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मथुरा से विदाई के समय परम पूज्य गुरुदेव के मार्मिक भाव
अखंड ज्योति मई 1971 में प्रकाशित “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ इतना विस्तृत और मार्मिक है कि किसी की भी आँखों में आंसू ला सकता है।पाठक स्वयं अनुभव कर सकते हैं कि इतना भावुक,इतना प्रेम करने वाला गुरु,मार्गदर्शक कहाँ मिल पायेगा। आज का ज्ञानप्रसाद लेख अपने बच्चों के प्रति स्नेह एवं अपने गुरु के प्रति…
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कौन है आत्मदेवता,एवं उसकी आराधना कैसे की जाए?
अखंड ज्योति मई 1971 के “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ में परम पूज्य गुरुदेव ने आधुनिक युग के मानव की प्रवृति को समझते हुए कहा कि प्राचीनकाल की शारीरिक, मानसिक,भौतिक एवं तात्त्विक परिस्थितियाँ अब बदल चुकी हैं। साधना तपश्चर्या का जो क्रम भूतकाल में अपनाया जाता रहा है, वह आज की परिस्थितियों से मेल नहीं…
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परम पूज्य गुरुदेव की 1971 हिमालय यात्रा का उद्देश्य
आज 29 जुलाई 2026,बुधवार का वोह पावन दिन है जिसे हम सब गुरुपूर्णिमा, व्यासपूर्णिमा कह कर मना रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा साथी होगा जिसे इस दिन के महत्व का ज्ञान न होगा, लेकिन हमारे लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब परम पूज्य गुरुदेव स्वयं आकर अखंड ज्योति मई 1971…
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