5 मार्च 2022 से आरम्भ होता है एक नवीन प्रयास : 

5 मार्च 2022 से आरम्भ होता है एक नवीन प्रयास : 

“सप्ताह का एक दिन पूर्णतया अपने सहकर्मियों का” – इस सुझाव को बहुत से सहकर्मियों ने सराहा है। इस नवीन प्रयास में हम कुछ प्रतिभाएं और अनुभूतियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। सहकर्मियों से निवेदन है कि अगले सप्ताह के लिए अपनी गतिविधियां प्रकाशित हेतु अभी से सोचना आरम्भ कर दें। 

आज की 24 आहुति संकल्प सूची में रेणुका गंजीर -24 ,अरुण वर्मा-26, सरविन्द पाल-32,संध्या कुमार-29,प्रेरणा कुमारी-27,पूनम कुमारी -27 विजेता हैं और सरविन्द जी सबसे अधिक अंक प्राप्त करके गोल्ड मैडल प्राप्त करते हैं। सभी को हमारा हृदय से नमन। 

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व्हाट्सप्प सहकर्मी जाग्रति बहिन जी की बेटी दिशा पटेल की प्रतिभा। 

दिशा बेटी सिविल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है लेकिन उसकी रूचि पेंटिंग और आर्ट्स में है और उसी क्षेत्र में अग्रसर होना चाहती है। परिवार में गायत्री साधना और गायत्री परिवार से जुड़े होने करके दिशा भी एक गायत्री साधक है जो अपने आसपास और सर्किल में परमपूज्य गुरुदेव के विचारों के प्रचार-प्रसार में कार्यरत है। आदरणीय चिन्मय पंड्या जी से बहुत प्रेरित है। दिशा द्वारा बनाए गए परमपूज्य गुरुदेव और वंदनीय माता जी के चित्रों की भाई साहिब ने बहुत सराहना की है। यह चित्र चिन्मय भाई साहिब के DSVV office में सुशोभित हैं। महाशिवरात्रि के महान पर्व पर बेटी ने भगवान शिव का चित्र भी हमारे साथ शेयर किया। इस ऊर्जावान युवाशक्ति को हमारा ह्रदय से नमन और आशीर्वाद। 

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सेवानिवृत हिंदी शिक्षक डा. रजत कुमार षडंगी एक बहुत ही प्रतिभाशाली हिंदी कवि हैं। अभी कुछ समय पूर्व ही रजत जी ने हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को ज्वाइन किया और अपनी कुछ रचनाएँ शेयर कीं जिनमें से 2 रचनाएँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। भाई साहिब बड़ी ही सक्रियता से दैनिक ज्ञानप्रसाद में अपनी सहभागिता रिकॉर्ड करवाते हुए गुरुकार्य कर रहे हैं। परमपूज्य गुरुदेव सदैव अपनी अनुकम्पा रजत जी एवं उनके परिवार पर बरसती रहें। 

1.भारतीय अस्मिता की पहचान

वह था एक नरेन

अपनी प्रतिभा से प्रखर

बना विवेकानंद महान ,

भारत माता की योग्य संतान ।।

ओजस्वी वाणी से निकली

जिनकी देवसंस्कृति की 

कलकल ध्वनि

समूचे संसार में फैली

बसुधैव कुटुम्बकम् की

उदार वाणी

मानव मात्र अपने हैं

यही तो भारत के सपने हैं ।।

ज्ञानदान ही श्रेष्ठ दान

भारत है विश्वगुरु महान

सुनो सुनो दुनिया वालो

इससे ज्ञान की झोली भरलो,

भले ही गरीबी में जीती है

पर सर्व श्रेष्ठ इसकी संस्कृति है ।।

हम किसी को नहीं गिराते

सब को साथ लेकर चलते

गिरि कन्दराओं से हमारे

उठते हैं विचारों की लहरें

सादा जीवन ऊंचे विचार

त्याग में भोग का है सरोकार ।।

सुनी धरती सुना आसमान

दुनिया में फहरा 

संस्कृति का ध्वज भारत का जयगान ।।

भारतीय अस्मिता की पहचान

वह था एक नरेन

अपनी प्रतिभा से प्रखर

बना विवेकानंद महान ,

भारत माता की योग्य संतान ।।

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 2.हिंदी देश की शान है

हिंदी देश की शान है

करोडों की अरमान है

गरिमा का जयगान करो जितना 

कम होगा उतना

यह तो देश की पहचान है।।

शोषण के विरुद्ध लडनेवाली

स्वतंत्रता संग्राम की है यह बोली

प्यारे भारत न्यारे भारत के

जन जन को जोडनेवाली

भाषा निराली मतवाली ।।

भारत की है हृदय की भाषा

जग में जगाए नवल आशा

महान राष्ट्र की मधुर ममता

वितरित कर जग आंगन में

बने यह भारती 

भारत की राष्ट्र भाषा ।।

हिंदी देश की शान है

भारत का स्वाभिमान है ।।

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निशा भारद्वाज बहिन जी के विचार:

हिमाचल निवासी निशा बहिन जी ऑनलाइन ज्ञानरथ की एक समर्पित सहकर्मी हैं। बेटी प्रीति और बेटे अभिषेक को संस्कारित करने में इस माँ को नमन करते हैं। जब निशा जी अपने मायके गयी होती हैं तो कई बार इन बच्चों ने हमारे साथ संपर्क किया है। प्रस्तुत हैं निशा बहिन के विचार: 

आदरणीय डॉक्टर अरुण त्रिखा जी सादर प्रणाम गुरू कृपा से मेरा मेरी पूजा बहुत अच्छी चल रही है बीच बीच में बहुत अच्छे आभास भी हो रहे है चालीस दिन की पूजा मेरे लिए बहुत कठिन थी क्योंकि मेरे पति अजीब सा व्यवहार करते हैं। मेरी बुआ जी ने मुझे सलाह दो कि मैं इक़िकस दिन में अगर कर लूँ तो बेहतर रहेगा क्योंकि कई बार कहीं जाना भी पड़ सकता है तो प्रतिदिन के हिसाब से साठ माला कर लिया करो। अभी तक मेरे पति भी शांत है, बस गुरु जी से यही निवेदन है की सब कुछ ठीक ही हो। आदरणीय रजत कुमार जी और आदरणीय सरविंद जी से प्रेरणा पा कर मैंने यह संकल्प चार फ़रवरी को लिया था। मैं अपने इन दोनो गुरू भाइयों का तहे दिल से आभार प्रकट करती हूँ। सचमुच ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार की सदस्यता मिलने के बाद कायाकल्प हो गया है इसके लिए आपका बहुत-बहुत आभार। गुरुदेव की कृपा आप पर सदैव भी रहे। मै अपनी यह अनुभूति हवन करने के बाद share करना चाहती थी लेकिन तब तक इंतज़ार करना मुश्किल लग रहा है अपनी इस जल्दबाज़ी के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ जय गुरुदेव 

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 प्रेमशीला मिश्रा बहिन जी की अनुभूति:

प्रेमशीला बहिन लखनऊ क्षेत्र के गायत्री महिला मंडल में बड़ी ही सक्रियता से कार्यरत है। आजकल अक्टूबर 2022 के 108 कुंडीय यज्ञ के आयोजन में व्यस्त हैं। महिला मंडल की गतिविधियों से हमें अवगत कराती रहती हैं। प्रस्तुत है उनकी 2017 की अनुभूति: 

भाई जी प्रणाम – अति व्यस्तता के कारण आज का लेख अभी पढ़ा तो इतना ज्ञानवर्धक लगा कि मन हो गया कुछ लिखने का। गुरुदेव के अनुसार गायत्री कामधेनु तो है ही बस पात्रता की आवश्यकता होती है।

भाई जी 2017 अप्रैल में हमारी तबियत खराब थी, बीपी ठीक नहीं चल रहा था , शरीर में और भी दिक्कतें थीं, उसी समय हमारी महिला मंडल प्रमुख श्रीमती पूनम शर्मा शान्तिकुंज जा रही थीं उनका टिकट निकल चुका था और हम कानपुर में एक रिस्तेदारी में गये थे जहां पर मृत्यु भोज था। हमारे भाई ने हमें फोन किया और बोले पूनम शर्मा शान्तिकुंज जा रही हैं जाओगी तो हम बोले भइया तबियत ठीक नहीं है टिकट भी नहीं मिलेगा, उन्होंने ने कहा देख लो शायद मिल जाए, जाओगी तो तबियत ठीक हो जायेगी। हमनें अपने बेटे से कहा उसी डिब्बे में टिकट मिले तो करा दो। उसने देखा टिकट उन्हीं के सामने वाली सीट का मिल गया। हम चल पड़े, पतिदेव लखनऊ स्टेशन पर छोड़ने गये, बोले कैसे जाओगी, ध्यान रखना । हम हरिद्वार शान्तिकुंज पहुंचे, वहां प्रखर प्रज्ञा और सजल श्रद्धा पर माथा टेका और रात में सो गये। सुबह तीन बजे उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर साधना की, यज्ञ किया और जीजी के दर्शन करने गये। सब ठीक हो गया, पांच दिन रुके वहां। जब चले और हरिद्वार स्टेशन पर आये तो पूनम शर्मा के पति जो पेशे से डॉक्टर हैं उन्होंने कहा दीदी आप तो चमक रही हैं। आप कह रही थीं आपकी तबियत नहीं ठीक है। जब घर आये तो सभी ने कहा कि क्या बात है मम्मी तुम तो एकदम बदल गई हो। अब हम क्या बताते कि हमारे गुरुदेव और माताजी का आशीर्वाद है । हमने तो आपको पहले भी बताया था कि किस तरह हमारी बेटी की तबियत सुधरी थी । गायत्री मंत्र बहुत ही अद्भुत मंत्र है। बस ध्यान धारणा बन जाय तो। गुरुदेव ने हमें सच में कामधेनु सौंपी है ।अपनी बुद्धि में इतना ही समझ आया। धन्यवाद, जय गुरुदेव, जय माताजी। भाई जी हमारी गुड़िया अब थोड़ा आराम में है। आपको बहुत बहुत धन्यवाद गुडिया को ज्ञानरथ परिवार में शामिल करने के लिए धन्यवाद। 

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रेनू श्रीवास्तव बहिन जी की अनुभूति:

रेनू बहिन जी की सक्रियता ऑनलाइन ज्ञानरथ में किसी से छुपी नहीं है। कई बार गोल्ड मैडल जीत चुकी हैं। लखनऊ निवासी रेनू बहिन जी की छोटी बेटी अमेरिका में गत 10 वर्ष से settled है। इस प्रतिभाशाली माँ-बेटी के लिए जितना कहा जाये कम है। प्रस्तुत है अनुभूति: 

भाई जी सादर नमन

मैं गुरुदेव की कृपा की एक चमत्कारिक घटना का उल्लेख करना चाहूंगी। SK Srivastava भाई साहिब पुलिस विभाग के construction department में सहायक इन्जीनियर के पद पर लखनऊ में कार्यरत थे।गायत्री परिवार के समर्पित कार्यकर्ता हैं अब तो senior post से retire भी हो चुके हैं । प्रत्येक नवरात्रि में पांच कुण्डीय यज्ञ का संचालन करोना काल के पहले तक किया।

बात मेरे याद से 1993 की है जब लखनऊ में अश्वमेध यज्ञ का आयोजन हुआ था।एक दिन अचानक आफिस में ही उनके पेट में दर्द हुआ और वह बेहोश हो गये। इलाज के लिये जब P.G.I. Of Medical sciences ले जाया गया तो जाँच के बाद पता चला कि दोनों किडनी में पत्थरी थे। डाक्टर ने सलाह दी कि एक बार में निकालना संभव नही है, बारी बारी आपरेशन करना होगा।

थोड़ा ठीक हुए तो यज्ञ कार्य के लिये एक माह की छुट्टी के लिये apply किये पर उनके incharge ने leave sanction करने से मना कर दिया, पर उन्हे तो गुरुजी का कार्यं करना था अतः यह कहकर कि leave without pay कर दीजिये पर मैं जाऊँगा अवश्य , promotion को भी forgo कर दिया। उसके बाद एक माह तक अश्वमेध यज्ञ में कार्यरत रहे। इनकी पत्नी के कहा कि गुरुदेव का कार्य कर रहे हैं तो उनसे ही प्रार्थना करें कि आप ठीक हो जायें ताकि ऑपरेशन न करवाना पड़े। श्रीवास्तव जी ने उत्तर दिया कि जो कार्य डाक्टर का है उसके लिये गुरुजी तो क्यों कष्ट दें। यज्ञ कार्य सम्पन्न होने के बाद आपरेशन के लिये admit हुए, पर आश्चर्य की बात यह थी कि जब आपरेशन से पहले दुबारा टेस्ट हुआ तो पथरी गायब थी । डाक्टरों ने अस्पताल से छुट्टी दे दी। उन्हे विश्वास नहीं हुआ। वह डाक्टर गायत्री शर्मा जो डा.ओ.पी. शर्मा की पत्नी हैं, के पास गए। यह दम्पति शांतिकुंज में पिछले कई वर्षों से जीवनदानी हैं। वह उस समय लखनऊ मे D.G.health services थीं उनके पास गये और कहा कि मेरे दोनो किडनी में पत्थरी थी अब डाक्टर कह रहे हैं नहीं है। कृपया दीदी आप अपने सामने x-ray निकाल कर देख लें। इस बार भी कुछ नहीं निकला, पर उन्हें विश्वास नही हुआ कि बिना इलाज पत्थरी गायब कैसे हो सकती है।उसके बाद भी संतोष नहीं हुआ तो एक बार फिर प्राइवेट सेन्टर में जाकर रंगीन x-ray निकलवाया ।यहाँ भी वही रिजल्ट। गुरुदेव ने ऐसे कितनों को रोगमुक्त किया। इसे गुरू का चमत्कार कहें या गुरु पर विश्वास। धन्य हैं हमारे गुरु, चरणों में कोटि कोटि नमन। 

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संजना बेटी की भावना:

हमारी सबकी प्रिय संजना बेटी जवाहर नवोदय residential विद्यालय की विद्यार्थी है। मम्मी पूनम जी बेटी को स्कूल में मिल कर आयी हैं और उसने ऑनलाइन ज्ञानरथ के लिए अपने भाव भेजे हैं। उसने तो हमें फ़ोन करने की इच्छा व्यक्त की थी लेकिन उस समय हमारे यहाँ कनाडा में सुबह के 4:30 बजे का समय था। हम तो 4 बजे उठ जाते हैं लेकिन घर में दूसरों को डिस्टर्ब नहीं कर सकते। 

प्रणाम सर,जय गुरुदेव। हम संजना, हम ठीक हैं सर आप कैसे हैं ? अब कुछ-कुछ वीडियो और देखे बहुत,अच्छा लगा आप सबकी प्रेरणा हमें मिलती रहती है। सचमुच ऑनलाइन ज्ञानरथ से हम सभी का आत्मीय संबंध है और इसका अनुभव तब होता है जब हम दूर होते हैं, तब आपके द्वारा बरसाए गए प्यार और आशीर्वाद की ताकत समाज आती है। हमारे जीवन में आने के लिए धन्यवाद।

हमारे प्रिय और आदरणीय सर ,जय गुरुदेव 

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इति श्री 


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