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी” का चार चरण वाला युगधर्म ही होगा।
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शीर्षक देखकर कर प्रश्न कर सकता है कि ऐसा कौन सा व्यक्ति है जिसे “समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी” जैसे शब्दों का ज्ञान नहीं है। इन शब्दों का किताबी ज्ञान तो अनेकों को होगा, प्रचार भी खूब हो रहा है, लेकिन यदि सब कुछ समझ में आ रहा है तो…
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चौथी शक्ति का अभिनव उद्भव अर्थात नया जन्म
आज का ज्ञानप्रसाद लेख एक ऐसी शक्ति का वर्णन कर रहा है जिसे “नवयुग की अधिष्ठात्री” कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। तो आइए गुरुचरणों में समर्पित हो,आज के ज्ञानरूपी अमृत का पयपान करें और जीवन को सफल बनायें। लगभग सभी को निम्नलिखित तीन शक्तियाें की प्रभुता और महत्ता सर्वविदित है: (1) बुद्धिबल, जिसमें…
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अनिश्चतता ही आज के युग की सबसे बड़ी समस्या है
आज का लेख तथ्यों के साथ,ऐतिहासिक प्रमाण दे रहा है कि विनाश और सृजन की प्रक्रिया पौराणिक काल से चली आ रही है। यदि ज्ञानप्रसाद लेख जनसाधारण की मनस्थिति को ठीक राह में चलाने में सफल हो पाएं तो बहुत बड़ी उपलब्धि समझी जानी चाहिए, Misguide करने में,अन्धविश्वास फैलाने में,अंधी गुरुभक्ति का प्रचार करने में…
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निराशावादिओं (Pessimists) के लिए गुरुदेव का मार्गदर्शन
आज के समय में अधिकतर मनुष्य नकारात्मकता एवं निराशा की बीमारी से ग्रस्त हैं,सभी एक ही धारणा लिए बैठे हैं कि कुछ नहीं हो सकता,सब कुछ ही उल्टा-पुलटा हो चुका है। ऐसी स्थिति में हम किस उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं? क्या गुरुदेव अकेले ही सब कुछ कर लेंगें? अपने अंग-अवयवों को श्रेय…
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विनाश के लिए दुर्बुद्धि को ही ज़िम्मेदार क्यों न ठहराएं ?
सद्बुद्धि की देवी, माँ गायत्री की उपासना साधक को सन्मार्ग की ओर चलने को प्रेरित करती है, यह एक शाश्वत सत्य है। आज का ज्ञानप्रसाद इतना प्रैक्टिकल है कि इसे समझने में ज़रा भी कठिनाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह तो घर-घर की कहानी है,मनुष्य-मनुष्य की कहानी है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर…
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क्या हम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं ?
क्रांतिधर्मी साहित्य की 23 रचनाओं की पुस्तकमाला की दूसरी दिव्य पुस्तक इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2 का प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है। आज के लेख को Compile करते हुए जिन अलग-अलग स्रोतों की सहायता ली गयी है उन्हें भी संक्षेप में यथास्थान शामिल किया गया है। आइए ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल…
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Wrap up, “अपने अंग अवयवों से”, एवं आगे की रणनीति
“इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य-भाग 1” पुस्तक के 60 पन्नें, लगभग 16000 शब्द,24 चैप्टर्स में समाहित ज्ञान को समझने के लिए गुरुदेव ने न केवल ऊँगली पकड़ कर पग-पग पर मार्गदर्शन प्रदान किया बल्कि जहाँ-वहां बिखरे अनेकों अमूल्य रत्न भी हमारी झोली में डाल दिए। सभी संगृहीत ज्ञानपुष्पों को यथासंभव, अपनी बुद्धि एवं योग्यता के…
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शांतिकुंज की कार्यप्रणाली Tried,tested and certified है
“इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य-भाग 1” पर आधारित वर्तमान लेख श्रृंखला का आज समापन लेख प्रस्तुत किया गया है। लेख छोटा अवश्य है,लेख के कंटेंट से कहीं अधिक जानकरी अनेकों को होगी क्योंकि यह जानकारी 36 वर्ष पूर्व की है। आज के लेख का मुख्य सन्देश गुरुदेव द्वारा स्थापित किया गया प्रमाणिक तंत्र है जिसे…
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विचारक्रान्ति का एक छोटा मॉडल है शांतिकुंज
लगन, श्रद्धा और प्रामाणिकता के साथ यदि उच्चस्तरीय उद्देश्यों के लिए इन दिनों कोई सामान्य स्तर का तंत्र भी खड़ा हो,तो उसे असाधारण सफलता मिलेगी। गुरुदेव ने इसी सूत्र को अपनाया और विचार क्रांति के एक छोटे मॉडल के रूप में शांतिकुंज की रचना कर डाली। इस तथ्य को अंगीकार करने वाली अनेक प्रतिभाएँ समग्र…
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युगतीर्थ शांतिकुंज को उज्जवल भविष्य की गंगोत्री क्यों कहा जाता है?
वर्तमान में पनपी हुई यां पनप रही दुष्प्रवृत्तियों का निराकरण होना एवं उनके स्थान पर सत्प्रवृत्तियों का संस्थापन एक बहुत ही बड़ा एवं महत्वपूर्ण कार्य है। यह एक दोहरा कार्य है,महान परिवर्तन के लिए जहाँ प्रत्यक्ष पुरुषार्थ की आवश्यकता है,वहीँ उसके साथ अदृश्य संकल्प, साहस और दूरदर्शी कौशल भी जुड़ा रहना बहुत आवश्यक है। “विश्वव्यापी…
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दिव्य दृष्टि से अदृश्य जगत में झाँका जा सकता है
सुप्रसिद्ध फ़्रांसिसी भविष्यवक्ता नोस्ट्राडेमस ने कहा था कि युगसंधि की अवधि में एक नयी अध्यात्मिक चेतना का उदय होगा और सतयुग का श्रीगणेश होगा। महर्षि अरविंद ने सुपरचेतना युक्त विभूतियों की बात की है। विचारों के सामूहिक प्रयास को ही प्रज्ञावतार का अवतरण कहा है। स्वामी विवेकानंद, इजरायल के प्रोफेसर हरार और अमेरिका की जीन…
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युग परिवर्तन का यही समय क्यों है ?
वर्तमान समय को “प्रज्ञा युग” अर्थात विवेक और बुद्धि का युग कहा गया है। जिस स्तर की लॉजिकल थिंकिंग आज के समय में हो रही है, शायद ही किसी अन्य युगों में हुई होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग,सतयुग आदि की अवधि लाखों वर्ष बताई गयी है,इन पर आज का मानव कहाँ विश्वास करेगा? लॉजिकल…
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ध्वंस और सृजन, सन्धिवेला की दो अनिवार्य प्रक्रियाएँ हैं
सृष्टि का शाश्वत नियम है कि विनाश और विकास का चोली दामन का साथ है।नए भवन के निर्माण के लिए पुरानी जर्जर इमारत को गिरना ही पड़ता है। परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधारित लेख श्रृंखला का चौथा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा में,गुरुचरणों में…
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माँ प्रकृति अपने बच्चों का विनाश कदापि नहीं होने देगी
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का तीसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…
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उलटे हुए को उल्ट कर सीधा करना पूर्णतः संभव है
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…
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युगपरिवर्तन का क्या अर्थ है ?
कल प्रस्तुत हुए ज्ञानप्रसाद लेख के अमृतपान के बाद कुछ कमेंट इतने विस्तृत थे कि लेखकों के प्रति हम नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सकते। हमारी सबकी प्रिय बेटी संजना,समर्पित साथी चंद्रेश जी,नीरा जी,कोकिला जी, सुमनलता जी,रेणु श्रीवास्तव जी,संध्या जी,सुजाता जी और विदुषी जी ने इतने विस्तृत और ज्ञानवर्धक कमेंट किये कि हम किसी को…
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क्या हमें जीवन की कोई दिशा नहीं मिल रही ?
शांतिकुंज के गेट नंबर 1 पर बड़े-बड़े शब्दों में अंकित किया हुआ है “इक्क्सवीं शताब्दी उज्जवल भविष्य की गंगोत्री”, इसे देख कर कोई भी पूछ सकता है कि क्या युग परिवर्तन हो गया है? हम किस उज्जवल भविष्य की गंगोत्री की बात कर रहे हैं ? कल प्रकाशित किये गए लेख में “किंकर्तव्यविमूढ़ता” को समझने…
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“क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधरित लेख श्रृंखला का शुभारंभ कल ही हो पायेगा। बिखराव को समेटना अति आवश्यक है।
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधारित लेख श्रृंखला लिखने का साहस करना ही अपनेआप में एक चुनौतीपूर्ण कदम है। इस परिवार की नियमित,समर्पित एवं सबकी प्रिय बेटी आदरणीय संजना कुमारी द्वारा इस प्रयास के लिए इच्छा व्यक्त करना ही गुरुदेव के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण…
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“हमारे अंतर्मन की वाणी”, 27 जून 2026 का विशेष सेगमेंट
हर माह के अंतिम शनिवार को प्रकाशित होने वाले इस विशेष सेगमेंट का सभी साथिओं को इंतज़ार होता है,कोई न कोई साथी कमेंट करके इस भावना को प्रकट कर ही देता है।कल हमारी बड़ी बहिन जी आद रेणु श्रीवास्तव जी ने इस प्रकार की भावना व्यक्त की थी। हमारी एक और आद बहिन सुमनलता जी…
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क्या आत्मज्ञानी हमेशा सुखी होते हैं ?
100 वर्षीय पुरातन “अखंड दीप” पर आधारित लेख श्रृंखला का पंचम एवं अंतिम लेख फरवरी 1971 के जिस लेख पर वर्तमान लेख श्रृंखला आधारित है उसका शीर्षक “अपनों से अपनी बात, हमारे दृश्य जीवन की अदृश्य अनुभूतियाँ” है। शीर्षक स्वयं ही बता रहा है कि गुरुदेव के जिस जीवन को हम सब देख रहे हैं…
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परम पूज्य गुरुदेव के महाप्रयाण को समर्पित 24 जून 2026 का विशेष ज्ञानप्रसाद लेख
आज का ज्ञानप्रसाद लेख 1990 का एक लाइव टेलीकास्ट दिखा रहा है। आज 24 जून 2026, बुधवार वाले दिन दो महान पर्व (गायत्री जयंती और गंगा दशहरा) के साथ ही तीसरा पर्व हमारे गुरुदेव का महाप्रयाण दिवस भी है। इस पावन दिन पर प्रत्येक गायत्री परिजन अति उत्साहित होता है,हर वर्ष, हर कोई बढ़…
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100 वर्षीय पुरातन “अखंड दीप” विवेक की आँख खोलने के लिए स्थापित किया गया था।
अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष को समर्पित तृतीय ज्ञानप्रसाद लेख लगभग 2400 शब्दों का,कल प्रकाशित हुआ ज्ञानप्रसाद लेख “दीपक के प्रकाश” से सम्बंधित था जिसमें प्रकाश का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विश्लेषण किया गया था। इस लेख के प्रकाशन के पीछे मुख्य उद्देश्य था कि पूजास्थली में रोज़ाना प्रज्वलित किये जाने वाले नन्हें से…
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दीप प्रज्वलन में छिपा है अद्भुत विज्ञान एवं अध्यात्म
22 जून 2026 का ज्ञानप्रसाद आज प्रस्तुत किया गया ज्ञानप्रसाद इस समय चल रही लेख श्रृंखला से थोड़ा हटकर तो है लेकिन इसे लिखने की प्रेरणा भी वर्तमान लेख श्रृंखला से ही प्राप्त हुई हुई है। अखंड दीप,दीप प्रजव्लन,दीप प्रज्वलन से प्राप्त होने वाली अदृश्य ऊर्जा, दीप प्रज्वलन से मिलने वाला मार्गदर्शन, दीप प्रज्वलन के…
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अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष को समर्पित द्वितीय ज्ञानप्रसाद लेख- आदरणीय चंद्रेश जी के सहयोग से
आज के ज्ञानप्रसाद लेख के लिए यदि कहा जाए कि यह लेख आदरणीय डॉ चंद्रेश बहादुर जी का ही लेख है तो शायद गलत न हो। लेख में प्रस्तुत किया गया, दो भागों का कंटेंट कल ही चंद्रेश जी ने हमें व्हाट्सप्प पर भेजा था। पहले भाग में ScoopWhoop मीडिया में 9 सितम्बर 2022 में…
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अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष को समर्पित प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का प्रत्येक सदस्य भलीभांति परिचित है कि वर्ष 2026 त्रिवेणी शताब्दी लेकर आया है। परम वंदनीय माता जी का अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य के वर्ष 2026 में 100 वर्ष पूरे होना हम सबके लिए सौभाग्य का अवसर है। इसी सौभाग्य को मनाते हुए हमने…
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शंख का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्ष
17 जून 2026 का ज्ञानप्रसाद हमारी सबकी आदरणीय बहिन सुमनलता जी ने ओंकार (ॐ) की महिमा पर आधारित ज्ञानप्रसाद लेख पर कमेंट किया कि शंखनाद की ध्वनि ॐ से मिलती जुलती है। हमें तो इस तथ्य का न तो कोई ज्ञान था एवं न ही कोई अनुभव। कमेंट देखते ही हमने जिज्ञासावश अपनी रिसर्च शुरू…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 12वां लेख-गायत्री मंत्र फलीभूत क्यों नहीं होता ?
“यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक, गुरुदेव द्वारा पंडित लीलापत शर्मा जी के जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उत्तरों का समावेश है। हमारा सौभाग्य है कि पिछले तीन सप्ताह से हमने इस पुस्तक के ज्ञान को समझने का प्रयास किया, ऑनलाइन सोर्सेज,साथिओं से प्राप्त हुए ज्ञान से, पुस्तक के एक-एक शब्द को समझने का प्रयास किया गया। 16…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 11वां लेख-अमृत,पारस,कामधेनु और कल्पवृक्ष की लॉजिकल चर्चा
“यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक, गुरुदेव द्वारा पंडित लीलापत शर्मा जी के जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उत्तरों का समावेश है। हमारा सौभाग्य है कि पिछले कुछ दिनों से हम इस पुस्तक के ज्ञान को समझने का प्रयास कर रहे हैं, ऑनलाइन सोर्सेज,साथिओं से प्राप्त हुए ज्ञान से, पुस्तक के एक-एक शब्द को समझने का प्रयास किया…
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आदरणीय चिन्मय जी से मिलना बिलकुल अविश्वसनीय,आश्चर्यजनक किन्तु सत्य रहा
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का एक-एक साथी जानता है कि हर महीने के अंतिम शनिवार को छोड़ कर बाकि के सभी शनिवारों को इस मंच से स्पेशल सेगमेंट प्रस्तुत किये जाते हैं जिसमें पूरे का पूरा योगदान इस परिवार के समर्पित साथिओं का ही होता है, कोई अपने घर में हो रहे यज्ञ की बात…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 10 वां लेख-गायत्री मंत्र के द्वितीय (भर्गो देवस्य धीमहि)एवं तृतीय चरण (धियो यो नः प्रचोदयात) की अति सरल व्याख्या।
“यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक, गुरुदेव द्वारा पंडित लीलापत शर्मा जी के जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उत्तरों का समावेश है। हमारा सौभाग्य है कि पिछले कुछ दिनों से हम इस पुस्तक के ज्ञान को समझने का प्रयास कर रहे हैं, ऑनलाइन सोर्सेज,साथिओं से प्राप्त हुए ज्ञान से, पुस्तक के एक-एक शब्द को समझने का प्रयास किया…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 9वां लेख-गायत्री मंत्र के प्रथम चरण (तत्सवितुर्वरेण्यं) की अति सरल व्याख्या।
“यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक, गुरुदेव द्वारा पंडित लीलापत शर्मा जी के जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उत्तरों का समावेश है। हमारा सौभाग्य है कि पिछले कुछ दिनों से हम इस पुस्तक के ज्ञान को समझने का प्रयास कर रहे हैं, ऑनलाइन सोर्सेज,साथिओं से प्राप्त हुए ज्ञान से, पुस्तक के एक-एक शब्द को समझने का प्रयास किया…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 8वां लेख-गायत्री मंत्र के पहले चार शब्दों (ॐ,भूः,भुवः, स्वः) की अति सरल व्याख्या।
“यज्ञ पिता-गायत्री माता”, गुरुदेव द्वारा पंडित लीलापत शर्मा जी के जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उत्तरों का समावेश है। हमारा सौभाग्य है कि आदरणीय संध्या बहिन जी की पहल से इस पुस्तक के एक-एक शब्द को समझने की प्रेरणा मिली, बहिन जी का धन्यवाद् करते हैं। आज के ज्ञानप्रसाद लेख में गायत्री मंत्र के प्रथम चार…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 7वां लेख-गायत्री उपासना से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है लेकिन शर्त केवल एक ही है !!
हमारी आदरणीय बहिन संध्या कुमार जी ने “यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक का स्वाध्याय किया,100 पृष्ठों के ज्ञान को कुछ ही पन्नों में Summarize किया, इस Summarized कंटेंट पर चार ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये गए लेकिन पुस्तक के 27 चैप्टर बार-बार कह रहे थे कि यह अति उत्कृष्ट ज्ञान है, इसे पूरे विस्तार से समझना चाहिए।…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 6वां लेख-गायत्री मंत्र के ज्ञान पक्ष की अति सरल व्याख्या,दूसरा एवं समापन भाग
वर्तमान लेख श्रृंखला में गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक एवं ज्ञान पक्ष को समझने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि यदि किसी ज्ञान का समझ कर अभ्यास किया जाए तो परिणाम अनेकों गुना होता है। गायत्री साधना के वैज्ञानिक पक्ष पर की गयी चर्चा पाठकों को इतनी पसंद आई कि इन पंक्तियों के लिखने समय…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का पांचवां लेख-गायत्री मंत्र के ज्ञान पक्ष की अति सरल व्याख्या,पहला भाग
सभी साथिओं को हम ह्रदय से बधाई देते हैं कि कल वाले लेख को फेसबुक पर 35000 लोगों ने देखा और 115 लोगों ने कमेंट किए। परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचा गया दिव्य साहित्य इतना विस्तृत है कि उसे समझने और स्वाध्याय के लिए अनेकों जन्म चाहिए। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का सदैव प्रयास रहता…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का चौथा लेख- गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक पक्ष पर कुछ और बेसिक जानकारी
आज के लेख में गायत्री मंत्र के “ज्ञान पक्ष” और “विज्ञान पक्ष” के अंतर् को समझने का प्रयास किया गया। इस अंतर् को समझने के लिए, सरल बनाने के लिए, जिन-जिन रिसर्च पेपर्स की सहायता ली गयी है उनका विवरण देना हमारे लिए असंभव है। उद्देश्य केवल एक ही है: गायत्री उपसना समझ कर की…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का तीसरा लेख- गायत्री मंत्र का अति सरल विज्ञान
कल वाले ज्ञानप्रसाद लेख में जानने और समझने के लिए इतना कुछ था कि ज्ञान के भवंडर से निकलना कठिन हो सकता था लेकिन हमारे अनेकों साथिओं ने कमेंट करके अद्भुत ज्ञान को और भी सरल बना दिया। ह्रदय से आभार व्यक्त करते हैं। विज्ञान के विद्यार्थी होने के कारण बार-बार यही जिज्ञासा उठती रहती…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का दूसरा लेख- “त्रिपदा गायत्री” को समझने का अति सरल प्रयास
आज के ज्ञानप्रसाद लेख में यथासंभव प्रयास करके “बहुचर्चित त्रिपदा गायत्री” के अर्थ को समझने का प्रयास किया गया है। यह एक ऐसा फ़िलॉसफिकल लेख है जिसे समझने के लिए कई प्रकार के ज्ञान की आवश्यकता है। लेख को समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है। परम पूज्य गुरुदेव एवं पंडित लीलापत…
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ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का “अपने साथिओं से अपनी बात” का 30 मई 2026 का विशेष सेगमेंट– हमारे जीवन के अंतरंग पहलू
जब भी हम माह के अंतिम शनिवार को “अपने साथिओं से अपनी बात” के इस विशेष सेगमेंट को लिखने बैठते हैं तो जो हमने सोचा होता है अधिकतर बदल ही जाता है। पूरा माह हम जब-जब,जैसे-जैसे जो-जो विचार आते जाते हैं उन्हें अपनी फाइल में बनाए स्पेशल पृष्ठ पर लिखते रहते हैं। यह विचार कहीं…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का प्रथम लेख- सद्बुद्धि की देवी गायत्री को माँ क्यों कहा जाता है
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के साथिओं ने आज के लेख का शीर्षक नोटिस कर लिया होगा, जो पिछले चार लेखों से अलग है। इस बदलाव के कारण जहाँ हम आदरणीय संध्या बहिन जी से क्षमाप्रार्थी हैं वहीँ उनका ह्रदय से आभार भी व्यक्त करते हैं कि “यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक से परिचय हो पाया। इस…
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त्रिवेणी शताब्दी में लिए गए संकल्प से ब्रेक लेकर आद संध्या जी द्वारा प्रस्तुत किये गये कंटेंट पर आधारित लेख श्रृंखला का चौथा लेख
गुरुदेव की अदुभुत रचना “यज्ञ पिता-गायत्री माता” में समाहित अद्भुत ज्ञान का स्वध्याय करके आदरणीय संध्या बहिन जी ने हम सबके लिए 100 पन्नों के ज्ञान का निचोड़ 20 पन्नों में प्रस्तुत किया है। इसी संक्षिप्त ज्ञान को ज्ञानप्रसाद लेखों के माध्यम से ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।…
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त्रिवेणी शताब्दी में लिए गए संकल्प से ब्रेक लेकर आद संध्या जी द्वारा प्रस्तुत किये गये कंटेंट पर आधारित लेख श्रृंखला का तीसरा लेख
गुरुदेव की अदुभुत रचना “यज्ञ पिता-गायत्री माता” में समाहित अद्भुत ज्ञान का स्वध्याय करके आदरणीय संध्या बहिन जी ने हम सबके लिए 100 पन्नों के ज्ञान का निचोड़ 20 पन्नों में प्रस्तुत किया है। इसी संक्षिप्त ज्ञान को ज्ञानप्रसाद लेखों के माध्यम से ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।…
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त्रिवेणी शताब्दी में लिए गए संकल्प से ब्रेक लेकर आद संध्या जी द्वारा प्रस्तुत किये गये कंटेंट पर आधारित लेख श्रृंखला का दूसरा लेख
गुरुदेव की अदुभुत रचना “यज्ञ पिता-गायत्री माता” में समाहित अद्भुत ज्ञान का स्वध्याय करके आदरणीय संध्या बहिन जी हम सबके लिए 100 पन्नों के ज्ञान का निचोड़ 20 पन्नों में प्रस्तुत किया है। इसी संक्षिप्त ज्ञान को परिवार के मंच पर प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का दूसरा लेख प्रस्तुत किया गया है।…
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त्रिवेणी शताब्दी में लिए गए संकल्प से ब्रेक लेकर आद संध्या जी द्वारा प्रस्तुत किये गये कंटेंट पर आधारित लेख श्रृंखला की प्रस्तावना
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा के समर्पित गुरु शिष्य भलीभांति जानते हैं कि इस मंच से परम वंदनीय माता जी के अवतरण, परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। गुरुसत्ता के आशीर्वाद से, उनके मार्गदर्शन में जनवरी 2026 से…
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22 मई 2026:ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार द्वारा लिए गए एक वर्षीय संकल्प के 33% भाग का Wrap up
आज की प्रस्तुति ज्ञानप्रसाद लेख न होकर मात्र एक जानकारी ही है। कल जब आदरणीय चंद्रेश जी ने आज प्रस्तुत होने वाले ज्ञानप्रसाद के बारे में जिज्ञासा प्रकट की तो उस समय हमारे मन-मस्तिष्क में कुछ ऐसे ही विचार दौड़ रहे थे कि Wrap up को कुछ ऐसे तरीके से प्रकाशित किया जाए कि इस…
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वंदनीय माताजी की जन्म शताब्दी को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला का 14वां एवं अंतिम ज्ञानप्रसाद लेख: हमारी माँ कह रही है, यह श्रेय लेने का समय है,बार-बार नहीं आएगा।
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से परम वंदनीय माता जी के अवतरण, परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। अगस्त 1994 की अखंड ज्योति में प्रकाशित लेख, “एक माँ की अंतः वेदना एवं अपेक्षा भरी गुहार” से प्रभावित होकर कल एक…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 13वां ज्ञानप्रसाद लेख: गुरुदेव के रिजर्व बैंक में कहीं कोई कमी नहीं रही।
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। पिछले कल प्रस्तुत किया गया 12वां ज्ञानप्रसाद लेख “मातृशक्ति विशेषांक पर आधारित” लेख श्रृंखला का समापन लेख था।…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 11वां ज्ञानप्रसाद लेख: गुरुदेव माताजी के बारे में क्या कह रहे हैं?
आज के ज्ञानप्रसाद लेख के साथ 3 स्लाइड्स अटैच की गयी हैं जिनमें लेख के कंटेंट को चीटशीट की भांति दिखाया गया है। प्रयास करेंगें की आने वाले दिव्य संदेशों में इन चीटशीट को शामिल किया जाये। शब्द सीमा के कारण आज सीधा लेख की और ही रुख करना होगा। ****************** गुरुदेव के जीवन में…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 12वां ज्ञानप्रसाद लेख: परम पूज्य गुरुदेव ने माताजी को “महाकाल की सहचर महाकाली के रूप” की उपमा दी
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 10वां ज्ञानप्रसाद लेख: हमारी माँ, वन्दनीय माताजी साक्षात् अन्नपूर्णा थीं/हैं
शब्द सीमा की बेड़ियाँ आज भी ज्ञानप्रसाद लेख सम्बन्धी Opening remarks/भूमिका/Main points आदि लिखने को रोके बैठी हैं। बस इतना ही कहकर आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ करेंगें कि यह समय है नींद से उठने का, अपनी माँ, माता भगवती देवी शर्मा जी की शक्ति को पहचानने का, समझने का एवं औरों को बताने…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 9वां ज्ञानप्रसाद लेख: बिल्ली के बच्चे, कबूतर,खरगोश एवं कुत्ते ने माँ का स्नेह पाया
आज का ज्ञानप्रसाद लेख कल वाले लेख की ही एक्सटेंशन है I शब्द सीमा की बेड़ियाँ कहाँ हमें अपने मन की बात लिखने देती हैं। अनेकों बार अपना ह्रदय चीरकर साथिओं के समक्ष रखने का प्रयास किया है लेकिन आज सीधा अपनी माँ के चरणों में समर्पित होकर, कुछ अन्य प्राणियों के प्रति भाव-संवेदना अनुभव…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 8वां ज्ञानप्रसाद लेख: वंदनीय माताजी द्वारा गाय, वानर सेना एवं तोते के प्रति करूणा दर्शाता एक दिव्य लेख
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के लिए हम ऐसी-ऐसी जानकारियां लेकर आ रहे हैं (यां यूँ कहें कि गुरुवर…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 7वां ज्ञानप्रसाद लेख:आंवलखेड़ा-मथुरा में वंदनीय माताजी के आरंभिक दिन
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 6वां ज्ञानप्रसाद लेख: मातृदिवस को समर्पित “नारी जागरण अभियान” पर एक दिव्य लेख
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का 5वां ज्ञानप्रसाद लेख: गायत्री परिवार का प्रथम महिला मंडल
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का चौथा ज्ञानप्रसाद लेख: वंदनीय माताजी समर्पण,निष्ठा एवं श्रद्धा के लिए कह रही हैं।
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का तीसरा ज्ञानप्रसाद लेख: वंदनीय माताजी के उद्बोधन से कुछ और शिक्षाप्रद ज्ञान
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख: मातृवाणी में बोओ और काटो का सिद्धांत
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। वर्तमान लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों उत्कृष्ट लेख…
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2 मई 2026 का “सहकर्मीओं के योगदान” को दर्शाता स्पेशल सेगमेंट
मई 2026 का प्रथम शनिवार, हर बार की भांति आज एक बार फिर ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण बातें लेकर उपस्थित है। नए साथी अनवरत आते रहते हैं, पुराने साथी छोड़ कर जाते रहते हैं: परिवर्तन सृष्टि का शाश्वत नियम है, इसे कोई भी नकार नहीं सकता। इसीलिए हर बार शनिवार के…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित एक और लेख श्रृंखला का प्रथम लेख ज्ञानप्रसाद लेख: गुरुदेव के जीवन में आयी आध्यात्मिक क्रांति
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज प्रारम्भ हुई लेख श्रृंखला का आधार अखंड ज्योति का फरवरी 1995 का “मातृस्मृति विशेषांक” है जिसमें अनेकों…
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30 अप्रैल 2026 का ज्ञानप्रसाद- समापन हुई लेख श्रृंखला का Wrap up और कल से आरम्भ हो रही लेख श्रृंखला की पृष्ठभूमि
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित अलग-अलग लेख श्रृंखलाओं के अंतर्गत ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। हम सब परिवारजनों का परम सौभाग्य है कि गुरुकृपा से अपनेआप ही, एक स्वचालित इंस्ट्रूमेंट की भांति गुरुवर…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 34वां एवं समापन ज्ञानप्रसाद लेख: माँ के चरणों में क्षमा याचना
“कुछ त्याग नहीं अपना माँ ,बस क़र्ज़ चुकाते हैं”, यह शब्द आज के लेख के साथ संलग्न वीडियो के चुनिंदा शब्द हैं, इसकी भावना समझते ही अश्रुधारा का फूट पड़ना स्वाभाविक है। आज स्वर्ण अवसर है अपनी माँ के चरणों में समर्पित होकर किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना का। 8 मार्च 2026 को…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 33वां ज्ञानप्रसाद लेख: वंदनीय माताजी का अपने बच्चों को आश्वासन
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 33 वां लेख प्रस्तुत किया गया है। आज शब्द सीमा की बेड़ियाँ केवल…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 32वां ज्ञानप्रसाद लेख: चित्रकूट अश्वमेध यज्ञ से सम्बंधित आद जितेंद्र रघुवंशी जी की जानकारी पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण संस्मरण-पार्ट 2
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 32वां लेख प्रस्तुत किया गया है। आज प्रस्तुत किया गया ज्ञानप्रसाद लेख आद…
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25 अप्रैल 2026 का माह के अंतिम शनिवार का विशेष सेगमेंट- जब व्हाट्सप्प पर ग्रुप मैसेज पर 35 की पाबंदी थी।
माह के अंतिम शनिवार को प्रस्तुत होने वाले सेगमेंट का शुभारम्भ अधिकतर आद सुमनलता बहिन जी के सुझाव और साथिओं के समर्थन के धन्यवाद् से करते हैं लेकिन आज शब्दसीमा के बेड़ियाँ अपना प्रतिबंध लगाए खड़ी हैं। हर बार की भांति, जब भी कोई बात याद आई लिख डाली। इस बार के सेगमेंट को लिखने…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 31वां ज्ञानप्रसाद लेख: चित्रकूट अश्वमेध यज्ञ से सम्बंधित आद जितेंद्र रघुवंशी जी की जानकारी पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण संस्मरण-पार्ट 1
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 31वां लेख प्रस्तुत किया गया है। आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ करने…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 30वां ज्ञानप्रसाद लेख: 19 सितम्बर 1994 को हुए वंदनीय माताजी के महाप्रयाण को समर्पित एक दिव्य लेख
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 30वां लेख प्रस्तुत किया गया है। हमारे पाठकों को अद्भुत संयोग स्मरण हो…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 29वां ज्ञानप्रसाद लेख: अप्रैल 1994 में, चित्रकूट में माताजी ने अंतिम अश्वमेध यज्ञ संपन्न कराया
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 29वां लेख प्रस्तुत किया गया है। लेख का शुभारम्भ करने से पहले साथिओं…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 28वां ज्ञानप्रसाद लेख: 1993 में विदेश की धरती पर वंदनीय माताजी के संरक्षण में 3 अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न हुए
हमारे स्वर्गीय पिताजी हमारे गुरु भी थे, कक्षाओं में पढ़ाते हुए अक्सर बोलते थे, “आगे दौड़ पीछे चौड़” अर्थात जल्दी-जल्दी में बहुत कुछ छूटने की आशंका रहती है। अपनी माँ की जन्म शताब्दी मनाने का दुर्लभ सौभाग्य सभी को नहीं मिलता, इसमें ज़रा भी जल्दी करने की ज़रुरत नहीं है, धीरे-धीरे एक नवजात शिशु की…
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वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 26वां ज्ञानप्रसाद लेख: माँ ने अश्वमेध यज्ञ श्रृंखला का शुभारम्भ किया
ऑनलाइन/ऑफलाइन दोनों स्रोतों पर उपलब्ध ब्रह्मवर्चस द्वारा सम्पादित 118 Scanned पन्नों और 32 Text पन्नों की दिव्य पुस्तक “महाशक्ति की लोकयात्रा” पर आधारित लेख श्रृंखला का प्रथम लेख हमने 8 मार्च 2026 को प्रस्तुत किया था। परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को…