Month: October 2026
-
युग के मत्स्यावतार का क्या अर्थ है ? समापन लेख
आज “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” लघु पुस्तिका का समापन 12वें लेख के साथ हो रहा है, कितना सौभाग्य है कि वर्तमान लेख श्रृंखला में गुरुदेव द्वारा मथे गए मक्खन का अमृतपान हो रहा है। आज प्रस्तुत किये गए लेख के दो भाग हैं। पहले भाग में युग के मत्स्यावतार (भगवान विष्णु के पहले अवतार-मछली)…
-
अब भगवान की पुकार पर ध्यान देने का अवसर है
आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ तो नाम जप,ध्यान एवं प्राणयाम से हुआ है जिसे लगभग सभी पाठक जानते ही हैं। गुरुदेव बता रहे हैं कि यह सभी कर्मकांडों के पीछे मुख्य उद्देश्य आत्मविकास एवं उत्कर्ष है न कि सभी कर रहे हैं तो हम भी करते जाएँ,लकीर पीटते जाएँ। गुरुदेव बता रहे हैं कि …
-
कर्मकाण्ड, प्रतीक पूजा की फिलॉसॉफी क्या है ?
परम पूज्य गुरुदेव ने कर्मकांडों को समझने,उनके पीछे छिपे तथ्यों को समझने के लिए बार -बार बल दिया है, संसार में अंधविश्वास का तो पहले ही बोलबाला है, यदि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से इस दिशा में कोई सार्थक परिणाम निकल पाते हैं, गुरूसाहित्य को समझा जाता है तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।…
-
मानवी काया का “नौलखा हार” सभी को उपलब्ध है
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” की 9वीं कक्षा में समर्पित गुरुशिष्यों का स्वागत है। त्रय शताब्दी वर्ष में लिया गया संकल्प सुपर हाई स्पीड से आगे बढ़ता जा रहा है जिसके लिए साथी बधाई के पात्र हैं। आज के ज्ञानप्रसाद लेख में चर्चा की गयी है कि भगवान को…
-
भारतीय संस्कृति में “9” के विशेष महत्व का क्या आधार है ?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की सातवीं पुस्तिका पर आधारित 8वें ज्ञानप्रसाद लेख के अध्ययन के लिए सभी गुरुशिष्यों का स्वागत है। पहली 6 पुस्तिकाओं की भांति इस पुस्तिका को भी सभी उपलब्ध स्रोतों की सहायता से समझने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ने गुरुकृपा से 23 पुस्तिकाओं के दिव्य संग्रह की…
-
शालीनता बिना मोल मिलती है,लेकिन उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है
आज का ज्ञानप्रसाद लेख ऐसे मानवीय मूल्यों की चर्चा कर रहा है जिनका पालन करके आज के युग की अनेकों समस्याओं का निवारण हो सकता है। समाज में मची त्राहि-त्राहि का एक कारण मानवीय मूल्यों का ह्रास ही है। जब ऐसा होता है तो मानवता का लुप्त होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में युगनिर्माण और…
-
नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधरित लेख श्रृंखला के आज के ज्ञानप्रसाद लेख में गुरुदेव पूर्ण विश्वास से समझा रहे हैं कि नए युग का नया मनुष्य कैसे बन पायेगा। कोई भी नया प्रोडक्ट बनाने के लिए फैक्ट्री लगानी पड़ती है, मशीनें इंसटाल करनी होती हैं,और न जाने कौन-कौन सी प्रक्रियाएं करने के बाद ही फिनिश्ड…
-
क्या दुर्गति से भरी दुर्दशा ही मानव जीवन की नियति है?
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” 23 छोटी-छोटी पुस्तिकाओं का एक ऐसा संग्रह है जिसे परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा जी ने अपने जीवन भर के साहित्य का मक्खन कहा है। इन 23 पुस्तकों को मात्र 23 दिनों में पढ़ा जा सकता है लेकिन ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से पिछले तीन माह से इस संग्रह…
-
क्या मंदिरों में प्रतिमाओं के स्थान पर विशालकाय दर्पण होने चाहिएं?
पिछले लेख में दर्पण प्रक्रिया के बारे में चर्चा की गयी थी,आज का लेख उसी सिद्धांत की एक्सटेंशन है। वर्तमान लेख में इस एक्सटेंशन को ऐसे स्तर तक बढ़ा दिया गया है कि मंदिर में प्रतिमा के स्थान पर एक विशालकाय दर्पण का सुझाव भी आन पड़ा है। लेख में इस उदाहरण का आनंद तो…
-
अंतःकरण में झाँकने की दर्पण प्रक्रिया
आज के लेख में अंतकरण को समझने का प्रयास किया गया है। “अंतःकरण” शब्द न जाने हज़ारों बार सुन चुके हैं,पढ़ चुके हैं। आज मन में विचार उतरा कि शरीर का कौन सा भाग है जिसे अंतःकरण कहा जाए? दिल, दिमाग,फेफड़े आदि तो शरीर के भाग हैं ही,क्या इन्हीं की तरह अंतःकरण भी शरीर का…
-
परिस्थितियां कभी भी, किसी के लिए भी अनुकूल नहीं थीं
“क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 7वीं पुस्तक “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का दूसरा ज्ञानप्रसाद लेख इतना प्रैक्टिकल है कि लेख में वर्णित किए कंटेंट से लगभग सभी पाठक भलीभांति परिचित हैं। जीवन से जुड़े सभी तथ्य इतने सरल हैं कि इन्हें कोई भी बड़ी ही आसानी से समझ सकता है लेकिन प्रश्न तो यह उठता…
-
दिवास्वप्न (Daydreaming) के मायाजाल से बाहिर निकलें
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार की सर्वप्रिय बिटिया, देव संस्कृति विश्वविद्यालय में MA साइकोलॉजी की विद्यार्थी,संजना के सुझाव पर आरम्भ किये गए एक विशाल प्रोजेक्ट के अंतर्गत “क्रांतिधर्मी साहित्य” की 23 पुस्तकों के क्रमवार अध्ययन में 7वीं पुस्तिका “जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र” का शुभारम्भ करते जिस प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है उसे शब्दों में…
-
जो पुकारेगा,उसे हम सामने खड़े दिखेंगें
साथिओ “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका पर आधारित श्रृंखला का नौंवा एवं समापन लेख गुरुदेव का आश्वासन एवं भविष्यवाणी को वर्णन कर रहा है। मात्र 35 पन्नों की छोटी सी पुस्तिका ने गुरुदेव के मार्गदर्शन में हमसे 9 लेख लिखवा लिए,यह सब कैसे हुआ केवल गुरुवर ही जानते हैं। आइए, सभी गुरुशिष्यों के स्वागत के…
-
भक्ति और शक्ति दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं
अगर साधक की भक्ति सच्ची एवं निस्वार्थ है तो ईश्वर भी उसमें साथ देने से पीछे नहीं हटते हैं। परम पूज्य गुरुदेव की जीवन झांकी पर दृष्टि दौड़ाने पर यह तथ्य इतना सार्थक दिखता है कि शंका की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती। 15 वर्ष की आयु में दादागुरु द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूर्ण…
-
सच्चे अध्यात्मवाद में विलक्षण शक्ति समाई हुई है
दादागुरु ने परम पूज्य गुरुदेव को अध्यात्म का कार्य सौंपते हुए अध्यात्म की असाधारण शक्ति का भी बता दिया था लेकिन जिज्ञासु होने के कारण गुरुदेव कहाँ मानने वाले थे, वोह तो इस तथ्य को साबित करने में लगे हुए थे कि क्या भक्ति में सचमुच शक्ति समाई हुई है। यदि ऐसा नहीं है तो…
-
गुरुदेव की सिद्धियां,गुरुदेव के ही शब्दों में
आज के लेख के बारे में गुरुदेव लिखते हैं कि इस चर्चा को अप्रासंगिक, अनावश्यक और अहंकार स्तर का उल्लेख न समझा जाए क्योंकि कहने को तो बहुत कुछ है इसीलिए जीवन भर के लम्बे प्रसंग को ऐसे जिज्ञासु बच्चों के लिए छोड़ दिया है जो शरीर न रहने पर कुछ और खोजने-जानने के लिए…
-
विज्ञान (शरीर) और अध्यात्म (प्राणचेतना) को मिलकर कार्य करना होगा
“परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका में “लेखक का निजी अनुभव” शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुए कंटेंट पर आज का ज्ञानप्रसाद लेख आधरित है। कहाँ मिलेगा ऐसा गुरु जिसने अपनी संतान के लिए,अपने शरीर को ही प्रयोगशाला बना लिया और जो भी रिजल्ट्स मिले उन्हें हम सबको (बिना किसी कोर्ट पेपर,कोर्ट फीस के) वसीयत के तौर…
-
वर्तमान असमंजस की स्थिति का क्या समाधान है ?
हम सब जानते हैं कि आजकल ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच पर “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 23 छोटी-छोटी पुस्तिकाओं को आधार बना कर ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं। परिवारजनों द्वारा लिए गए संकल्प के अंतर्गत पहली 5 पुस्तिकाओं के समापन के बाद कुछ दिन पहले ही छठी पुस्तक “परिवर्तन के महान क्षण”…
-
क्या मनुष्य तेज़ी से सामूहिक आत्महत्या की ओर बढ़ रहा है।?
परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य रचना “परिवर्तन के महान क्षण” पर आधारित लेख श्रृंखला का आज तीसरा ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत है, सभी साथिओं को ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के ज्ञानकलश से निकले अमृत को ग्रहण करने के लिए सादर निमंत्रण है। हमारे अनेकों साथिओं ने यह पुस्तिका एक बार नहीं,कई बार पढ़ी होगी लेकिन जिस…