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पात्रता विकसित करना एक निजी पुरुषार्थ है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 8वीं पुस्तिका का शीर्षक “महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण” है। इस दिव्य पुस्तकमाला की अन्य 23 पुस्तकों की तरह यह लघु पुस्तिका भी केवल 35 पन्नों और 9000 से भी कम शब्दों में जिस ज्ञान को अपने गर्भ में संजोए हुए हैं उसे गुरुदेव ने अपने जीवन भर के साहित्य का…
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युग के मत्स्यावतार का क्या अर्थ है ? समापन लेख
आज “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” लघु पुस्तिका का समापन 12वें लेख के साथ हो रहा है, कितना सौभाग्य है कि वर्तमान लेख श्रृंखला में गुरुदेव द्वारा मथे गए मक्खन का अमृतपान हो रहा है। आज प्रस्तुत किये गए लेख के दो भाग हैं। पहले भाग में युग के मत्स्यावतार (भगवान विष्णु के पहले अवतार-मछली)…
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