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परिस्थितियां कभी भी, किसी के लिए भी अनुकूल नहीं थीं
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तक “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख इतना प्रैक्टिकल है कि लेख में वर्णित किए कंटेंट से लगभग सभी पाठक भलीभांति परिचित हैं। जीवन से जुड़े सभी तथ्य इतने सरल हैं कि इन्हें कोई भी बड़ी ही आसानी से समझ सकता है लेकिन प्रश्न तो यह उठता…
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दिवास्वप्न (Daydreaming) के मायाजाल से बाहिर निकलें
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार की सर्वप्रिय बिटिया, देव संस्कृति विश्वविद्यालय में MA साइकोलॉजी की विद्यार्थी,संजना के सुझाव पर आरम्भ किये गए एक विशाल प्रोजेक्ट के अंतर्गत “क्रांतिधर्मी साहित्य” की 23 पुस्तकों के क्रमवार अध्ययन में 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का शुभारम्भ करते जिस प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है उसे शब्दों में…
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जो पुकारेगा,उसे हम सामने खड़े दिखेंगें
साथिओ “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका पर आधारित श्रृंखला का नौंवा एवं समापन लेख गुरुदेव का आश्वासन एवं भविष्यवाणी को वर्णन कर रहा है। मात्र 35 पन्नों की छोटी सी पुस्तिका ने गुरुदेव के मार्गदर्शन में हमसे 9 लेख लिखवा लिए,यह सब कैसे हुआ केवल गुरुवर ही जानते हैं। आइए, सभी गुरुशिष्यों के स्वागत के…
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