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मनुष्य को दैवी अनुदान/वरदान कैसे प्राप्त होते हैं
23 छोटी-छोटी पुस्तकों की “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज के ज्ञानप्रसाद के अमृतपान के लिए आपको सादर आमंत्रण है। आज के लेख में मार्गदर्शन मिल रहा है कि अनेकों सम्पदाओं से लैस मनुष्य अपनेआप को भवसागर में धँसाता ही क्यों जाता है, क्यों नहीं…
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ईश्वर का राजकुमार इतना भटका हुआ क्यों है?
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से मनुष्य को अनेकों बार ईश्वर का राजकुमार, वरद पुत्र अर्थात वरदान लेकर जन्मा पुत्र, असीमित प्रतिभाओं और सम्पदाओं से लैस ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना जैसे विशेषण प्रयोग करके गौरवान्वित किया जाता रहा है लेकिन इतनी समृद्धि होने के बावजूद भी अपने आस पास जिसे भी देखो दुःखी, भटका…
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गुरुदेव की उलटे को उल्ट कर सीधा करने की प्रक्रिया
मनुष्य ने अपनी संकल्पशक्ति एवं ईश्वर की अनंत कृपा से अग्नि के आविष्कार से अपनी जीवन यात्रा का शुभारम्भ किया,आज वोह आकाश को छूने की क्षमता रखता है। जब कोई संतान अति शक्तिशाली हो जाती है,पिता के विचारों का विरोध करना उसकी आदत बन जाती है। स्थिति इस हद तक पंहुच जाती है कि…
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