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“सप्ताह का एक दिन पूर्णतया अपने सहकर्मियों का” 20   मार्च ,2022 

“सप्ताह का एक दिन पूर्णतया अपने सहकर्मियों का” 20   मार्च ,2022 

5 मार्च से आरम्भ किये गए इस नवीन प्रयास की तीसरी  कड़ी आपके समक्ष प्रस्तुत है। इस कड़ी में हमें  विदुषी बहिन जी का कमेंट पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त होगा  जिसमें उन्होंने एक नवीन जानकरी दी है, आदरणीय अशोक जी (संजना बेटी के पापा) को आप चित्रों के माध्यम से सम्मानित होता देखेंगें ,रजत भाई साहिब की कवि क्षमता और राजकुमारी बहिन जी द्वारा नमर्दा जयंती समरोह का आयोजन के बारे में देखेंगें। अशोक जी का नाम पहली बार ऑनलाइन ज्ञानरथ में प्रकाशित हो रहा है।  हम आग्रह करेंगें कि अन्य  सहकर्मियों को भांति अशोक जी भी नियमित तौर से इस प्लेटफॉर्म  पर समयदान करके गुरुकार्य का पुण्य प्राप्त करें क्योंकि परमपूज्य गुरुदेव का सबसे प्रिय शिष्य वही है जो उनके विचारों को जन जन तक पहुंचा रहा है। रेणु श्रीवास्तव  बहिन जी ने अपनी चार धाम यात्रा के बारे में कमेंट करके गोमुख यात्रा की कठिनता का वर्णन किया है जिसके लिए हम आभारी  हैं    

अंत में 24 आहुति संकल्प सूची तो होगी ही।

एक सुझाव:

सहकर्मियों से सुझाव है कि जब भी कोई प्रकाशन भेजें तो अपने बारे में संक्षिप्त सी जानकारी भेज दें तो बहुत अच्छा होगा। इससे हम सब एक दूसरे  को और अधिक अच्छी प्रकार जान पायेंगें। ऐसी जानकारी  भेजते समय  confidentiality को पूर्णतया  कायम रखा जाये और कोई भी personal information  न शेयर की जाए। धन्यवाद् जय गुरुदेव   

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विदुषी बंता :

परम पूजनीय गुरुदेव परम वंदनीय माता जी के चरणों में बारम्बार प्रणाम आ. त्रिखा भाई सा. भाव भरा नमस्कार स्वीकार करें आज का शीर्षक अध्यात्म का ध्रुव केंद्र देवात्मा हिमालय ‘जो कि उत्तराखंड में स्थित है जिसे हिमालय का हृदय भी कहते है देवी चेतन सत्ता की निवास स्थली है। जैसा कि आपने लिखा है कि आर्य तिब्बत के पठारों से होते हुए इधर आए थे। यहाँ का वातावरण उनके अनुकूल होने के कारण वे यहीं बस गए थे वे मूर्धन्य स्तर के निवासी थे गुरु जी के अनुसार यहाँ के निवासी ज्ञान विज्ञान से परिपूर्ण थे तथा और भी विद्यायो कलाओं में प्रांगत थे ऋषि मुनि व सिद्ध योगी आदि के लिए भी ये जगह जप तप व जो भी वह अनुसंधान करते हैं उपयुक्त हैहमारे गुरुदेव भी इन्ही हिमालय की कन्द्रायों में जप तप करके सिद्धिया अर्जित की थीं इन्ही सब विशेषताओ के कारण ही इसे अध्यात्म का ध्रुव केंद्र कहा जाता है या स्वर्ग भी कहा जा सकता है 

एक बात बताना चाहेंगे कि इंद्र से मिली उपहार में उर्वशी को अर्जुन ने लेने से इंकार कर दिया था फ्लस्वरूप दूसरा उपहार अर्जुन को गाण्डीव धनुष मिला था जिसके बाण शब्द भेदी होते थे। आज के इस ज्ञानवर्धक व रुचिकर लेख के लिए आ. डॉ. सा. आपका बहुत बहुत आभार  धन्यवाद। इस प्रकार के लेखों से हमें प्राचीनतम जानकारी व इतिहास का पता चलता है। सभी को प्रणाम आहुति संकल्प परिजनों को हार्दिक बधाई। शुभ मंगलमय दिन के साथ जय माँ गायत्री 

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रजत भाई साहिब :

स्वर्ग

स्वर्ग कहीं बाहर नहीं

है तो अपने अंदर,

क्यों तू ही ढूंढता रहता

सात पार समंदर ।।

निरख अपने अंदर

भरा पड़ा स्वर्ग सुख

कथनी करनी एक हो

सत कर्म में हो रुख ।।

इसी भूमि पर स्वर्ग था

स्वर्ग यहीं हो सकता

सत विचार सत्कर्म से

सुख साधन मिलता ।।

विचार क्रांति अभियान

चल पड़े चारों ओर

स्वर्ग अपने आप होगा 

उतर धरती पर ।। 

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अशोक कुमार गुप्ता :

परम आदरणीय सर जी आपके चरणों  में नतमस्तक होकर भाव भरा सादर प्रणाम । मैं अशोक कुमार गुप्ता बचपन से ही मुझे संगीत, शेरो शायरी और कविता में रुचि है। माता के जागरण में निस्वार्थ भाव से सेवा करता हूं। 13 मार्च 2022 को पटना के ऐतिहासिक कृष्ण मेमोरियल हॉल में मुझे कविता बोलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसमें दो बार मुझे सम्मानित किया गया दो शाल, दो मेडल, श्री गणेश प्रतिमा, गुलदस्ता,कवि प्रतीक सम्मान पत्र और माला पहनाकर सम्मानित किया गया | यह मेरे जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दिन होगा।  यह सब परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से ही संभव हुआ है। 

“दिव्यांगों के हाथों की लकीरों को बदल सकता हूं मैं, भारत माता ने दी है इतनी ताकत कि पत्थर में फूल खिला सकता हूं मैं | जय गुरुदेव,जय माता दी सादर प्रणाम

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राजकुमारी कौरव:

हमारी समर्पित सहकर्मी राज कुमारी कौरव बहिन जी नरसिंगपुर मध्य प्रदेश की  जिला Coordinator  हैं।  करेली में नर्मदा जयंती के पावन पर्व पर एक  समारोह का आयोजन हुआ। बहिन जी ने  इस समरोह को दर्शाती एक लघु वीडियो हमें भेजी थी लेकिन उसका लिंक generate न होने के कारण हम आपके समक्ष केवल चित्र ही प्रस्तुत कर रहे हैं। यह एक बहुत ही सराहनीय  कार्य है। ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार को ओर  से हार्दिक बधाई।  एक चित्र में आप परमपूज्य गुरुदेव का दिव्य साहित्य देख रहे हैं और  दुसरे में   आप  बहिन जी को देख रहे हैं।

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 24 आहुति संकल्प 

18  मार्च 2022 वाले ज्ञानप्रसाद का  अमृतपान करने के  उपरांत 7  समर्पित सहकर्मियों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है, यह समर्पित सहकर्मी निम्नलिखित हैं :

(1) सरविन्द कुमार -41, (2 ) संध्या कुमार -26,(3 ) रेणुका गंजीर -26,(4 ) अरुण वर्मा -36,(5 )प्रेरणा कुमारी-25,( 6 ) रेनू श्रीवास्तव -41 ,27 (7 ) निशा भारद्वाज -26 

सभी सप्तऋषियों  को हमारी व्यक्तिगत और परिवार की सामूहिक बधाई। आज के  परिणाम ने  गोल्ड मैडल विजेता घोषित करने में हमें असमंजस में डाल  दिया है।  रेणु श्रीवास्तव बहिन जी और सरविन्द भाई साहिब दोनों में tie तो हम देख ही रहे हैं लेकिन रेणु  जी ने दो  2  बार सफल प्रयास किया है। इस स्थिति में गोल्ड मैडल तो रेणु जी को जाना चाहिए लेकिन सरविन्द भाई साहिब के प्रयास को नज़रअंदाज़ करना भी कोई न्याय नहीं होगा। इसलिए आज के विजेता दोनों समर्पित सहकर्मी घोषित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता का आभास हो रहा हैं ,आशा करते हैं कि अन्य सहकर्मी भी इस पुनीत  कार्य  में सक्रियता दिखाएंगें। जो नए सहकर्मी  हमारे साथ जुड़ रहे हैं उनके लिए 24 आहुति संकल्प का इतिहास शेयर कर रहे हैं।  

सभी सहकर्मी अपनी अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिन्हे हम हृदय से नमन करते हैं और आभार व्यक्त करते हैं। धन्यवाद्  

24 आहुति संकल्प सूची एवं इतिहास : जो सहकर्मी हमारे साथ लम्बे समय से जुड़े हुए हैं वह जानते हैं कि हमने कुछ समय पूर्व काउंटर कमेंट का सुझाव दिया था जिसका पहला उद्देश्य था कि जो कोई भी कमेंट करता है हम उसके आदर-सम्मान हेतु रिप्लाई अवश्य करेंगें। अर्थात जो हमारे लिए अपना मूल्यवान समय निकाल रहा है हमारा कर्तव्य बनता है कि उसकी भावना का सम्मान किया जाये। कमेंट चाहे छोटा हो य विस्तृत ,हमारे लिए अत्यंत ही सम्मानजनक है। दूसरा उद्देश्य था एक परिवार की भावना को जागृत करना। जब एक दूसरे के कमेंट देखे जायेंगें ,पढ़े जायेंगें ,काउंटर कमेंट किये जायेंगें ,ज्ञान की वृद्धि होगी ,नए सम्पर्क बनेगें , नई प्रतिभाएं उभर कर आगे आएँगी , सुप्त प्रतिभाओं को जागृत करने के अवसर प्राप्त होंगें,परिवार की वृद्धि होगी और ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार का दायरा और भी विस्तृत होगा। ऐसा करने से और अधिक युग शिल्पियों की सेना का विस्तार होगा। हमारे सहकर्मी जानते हैं कि हमें किन -किन सुप्त प्रतिभाओं का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, किन-किन महान व्यक्तियों से हमारा संपर्क संभव हो पाया है। अगर हमारे सहकर्मी चाहते हैं तो कभी किसी लेख में मस्तीचक हॉस्पिटल से- जयपुर सेंट्रल जेल-मसूरी इंटरनेशनल स्कूल तक के विवरण compile कर सकते हैं। इन्ही काउंटर कमैंट्स के चलते आज सिलसिला इतना विस्तृत हो चुका है कि ऑनलाइन ज्ञानरथ को एक महायज्ञशाला की परिभाषा दी गयी है। इस महायज्ञशाला में विचाररूपी हवन सामग्री से कमैंट्स की आहुतियां दी जा रही हैं। केवल कुछ दिन पूर्व ही कम से कम 24 आहुतियों (कमैंट्स ) का संकल्प प्रस्तुत किया गया। इसका विस्तार स्कोरसूची के रूप में आपके समक्ष होता है। आप सब बधाई के पात्र है और इस सहकारिता ,अपनत्व के लिए हमारा धन्यवाद्। सहकर्मीओं से निवेदन है कि संकल्प सूची की अगली पायदान पर दैनिक ज्ञानप्रसाद के संदर्भ में कमेंट करने का प्रयास करें -बहुत ही धन्यवाद् होगा।

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