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शालीनता बिना मोल मिलती है,लेकिन उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है
आज का ज्ञानप्रसाद लेख ऐसे मानवीय मूल्यों की चर्चा कर रहा है जिनका पालन करके आज के युग की अनेकों समस्याओं का निवारण हो सकता है। समाज में मची त्राहि-त्राहि का एक कारण मानवीय मूल्यों का ह्रास ही है। जब ऐसा होता है तो मानवता का लुप्त होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में युगनिर्माण और…
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नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधरित लेख श्रृंखला के आज के ज्ञानप्रसाद लेख में गुरुदेव पूर्ण विश्वास से समझा रहे हैं कि नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा। कोई भी नया प्रोडक्ट बनाने के लिए फैक्ट्री लगानी पड़ती है, मशीनें इंसटाल करनी होती हैं,और न जाने कौन-कौन सी प्रक्रियाएं करने के बाद ही फिनिश्ड…
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क्या दुर्गति से भरी दुर्दशा ही मानव जीवन की नियति है?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” 23 छोटी-छोटी पुस्तिकाओं का एक ऐसा संग्रह है जिसे परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा जी ने अपने जीवन भर के साहित्य का मक्खन कहा है। इन 23 पुस्तकों को मात्र 23 दिनों में पढ़ा जा सकता है लेकिन ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से पिछले तीन माह से इस संग्रह…
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