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क्या इस संसार में सबको सब कुछ मिल जाता है?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है, स्वाध्याय द्वारा इसी मक्खन को समझकर, चिंतन करके, अन्य स्रोतों से ज्ञान शामिल करके,सरल करके वर्तमान ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं, हमारे साथी इन लेखों को पढ़कर, कमेंट और काउंटर कमेंट से हमारा उत्साहवर्धन कर रहे हैं जिसके लिए हम सभी का…
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क्या भगवान की रचना मनुष्य ने की है ?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित लेख श्रृंखला के अगले लेख को लिखने के लिए जब स्वाध्याय करना शुरू किया तो एक पॉइंट ऐसा आया जिसने हमारी आज की दिशाधारा ही बदल डाली। यह पॉइंट था, “ईश्वर को मनुष्य ने ही बनाया है।” हालाँकि इस पॉइंट में कोई विशेष बात नहीं लगती लेकिन हमारा माथा तो…
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ईश्वर के अनुदानों की प्लानिंग करना मनुष्य की ही ज़िम्मेदारी है
23 पुस्तकों के दिव्य संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य” की चौथी पुस्तक “युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज का ज्ञानप्रसाद लेख बता रहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदान की गयी प्रतिभा का नियोजन करना मनुष्य की अपनी ही ज़िम्मेदारी है। इस मंच से आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार,आत्मकल्याण और आत्मविकास जैसे शब्दों की बार-बार चर्चा की…
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