वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • सतयुग की वापसी के लिए भाव-सम्वेदना ही एकमात्र विकल्प है

    वर्तमान लेख श्रृंखला का 8वां समापन लेख बता रहा है कि  इक्कीसवीं सदी भाव-सम्वेदनाओं के उभरने-उभारने की अवधि है। हमें इस उपेक्षित क्षेत्र को ही हरा-भरा बनाने में निष्ठावान माली,ईश्वर की संतान की भूमिका निभानी चाहिए। यह विश्व उद्यान इसी आधार पर हरा-भरा,फला-फूला एवं सुषमा-सम्पन्न बन सकेगा। आश्चर्य नहीं कि वह स्वर्गलोक वाले नन्दन वन…

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  • दानव नहीं, देवता बनें, सतयुग स्वतः ही अवतरित हो जायेगा 

    Fortune knocks at your door at least once. भाग्य एक बार अवश्य ही हर मनुष्य का द्वार खटखटाता है, सफलता हर किसी के लिए उपलब्ध है उसका वरन करने के लिए उचित समय और अवसर का नाम ही संयोग है। एक बार यह संयोग क्लिक हो गया, आपने उस दिव्य शक्ति के लिए द्वार खोल…

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  • माँ प्रकृति अपने बच्चों का विनाश कदापि नहीं होने देगी

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का तीसरा  ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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