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ईश्वर के अनुदानों की प्लानिंग करना मनुष्य की ही ज़िम्मेदारी है
23 पुस्तकों के दिव्य संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य” की चौथी पुस्तक “युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज का ज्ञानप्रसाद लेख बता रहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदान की गयी प्रतिभा का नियोजन करना मनुष्य की अपनी ही ज़िम्मेदारी है। इस मंच से आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार,आत्मकल्याण और आत्मविकास जैसे शब्दों की बार-बार चर्चा की…
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मनुष्य की 93% प्रतिभा प्रसुप्त ही पड़ी रहती है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है। आज इसी मक्खन की चौथी पुस्तक “ युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधरित लेख श्रृंखला का चौथा लेख मनुष्य की उस 93% शक्ति के बारे में जानकारी दे रहा है जो सोई पड़ी रहती है। एक कहावत है कि ‘‘ईश्वर…
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प्रतिभा संवर्धन(Talent development) के लिए भारत के पास कौनसी जादू की छड़ी है ?
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ हमारी मातृभूमि “भारत” के लिए प्रयोग किये गए अनेकों विशेषणों से हो रहा है। जगतगुरु,विश्वगुरु,चक्रवर्ती,सोने की चिड़िया, स्वर्गादपि गरीयसी जैसे विशेषणों से हमारे (कैनेडियन होने के भावजूद) समेत प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। लेख का अमृतपान करने से, इन विशेषणों की सार्थकता होना सुनिश्चित है। इन्हीं विशेषणों ने …
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