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जहाँ भौतिक साइंस फेल होती है,अध्यात्मिक साइंस वहीं से आरम्भ होती है। 

3 अगस्त 2022 का ज्ञानप्रसाद -जहाँ भौतिक साइंस फेल होती है,अध्यात्मिक साइंस वहीं से आरम्भ होती है। 

आज का ज्ञानप्रसाद हम पूज्यवर और पंडित जी के संवाद से वहीँ से आरम्भ करेंगें जहाँ कल छोड़ा था। 

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इसके बाद  गुरुदेव ने हमें हनुमान का उदाहरण देकर समझाया कि हनुमान की क्या स्थिति थी? सुग्रीव के मंत्री थे। बालि ने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी को छीन  लिया था और सुग्रीव डर कर हनुमान जी  के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर छिपकर समय बिताते थे। वही हनुमान, जब पत्नि के अपहरण से व्यथित भगवान राम की सहायता के लिए उनके संपर्क में आए तो उनका आत्मबल कितना बढ़ गया सब जानते हैं। बेटा! परमार्थ के द्वारा, दूसरों की सहायता से, समाज सेवा का कार्य करने वालों का आत्मबल बहुत बढ़ जाता है। जब हनुमान में आत्मबल आया तो उनमें शरीरबल भी इतना आ गया कि समुद्र तक को लांघ गए, पर्वत को उखाड़ लाए, लंका में रावण की सभा में ताल ठोककर खड़े हो गए। राम-लक्ष्मण को अपने कंधों पर बिठाकर पाताल से अहिरावण से छुड़ा लाए। सीता माता की खोज करके ले आए। यह थी   हनुमान जी की  शरीरबल प्राप्ति। धनबल की बात करें  तो भारत के सात लाख गाँवों में कम से कम एक मंदिर प्रति गाँव भी गिनें तो सात लाख मंदिर हनुमान के होंगे। इतने मंदिर तो भगवान राम के भी नहीं हैं। इन मंदिरों की कीमत अरबों रुपया होगी और उनमें करोड़ों का भोग लग जाता होगा। इतना धन हनुमान जी को मिल गया और सम्मान श्रद्धा इतनी मिली कि आज भारत में सबसे अधिक भक्त हनुमान जी के ही  हैं। बेटा! अध्यात्म के रास्ते पर जो भी चला उसे सभी कुछ मिलता ही चला गया। हमने कहा-गुरुदेव! हनुमान जी  का उदाहरण तो बहुत पुराना है,कोई और उदाहरण बताइए जिसने अध्यात्म के रास्ते पर चलकर सब कुछ पा लिया हो।

गुरुदेव बोले: बेटा!  भगवान बुद्ध  का नाम तो तुमने सुना ही है? हमने कहा-हाँ गुरुदेव! उनका साहित्य भी पढ़ा है। उनके पिता ने उन्हें महल से बाहर नहीं निकलने दिया, लेकिन जब वे महल छोड़कर जंगल में चले गए और अध्यात्म के मार्ग पर चल पड़े तो बुद्ध से भगवान बुद्ध हो गए। उनकी सोने की मूर्तियाँ बनी।  बर्मा, चीन, लंका, जापान, जावा, सुमात्रा और सारे विश्व में उनका धर्म, बुद्ध धर्म  फैल गया। यदि राजा ही रहते तो उन्हें कौन जान सकता था। अध्यात्म  के रास्ते पर चले तो राजा अशोक, राजा हर्षवर्धन ने अपनी सारी संपत्ति दे डाली। डाकू अंगुलिमाल और आम्रपाली वेश्या ने अपनी अनीति की कमाई उनके चरणों में अर्पित कर दी। हजारों भिक्षुक, भिक्षुणियों ने उनके धर्म का प्रचार किया। उनको शरीरबल भी मिला, बुद्धि भी मिली और धन भी मिला। जब कोई असली अध्यात्म पर चलता है तो उसे सब कुछ मिल जाता है और नकली अध्यात्म पर चलने पर उसे कुछ नहीं मिलता है। बेटा! असली सोना तो महँगा ही आएगा। अगर सोना सस्ता मिले  तो समझ लेना चाहिए कि , नकली है। अध्यात्म के रास्ते पर तो साहसी व्यक्ति ही चल सकता है। कमजोर और कायर  इस मार्ग पर कैसे चल सकता है?

गुरुदेव बोले-एक विवेकानंद का उदाहरण है। नरेंद्र नाम का कायस्थ परिवार का लड़का था। उसके पिता का स्वर्गवास हो गया। वह स्वामी रामकृष्ण परमहंस से नौकरी माँगने गया। स्वामी जी ने कहा-माँ काली  से माँग ले। जब माँ में उसने विश्व ब्रह्मांड के दर्शन किए तो उसने सोचा इतनी बड़ी शक्ति से मैं केवल पेट के लिए रोटी क्यों मांगू। पेट तो मैं मज़दूरी  करके भी भर सकता हूँ। उन्होंने कहा कि हे माँ! मुझे भक्ति दो, ज्ञान दो, शक्ति दो। जब वह नरेंद्र अध्यात्म के रास्ते पर चल पड़ा तो नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद बन गया। सारे विश्व में भारतीय संस्कृति की धर्मध्वजा फहरा दी। जमशेद जी टाटा को जब लंदन से स्टील कारखाने का परमिट मिला तो  जिस होटल में जमशेद जी ठहरे थे, उसी में स्वामी जी ठहरे थे। जमशेद जी ने स्वामी जी से कहा कि क्या अध्यात्म में ऐसी शक्ति है जो यह बता दे कि भारत में कोयला, लोहा और पानी एक ही जगह कहाँ मिल सकता है ? स्वामी जी ने कहा कल सुबह बतला देंगे। सुबह जमशेद जी स्वामी जी के पास पहुँचे। स्वामी जी बोले-बिहार में सिंहभूम के पास साक्षी गाँव है, उसके पास जंगल ही जंगल है, उसे खरीद लो। वहाँ लोहा, पानी और कोयला पर्याप्त मिल जाएगा। जमशेद जी ने वहीं जमीन खरीदकर स्टील का कारखाना लगा लिया तो जमशेद जी मालामाल हो गए।

स्वामी जी और जमशेद जी की इसी तरह की एक  और भेंट तब हुई जब स्वामी जी शिकागो वर्ल्ड कांफ्रेंस में जा रहे थे और जमशेद जी किसी उद्योगिक कांफ्रेंस में शिकागो  ही जा  रहे थे। SS Empress of India  स्टीमशिप  पर दो हस्तियों  के बीच जो बातचीत हुई थी उस से इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस (IIS,Tata Institute) बैंगलोर का जन्म हुआ था। इस विषय पर  पूरा लेख हमने 24 जनवरी को लिखा था जिसे आप फिर से पढ़ सकते हैं।    

यह धन जमशेद जी को स्वामी विवेकानंद की ही कृपा से मिला।

गुरुदेव ने हमसे कहा-बेटा! तुमने गाँधीजी को देखा है ? हमने कहा-हाँ गुरुदेव ,कई बार देखा है। गुरुदेव बोले-गांधी जी बड़े कमजोर वकील थे। पहला मुकदमा मिला तो उसे लड़ नहीं सके। क्लाइंट  की दी हुई फीस भी वापस करनी पड़ी, लेकिन वही गांधी जी जब अध्यात्म के रास्ते पर चले तो कितने शक्तिशाली हो गए। गाँधी से महात्मा गांधी हो गए। उन्होंने अंग्रेज़ों  से कहा-अंग्रेज़ों भारत छोड़ो, और भारतीयों से कहा-करो या मरो। उनके दो वाक्यों ने अंग्रेज़ों को भारत से निकाल दिया। उनकी एक आवाज पर जेलें भर गईं। लोग फाँसी पर लटक गए, गोली के सामने आ गए। इतने शक्तिशाली कैसे हो गए गाँधी जी? अध्यात्म के रास्ते पर चलकर हो गए। धन इतना मिला कि जगह जगह  उनकी हजारों मूर्तियाँ लगी हैं। करोड़ों के स्मारक बने हैं। अंग्रेज़ों ने ही इतना सम्मान दिया कि  लंदन में  गाँधी जी का पीतल का  statue लगा लगा दिया। यदि वकील ही रहे होते तो दस-पाँच लाख रूपए  से अधिक नहीं कमा पाते। दो चार कोठियाँ बनवा सकते थे बस। लेकिन जब सच्चे अध्यात्म के रास्ते पर चले तो बुद्धिबल,सम्मान आदि  सब कुछ मिला। धन तो मिला ही लेकिन साथ में  बुद्धि भी मिली। बुद्धि ऐसी कि वाइसराय भी उनसे बात करने में घबराता था। उनका शरीर भी स्वस्थ व मजबूत था। शरीरबल, धनबल, बुद्धिबल, सम्मान सब कुछ उन्हें मिला। आज सारा विश्व उन्हें जानता है , विश्व के जिस भी भाग में हम जाकर कहें कि हम भारतीय हैं तो एक ही कमेंट आएगा -Oh  you are from a country of Gandhi .  

बेटा! आगे आने वाले समय में युवा वर्ग कथा, भजन, पूजन, स्नान तीर्थयात्रा पर विश्वास नहीं करेगा। वह तथ्यों(Facts ) पर विश्वास करेगा। उसे प्रमाणित करके बताना होगा कि अध्यात्म के रास्ते चलने पर क्या-क्या उपलब्धियाँ हो सकती हैं। बेटा! तुम हमें देखो, हम तुम्हारे सामने हैं। जब हम अध्यात्म के रास्ते पर चले तो जिस धन की बात तुम बार-बार करते हो,देख सकते हो एमबी कितना मिला। हमने चौबीस शक्ति पीठ बनवाने को कहा था जो चौबीस सौ बनकर तैयार हो गए, ( आज 2022 में शायद 5000 से भी अधिक ही हैं।केवल इनका ही  हिसाब लगाया जाए तो करोड़ों-अरबों  रुपयों में पहुँचेगा। युगतीर्थ  शांतिकुंज को देखो, ब्रह्मवर्चस और गायत्री तपोभूमि को देखो कुल मिलाकर अरबों की संपत्ति होगी, करोड़ों का बैंक बैलेंस होगा।

हमने कहा-हाँ गुरुदेव! यह तो हम देख रहे हैं। वे बोले अब बुद्धिबल की बात बताएँ। चारों वेद, उपनिषद, दर्शन, ब्राह्मण, स्मृति, पुराण सारे धार्मिक ग्रंथों का भाष्य कर दिया। प्रज्ञापुराण लिख दिया जिसकी कथा घर-घर में होती है। विज्ञान और अध्यात्म का हमेशा ही 24 का आंकड़ा रहा है। अक्सर भौतिक  विज्ञानी अध्यात्म   को ढोंग और अंधविश्वास कहते हैं और अध्यात्मी विज्ञान को गाली देते थे लेकिन  हमने अध्यात्म और विज्ञान को मिला दिया और scientific spirituality की बात करनी शुरू कर दी।  हमने दोनों को एक दूसरे का पूरक सिद्ध कर दिया। हम तो इतना ही कहेंगें कि 

  • “भौतिक विज्ञान की सीमाएं जहां समाप्त होती हैं अध्यात्म विज्ञान की सीमाएं वहां से आरंभ होती हैं अध्यात्म विशुद्ध विज्ञान है । अब अध्यात्मिक मान्यताओं को विज्ञान की मान्यताओं के अनुसार प्रमाणित करने का क्रम सारी दुनिया में चल रहा है।” 

गुरुदेव कह रहे हैं हमने कुत्ता और बिल्ली की शादी करा दी। कितना बुद्धिबल आ गया? शरीरबल की बात बताएँ तो  हमारा शरीर बिल्कुल  स्वस्थ है, कोई बीमारी नहीं है। एक बदमाश ने हमारे ऊपर अकेला पाकर हमला कर दिया। उसके पास बहुत बड़ा छुरा और सात फायर की पिस्तौल थी। हमने उसका पिस्तौल और छुरा दोनों छुड़ा लिए। कितना शरीर बल है हमारे अंदर? बेटा! हमने त्रिपदा गायत्री को जपा है। गायत्री के अंतरंग पक्ष को अपने व्यवहार, आचरण और चिंतन में उतारा है। कोई भी व्यक्ति उपासना, साधना और आराधना द्वारा आत्मबल पैदा कर सकता है। जब आत्मबल आता है तो तीनों बल अपनेआप ही  आ जाते हैं। हमने कितने ही उदाहरण, प्रमाण देकर तुम्हें समझा दिया।

हमने कहा-गुरुदेव! आपने हमारा और हमारे सब भाई बहिनों का भ्रम दूर कर दिया, यह आपका बहुत बड़ा उपकार है, जिसे हम जीवन भर नहीं भुला पाएँगे। हम लोग अब अध्यात्म के सच्चे स्वरूप को सबके सामने रखेंगे। गुरुदेव ने कहा-“आज बच्चों में, युवकों में अध्यात्म के प्रति घृणा पैदा हो गई है। आज अध्यात्म का यह जो बिगड़ा हुआ  स्वरूप है, वह अध्यात्म ( spirituality) की लाश है। इसको या तो जीवित करना पड़ेगा या जलाना पड़ेगा,अन्यथा यह बदबू फैलाएगी। असली अध्यात्म के लिए पवित्र, दोष दुर्गुणों से रहित जीवन जीना होता है। बुराइयों को छोड़ना और अच्छाइयों को ग्रहण करना होता है। भगवान की उपासना, अपनी साधना और समाज की आराधना करनी पड़ती है। आज तो बस थोड़ा सा जप और यज्ञ करके ही संतोष कर लेते हैं । इस भूल का सुधार कर लेना चाहिए।”

समाज में कुरीतियाँ फैली हैं, अपने अंदर जो दोष दुर्गुण हैं और जिन व्यसनों में हम फँसे हुए हैं, उनको दूर करने के लिए पूज्य गुरुदेव के क्रांतिकारी एवं प्रभावशाली विचारों की डेढ़-डेढ़ रुपये वाली पॉकेट बुक्स का प्रकाशन किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति को ये पुस्तकें पढ़ना चाहिए और दूसरों को पढ़ानी चाहिए। साहित्य के माध्यम से पूज्यवर के विचार लोगों तक पहुँचाकर यदि हम उनका चिंतन बदल सकें तो ही स्थायी परिवर्तन आ सकता है। 

“यही विचार क्रांति है, यही ज्ञानयज्ञ है।”

विचारों के परिवर्तन से जो सामाजिक परिवर्तन होगा वही स्थायी और फलदायी होगा। प्रशासन, पुलिस, न्यायालय, दंड के भय से स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है। इस विचार क्रांति के लिए हर भावनाशील व्यक्ति को दो घंटे का समय निकालना ही चाहिए। विश्व की वर्तमान स्थिति को देखकर कोई पत्थर हृदय ही होगा जो इसे देखता रहे और हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे। इस विनाश की अग्नि में प्रत्येक समझदार व्यक्ति को एक घड़ा पानी तो डालना ही चाहिए, कुछ समय, कुछ श्रम, कुछ धन समाज सेवा में लगाना ही चाहिए नहीं तो यह अग्नि हम सबको भस्म कर देगी।

हर लेख की भांति यह लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अनजाने में अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। धन्यवाद् जय गुरुदेव।

To be  continued :

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3  अगस्त 2022, की 24 आहुति संकल्प सूची: 

(1 )संध्या कुमार-26 , (2 ) अरुण वर्मा-30  , (3 ) सरविन्द कुमार-25 , (4 ) प्रेरणा कुमारी-24    

इस सूची के अनुसार सभी सहकर्मी गोल्ड मैडल विजेता हैं, सामूहिक शक्ति को नमन एवं  सामूहिक बधाई। सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिनको हम हृदय से नमन करते हैं, आभार व्यक्त करते हैं और जीवनपर्यन्त ऋणी रहेंगें। धन्यवाद


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