वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

Month: September 2026


  • इतनी प्रगति के बावजूद लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?  

    कल वाले अति विस्तृत लेख में गुरुदेव बता रहे थे कि सतयुग  कोई बाहरी समय या स्थान नहीं है, यह मनुष्य की आंतरिक स्थिति है। गुरुदेव इतनी प्रगति को देखते हुए, चिंतित होते हुए पूछ रहे हैं कि इतना सब कुछ होने के बावजूद “लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?” ऐसी स्थिति से…

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  • अवश्य ही सतयुग की वापसी हो रही है !!!

    आज के लेख का मुख्य सन्देश :  “20वीं सदी ने हमें ‘दिमाग’ (Intelligence quotient-IQ ) दिया, लेकिन 21वीं सदी हमसे ‘दिल’ (Emotional quotient-EQ) की मांग रही है। मशीनें तब तक इंसान की जगह नहीं ले सकतीं, जब तक इंसान खुद मशीन की तरह सोचना बंद न कर दे।” ********************* परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा…

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  • “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी” के शुभारम्भ से पहले की भूमिका 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की आज की गुरुकक्षा में सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन करते हैं। मात्र 1500 शब्दों का बहुत ही संक्षिप्त, आज का लेख कुछ ऐसा कह रहा है जिसे रेगुलर लेख के दौरान कहना कठिन रहता है। ज्ञानप्रसाद लेखों के दौरान,अनेकों प्रकार की ज़ंजीरों (शब्द सीमा,साथिओं की समय सीमा, ग्रहण करने…

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  • प्रतिभा परिष्कार के 10 प्रयोगों में से बाकी 8  का संक्षिप्त वर्णन 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” गुरुदेव द्वारा रची गयी 23 छोटी-छोटी पुस्तकों की एक अद्भुत प्रस्तुति है। इस पुस्तकमाला  की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित लेख श्रृंखला का आज समापन हो रहा है। हमारा विश्वास है कि अनेकों  लेखों की इस दिव्य श्रृंखला को आत्मसात करके पाठकों के अनेकों भ्र्म,शंकाओं का…

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  • प्रतिभा परिष्कार के 10 प्रयोगों में से 2 का संक्षिप्त वर्णन 

    आज के लेख का शुभारम्भ करने से पहले सभी साथिओं से करबद्ध क्षमाप्रार्थी  हैं कि कल हम दिव्य सन्देश प्रकाशित करना ही भूल गए। आदरणीय मंजू मिश्रा बहिन जी ने मैसेज करके पूछा, तब कहीं याद आया। आदरणीय नीरा जी अक्सर पूछ लेती हैं लेकिन आज वोह भी भूल गईं ।  23 छोटी-छोटी पुस्तकों की…

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  • मनुष्य को दैवी अनुदान/वरदान कैसे प्राप्त होते हैं 

    23 छोटी-छोटी पुस्तकों की “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज के ज्ञानप्रसाद के अमृतपान के लिए आपको सादर आमंत्रण है।  आज के लेख में मार्गदर्शन मिल रहा है कि अनेकों सम्पदाओं से लैस मनुष्य अपनेआप को भवसागर में धँसाता ही क्यों जाता है, क्यों नहीं…

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  • ईश्वर का राजकुमार इतना भटका हुआ क्यों है?

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से मनुष्य को अनेकों बार ईश्वर का राजकुमार, वरद पुत्र अर्थात वरदान लेकर जन्मा पुत्र, असीमित प्रतिभाओं और सम्पदाओं से लैस ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना जैसे विशेषण प्रयोग करके गौरवान्वित किया जाता रहा है लेकिन इतनी समृद्धि होने के बावजूद भी अपने आस पास जिसे भी देखो दुःखी, भटका…

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  • गुरुदेव की उलटे को उल्ट कर सीधा करने की प्रक्रिया

       मनुष्य ने अपनी संकल्पशक्ति एवं ईश्वर की अनंत कृपा से अग्नि के आविष्कार से अपनी जीवन यात्रा का शुभारम्भ किया,आज वोह आकाश को छूने की क्षमता रखता है। जब कोई संतान अति शक्तिशाली हो जाती है,पिता के विचारों का विरोध करना उसकी आदत बन जाती है। स्थिति इस हद तक पंहुच जाती है कि…

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  • क्या इस संसार में सबको सब कुछ मिल जाता है?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है, स्वाध्याय द्वारा इसी मक्खन को समझकर, चिंतन करके, अन्य स्रोतों से ज्ञान शामिल करके,सरल करके वर्तमान ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं, हमारे साथी इन लेखों को पढ़कर, कमेंट और काउंटर कमेंट से हमारा उत्साहवर्धन कर रहे हैं जिसके लिए हम सभी का…

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  • क्या भगवान की रचना मनुष्य ने की है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित लेख श्रृंखला के अगले लेख को लिखने के लिए जब स्वाध्याय करना शुरू किया तो एक पॉइंट ऐसा आया जिसने हमारी आज की दिशाधारा ही बदल डाली। यह पॉइंट था, “ईश्वर को मनुष्य ने ही बनाया है।” हालाँकि इस पॉइंट में कोई विशेष बात नहीं लगती लेकिन हमारा माथा तो…

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  • ईश्वर के अनुदानों की प्लानिंग करना मनुष्य की ही ज़िम्मेदारी है 

    23 पुस्तकों के दिव्य संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य” की चौथी पुस्तक “युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज का ज्ञानप्रसाद लेख बता रहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदान की गयी प्रतिभा का नियोजन करना मनुष्य की अपनी ही ज़िम्मेदारी है। इस मंच से आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार,आत्मकल्याण और आत्मविकास जैसे शब्दों की बार-बार चर्चा की…

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