3 मार्च,2026
हमारे साथी जानते हैं कि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से प्रकाशित होने वाले लगभग प्रत्येक कंटेंट का सोर्स बताना अपना कर्तव्य समझा जाता है ताकि किसी भी प्रकार के संदेह/शंका की गुंजाइश न रहे। लेकिन परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस को समर्पित वर्तमान लेख का सोर्स बताना संभव नहीं है क्योंकि इसे हमारे निष्ठवान साथी आदरणीय सरविन्द जी ने अखंड ज्योति के अनेकों अंकों के स्वाध्याय के बाद अपनी आत्मा में उठ रहे विचारों को व्यक्त किया है। भाई साहिब के इस योगदान से ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का प्रत्येक साथी लाभान्वित होगा,ऐसा हमारा विचार है, आद सरविन्द जी का ह्रदय से आभार व्यक्त करते हैं।
अक्सर हम कहते रहते हैं कि इस मंच पर प्रकाशित प्रत्येक दिव्य कंटेंट को ध्यान से पढ़कर, समझकर, अंतर्मन में उतार कर ही कमेंट करें ताकि कमेंट पढ़ने वाले को आभास हो जाए कि सच में ज्ञानप्रसाद का अमृतपान किया गया है। हम तो कहेंगें कि ज्ञानप्रसाद लेखों को “Between the lines” के सिद्धांत के साथ, एक-एक शब्द का अर्थ एवं भावना से पढ़ना ही लाभदायक होगा।
समस्त विश्व में त्राहि-त्राहि मची हुई है, ऐसे में विश्व शांति के लिए कामना करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उससे भी ऊपर यदि शांतिपाठ का अर्थ समझकर, अंतर्मन से सच्ची प्रार्थना की जाए तो भगवान इतने निष्ठुर नहीं हैं कि गिलहरी जैसे हमारे योगदान को नज़रअंदाज कर दें, बूँद बूँद से हो तो तालाब भरते हैं।
आइये आज के दिव्य लेख का शुभारम्भ करें :
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
अर्थात शान्ति: कीजिये प्रभु ! त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में,अन्तरिक्ष में, अग्नि – पवन में, औषधियों, वनस्पतियों, वन और उपवन में,सकल विश्व में अवचेतन में,शान्ति राष्ट्र-निर्माण और सृजन में, नगर , ग्राम और भवन में प्रत्येक जीव के तन, मन और जगत के कण – कण में, शान्ति कीजिए ! शान्ति कीजिए ! शान्ति कीजिए
परम पूज्य गुरुदेव के सूक्ष्म संरक्षण व दिव्य सानिध्य में संचालित आनलाइन ज्ञान रथ गायत्री परिवार जैसे दिव्य मंच के लिए योगदान देना वास्तव में लोकमंगल का कार्य एवं परम सौभाग्य है।
2026 के वसंत के लिए, गुरुदेव के दिव्य आध्यात्मिक जन्म दिवस के पावन अवसर पर, विशेष ध्यान केंद्रित कर एकाग्र मन से, श्रद्धापूर्वक लिखा गया यह आध्यात्मिक लेख सादर प्रेषित है। इस लेख का गंभीरतापूर्वक स्वाध्याय करना, लेख में दिए गए ज्ञान को आत्मसात करने में पाठकों के अंतःकरण का कायाकल्प होना स्वाभाविक व सुनिश्चित है।
वसंत पर्व, परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी का दिव्य आध्यात्मिक अवतरण, नवयुग चेतना के सूर्य का उदय:
“वसंत ऋतु केवल प्रकृति का श्रृंगार नहीं, यह आत्मा के नवजागरण का भी महोत्सव है”
भारतीय संस्कृति में वसंत पंचमी का विशेष स्थान है। यह दिन ज्ञान, चेतना, सृजन और नवजीवन का प्रतीक माना गया है। पीले पुष्पों से सजी धरती, मंद-मंद बहती सुगंधित बयार और प्रकृति में छाई नवचेतना,सब मिलकर “जड़ता छोड़ो, जागो और आगे बढ़ो” का सन्देश देती है।
यही कारण है कि इसी पावन तिथि को परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी का दिव्य आध्यात्मिक जन्म दिवस वसंत पर्व के रूप में मनाया जाता है।
वसंत ऋतु जहाँ बाहरी जगत में नवसृजन का संकेत देती है, वहीं परम पूज्य गुरुदेव का जीवन संदेश देता है कि असली वसंत मनुष्य के भीतर आना चाहिए। जब विचार शुद्ध हों, भावनाएं पवित्र हों और कर्म लोकमंगलकारी हों, तभी जीवन में सच्चा वसंत आता है।
परम पूज्य गुरुदेव कहते थे:
“ऋतुएं तो हर साल आती हैं लेकिन मनुष्य का वसंत तभी आता है जब उसकी चेतना जागृत होती है।”
परम पूज्य गुरुदेव केवल एक संत व विचारक नहीं थे, वे युगदृष्टा ऋषि थे। उन्होंने आने वाले समय की चुनौतियों को पहले ही देख लिया था:
मूल्यहीनता, स्वार्थपरता,आध्यात्मिक शून्यता,सामाजिक विघटन
और इसके समाधान के रूप में परम पूज्य गुरुदेव ने विचार क्रांति अभियान, युग निर्माण योजना, गायत्री महायज्ञ,अखंड ज्योति और प्रज्ञा आंदोलन जैसे अनेकों सूत्र दिए।
गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस का अर्थ, वसंत पंचमी को परम पूज्य गुरुदेव को दादागुरु का मार्गदर्शन मिलना केवल संयोग नहीं, बल्कि दैवी संकेत है। उनका जन्म उस चेतना के लिए हुआ था जो समाज में जमी हुई बर्फ को पिघलाकर नवजीवन प्रवाहित करे। उनका जीवन बताता है कि जन्म तो शरीर का होता है लेकिन जन्म दिवस आत्मा का होना चाहिए। वसंत पर्व इसी आत्मिक जन्म का स्मरण है।
गायत्री मंत्र, चेतना की महामंत्रणा है। परम पूज्य गुरुदेव ने गायत्री मंत्र को केवल जप का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला बनाया है। उनका स्पष्ट संदेश है:
“गायत्री उपासना का अर्थ-सद्बुद्धि का विकास और सत्कर्मों का विस्तार है।”
आज जब समाज दिशाहीन हो रहा है, गायत्री मंत्र एक आंतरिक Compass बनकर मार्गदर्शन करता है।
युग निर्माण का सूत्र:
परम पूज्य गुरुदेव के जीवन को एक ही वाक्य में समाहित किया जा सकता है-“व्यक्ति बदलेगा, युग बदलेगा।”
परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि व्यवस्था बदलने से पहले व्यक्ति बदलना होगा। व्यक्ति बदलेगा तो परिवार बदलेगा। परिवार बदलेगा तो समाज बदलेगा।
वसंत पर्व हमें यह संकल्प दिलाता है कि हम स्वयं के सुधार से युग परिवर्तन की शुरुआत करें।
परम पूज्य गुरुदेव का संपूर्ण जीवन अखंड तपस्या का इतिहास है:
24-24 घंटे का जप, हिमालय की साधनाएं,लेखन, संगठन और सेवा का अद्भुत समन्वय। परम पूज्य गुरुदेव ने खुद सिद्ध करके दिखा दिया कि आध्यात्मिकता पलायन नहीं, परिवर्तन की शक्ति है। परम पूज्य गुरुदेव तप, त्याग और तपस्या के अप्रतिम उदाहरण हैं, इसमें तनिक भी संदेह व संशय नहीं है।
वसंत पर्व केवल उत्सव नहीं, संकल्प दिवस भी है:
परम पूज्य गुरुदेव ने वसंत पर्व को केवल उत्सव नहीं रहने दिया, बल्कि इसे आत्मसुधार और लोकमंगल का संकल्प दिवस बनाया। अतः हम सबको वसंत पर्व जैसे दिव्य अलौकिक महापर्व पर संकल्प लेना चाहिए कि आज से हम कम से कम एक बुराई छोड़ेंगे और एक अच्छाई ग्रहण करेंगें। एक व्यक्ति को सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेंगे। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से इसी प्रकार के प्रयास किये जाते हैं। वर्ष 2026 के वसंत पर गुरुदेव के प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आज के युग में परम पूज्य गुरुदेव की शिक्षा की प्रासंगिकता:
आज जब युवा वर्ग दिशाहीन है, परिवार बिखर रहे हैं और समाज तनावग्रस्त है, तब परम पूज्य गुरुदेव की फिलासफी चरित्र-निर्माण, संयम, सेवा, साधना और स्वाध्याय के लिए कहती है। यही नवयुग का वास्तविक आधार है जिसे हम सबको हृदयंगम करना चाहिए, तभी गृहस्थ जीवन में रहकर गृहस्थ धर्म निभा सकते हैं, तभी हम परम पूज्य गुरुदेव के परम शिष्य बन सकते हैं।
हम सब परम पूज्य गुरुदेव के कार्यकर्ता हैं और गुरुदेव ने खुद अपने सभी आत्मीय कार्यकर्ताओं से कहा है कि
“मैं व्यक्ति नहीं, विचार हूँ।”
आज हम सब पर यह अहम जिम्मेदारी है कि परम पूज्य गुरुदेव के दिव्य विचारों को जिएं, उनके दिव्य संदेशों को फैलाएं और जन-जन तक पहुँचायें तथा अपने दिव्य आचरण से आदर्श बनें। यही सच्चा वसंत पर्व है और इस वसंत पर्व को जीवन में उतारकर स्वयं का आत्मपरिशोधन कर आत्मजागरण जैसे सराहनीय व प्रसंशनीय कार्य करके पुरुषार्थ कमांयें।
वसंत पर्व और परम पूज्य गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्म दिवस हम सबको यह बोध कराता है:
“यदि विचार उजले हों ,कर्म पवित्र हों तो जीवन में हर दिन वसंत हो सकता है।”
आइए, ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के सभी परिवारजन 2026 के वसंत पर्व पर संकल्प लें:
निराशा नहीं, नवआशा बोयेंगे, अंधकार नहीं, दीप जलायेंगे, स्वार्थ नहीं, सेवा अपनायेंगे।
गुरुवर के प्रति हमारी यही श्रद्धा-विश्वास और समर्पण के साथ सच्ची व पवित्र श्रद्धांजलि होगी।
इन पंक्तियों में जो कुछ भी लिखा गया है वह गुरुदेव की दिव्य प्रेरणा व मार्गदर्शन का प्रतिफल है। अतः लिखने में कोई त्रुटि हुई हो तो सभी आत्मीय परिजन हमें अपना गुरु भाई व शुभचिन्तक समझकर क्षमा कर देना, महान दया होगी। हम सदैव आप सबके आभारी रहेंगे।
धन्यवाद। जय गुरुदेव
इसी कड़ी के अंतर्गत कल “गृहस्थ जीवन एक पावन योजना” लेख प्रस्तुत किया जायेगा। उसके बाद इस श्रृंखला का समापन हमारी सबकी प्रिय बेटी संजना की प्रस्तुति के साथ होगा।
वर्ष 2026 में लिए गए संकल्प की स्लाइड हमारे साथी पहले से ही देख चुके हैं लेकिन आदरणीय श्रेध्य डॉ प्रणव पंड्या जी की उत्कृष्ट रचना “महाशक्ति की लोकयात्रा” का अमृतपान करने का वर्तमान समय से बड़ा अवसर क्या ही होगा, वर्षों से यह अभिलाषा लिए हुए हैं। आशा करते हैं साथिओं का समर्थन अवश्य प्राप्त होगा। गुरुकक्षा के एक निकटतम सहपाठी, हमारे जीवनसाथी का समर्थन तो प्राप्त हो ही चुका है।
धन्यवाद्,जय गुरुदेव