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युग के मत्स्यावतार का क्या अर्थ है ? समापन लेख
आज “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” लघु पुस्तिका का समापन 12वें लेख के साथ हो रहा है, कितना सौभाग्य है कि वर्तमान लेख श्रृंखला में गुरुदेव द्वारा मथे गए मक्खन का अमृतपान हो रहा है। आज प्रस्तुत किये गए लेख के दो भाग हैं। पहले भाग में युग के मत्स्यावतार (भगवान विष्णु के पहले अवतार-मछली)…
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अब भगवान की पुकार पर ध्यान देने का अवसर है
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ तो नाम जप,ध्यान एवं प्राणयाम से हुआ है जिसे लगभग सभी पाठक जानते ही हैं। गुरुदेव बता रहे हैं कि यह सभी कर्मकांडों के पीछे मुख्य उद्देश्य आत्मविकास एवं उत्कर्ष है न कि सभी कर रहे हैं तो हम भी करते जाएँ,लकीर पीटते जाएँ। गुरुदेव बता रहे हैं कि …
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कर्मकाण्ड, प्रतीक पूजा की फिलॉसॉफी क्या है ?
परम पूज्य गुरुदेव ने कर्मकांडों को समझने,उनके पीछे छिपे तथ्यों को समझने के लिए बार -बार बल दिया है, संसार में अंधविश्वास का तो पहले ही बोलबाला है, यदि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से इस दिशा में कोई सार्थक परिणाम निकल पाते हैं, गुरूसाहित्य को समझा जाता है तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।…
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