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गुरुदेव की सिद्धियां,गुरुदेव के ही शब्दों में
आज के लेख के बारे में गुरुदेव लिखते हैं कि इस चर्चा को अप्रासंगिक, अनावश्यक और अहंकार स्तर का उल्लेख न समझा जाए क्योंकि कहने को तो बहुत कुछ है इसीलिए जीवन भर के लम्बे प्रसंग को ऐसे जिज्ञासु बच्चों के लिए छोड़ दिया है जो शरीर न रहने पर कुछ और खोजने-जानने के लिए…
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विज्ञान (शरीर) और अध्यात्म (प्राणचेतना) को मिलकर कार्य करना होगा
“परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका में “लेखक का निजी अनुभव” शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुए कंटेंट पर आज का ज्ञानप्रसाद लेख आधरित है। कहाँ मिलेगा ऐसा गुरु जिसने अपनी संतान के लिए,अपने शरीर को ही प्रयोगशाला बना लिया और जो भी रिजल्ट्स मिले उन्हें हम सबको (बिना किसी कोर्ट पेपर,कोर्ट फीस के) वसीयत के तौर…
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वर्तमान असमंजस की स्थिति का क्या समाधान है ?
हम सब जानते हैं कि आजकल ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 23 छोटी-छोटी पुस्तिकाओं को आधार बना कर ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं। परिवारजनों द्वारा लिए गए संकल्प के अंतर्गत पहली 5 पुस्तिकाओं के समापन के बाद कुछ दिन पहले ही छठी पुस्तक “परिवर्तन के महान क्षण”…
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