वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • सतयुग की वापसी मनुष्य में देवत्व के अवतरण से ही संभव है 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 23 पुस्तकों के बारे में गुरुदेव कह चुके हैं कि यह हमारे जीवन भर के साहित्य का मक्खन है, हमारे विशाल साहित्य को न  पढ़ सको तो कोई बात नहीं लेकिन इन 23 पुस्तकों को बार-बार पढ़ना,100 बार पढ़ना, एक-एक शब्द पढ़ना। गुरुदेव ऐसा भी कह रहे हैं कि  गायत्री महाविज्ञान…

    Continue reading


  • समस्या अभावग्रस्तता की नहीं है, प्राप्त साधनों के सुनियोजन की है 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख में इस विषय पर चर्चा की गयी है कि समाज में दिख रही समस्याओं का आधार “साधनों का अभाव” है लेकिन ऐसा नहीं है। साधन-सम्पन्न अमीरों को देख कर दरिद्रों को भी उलटे-सीधे मार्ग अपनाकर अमीर होने की ललक लगती जा रही है। जब उलटे-सीधे मार्ग की बात हो रही है…

    Continue reading


  • सम्वेदना का सरोवर सूखने न दें

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का सन्देश, “जो उसकी सुनता है,गुरुदेव की सुनता है उसे अन्य किसी की भी सुनने का आवश्यकता नहीं पड़ती है।”  “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी”  में गुरुदेव जिस सतयुग की बात कर रहे हैं उसे हम सबने इक्क्ठे होकर,अपनी आँखों के ऊपर चढ़े हुए चश्मे को बदल…

    Continue reading

Latest posts