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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 8वां लेख-गायत्री मंत्र के पहले चार शब्दों (ॐ,भूः,भुवः, स्वः) की अति सरल व्याख्या।
“यज्ञ पिता-गायत्री माता”, गुरुदेव द्वारा पंडित लीलापत शर्मा जी के जिज्ञासा भरे प्रश्नों के उत्तरों का समावेश है। हमारा सौभाग्य है कि आदरणीय संध्या बहिन जी की पहल से इस पुस्तक के एक-एक शब्द को समझने की प्रेरणा मिली, बहिन जी का धन्यवाद् करते हैं। आज के ज्ञानप्रसाद लेख में गायत्री मंत्र के प्रथम चार…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 7वां लेख-गायत्री उपासना से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है लेकिन शर्त केवल एक ही है !!
हमारी आदरणीय बहिन संध्या कुमार जी ने “यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक का स्वाध्याय किया,100 पृष्ठों के ज्ञान को कुछ ही पन्नों में Summarize किया, इस Summarized कंटेंट पर चार ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये गए लेकिन पुस्तक के 27 चैप्टर बार-बार कह रहे थे कि यह अति उत्कृष्ट ज्ञान है, इसे पूरे विस्तार से समझना चाहिए।…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का 6वां लेख-गायत्री मंत्र के ज्ञान पक्ष की अति सरल व्याख्या,दूसरा एवं समापन भाग
वर्तमान लेख श्रृंखला में गायत्री मंत्र के वैज्ञानिक एवं ज्ञान पक्ष को समझने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि यदि किसी ज्ञान का समझ कर अभ्यास किया जाए तो परिणाम अनेकों गुना होता है। गायत्री साधना के वैज्ञानिक पक्ष पर की गयी चर्चा पाठकों को इतनी पसंद आई कि इन पंक्तियों के लिखने समय…
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