वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • अंतःकरण में झाँकने की दर्पण प्रक्रिया 

    आज के लेख में अंतकरण को समझने का प्रयास किया गया है। “अंतःकरण” शब्द न जाने हज़ारों बार सुन चुके हैं,पढ़ चुके हैं। आज मन में विचार उतरा कि शरीर का कौन सा भाग है जिसे अंतःकरण कहा जाए? दिल, दिमाग,फेफड़े आदि तो शरीर के भाग हैं ही,क्या इन्हीं की तरह अंतःकरण भी शरीर का…

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  • परिस्थितियां कभी भी, किसी के लिए भी अनुकूल नहीं थीं 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तक “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख इतना प्रैक्टिकल है कि लेख में वर्णित किए कंटेंट से लगभग सभी पाठक भलीभांति परिचित हैं। जीवन से जुड़े सभी तथ्य इतने सरल हैं कि इन्हें कोई भी बड़ी ही आसानी से समझ सकता है लेकिन प्रश्न तो यह उठता…

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  • दिवास्वप्न (Daydreaming) के मायाजाल से बाहिर निकलें 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार की सर्वप्रिय बिटिया, देव संस्कृति विश्वविद्यालय में MA साइकोलॉजी की विद्यार्थी,संजना के सुझाव पर आरम्भ किये गए एक विशाल प्रोजेक्ट के अंतर्गत “क्रांतिधर्मी साहित्य” की 23 पुस्तकों के क्रमवार अध्ययन में 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का शुभारम्भ करते जिस प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है उसे शब्दों में…

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