वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

Month: July 2026


  • मथुरा से विदाई के समय परम पूज्य गुरुदेव के मार्मिक भाव  

    अखंड ज्योति मई 1971 में प्रकाशित “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ इतना विस्तृत और मार्मिक है कि किसी की भी आँखों में आंसू ला सकता है।पाठक स्वयं अनुभव कर सकते हैं कि इतना भावुक,इतना प्रेम करने वाला गुरु,मार्गदर्शक कहाँ मिल पायेगा। आज का ज्ञानप्रसाद लेख अपने बच्चों के प्रति स्नेह एवं अपने गुरु के प्रति…

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  • कौन है आत्मदेवता,एवं उसकी आराधना कैसे की जाए?

    अखंड ज्योति मई 1971 के “अपनों से अपनी बात” स्तम्भ में परम पूज्य गुरुदेव ने आधुनिक युग के मानव की प्रवृति को समझते हुए कहा कि प्राचीनकाल की शारीरिक, मानसिक,भौतिक एवं तात्त्विक परिस्थितियाँ अब बदल चुकी हैं। साधना तपश्चर्या का जो क्रम भूतकाल में अपनाया जाता रहा है, वह आज की परिस्थितियों से मेल नहीं…

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  • परम पूज्य गुरुदेव की 1971 हिमालय यात्रा का उद्देश्य 

    आज 29 जुलाई 2026,बुधवार का वोह पावन दिन है जिसे हम सब गुरुपूर्णिमा, व्यासपूर्णिमा कह कर मना रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा साथी होगा जिसे इस दिन के महत्व का ज्ञान न होगा, लेकिन हमारे लिए यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब परम पूज्य गुरुदेव स्वयं आकर अखंड ज्योति मई 1971…

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  • परिवर्तन प्रक्रिया का सार-संक्षेप 

    उन्नीसवीं शताब्दी(1801-1900) से आरम्भ होकर बीसवीं(1901-2000) सदी के अन्तिम चरण तक, 200 वर्षों में  कालचक्र अत्यन्त तीव्रगति से घूमा है। जितना भला-बुरा पिछले हजारों वर्षों में नहीं बन पड़ा, वह इस 200 वर्ष की अवधि में हो चला है।  इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित है: —प्रगति के नाम पर असाधारण महत्त्व के आविष्कार, बुद्धि तीक्ष्णता के…

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  • ‘‘इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य’’ का उद्घोष मात्र नारा नहीं है

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की दूसरी पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का 9वां लेख प्रस्तुत है। परम पूज्य गुरुदेव ने युगसंधि के 12 वर्षों (1989-2000) की बात बार-बार की है,अनेकों पुस्तकों, अखंड ज्योति लेखों में गुरुदेव में विश्व भर में घटित आश्चर्यजनक परिवर्तनों के रिफरेन्स दिए हैं लेकिन हम तो ठहरे तर्कशील,शंकाग्रस्त; ऐसे कैसे बिना किसी…

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  • सूर्य विज्ञान और गायत्री मंत्र के महत्वपूर्ण तथ्य  

    परम पूज्य गुरुदेव ने हम सबके लिए “क्रंतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की रचना करते समय अवश्य सोचा होगा कि आने वाले दिनों में मेरे बच्चे बहुत व्यस्त हो जायेंगें,उनके पास मेरे द्वारा रचा गया विशाल साहित्य पढ़ने और समझने का कहाँ समय होगा !!!  ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से वर्ष 2026 के संकल्प का…

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  • भूलोक, स्वर्गलोक से भी बढ़कर कैसे है? 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख को समझने के लिए संक्षिप्त सी भूमिका देने की आवश्यकता पड़ रही है।  “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2” पर आधरित वर्तमान लेख श्रृंखला के सातवें चैप्टर का शीर्षक “अगली शताब्दी का अधिष्ठाता-सूर्य” जितना आकर्षक है उतना ही जिज्ञासापूर्ण भी है। बार-बार पूरे चैप्टर को पढ़ने के बाद भी हम…

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  • इक्क्सवीं सदी का धर्म “समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी” का चार चरण वाला युगधर्म ही होगा। 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शीर्षक देखकर कर प्रश्न कर सकता है कि ऐसा कौन सा व्यक्ति है जिसे “समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी” जैसे शब्दों का ज्ञान नहीं है। इन शब्दों का किताबी ज्ञान तो अनेकों को होगा, प्रचार भी खूब हो रहा है, लेकिन यदि सब कुछ समझ में आ रहा है तो…

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  • चौथी शक्ति का अभिनव उद्भव अर्थात नया जन्म

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख एक ऐसी शक्ति का वर्णन कर रहा है जिसे “नवयुग की अधिष्ठात्री” कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। तो आइए गुरुचरणों में समर्पित हो,आज के ज्ञानरूपी अमृत का पयपान करें और जीवन को सफल बनायें।   लगभग सभी को निम्नलिखित तीन शक्तियाें की प्रभुता और महत्ता सर्वविदित है: (1) बुद्धिबल, जिसमें…

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  • अनिश्चतता ही आज के युग की  सबसे बड़ी समस्या है

    आज का लेख तथ्यों के साथ,ऐतिहासिक प्रमाण दे रहा है कि विनाश और सृजन की प्रक्रिया पौराणिक काल से चली आ रही है। यदि ज्ञानप्रसाद लेख जनसाधारण की मनस्थिति को ठीक राह में चलाने में सफल हो पाएं तो बहुत बड़ी उपलब्धि समझी जानी चाहिए, Misguide करने में,अन्धविश्वास फैलाने में,अंधी गुरुभक्ति का प्रचार करने में…

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  • निराशावादिओं (Pessimists) के लिए गुरुदेव का मार्गदर्शन 

    आज के समय में अधिकतर मनुष्य नकारात्मकता एवं निराशा की बीमारी से ग्रस्त हैं,सभी एक ही धारणा लिए बैठे हैं कि कुछ नहीं हो सकता,सब कुछ ही उल्टा-पुलटा हो चुका है। ऐसी स्थिति में हम किस उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं? क्या गुरुदेव अकेले ही सब कुछ कर लेंगें? अपने अंग-अवयवों को श्रेय…

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  • विनाश के लिए दुर्बुद्धि को ही ज़िम्मेदार क्यों न ठहराएं ?

    सद्बुद्धि की देवी, माँ गायत्री की उपासना साधक को सन्मार्ग की ओर चलने को प्रेरित करती है, यह एक शाश्वत सत्य है। आज का ज्ञानप्रसाद इतना प्रैक्टिकल है कि इसे समझने में ज़रा भी कठिनाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह तो घर-घर की कहानी है,मनुष्य-मनुष्य की कहानी है।  ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर…

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  • क्या हम विनाश की ओर बढ़ रहे हैं ?

    क्रांतिधर्मी साहित्य की 23 रचनाओं की पुस्तकमाला की दूसरी दिव्य पुस्तक इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य भाग 2 का प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है।  आज के लेख को Compile करते हुए जिन अलग-अलग स्रोतों की सहायता ली गयी है उन्हें भी संक्षेप में यथास्थान शामिल किया गया है।  आइए ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल…

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  • Wrap up, “अपने अंग अवयवों से”, एवं आगे की रणनीति 

    “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य-भाग 1” पुस्तक के 60 पन्नें, लगभग 16000 शब्द,24 चैप्टर्स में समाहित ज्ञान को समझने के लिए गुरुदेव ने न केवल ऊँगली पकड़ कर पग-पग पर मार्गदर्शन प्रदान  किया बल्कि जहाँ-वहां बिखरे अनेकों अमूल्य रत्न भी हमारी झोली में डाल दिए। सभी संगृहीत ज्ञानपुष्पों को यथासंभव, अपनी बुद्धि एवं योग्यता के…

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  • शांतिकुंज की कार्यप्रणाली Tried,tested and certified है

    “इक्क्सवीं सदी बनाम उज्जवल भविष्य-भाग 1” पर आधारित वर्तमान लेख श्रृंखला का आज समापन लेख प्रस्तुत किया गया है। लेख छोटा अवश्य है,लेख के कंटेंट से कहीं अधिक जानकरी अनेकों को होगी क्योंकि यह जानकारी 36 वर्ष पूर्व की है। आज के लेख का मुख्य सन्देश गुरुदेव द्वारा स्थापित किया गया प्रमाणिक तंत्र है जिसे…

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  • विचारक्रान्ति का एक छोटा मॉडल है शांतिकुंज 

    लगन, श्रद्धा और प्रामाणिकता के साथ यदि उच्चस्तरीय उद्देश्यों के लिए इन दिनों कोई सामान्य स्तर का तंत्र भी खड़ा हो,तो उसे असाधारण सफलता मिलेगी। गुरुदेव ने इसी सूत्र को अपनाया और विचार क्रांति के एक छोटे मॉडल के रूप में शांतिकुंज की रचना कर डाली। इस तथ्य को अंगीकार करने वाली अनेक प्रतिभाएँ समग्र…

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  • युगतीर्थ शांतिकुंज को उज्जवल भविष्य की गंगोत्री क्यों कहा जाता है?

    वर्तमान में पनपी हुई यां पनप रही दुष्प्रवृत्तियों का निराकरण होना एवं  उनके स्थान पर सत्प्रवृत्तियों का संस्थापन एक बहुत ही बड़ा एवं  महत्वपूर्ण कार्य है। यह एक दोहरा कार्य है,महान परिवर्तन के लिए जहाँ प्रत्यक्ष पुरुषार्थ की आवश्यकता है,वहीँ उसके साथ अदृश्य संकल्प, साहस और दूरदर्शी कौशल भी जुड़ा रहना बहुत आवश्यक है। “विश्वव्यापी…

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  • दिव्य दृष्टि से अदृश्य जगत में झाँका जा सकता है 

    सुप्रसिद्ध फ़्रांसिसी भविष्यवक्ता नोस्ट्राडेमस ने कहा था कि युगसंधि की अवधि में एक नयी अध्यात्मिक चेतना का उदय होगा और सतयुग का श्रीगणेश होगा। महर्षि अरविंद ने सुपरचेतना युक्त विभूतियों की बात की है। विचारों के सामूहिक प्रयास को ही प्रज्ञावतार का अवतरण कहा है। स्वामी विवेकानंद, इजरायल के प्रोफेसर हरार और अमेरिका की जीन…

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  • युग परिवर्तन का यही समय क्यों है ?

    वर्तमान समय को “प्रज्ञा युग” अर्थात विवेक और बुद्धि का युग कहा गया है। जिस स्तर की लॉजिकल थिंकिंग आज के समय में हो रही है, शायद ही किसी अन्य युगों में हुई होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कलयुग,सतयुग आदि की अवधि लाखों वर्ष बताई गयी है,इन पर आज का मानव कहाँ विश्वास करेगा? लॉजिकल…

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  • ध्वंस और  सृजन, सन्धिवेला की दो अनिवार्य प्रक्रियाएँ हैं

    सृष्टि का शाश्वत नियम है कि विनाश और विकास का चोली दामन का साथ है।नए भवन के निर्माण के लिए पुरानी जर्जर इमारत को गिरना ही पड़ता है। परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य” पर आधारित लेख श्रृंखला का चौथा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है।  ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा में,गुरुचरणों में…

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  • माँ प्रकृति अपने बच्चों का विनाश कदापि नहीं होने देगी

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का तीसरा  ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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  • उलटे हुए को उल्ट कर सीधा करना पूर्णतः संभव है 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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  • युगपरिवर्तन का क्या अर्थ है ? 

    कल प्रस्तुत हुए  ज्ञानप्रसाद लेख के अमृतपान के बाद कुछ कमेंट इतने विस्तृत थे कि लेखकों के प्रति हम नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सकते। हमारी सबकी प्रिय बेटी संजना,समर्पित साथी चंद्रेश जी,नीरा जी,कोकिला जी, सुमनलता जी,रेणु श्रीवास्तव जी,संध्या जी,सुजाता जी और विदुषी जी ने इतने विस्तृत और ज्ञानवर्धक कमेंट किये कि हम किसी को…

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