वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

Month: August 2026


  • प्रसुप्त प्राणाग्नि के प्रज्जवलन के लिए कोई प्रेरक भी तो मिले !!!

    Every human is loaded with immense potential,प्रत्येक मनुष्य असीमित क्षमताओं से ओतप्रोत है,उसे तो ज्ञान ही नहीं है कि ईश्वर ने उसे क्या कुछ देकर इस धरती पर अवतरित किया है।  आज का लेख उन्हीं प्रसुप्त प्रतिभाओं को जागृत करने का सरल सा मार्ग प्रदान कर रहा है, बता रहा है कि वैभव,पराक्रम,विभूतियाँ आदि ईश्वर…

    Continue reading


  • क्या  मानव शरीर सच में एक Vehicle है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक,“युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार भाग 2 ” के  प्रथम ज्ञानप्रसाद लेख का अमृतपान करने के लिए सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन है।  गुरुदेव बता रहे हैं:  गाड़ी  का ढाँचा लोहे का बना होता है। उसके पहियों में रबड़, सीटों पर रेक्सीन, खिड़कियों में काँच आदि लगे होते हैं लेकिन गाड़ी का…

    Continue reading


  • शालीनता ही प्रतिभा का आधार है -तीसरी पुस्तक का समापन लेख  

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” 23 पुस्तकों का एक ऐसा अद्भुत साहित्य है जिसे पूज्यवर ने स्वयं अपने जीवन भर के “साहित्य का मक्खन” कहा है। उन्होंने कहा है कि मेरे द्वारा रचित विशाल साहित्य न भी पढ़ो तो कोई बात नहीं है लेकिन इस मक्खन को कभी भी मिस न करना।  गुरुदेव के  निर्देश एवं हमारी…

    Continue reading


  • 21वीं सदी प्रतिभावानों का प्ले ग्राउंड है !!

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शीर्षक बहुत ही आकर्षक है और उससे भी आकर्षक इसका कंटेंट है जहाँ हम आधुनिक रिसर्च के उदाहरणों से  देखेंगें कि 21वीं सदी, जिसके 26वें वर्ष में से हम इस समय गुज़र रहे हैं, प्रतिभावानों की क्रीड़ास्थली कैसे है।  लेख का शुभारम्भ करने से पहले  पाठकों को बताना अपना कर्तव्य…

    Continue reading


  • उच्चस्तरीय प्रतिभाएं हमारे आस-पास ही हैं

    शुक्रवार वाले लेख में “उच्चस्तरीय प्रतिभाएं कहाँ से आएंगीं ?” पर चर्चा हुई थी, आज चर्चा का विषय है  “उच्चस्तरीय प्रतिभाएं हमारे आस-पास ही हैं”, प्रत्येक पाठक को अपना मूल्यांकन करके समझ जाना चाहिए कि  “हम किसी से कम नहीं।” ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार एक ऐसा मंच है जहाँ असम्भव तो सम्भव करने का जादुई…

    Continue reading


  • उच्चस्तरीय प्रतिभाएं कहाँ से आएंगीं ?

    परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष  एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…

    Continue reading


  • प्रतिभा परिष्कार (Talent enhancement) की आरंभिक शर्त क्या है?

    परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष  एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…

    Continue reading


  • मानव शरीर में व्याप्त असीम शक्ति (Bioelectricity) ही प्रतिभा परिष्कार का आधार है

    परम वंदनीय माता जी के अवतरण के 100 वर्ष, अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष  एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1988–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। 23 पुस्तिकाओं की इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार…

    Continue reading


  • 18 अगस्त 2026 का दैनिक दिव्य संदेश

    अगर इन मूल्यों में से केवल कुछ एक का पालन हो जाए तो सतयुग की वापसी सुनिश्चित है, यही है आज का दिव्य संदेश।

    Continue reading


  • गुरुदेव के “सतयुग की वापसी” का क्या आधार है ?

    वर्तमान लेख श्रृंखला, 36 वर्ष पूर्व (1989–90) गुरुदेव द्वारा रचित “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित है। इस पुस्तकमाला की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार भाग 1” में गुरुदेव ने उस समय, वर्षों पहले लिख दिया था कि हम “संधिकाल” से गुज़र रहे हैं। इस संधिकाल में दो शताब्दियों का मिलन हो रहा है। 20वीं…

    Continue reading


  • युगसृजन के लिए प्रतिभाओं को प्रेरित करता एक लेख

    कहने को तो हमारे गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी केवल पांचवीं कक्षा तक ही स्कूली शिक्षा प्राप्त किये थे लेकिन उनके द्वारा रचित विशाल साहित्य देखकर आँखें खुली की खुली रह जाती हैं।  प्रतिभा जैसे विषय पर (जिससे लगभग सभी पाठक परिचित हैं) एक नहीं दो पुस्तकें लिख कर गुरुदेव ने जो उपकार किया…

    Continue reading


  • प्रतिभा परिवर्धन (Talent development) समझने के लिए एक सरल सा लेख

    Personality development, वर्तमान युग की बहुत बड़ी मांग बन चुकी है,कंपनियों में मैनेजर लेवल के लोगों के लिए कोर्सेज डिज़ाइन किये हुए हैं जिन्हें करना आवश्यक समझा जाता है। कॉलेज, यूनिवर्सिटीज में भी इस कोर्स का बड़ा महत्व है। इसी तरह  Talent development के भी कुछ कोर्स उपलब्ध हैं जिन्हें पर्सनालिटी डेवलपमेंट के साथ ही…

    Continue reading


  • युगपरिवर्तन के लिए उत्कृष्ट प्रतिभाएं कहाँ से मिलेंगीं ?

    23 उत्कृष्ट पुस्तिकाओं का अद्भुत संग्रह जिसे गुरुदेव ने आज से लगभग 36 वर्ष पूर्व “क्रांतिधर्मी सहित्य पुस्तकमाला” टाइटल से रच कर हम सब पर जो उपकार किया है उसे शब्दों में वर्णन लगभग असंभव है। गुरुदेव ने इस पुस्तकमाला को अपने सारे साहित्य का मक्खन कहा है,उसी मक्खन की तीसरी रचना “युग की मांग-प्रतिभा…

    Continue reading


  • कहीं अगले दिनों महाविनाश तो नहीं घटने वाला? 

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख इतना सरल और प्रेरणादायक है कि शायद ही कोई पाठक यह न कह उठे,“गुरुदेव हम तैयार हैं,बताइए क्या करना है?” गुरुदेव एक  Fully-trained  गोताखोर की तरह प्राणवानों को खारे समुद्र में से मणिमुक्तकों की तरह ढूँढ़ निकालने में लगे हुए हैं। आइए, 11 अगस्त 2026 की गुरुकक्षा में स्वयं को समर्पित…

    Continue reading


  • चार प्रकार की प्रतिभाओं का संक्षेप में वर्णन 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की तीसरी पुस्तक “युग की मांग-प्रतिभा परिष्कार-भाग 1” के पहले  ज्ञानप्रसाद लेख का अमृतपान करने के लिए ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की गुरुकक्षा में आपका स्वागत है।  56 पन्नों की इस लघु पुस्तिका को समझाने के लिए गुरुवर ने हम शिष्यों  के लिए आरम्भ में ही सारांश प्रकाशित कर दिया…

    Continue reading


  • परम पूज्य गुरुदेव के पाँच स्थूल शरीरों का संक्षिप्त सा वर्णन 

    आज का ज्ञानप्रसाद लेख परम पूज्य गुरुदेव के पांच स्थूल शरीरों का संक्षिप्त सा वर्णन प्रस्तुत कर रहा है। अखंड ज्योति के जुलाई 1997 अंक में प्रकाशित हुए लेख पर आधरित आज के   कि लगभग 30 वर्ष में सभी संस्थानों का इतना विकास एवं विस्तार हो चुका  है कि क्या कहा जाए। साथिओं से…

    Continue reading


  • परम पूज्य गुरुदेव पांच शरीरों से जीते थे-परम वंदनीय माता जी द्वारा दिया गया  दिव्य वर्णन 

    जुलाई 1997 की अखंड ज्योति में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था “विराट प्रज्ञापुरुष गुरुदेव जिनके पांच स्थूल शरीर अभी भी हमारे बीच हैं।” इन पंक्तियों के लेखक ने मात्र 4 पन्नों के लेख को जब देखा तो उसकी आँखें ही चुंधियाँ सी गयीं। लेख में समाहित अद्भुत,विस्तृत ज्ञान, अनेकों Cross references के बारे…

    Continue reading


  • गुरुदेव की सूक्ष्मीकरण साधना के विश्व्यापी सामूहिक एवं व्यक्तिगत प्रमाण 

    अखंड ज्योति जुलाई 1997, गुरुसत्ता के पाँच सूक्ष्मशरीर – वीरभद्र जो हम सबकी रक्षा में जुटे हुए हैं आज के ज्ञानप्रसाद लेख में हमारे साथी देखेंगें कि गुरुदेव की सूक्ष्मीकरण साधना की शक्ति ने विश्व भर में क्या-क्या कुछ करवा डाला। अवश्य ही गुरुदेव की तरह अनेकों दिव्य आत्माएं विश्व को बचाने में प्रयासरत है,…

    Continue reading


  • सूक्ष्म की असीमित शक्ति को समझने का सरल सा प्रयास

    हम अक्सर कहते रहते हैं कि “ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार” जैसा छोटा सा परिवार केवल समर्पित साथिओं के निस्वार्थ समर्पण एवं कर्तव्यनिष्ठा से ही चल रहा है। हर कोई समर्पित साथी यथासंभव योगदान कर रहा है जिसके लिए हम सदैव आभारी हैं।  इसी योगदान ने आज के लेख को जन्म दिया है।  हमारी आदरणीय पुष्पा…

    Continue reading


  • परम पूज्य गुरुदेव द्वारा 1971 वाली हिमालय यात्रा  से पहले बनाई गयी व्यवस्था   

    29 जुलाई 2026, गुरुपूर्णिमा के दिन आरम्भ हुए इस लघु ज्ञानप्रसाद लेख श्रृंखला का आज चौथा एवं समापन लेख गुरुचरणों में समर्पित हैं। अखंड ज्योति के मई 1971 अंक में प्रकाशित 6 पन्नों में समाहित एक  लेख का प्रकट होना मात्र संयोग तो नहीं हो सकता, साक्षात् गुरु आदेश कहें तो शायद गलत न हो। …

    Continue reading