-
वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 30वां ज्ञानप्रसाद लेख: 19 सितम्बर 1994 को हुए वंदनीय माताजी के महाप्रयाण को समर्पित एक दिव्य लेख
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 30वां लेख प्रस्तुत किया गया है। हमारे पाठकों को अद्भुत संयोग स्मरण हो…
-
वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 29वां ज्ञानप्रसाद लेख: अप्रैल 1994 में, चित्रकूट में माताजी ने अंतिम अश्वमेध यज्ञ संपन्न कराया
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्तमान लेख श्रृंखला के अंतर्गत परम वंदनीय माता जी के अवतरण,परम पूज्य गुरुदेव की साधना एवं अखंड दीप के प्राकट्य की तीन शताब्दिओं को समर्पित ज्ञानप्रसाद लिखे जा रहे हैं। आज इस दिव्य श्रृंखला का 29वां लेख प्रस्तुत किया गया है। लेख का शुभारम्भ करने से पहले साथिओं…
-
वर्ष 2026 की “त्रिवेणी शताब्दी” को समर्पित लेख श्रृंखला का 28वां ज्ञानप्रसाद लेख: 1993 में विदेश की धरती पर वंदनीय माताजी के संरक्षण में 3 अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न हुए
हमारे स्वर्गीय पिताजी हमारे गुरु भी थे, कक्षाओं में पढ़ाते हुए अक्सर बोलते थे, “आगे दौड़ पीछे चौड़” अर्थात जल्दी-जल्दी में बहुत कुछ छूटने की आशंका रहती है। अपनी माँ की जन्म शताब्दी मनाने का दुर्लभ सौभाग्य सभी को नहीं मिलता, इसमें ज़रा भी जल्दी करने की ज़रुरत नहीं है, धीरे-धीरे एक नवजात शिशु की…
Latest posts






