वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • क्या मंदिरों में प्रतिमाओं के स्थान पर विशालकाय दर्पण होने चाहिएं?

    पिछले लेख में दर्पण प्रक्रिया के बारे में चर्चा की गयी थी,आज का लेख उसी सिद्धांत की एक्सटेंशन है। वर्तमान लेख में इस एक्सटेंशन को ऐसे स्तर तक बढ़ा  दिया गया है कि मंदिर में प्रतिमा के स्थान पर एक विशालकाय दर्पण का सुझाव भी आन पड़ा है। लेख में इस उदाहरण का आनंद तो…

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  • अंतःकरण में झाँकने की दर्पण प्रक्रिया 

    आज के लेख में अंतकरण को समझने का प्रयास किया गया है। “अंतःकरण” शब्द न जाने हज़ारों बार सुन चुके हैं,पढ़ चुके हैं। आज मन में विचार उतरा कि शरीर का कौन सा भाग है जिसे अंतःकरण कहा जाए? दिल, दिमाग,फेफड़े आदि तो शरीर के भाग हैं ही,क्या इन्हीं की तरह अंतःकरण भी शरीर का…

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  • परिस्थितियां कभी भी, किसी के लिए भी अनुकूल नहीं थीं 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तक “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख इतना प्रैक्टिकल है कि लेख में वर्णित किए कंटेंट से लगभग सभी पाठक भलीभांति परिचित हैं। जीवन से जुड़े सभी तथ्य इतने सरल हैं कि इन्हें कोई भी बड़ी ही आसानी से समझ सकता है लेकिन प्रश्न तो यह उठता…

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