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इतनी प्रगति के बावजूद लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?
कल वाले अति विस्तृत लेख में गुरुदेव बता रहे थे कि सतयुग कोई बाहरी समय या स्थान नहीं है, यह मनुष्य की आंतरिक स्थिति है। गुरुदेव इतनी प्रगति को देखते हुए, चिंतित होते हुए पूछ रहे हैं कि इतना सब कुछ होने के बावजूद “लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?” ऐसी स्थिति से…
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अवश्य ही सतयुग की वापसी हो रही है !!!
आज के लेख का मुख्य सन्देश : “20वीं सदी ने हमें ‘दिमाग’ (Intelligence quotient-IQ ) दिया, लेकिन 21वीं सदी हमसे ‘दिल’ (Emotional quotient-EQ) की मांग रही है। मशीनें तब तक इंसान की जगह नहीं ले सकतीं, जब तक इंसान खुद मशीन की तरह सोचना बंद न कर दे।” ********************* परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा…
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“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी” के शुभारम्भ से पहले की भूमिका
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की आज की गुरुकक्षा में सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन करते हैं। मात्र 1500 शब्दों का बहुत ही संक्षिप्त, आज का लेख कुछ ऐसा कह रहा है जिसे रेगुलर लेख के दौरान कहना कठिन रहता है। ज्ञानप्रसाद लेखों के दौरान,अनेकों प्रकार की ज़ंजीरों (शब्द सीमा,साथिओं की समय सीमा, ग्रहण करने…
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