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अदृश्य सत्ता के महान् कार्य में श्रेय के अधिकारी बनें
युग परिवर्तन के आधार को यदि एक शब्द में व्यक्त करना हो तो इतना कहने भर से भी काम चल सकता है कि अगले दिनों “निष्ठुर स्वार्थपरता” को निरस्त करके उसके स्थान पर “उदार भाव-सम्वेदनाओं” को अन्त:करण की गहराई में प्रतिष्ठित करने की, उभारने की, खोद निकालने की आवश्यकता पड़ेगी। परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम…
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इतनी प्रगति के बावजूद लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?
कल वाले अति विस्तृत लेख में गुरुदेव बता रहे थे कि सतयुग कोई बाहरी समय या स्थान नहीं है, यह मनुष्य की आंतरिक स्थिति है। गुरुदेव इतनी प्रगति को देखते हुए, चिंतित होते हुए पूछ रहे हैं कि इतना सब कुछ होने के बावजूद “लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?” ऐसी स्थिति से…
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अवश्य ही सतयुग की वापसी हो रही है !!!
आज के लेख का मुख्य सन्देश : “20वीं सदी ने हमें ‘दिमाग’ (Intelligence quotient-IQ ) दिया, लेकिन 21वीं सदी हमसे ‘दिल’ (Emotional quotient-EQ) की मांग रही है। मशीनें तब तक इंसान की जगह नहीं ले सकतीं, जब तक इंसान खुद मशीन की तरह सोचना बंद न कर दे।” ********************* परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा…
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