वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

Month: September 2026


  • क्या दिख रही प्रगति सच में प्रगति ही है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की छठी पुस्तिका  “परिवर्तन के महान” है। आज  इस पुस्तिका पर आधारित लेख श्रृंखला के दूसरे लेख का अमृतपान करने के लिए साथिओं को सादर निमंत्रण है।  सभी जानते हैं कि परिवर्तन एक शाश्वत नियम है, इस तथ्य को कोई भी नकार नहीं सकता। प्रश्न यह उठता है कि एक शताब्दी से…

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  • “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तिका पर आधरित लेख श्रृंखला का प्रथम लेख

    “परिवर्तन के महान क्षण” मात्र 35 पन्नों की एक बहुत ही छोटी सी पुस्तिका है। 23 पुस्तकों के अद्भुत संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की यह छठी पुस्तिका है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ने इन सभी 23 पुस्तकों को,एक-एक करके, एक-एक शब्द को पढ़ कर,समझ कर ज्ञानप्रसाद लेखों के रूप में प्रस्तुत करने का संकल्प लिया…

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  • एक ही प्रवाह में लिखी गयी थी “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला”

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समर्पित साथिओं को बताना चाहेंगें  कि आज का ज्ञानप्रसाद लेख बहुत ही छोटा है लेकिन बहुत ही बड़ा ज्ञान लिए हुए है। 23 पुस्तकों का  संग्रह जिसे “क्रांतिधर्मी साहित्य” का टाइटल दिया गया है, आज का लेख इस विषय पर चर्चा कर रहा है कि “एक ही प्रवाह में” लिखे…

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  • “परिवर्तन के महान क्षण” पुस्तक के शुभारम्भ से पूर्व गुरुदेव के सन्देश एक बार फिर से रिवीजन 

    वर्ष 2026 गायत्री परिवार के लिए एक अविस्मरणीय वर्ष स्मरण किया जायेगा। यह वर्ष परम वंदनीय वंदनीय माता जी के जन्म दिवस के 100 वर्ष,अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष एवं परम पूज्य गुरुदेव की साधना के 100 वर्ष को समर्पित है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समर्पित साथिओं ने इस त्रय शताब्दी वर्ष…

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  • 260926 अर्थात 26 सितम्बर 2026 का विशेष विशेषांक-हमारे अंतर्मन की वाणी 

    जून 2026 के अंतिम शनिवार के बाद आज सितम्बर 2026 के अंतिम शनिवार का सेगमेंट साथिओं के समक्ष प्रस्तुत है। जुलाई,अगस्त के सेगमेंट प्रस्तुत न होने के कारणों पर चर्चा किये बिना सीधा आज के सेगमेंट की और रुख करना उचित होगा।  अपने ह्रदय से भी निकट,हमारे अंतर्मन में विराजमान,हमारे प्रिय साथिओं का आज के…

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  • सतयुग की वापसी के लिए भाव-सम्वेदना ही एकमात्र विकल्प है

    वर्तमान लेख श्रृंखला का 8वां समापन लेख बता रहा है कि  इक्कीसवीं सदी भाव-सम्वेदनाओं के उभरने-उभारने की अवधि है। हमें इस उपेक्षित क्षेत्र को ही हरा-भरा बनाने में निष्ठावान माली,ईश्वर की संतान की भूमिका निभानी चाहिए। यह विश्व उद्यान इसी आधार पर हरा-भरा,फला-फूला एवं सुषमा-सम्पन्न बन सकेगा। आश्चर्य नहीं कि वह स्वर्गलोक वाले नन्दन वन…

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  • दानव नहीं, देवता बनें, सतयुग स्वतः ही अवतरित हो जायेगा 

    Fortune knocks at your door at least once. भाग्य एक बार अवश्य ही हर मनुष्य का द्वार खटखटाता है, सफलता हर किसी के लिए उपलब्ध है उसका वरन करने के लिए उचित समय और अवसर का नाम ही संयोग है। एक बार यह संयोग क्लिक हो गया, आपने उस दिव्य शक्ति के लिए द्वार खोल…

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  • माँ प्रकृति अपने बच्चों का विनाश कदापि नहीं होने देगी

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से “क्रांतिधर्मी साहित्य” के दिव्य कंटेंट का अध्ययन करना,उसे समझना,सरल करना और फिर अपने साथिओ के समक्ष प्रस्तुत करना एक चुनौती भरा साहस है। परम पूज्य गुरुदेव हाथ पकड़कर इस साहस की पूर्ति करा रहे हैं,ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। आज इस प्रयास का तीसरा  ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किया…

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  • सतयुग की वापसी मनुष्य में देवत्व के अवतरण से ही संभव है 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की 23 पुस्तकों के बारे में गुरुदेव कह चुके हैं कि यह हमारे जीवन भर के साहित्य का मक्खन है, हमारे विशाल साहित्य को न  पढ़ सको तो कोई बात नहीं लेकिन इन 23 पुस्तकों को बार-बार पढ़ना,100 बार पढ़ना, एक-एक शब्द पढ़ना। गुरुदेव ऐसा भी कह रहे हैं कि  गायत्री महाविज्ञान…

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  • समस्या अभावग्रस्तता की नहीं है, प्राप्त साधनों के सुनियोजन की है 

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख में इस विषय पर चर्चा की गयी है कि समाज में दिख रही समस्याओं का आधार “साधनों का अभाव” है लेकिन ऐसा नहीं है। साधन-सम्पन्न अमीरों को देख कर दरिद्रों को भी उलटे-सीधे मार्ग अपनाकर अमीर होने की ललक लगती जा रही है। जब उलटे-सीधे मार्ग की बात हो रही है…

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  • सम्वेदना का सरोवर सूखने न दें

    आज के ज्ञानप्रसाद लेख का सन्देश, “जो उसकी सुनता है,गुरुदेव की सुनता है उसे अन्य किसी की भी सुनने का आवश्यकता नहीं पड़ती है।”  “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी”  में गुरुदेव जिस सतयुग की बात कर रहे हैं उसे हम सबने इक्क्ठे होकर,अपनी आँखों के ऊपर चढ़े हुए चश्मे को बदल…

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  • अदृश्य सत्ता के महान् कार्य में  श्रेय के अधिकारी बनें  

    युग परिवर्तन के आधार को यदि एक शब्द में व्यक्त करना हो तो इतना कहने भर से भी काम चल सकता है कि अगले दिनों “निष्ठुर स्वार्थपरता” को निरस्त करके उसके स्थान पर “उदार भाव-सम्वेदनाओं” को अन्त:करण की गहराई में प्रतिष्ठित करने की, उभारने की, खोद निकालने की आवश्यकता पड़ेगी। परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम…

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  • इतनी प्रगति के बावजूद लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?  

    कल वाले अति विस्तृत लेख में गुरुदेव बता रहे थे कि सतयुग  कोई बाहरी समय या स्थान नहीं है, यह मनुष्य की आंतरिक स्थिति है। गुरुदेव इतनी प्रगति को देखते हुए, चिंतित होते हुए पूछ रहे हैं कि इतना सब कुछ होने के बावजूद “लेने के देने क्यों पड़ रहे हैं ?” ऐसी स्थिति से…

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  • अवश्य ही सतयुग की वापसी हो रही है !!!

    आज के लेख का मुख्य सन्देश :  “20वीं सदी ने हमें ‘दिमाग’ (Intelligence quotient-IQ ) दिया, लेकिन 21वीं सदी हमसे ‘दिल’ (Emotional quotient-EQ) की मांग रही है। मशीनें तब तक इंसान की जगह नहीं ले सकतीं, जब तक इंसान खुद मशीन की तरह सोचना बंद न कर दे।” ********************* परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा…

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  • “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की पांचवीं पुस्तक “सतयुग की वापसी” के शुभारम्भ से पहले की भूमिका 

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के गुरुकुल की आज की गुरुकक्षा में सभी गुरुशिष्यों का अभिवादन करते हैं। मात्र 1500 शब्दों का बहुत ही संक्षिप्त, आज का लेख कुछ ऐसा कह रहा है जिसे रेगुलर लेख के दौरान कहना कठिन रहता है। ज्ञानप्रसाद लेखों के दौरान,अनेकों प्रकार की ज़ंजीरों (शब्द सीमा,साथिओं की समय सीमा, ग्रहण करने…

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  • प्रतिभा परिष्कार के 10 प्रयोगों में से बाकी 8  का संक्षिप्त वर्णन 

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” गुरुदेव द्वारा रची गयी 23 छोटी-छोटी पुस्तकों की एक अद्भुत प्रस्तुति है। इस पुस्तकमाला  की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित लेख श्रृंखला का आज समापन हो रहा है। हमारा विश्वास है कि अनेकों  लेखों की इस दिव्य श्रृंखला को आत्मसात करके पाठकों के अनेकों भ्र्म,शंकाओं का…

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  • प्रतिभा परिष्कार के 10 प्रयोगों में से 2 का संक्षिप्त वर्णन 

    आज के लेख का शुभारम्भ करने से पहले सभी साथिओं से करबद्ध क्षमाप्रार्थी  हैं कि कल हम दिव्य सन्देश प्रकाशित करना ही भूल गए। आदरणीय मंजू मिश्रा बहिन जी ने मैसेज करके पूछा, तब कहीं याद आया। आदरणीय नीरा जी अक्सर पूछ लेती हैं लेकिन आज वोह भी भूल गईं ।  23 छोटी-छोटी पुस्तकों की…

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  • मनुष्य को दैवी अनुदान/वरदान कैसे प्राप्त होते हैं 

    23 छोटी-छोटी पुस्तकों की “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” की चौथी पुस्तक “युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज के ज्ञानप्रसाद के अमृतपान के लिए आपको सादर आमंत्रण है।  आज के लेख में मार्गदर्शन मिल रहा है कि अनेकों सम्पदाओं से लैस मनुष्य अपनेआप को भवसागर में धँसाता ही क्यों जाता है, क्यों नहीं…

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  • ईश्वर का राजकुमार इतना भटका हुआ क्यों है?

    ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से मनुष्य को अनेकों बार ईश्वर का राजकुमार, वरद पुत्र अर्थात वरदान लेकर जन्मा पुत्र, असीमित प्रतिभाओं और सम्पदाओं से लैस ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना जैसे विशेषण प्रयोग करके गौरवान्वित किया जाता रहा है लेकिन इतनी समृद्धि होने के बावजूद भी अपने आस पास जिसे भी देखो दुःखी, भटका…

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  • गुरुदेव की उलटे को उल्ट कर सीधा करने की प्रक्रिया

       मनुष्य ने अपनी संकल्पशक्ति एवं ईश्वर की अनंत कृपा से अग्नि के आविष्कार से अपनी जीवन यात्रा का शुभारम्भ किया,आज वोह आकाश को छूने की क्षमता रखता है। जब कोई संतान अति शक्तिशाली हो जाती है,पिता के विचारों का विरोध करना उसकी आदत बन जाती है। स्थिति इस हद तक पंहुच जाती है कि…

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  • क्या इस संसार में सबको सब कुछ मिल जाता है?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य का मक्खन है, स्वाध्याय द्वारा इसी मक्खन को समझकर, चिंतन करके, अन्य स्रोतों से ज्ञान शामिल करके,सरल करके वर्तमान ज्ञानप्रसाद लेख प्रस्तुत किये जा रहे हैं, हमारे साथी इन लेखों को पढ़कर, कमेंट और काउंटर कमेंट से हमारा उत्साहवर्धन कर रहे हैं जिसके लिए हम सभी का…

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  • क्या भगवान की रचना मनुष्य ने की है ?

    “क्रांतिधर्मी साहित्य पुस्तकमाला” पर आधारित लेख श्रृंखला के अगले लेख को लिखने के लिए जब स्वाध्याय करना शुरू किया तो एक पॉइंट ऐसा आया जिसने हमारी आज की दिशाधारा ही बदल डाली। यह पॉइंट था, “ईश्वर को मनुष्य ने ही बनाया है।” हालाँकि इस पॉइंट में कोई विशेष बात नहीं लगती लेकिन हमारा माथा तो…

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  • ईश्वर के अनुदानों की प्लानिंग करना मनुष्य की ही ज़िम्मेदारी है 

    23 पुस्तकों के दिव्य संग्रह “क्रांतिधर्मी साहित्य” की चौथी पुस्तक “युग की माँग, प्रतिभा परिष्कार भाग 2” पर आधारित आज का ज्ञानप्रसाद लेख बता रहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदान की गयी प्रतिभा का नियोजन करना मनुष्य की अपनी ही ज़िम्मेदारी है। इस मंच से आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार,आत्मकल्याण और आत्मविकास जैसे शब्दों की बार-बार चर्चा की…

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