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उलटे हुए को उल्ट कर सीधा करना पूर्णतः संभव है
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…
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युगपरिवर्तन का क्या अर्थ है ?
कल प्रस्तुत हुए ज्ञानप्रसाद लेख के अमृतपान के बाद कुछ कमेंट इतने विस्तृत थे कि लेखकों के प्रति हम नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सकते। हमारी सबकी प्रिय बेटी संजना,समर्पित साथी चंद्रेश जी,नीरा जी,कोकिला जी, सुमनलता जी,रेणु श्रीवास्तव जी,संध्या जी,सुजाता जी और विदुषी जी ने इतने विस्तृत और ज्ञानवर्धक कमेंट किये कि हम किसी को…
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क्या हमें जीवन की कोई दिशा नहीं मिल रही ?
शांतिकुंज के गेट नंबर 1 पर बड़े-बड़े शब्दों में अंकित किया हुआ है “इक्क्सवीं शताब्दी उज्जवल भविष्य की गंगोत्री”, इसे देख कर कोई भी पूछ सकता है कि क्या युग परिवर्तन हो गया है? हम किस उज्जवल भविष्य की गंगोत्री की बात कर रहे हैं ? कल प्रकाशित किये गए लेख में “किंकर्तव्यविमूढ़ता” को समझने…
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