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परम पूज्य गुरुदेव की 1971 हिमालय यात्रा का उद्देश्य
आज 29 जुलाई 2026,बुधवार का वोह पावन दिन है जिसे हम सब गुरुपूर्णिमा, व्यासपूर्णिमा कह कर मना रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा साथी होगा जिसे इस दिन के महत्व का ज्ञान न होगा, लेकिन हमारे लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब परम पूज्य गुरुदेव स्वयं आकर अखंड ज्योति मई 1971…
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परिवर्तन प्रक्रिया का सार-संक्षेप
उन्नीसवीं शताब्दी(1801-1900) से आरम्भ होकर बीसवीं(1901-2000) सदी के अन्तिम चरण तक, 200 वर्षों में कालचक्र अत्यन्त तीव्रगति से घूमा है। जितना भला-बुरा पिछले हजारों वर्षों में नहीं बन पड़ा, वह इस 200 वर्ष की अवधि में हो चला है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित है: —प्रगति के नाम पर असाधारण महत्त्व के आविष्कार, बुद्धि तीक्ष्णता के…
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‘‘इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य’’ का उद्घोष मात्र नारा नहीं है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की दूसरी पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का 9वां लेख प्रस्तुत है। परम पूज्य गुरुदेव ने युगसंधि के 12 वर्षों (1989-2000) की बात बार-बार की है,अनेकों पुस्तकों, अखंड ज्योति लेखों में गुरुदेव में विश्व भर में घटित आश्चर्यजनक परिवर्तनों के रिफरेन्स दिए हैं लेकिन हम तो ठहरे तर्कशील,शंकाग्रस्त; ऐसे कैसे बिना किसी…
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