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प्रतिभावान उदीयमान सूर्य होते हैं
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 8वीं पुस्तक के दूसरे लेख में चर्चा की गयी है कि प्रतिभावान उदीयमान सूर्य होते हैं जिसके दर्शन होते ही सर्वत्र चेतना का एक नया माहौल उमड़ पड़ता है। आज के ज्ञानप्रसाद लेख के अमृतपान के लिए सभी गुरु शिष्यों को सादर आमंत्रण है,आइए इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाएं एवं…
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पात्रता विकसित करना एक निजी पुरुषार्थ है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 8वीं पुस्तिका का शीर्षक “महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण” है। इस दिव्य पुस्तकमाला की अन्य 23 पुस्तकों की तरह यह लघु पुस्तिका भी केवल 35 पन्नों और 9000 से भी कम शब्दों में जिस ज्ञान को अपने गर्भ में संजोए हुए हैं उसे गुरुदेव ने अपने जीवन भर के साहित्य का…
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