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भारतीय संस्कृति में “9” के विशेष महत्व का क्या आधार है ?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की सातवीं पुस्तिका पर आधारित 8वें ज्ञानप्रसाद लेख के अध्ययन के लिए सभी गुरुशिष्यों का स्वागत है। पहली 6 पुस्तिकाओं की भांति इस पुस्तिका को भी सभी उपलब्ध स्रोतों की सहायता से समझने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ने गुरुकृपा से 23 पुस्तिकाओं के दिव्य संग्रह की…
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शालीनता बिना मोल मिलती है,लेकिन उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है
आज का ज्ञानप्रसाद लेख ऐसे मानवीय मूल्यों की चर्चा कर रहा है जिनका पालन करके आज के युग की अनेकों समस्याओं का निवारण हो सकता है। समाज में मची त्राहि-त्राहि का एक कारण मानवीय मूल्यों का ह्रास ही है। जब ऐसा होता है तो मानवता का लुप्त होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में युगनिर्माण और…
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नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधरित लेख श्रृंखला के आज के ज्ञानप्रसाद लेख में गुरुदेव पूर्ण विश्वास से समझा रहे हैं कि नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा। कोई भी नया प्रोडक्ट बनाने के लिए फैक्ट्री लगानी पड़ती है, मशीनें इंसटाल करनी होती हैं,और न जाने कौन-कौन सी प्रक्रियाएं करने के बाद ही फिनिश्ड…
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