वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • भक्ति और शक्ति दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं 

    अगर साधक की भक्ति सच्ची एवं निस्वार्थ है तो ईश्वर भी उसमें साथ देने से पीछे नहीं हटते हैं। परम पूज्य गुरुदेव की जीवन झांकी पर दृष्टि दौड़ाने पर यह तथ्य इतना सार्थक दिखता है कि शंका की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती। 15 वर्ष की आयु में दादागुरु द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूर्ण…

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  • सच्चे अध्यात्मवाद में विलक्षण शक्ति समाई हुई है 

    दादागुरु ने परम पूज्य गुरुदेव को अध्यात्म का कार्य सौंपते हुए अध्यात्म की असाधारण शक्ति का भी बता दिया था लेकिन जिज्ञासु होने के कारण गुरुदेव कहाँ मानने वाले थे, वोह तो इस तथ्य को साबित करने में लगे हुए थे कि क्या भक्ति में  सचमुच शक्ति समाई हुई है। यदि ऐसा नहीं है तो…

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  • गुरुदेव की सिद्धियां,गुरुदेव के ही शब्दों में 

    आज के लेख के बारे में गुरुदेव लिखते हैं कि इस चर्चा को अप्रासंगिक, अनावश्यक और अहंकार स्तर का उल्लेख न समझा जाए क्योंकि कहने को तो बहुत कुछ है इसीलिए जीवन भर के लम्बे प्रसंग को ऐसे जिज्ञासु बच्चों के लिए छोड़ दिया है जो शरीर न रहने पर कुछ और खोजने-जानने  के लिए…

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