वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • समस्या अभावग्रस्तता की नहीं है, प्राप्त साधनों के सुनियोजन की है 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख में इस विषय पर चर्चा की गयी है कि समाज में दिख रही समस्याओं का आधार “साधनों का अभाव” है लेकिन ऐसा नहीं है। साधन-सम्पन्न अमीरों को देख कर दरिद्रों को भी उलटे-सीधे मार्ग अपनाकर अमीर होने की ललक लगती जा रही है। जब उलटे-सीधे मार्ग की बात हो रही है…

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  • सम्वेदना का सरोवर सूखने न दें

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का सन्देश, “जो उसकी सुनता है,गुरुदेव की सुनता है उसे अन्य किसी की भी सुनने का आवश्यकता नहीं पड़ती है।”  “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी”  में गुरुदेव जिस सतयुग की बात कर रहे हैं उसे हम सबने इक्क्ठे होकर,अपनी आँखों के ऊपर चढ़े हुए चश्मे को बदल…

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  • अदृश्य सत्ता के महान् कार्य में  श्रेय के अधिकारी बनें  

    युग परिवर्तन के आधार को यदि एक शब्द में व्यक्त करना हो तो इतना कहने भर से भी काम चल सकता है कि अगले दिनों “निष्ठुर स्वार्थपरता” को निरस्त करके उसके स्थान पर “उदार भाव-सम्वेदनाओं” को अन्त:करण की गहराई में प्रतिष्ठित करने की, उभारने की, खोद निकालने की आवश्यकता पड़ेगी। परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम…

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