माह के अंतिम शनिवार को प्रस्तुत होने वाले सेगमेंट का शुभारम्भ अधिकतर आद सुमनलता बहिन जी के सुझाव और साथिओं के समर्थन के धन्यवाद् से करते हैं लेकिन आज शब्दसीमा के बेड़ियाँ अपना प्रतिबंध लगाए खड़ी हैं।
हर बार की भांति, जब भी कोई बात याद आई लिख डाली। इस बार के सेगमेंट को लिखने के लिए भी हमने लगभग 3000 शब्दों का कंटेंट संगृहीत कर लिया था लेकिन व्हाट्सअप में आयी समस्या के कारण, सोमवार सारी रात न सोने के कारण, स्ट्रेस और डिप्रेशन से ग्रसित उस कंटेंट को अगले महीने के अंतिम शनिवार के लिए पोस्टपोन करना उचित समझा।
उसी स्थिति के निवारण के लिए आज कुछ सुझाव पोस्ट किये हैं,साथिओं से सुझावों के पालन की याचना करते हैं लेकिन हमारे सहकर्मी रिजेक्ट करने में भी पूरी तरह स्वतंत्र हैं
अक्सर कहा जाता है: Everything happens for a reason, परिस्थितियां बहुत कुछ सिखा जाती हैं, बहुत सारे संकेत दे जाती हैं ।
उपरोक्त शब्द किसी ऐसे संदेश एवं संकेत के लिए इशारा कर रहे हैं जिनके लिए हमारा सतर्क रहना बहुत ही आवश्यक है, कहीं ऐसा न हो कि हम Point of “No return” की स्थिति में पहुंच जाएं।
हमारे मात्र “कुछ एक समर्पित, नियमित साथी” सोच रहे होंगे कि आज अरुण नामक प्राणी कोई नया “रोना” रो रहा होगा। कॉमेंट्स/काउंटर कॉमेंट्स की चिंता, ज्ञानप्रसाद पढ़ाने की चिंता तो अनेकों बार व्यक्त हो चुकी है।
वही “कुछ एक समर्पित ,नियमित साथी” जो हमें अपने प्राणों से भी प्रिय हैं, हमारे साथ शुरू से ही जुड़े हैं, हमारे साथ पूरा तालमेल बनाये रखते हैं, एक-एक पल की सूचना से अपडेट करते रहते हैं, उनके चरणों में नमन करते हैं, उनके हर प्रयास की सराहना करते हैं। कुछ दिन पहले सहयोग की याचना की थी, याचना का अर्थ भीख होता है, Begging होता है, किसके लिए भीख? किसके लिए याचना? केवल और केवल अपने गुरु के लिए; यदि हम अपनी ही लिखी हुई Tagline “हम अंतिम श्वास तक परम पूज्य गुरुदेव को समर्पित होने का संकल्प लिए हैं।” का पालन नहीं कर सकते तो धिक्कार है ऐसे संकल्प का, ऐसी Tagline का। हमें कोई चिंता नहीं, चाहे इसी पल का श्वास ही अंतिम क्यों न हो। अरुण वर्मा जी जैसे साथी हर कमेंट में हमारे स्वास्थ्य और ख़ुशी की कामना करते हैं। ऐसे साथिओं को नमन किये बिना हम कैसे रह सकते हैं। लेकिन अरुण जी को क्या मालूम कि पाँच Surgeries, 12 गोलियां रोज़ाना, दो इंजेक्शन प्रति सप्ताह लेने वाला यह प्राणी किस शक्ति से गुरु का कार्य कर रहा है। गुरु की जन्म घुंटी सारा दिन क्या, सारी रात भी ऐसे दौड़ाती रहती है जैसे कोई 15-16 वर्ष का युवक हो, 24 घंटे में जब भी मन करता है कुछ Milliseconds की Power nap वह शक्ति दे जाती है जिसे बताने के लिए गूंगे का गुड़ वाला उदाहरण बिलकुल सटीक है- ऐसे शक्ति स्रोत को दंडवत प्रणाम है।
गुरु को समर्पित होकर जो कुछ हमें मिला है, उसे वर्णन करना शुरू कर दें तो शायद पाठक यहीं पर छोड़ कर भाग जाएँ क्योंकि किसी को विश्वास ही नहीं होगा।
आज तो AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता ) का युग है, इस युग में तो आर्टिफीसियल वीडियोस पर विश्वास किया जाता है, शर्म आनी चाहिए उन लोगों को जो गुरुदेव माताजी को AI के माध्यम से शक्लें बदल कर शेयर कर रहे हैं।
गुरु का कार्य करते हुए हमें कोई वाहवाही, कोई विज्ञापनबाजी नहीं चाहिए, केवल समर्पण ही एकमात्र हमारी भिक्षा है।
आइए असल पॉइंट पर आएं और देखें कि हम इस मंच को, अपने So-called परिवार को शक्तिशाली बनाने का क्या प्रयास कर रहे हैं।समय के साथ बदलाव करना/होना सृष्टि का नियम है।
“व्हाट्सप्प का प्रतिबंध” हमें बहुत कुछ सिखा गया ।
15 अप्रैल 2026 को “व्हाट्सप्प के प्रतिबंध” के कारण साथिओं को व्हाट्सप्प पर ज्ञानप्रसाद, दिव्य सन्देश, शार्ट वीडियो आदि मिलना बंद हो गया। शाम को पांच बजे उस दिन के ज्ञानप्रसाद को पोस्ट करते ही, व्हाट्सअप से यह सन्देश फ़्लैश हुआ। साथिओं को असुविधा न हो,इसे देखते हुए कुछ ही मिनटों में यूट्यूब पर अपडेट शेयर कर दिया लेकिन अधिकतर साथिओं (अपने मुट्ठीभर समर्पित साथिओं को छोड़ कर) ने न तो इस अपडेट को पढ़ा, न इसमें दिए गए विकल्पों के लिए प्रयास किया, यदि प्रयास किया भी तो अधमने मन से किया। परिणाम यह निकल कर आया कि ऐसे साथी आज सात दिन के बाद भी यही रट लगाए जा रहे हैं कि हमें ज्ञानप्रसाद का अमृतपान नहीं हो रहा, मन बहुत विचलित है। लगातार सात दिन तक दिन रात वाहट्सएप्प पर मैसेज आते रहे, हम पहले दिन पोस्ट हुए अपडेट को, पूरे विकल्पों के साथ बार-बार रात/दिन (जी हाँ रात दिन) रिप्लाई करते रहे लेकिन कई ऐसे थे जिनके सिर पर जूँ तक न रिंगी।
परिणाम यह हुआ कि एक बार सारी रात न सोने करके,स्ट्रेस और डिप्रेशन ने ऐसी स्थिति बना दी कि नीरा जी के साथ अपनी स्थिति डिसकस करने का अन्य कोई विकल्प नहीं था। जीवन साथी जो ठहरीं। उनकी आँख खुलते ही जब चर्चा की तो उनका एकदम रिप्लाई था कि यदि हर कोई इतना lightly ले रहा है, कोई कुछ सुन ही नहीं रहा है तो आप भी उनकी तरह दुनियादारी करते चलिए, आपको क्या मिल जायेगा? हमें केवल आपकी सुख शांति चाहिए। नीरा जी व्हाट्सअप के उन साथिओं की बात कर रही थीं जिन्हें “ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार” का यूट्यूब एड्रेस तक मालूम नहीं है, उन्हें तो व्हाट्सप्प पर लेख का लिंक मिल जाता था, उसे क्लिक कर लेते थे, उन्हें क्या ज़रुरत है एड्रेस सेव करके रखने की। नीरा जी कह रही थीं की आपने अपने पैर पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली है, आपने क्यों नहीं कहा कि हमारे चैनल को Subscribe करो, अगर किया होता तो जब भी कोई लेख पोस्ट होता तो उन्हें नोटिफिकेशन आ जाती। हमें तो सुमनलता बहिन जी की बात रह रह कर याद आ रही थी कि प्यासा कुँए के पास खुद ही आ जायेगा। बहिन जी एवं अन्य साथिओं द्वारा प्रदान किये गए 50 से भी अधिक अलंकार हमें और भी छोटा बना गए। स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी की बात याद आ गयी कि रेलमंत्री के पद से उन्होंने क्यों त्यागपत्र दिया था। कैसे अलंकार? कैसे विशेषण? हमारी स्थिति के पीछे हमारी अयोग्यता के सिवाय और कोई कारण हो ही नहीं सकता। खैर जो भी होगा हम अपनेआप को सुधारने का प्रयास करेंगें, उन्हीं प्रयासों की लिस्ट आगे दे रहे हैं।
जो लोग हमें बार-बार पूछ रहे थे उनमें से अधिकतर ऐसे थे जिन्हें ज्ञानप्रसाद, दिव्य सन्देश आदि से कोई मतलब नहीं था, उन्हें सिर्फ यह दिखाना था कि हम बहुत समर्पित हैं। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि हर बार जब हमने ज्ञानप्रसाद/दिव्य सन्देश यदि 10:20:10 बजे पोस्ट किया तो उसी समय (1 सेकंड से भी पहले) 10:20:10/10:20:11 बजे ही अंगूठे लग कर आ जाते थे, यूट्यूब पर कभी कमेंट नहीं किया, कभी कोई काउंटर कमेंट नहीं किया। ऐसे साथिओं ने व्हाट्सअप का माध्यम केवल अपनी पारिवारिक, घरेलू रोने-धोने के लिए रखा था। जब हम घण्टों इनके दुखड़े सुनते रहते थे तो नीरा जी हमें बार-बार टोकते रहती थीं, एक भाई साहिब तो पिछले पांच वर्ष से जब भी फ़ोन करते हैं, अपने मरने की ही बात करते हैं लेकिन आज तक पूरी तरह हट्टे-कट्टे हैं। यह है साक्षात् ड्रामे बाज़ी।
नीरा जी के प्रश्न के उत्तर में हम यही कहते थे कि भगवान् ने हमें इतना भावनाशील क्यों बनाया है? किसी अनजान का दुःख भी हमें इतना व्यथित क्यों कर जाता है ? खैर यह हमारी प्रवृति है, जिसे हम आज तक बदल नहीं पाए हैं तो अब अंतिम समय में क्या बदल पायेंगें।
दूसरी केटेगरी के वोह लोग हैं जिनके लिए सोशल मीडिया केवल शेयर करने का माध्यम है। बिना देखे, बिना पढ़े, बिना सोचे समझे शेयर किये जा रहे हैं। हमें शान से बताते भी हैं कि हम आपके लेख 10 ग्रूपों में शेयर करते हैं, हम अनेकों बार पूछ चुके हैं कि कभी 10 ग्रूपों के हज़ारों लोग पढ़ते भी हैं? यदि पढ़ते होते तो यूट्यूब पर कमेंट करते, काउंटर कमेंट करते, ऐसे एक भी सदस्य का, कोई भी कमेंट, कभी नहीं देखा है, शेयर करने वाले भाई साहिब खुद ही नहीं पढ़ते तो औरों को क्या पढायेंगें।
हमें फिर यही कहना पड़ रहा है कि हमारी लेखनी में ही कोई कसर है, गुरु का ज्ञान तो इतना शक्तिशाली है कि मुर्दे में भी प्राण डाल दे। शास्त्री जी की तरह साथिओं द्वारा दिए गए सभी अलंकार वापिस कर देने चाहिए।
जिन साथिओं की हम चुगली कर रहे हैं (जी हाँ चुगली ही है) उनके लिए ज्ञानरथ परिवार का व्हाट्सप्प ग्रुप केवल One way traffic ही है, अपनी समस्या पड़ेगी तो रात के तीन बजे भी फ़ोन कर लेंगें लेकिन कभी भी Call/message का रिप्लाई नहीं करेंगें चाहे जितनी भी महत्वपूर्ण बात क्यों न पूछी हो, क्या यही शिष्टाचार है, यही आदर सम्मान है? मानवीय मूल्यों का हनन होता हमसे सहन नहीं होगा। विश्व में मानवता वैसे ही विनाश की कगार पर है, हम क्यों उस विनाश का हिस्सा बनें।
बीमारी के निवारण के लिए दवा लेनी पड़ती है, बार-बार दवा बताई गयी है लेकिन बताने से क्या होगा, लेनी तो मरीज़ को ही होगी। वर्तमान परिस्थिति के निवारण के लिए हमारे मस्तिष्क में निम्नलिखित सुझाव उभरे हैं, यदि साथिओं को ठीक लगें तो आज से ही पालन करना शुरू कर दें, जिन्हें ठीक नहीं लगें उन्हें नकारने की पूर्ण स्वतंत्रता है :
1.हम सबने ज्ञानप्रसाद को अमृत (मृत का उल्ट अमृत,जो मरे हुए को भी ज़िंदा कर दे) की परिभाषा दी है। यदि किसी को भी दिनचर्या के लिए ऊर्जावान होने की आवश्यकता है तो ज्ञानप्रसाद की प्राणशक्ति का सबसे उत्तम एवं सरल सोर्स यूट्यूब ही रहेगा।
2. मई के शुरू में ग्रुप मैसेज का प्रतिबंध तो हट जाने की सम्भावना है लेकिन ज्ञानप्रसाद/दिव्य सन्देश/शार्ट वीडियो आदि कोई भी चीज़ कुछ समय के लिए व्हाट्सप्प पर नहीं भेजी जाएगी।
3. ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में शब्द “परिवार” बिलकुल उसी भावना को लिए रहेगा, लेकिन जन्मदिन, मैरिज एनिवर्सरी जैसे सन्देश यूट्यूब पर ही पोस्ट करने का निवेदन है। जिस साथी के साथ यह अवसर सम्बंधित होंगें, यूट्यूब पर पोस्ट करने की उसी की ज़िम्मेदारी होगी। ऐसा करने से यह तो पता चल ही जायेगा कि किसने इस शुभ अवसर समाचार को पढ़ा और काउंटर कमेंट किया।
4. व्हाट्सअप पर केवल गुरुदेव से सम्बंधित साहित्य ही शेयर करने का पालन करने का निवेदन है। कोई भी सन्देश भेज देना,और वोह भी बिना किसी इज़ाज़त के; समय और श्रम का ऐसा नाश करता है कि क्या कहा जाए। यही वह लोग हैं जो समय न होने की दुहाई देते रहते हैं।
हमारा तो दिन ही गुरुदेव की उस वीडियो के साथ होता है जिसमें गुरुदेव कह रहे हैं: “अपने समय का कुछ अंश हमें दीजिए, अपने श्रम का कुछ अंश हमें दीजिये।”
5. सारे अपडेट (फ़ोन का रिचार्ज खत्म है, बारिश के कारण बिजली नहीं है आदि) यूट्यूब पर स्वयं ही पोस्ट हों तो अच्छा रहेगा।
अपने साथिओं से इन सुझावों की याचना इस दृष्टि से की गयी है कि हमें कुछ स्वाध्याय के लिए फ्री माइंड से, फ्री टाइम मिल सके।
जय गुरुदेव