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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का दूसरा लेख- “त्रिपदा गायत्री” को समझने का अति सरल प्रयास
आज के ज्ञानप्रसाद लेख में यथासंभव प्रयास करके “बहुचर्चित त्रिपदा गायत्री” के अर्थ को समझने का प्रयास किया गया है। यह एक ऐसा फ़िलॉसफिकल लेख है जिसे समझने के लिए कई प्रकार के ज्ञान की आवश्यकता है। लेख को समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है। परम पूज्य गुरुदेव एवं पंडित लीलापत…
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ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का “अपने साथिओं से अपनी बात” का 30 मई 2026 का विशेष सेगमेंट– हमारे जीवन के अंतरंग पहलू
जब भी हम माह के अंतिम शनिवार को “अपने साथिओं से अपनी बात” के इस विशेष सेगमेंट को लिखने बैठते हैं तो जो हमने सोचा होता है अधिकतर बदल ही जाता है। पूरा माह हम जब-जब,जैसे-जैसे जो-जो विचार आते जाते हैं उन्हें अपनी फाइल में बनाए स्पेशल पृष्ठ पर लिखते रहते हैं। यह विचार कहीं…
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परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित एक दिव्य लेख श्रृंखला का प्रथम लेख- सद्बुद्धि की देवी गायत्री को माँ क्यों कहा जाता है
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के साथिओं ने आज के लेख का शीर्षक नोटिस कर लिया होगा, जो पिछले चार लेखों से अलग है। इस बदलाव के कारण जहाँ हम आदरणीय संध्या बहिन जी से क्षमाप्रार्थी हैं वहीँ उनका ह्रदय से आभार भी व्यक्त करते हैं कि “यज्ञ पिता-गायत्री माता” पुस्तक से परिचय हो पाया। इस…
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