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अब भगवान की पुकार पर ध्यान देने का अवसर है
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ तो नाम जप,ध्यान एवं प्राणयाम से हुआ है जिसे लगभग सभी पाठक जानते ही हैं। गुरुदेव बता रहे हैं कि यह सभी कर्मकांडों के पीछे मुख्य उद्देश्य आत्मविकास एवं उत्कर्ष है न कि सभी कर रहे हैं तो हम भी करते जाएँ,लकीर पीटते जाएँ। गुरुदेव बता रहे हैं कि …
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कर्मकाण्ड, प्रतीक पूजा की फिलॉसॉफी क्या है ?
परम पूज्य गुरुदेव ने कर्मकांडों को समझने,उनके पीछे छिपे तथ्यों को समझने के लिए बार -बार बल दिया है, संसार में अंधविश्वास का तो पहले ही बोलबाला है, यदि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से इस दिशा में कोई सार्थक परिणाम निकल पाते हैं, गुरूसाहित्य को समझा जाता है तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।…
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मानवी काया का “नौलखा हार” सभी को उपलब्ध है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” की 9वीं कक्षा में समर्पित गुरुशिष्यों का स्वागत है। त्रय शताब्दी वर्ष में लिया गया संकल्प सुपर हाई स्पीड से आगे बढ़ता जा रहा है जिसके लिए साथी बधाई के पात्र हैं। आज के ज्ञानप्रसाद लेख में चर्चा की गयी है कि भगवान को…
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