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‘‘इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य’’ का उद्घोष मात्र नारा नहीं है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की दूसरी पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का 9वां लेख प्रस्तुत है। परम पूज्य गुरुदेव ने युगसंधि के 12 वर्षों (1989-2000) की बात बार-बार की है,अनेकों पुस्तकों, अखंड ज्योति लेखों में गुरुदेव में विश्व भर में घटित आश्चर्यजनक परिवर्तनों के रिफरेन्स दिए हैं लेकिन हम तो ठहरे तर्कशील,शंकाग्रस्त; ऐसे कैसे बिना किसी…
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सूर्य विज्ञान और गायत्री मंत्र के महत्वपूर्ण तथ्य
परम पूज्य गुरुदेव ने हम सबके लिए “क्रंतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की रचना करते समय अवश्य सोचा होगा कि आने वाले दिनों में मेरे बच्चे बहुत व्यस्त हो जायेंगें,उनके पास मेरे द्वारा रचा गया विशाल साहित्य पढ़ने और समझने का कहाँ समय होगा !!! ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्ष 2026 के संकल्प का…
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भूलोक, स्वर्गलोक से भी बढ़कर कैसे है?
आज के ज्ञानप्रसाद लेख को समझने के लिए संक्षिप्त सी भूमिका देने की आवश्यकता पड़ रही है। “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2” पर आधरित वर्तमान लेख श्रृंखला के सातवें चैप्टर का शीर्षक “अगली शताब्दी का अधिष्ठाता-सूर्य” जितना आकर्षक है उतना ही जिज्ञासापूर्ण भी है। बार-बार पूरे चैप्टर को पढ़ने के बाद भी हम…
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