कल वाले लेख में सभी साथिओं ने अपने जीवन के उत्कृष्ट उदाहरण देकर सरविन्द भाई साहिब के परिवार का मार्गदर्शन किया लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न: जिस परिवार के लिए इतने घंटों का समयदान, श्रमदान, विवेकदान और यहाँ तक कि जीवन के दुर्लभ “अनुभव-दान” तक देने में भी कोई कंजूसी नहीं की, उस परिवार के किसी भी सदस्य की कोई प्रतिक्रिया देखने को न मिली।
आज का ज्ञानप्रसाद भी इसी परिवार के पांचों सदस्यों की अनुभूतिओं का प्रकटीकरण कर रहा है,शब्दसीमा की बेड़ियाँ यहीं पर रोक रही हैं।
जय गुरुदेव
1.सरविन्द कुमार पाल
बसंत पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं है, यह चेतना के नवोन्मेष, जीवन में उल्लास और आत्मिक जागरण का दिव्य अवसर है। इसी पावन बसंत पर्व पर जब हम अपने जीवन की यात्रा पर दृष्टि डालते हैं, तो अंतःकरण से एक ही अनुभूति उभरकर आती है कि
“यह सब परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की दिव्य कृपा दृष्टि का ही प्रतिफल है।”
गुरुदेव की अनुकंपा से ही हमें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि हमारा पूरा परिवार दीक्षित है। सारा परिवार जीवन को केवल भोग की नहीं, योग और यज्ञ की प्रक्रिया के रूप में जीने का सतत प्रयास कर रहा है। परिवार के प्रत्येक सदस्य में कर्त्तव्यबोध, संयम, सेवा और संस्कारों के प्रति निष्ठा, लगन, श्रद्धा-विश्वास और समर्पण का समावेश है।
गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलते हुए हम अपने व्यक्तिगत परिवार का कुशल नेतृत्व कर पाने में सक्षम हो पाए हैं। यह नेतृत्व किसी अधिकार या अहंकार पर आधारित नहीं, बल्कि त्याग, संवाद, सह-अनुभूति और उदाहरण के माध्यम से विकसित हुआ है। गुरुदेव ने सिखाया है कि
परिवार ही समाज निर्माण की प्रथम प्रयोगशाला है और उसी प्रयोगशाला में हम स्वयं को गढ़ते रहे हैं।
जीवन में आर्थिक चुनौतियाँ, मानसिक दबाव, सामाजिक संघर्ष आदि कई विषम परिस्थितियां आईं लेकिन गुरुदेव के दिव्य विचारों ने हमें कभी टूटने नहीं दिया।
परिस्थितियाँ नहीं, हमारी प्रतिक्रिया हमारा भविष्य तय करती है।
यह दिव्य सूत्र हमारे जीवन का आधार बन गया। इसी कारण हम हर परिस्थिति का सामना सहर्ष, धैर्य और श्रद्धा के साथ कर पा रहे हैं।
हमारा परिवार केवल अपने तक सीमित नहीं रहा। पूज्यवर की दिव्य प्रेरणा व मार्गदर्शन से हम लोकमंगल के दिव्य कार्यों में सेवा, जागरूकता और श्रमशीलता में यथाशक्ति संलग्न हैं। हमें यह स्पष्ट बोध है कि साधना का प्रमाण सेवा में है और उपासना का विस्तार समाज तक पहुँचना चाहिए।
बसंत पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि जिस प्रकार प्रकृति में नवपल्लव फूटते हैं, वैसे ही मानव जीवन में भी विचारों का बसंत आना चाहिए। आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के सामुहिक आशीर्वाद से हमारे जीवन में यह बसंत निरंतर बना हुआ है, यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
परम पूज्य गुरुदेव के दिव्य चरणों में विनम्र प्रार्थना है कि हमें सही दिशा, शुद्ध नीयत और अखंड पुरुषार्थ की दिव्य शक्ति अनवरत मिलती रहे और हमारा परिवार गुरुदेव के स्वप्न “युग निर्माण” का एक छोटा किंतु सशक्त माध्यम बनता रहे।
धन्यवाद। जय गुरुदेव
2.आयुष कुमार पाल
बसंत पर्व जीवन में आशा, नवचेतना और विश्वास के अंकुर फूटने का दिव्य पर्व है और इसी दिव्य पावन अवसर पर हम अपने जीवन की ऐसी अनुभूति साझा कर रहे हैं, जिसने हमारे अंतःकरण में परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के प्रति श्रद्धा-विश्वास और समर्पण को और अधिक दृढ़ कर दिया है।
10 नवंबर 2025 को बीसीसीआई बोर्ड के निर्देश अनुसार अंडर-16 टीम के चयन हेतु मेडिकल टेस्ट के लिए हमें पांडिचेरी जाना पड़ा। 12 नवंबर को टेस्ट हुआ और ओवरएज होने के कारण चयन न हो पाया। हमारे साथ कानपुर से एक व रायबरेली से तीन लड़के भी ओवरएज घोषित कर दिए गए। लेकिन मन में कोई भी निराशा नहीं थी क्योंकि गुरुदेव कहते हैं: “फल नहीं, पुरुषार्थ ही हमारा परम धर्म है।”
उसी दिन शाम को सब वापसी यात्रा के लिए विल्लूपुरम स्टेशन से चेन्नई स्टेशन के लिए चल पड़े, वहीँ से कानपुर के लिए रात 11:35 की ट्रेन थी। यात्रा के दौरान अचानक क्लब संचालक महोदय ने फ़ोन करके तत्काल वापस आने को कहा। 8:30 बजे हम चेन्नई स्टेशन पँहुच गए थे, लेकिन 11:20 पर फिर विल्लूपुरम वापिस आ गए।
हमने आद सरविन्द जी से इस यात्रा के विवरण को समझने का प्रयास किया था लेकिन जो है आपके समक्ष रख दिया है।
महत्व निम्नलिखित का है :
बेटे आयुष की आयु 15 वर्ष है और वह बता रहा है कि नई जगह, नई भाषा, नया परिवेश और अर्द्धरात्रि का समय, स्वाभाविक था कि परिवार चिंतित होगा लेकिन हमारे अंतःकरण में अद्भुत शांति और विश्वास था। हमने अपने गुरुदेव को मन ही मन स्मरण किया और उनके निर्देशों पर चलते हुए उचित निर्णय लिया और रात में ही उसी समय हमने स्वयं अपने क्लब संचालक महोदय जी से बात किया और उनके मार्गदर्शन में आटो द्वारा सुरक्षित अपने गंतव्य स्थान तक पहुँच गए। पूरी यात्रा में कहीं भी किसी प्रकार का कोई भय, घबराहट या असुरक्षा का अनुभव नहीं हुआ। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो कि कोई अदृश्य शक्ति हमारा मार्गदर्शन और संरक्षण कर रही हो। उस रात हमें प्रत्यक्ष अनुभूति हुई कि “परम पूज्य गुरुदेव केवल विचार नहीं हैं, वे चेतना हैं। वे केवल मार्गदर्शक नहीं, साक्षात महाकाल का करुणामय स्वरूप हैं।”
हम प्रतिदिन नियमिततापूर्वक परम पूज्य गुरुदेव द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का हर संभव प्रयास करते हैं और उपासना, साधना व आराधना और मंत्र लेखन हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। उसी दिव्य साधना का यह फल था कि विषम परिस्थिति में भी हमारा मन स्थिर रहा और गुरुदेव का सुरक्षा कवच हमारे चारों ओर सक्रिय रहा।
बसंत पर्व के पावन अवसर पर हम नतमस्तक होकर कहना चाहते हैं कि गुरुदेव साक्षात महाकाल हैं और जिनके सिर महाकाल का हाथ होता है, उनका कभी अमंगल नहीं हो सकता है। विश्वास, अनुशासन और साधना ही जीवन की सच्ची सुरक्षा है। गुरुदेव से विनम्र प्रार्थना है कि वह हमें सदैव सही दिशा, विनम्रता और साहस प्रदान करें ताकि हम क्रिकेट के साथ-साथ अपने जीवन को युग निर्माण के संकल्प में अर्पित कर सकें। खेल में हमें असीम ऊर्जा मिले, खेल जगत में इंटरनेशनल स्तर तक पहुँच कर अपना और अपने परिवार का नाम रोशन करें। हमें पूर्ण विश्वास है कि परम पूज्य गुरुदेव एक दिन हमें इंटरनेशनल खिलाड़ी बनाएंगे, समय कुछ भी लग जाए।
3.पिंकी पाल
हमारे जीवन में हमारे पिता जी ही हमारा संसार है। वह केवल हमारे पालनहार नहीं, बल्कि हमारी ढाल, हमारा विश्वास और हमारा मौन त्याग हैं। हमारी हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने सुख-चैन, शौक और शानो-शौकत को सहर्ष त्याग दिया और निस्वार्थ भाव से अपना संपूर्ण जीवन हम भाई व बहनों के उज्जवल भविष्य के लिए अर्पित कर दिया।
बसंत पर्व पर हम अनुभव कर रहे हैं कि हमारे पिता जी के त्याग के पीछे परम पूज्य गुरुदेव का सूक्ष्म संरक्षण व दिव्य सानिध्य एक अदृष्य शक्ति बनकर कार्य कर रही है जिसका लाभ हम सबको अनवरत मिल रहा है। गुरुदेव की दिव्य कृपा दृष्टि हम बच्चों पर एक सुरक्षा कवच के रूप में अनवरत बरस रही है जो हमें गलत मार्ग से बचाती है, कठिन समय में संबल प्रदान करती है और जीवन में सही दिशा की ओर अग्रसर करती है।
गुरुदेव के दिव्य चरणों में प्रार्थना है कि वे हमारे पिता जी को दीर्घायु, स्वास्थ्य और शांति प्रदान करें और हम सबको हमेशा ऐसा जीवन जीने की प्रेरणा दें जो परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बन सके।धन्यवाद, जय गुरुदेव
4.अनुराधा पाल
मेरे पापा मेरे जीवन का वह सहारा हैं, जिनके बिना मेरी दुनियां अधूरी सी लगती है और वह अपने दर्द को कभी जाहिर नहीं करते, लेकिन हर पल मेरी खुशी के लिए जीते हैं। उनकी खामोशी में भी प्यार छुपा होता है और उनकी डांट-फटकार में भी मेरी भलाई। मेरे पापा ने मुझे चलना सिखाया, गिरने पर उठना सिखाया और सबसे जरूरी बात-हार न मामना सिखाया। जब पूरी दुनिया साथ छोड़ दे,पापा का भरोसा मेरे साथ खड़ा रहता है। मेरे पापा ने अपनी जरूरतों को पीछे रखकर, मेरे सपनों को आगे बढ़ाया है और आज जो भी मैं हूँ, उसमें उन्हीं का त्याग, मेहनत और आशीर्वाद शामिल है। इसका संपूर्ण श्रेय आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का है जिसके सारथी परम पूज्य गुरुदेव हैं जिनका सूक्ष्म संरक्षण व दिव्य सानिध्य हम सब पर अनवरत बरस रहा है और उनका सुरक्षाकवच काम कर रहा है। हमारे पापा, हमारे लिए सिर्फ हमारे पिता नहीं, बल्कि हमारे हीरो, हमारे दोस्त और हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। गुरुदेव से बस यही दुआ है कि हमारे पापा स्वस्थ रहें, मस्त रहें और खुश रहें धन्यवाद। जय गुरुदेव
5.मीरा पाल की अनुभूति:
हमारे जीवन में अनेकों ऐसे क्षण आए कि जब परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं थीं, लेकिन हर बार ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो कोई अदृश्य दिव्य शक्ति हमें भीतर से संबल दे रही हो और वह शक्ति, वह विश्वास, वही परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य करुणा है। हम पढ़ी-लिखी नहीं हैं, पर बसंत की तरह ही हमारे जीवन में भी जागृति और आशा का संचार गुरुदेव की दिव्य कृपा दृष्टि से हुआ है। संघर्ष, अभाव और कठिन परिस्थितियों में जब जीवन शुष्क लगने लगता था, तब गुरुदेव की दिव्य दृष्टि बसंत बनकर हमारे जीवन में आई। जीवन की दिव्य पाठशाला में परम पूज्य गुरुदेव ने हमें बहुत कुछ पढ़ा दिया है। हम नियमित पूजा-पाठ तो नहीं कर पाते हैं, लेकिन हमारा विश्वास, हमारी निष्ठा और हमारी कर्मशीलता गुरुदेव के दिव्य चरणों में समर्पित है। हम दरिद्रता को नहीं, परिश्रम और स्वावलंबन को पूजते हैं। घर को नियमित स्वच्छ रखना, परिवार को संगठित कर एक सूत्र में बांधना, हर विषम परिस्थितियों में अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना, हम इसे अपना गृहस्थ धर्म मानते हैं। कभी-कभार विषम परिस्थितियों में भटक जाती हूँ और क्रोध भी बहुत आ जाता है लेकिन गुरुदेव की कृपा से बहुत जल्द नियंत्रण में भी आ जाती हूँ।
बसंत पर्व पर अनुभव करते हैं कि हमारे अंतःकरण में जो आत्मबल, धैर्य और सजगता है, वह परम पूज्य गुरुदेव की ही दिव्य प्रेरणा है। हमारे जीवन का हर छोटा प्रयास बसंत की एक नई कली की तरह आशा और विश्वास से भरा है। आज जो भी सामर्थ्य धैर्य और आत्मबल हमारे भीतर है, वह सब परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य कृपा दृष्टि का ही प्रतिफल है। मैं नमन वंदन और अभिनन्दन करती हूँ, उस शक्ति को जो मुझे हर दिन चुपचाप मजबूत बनाती है। हे गुरुदेव! जैसे बसंत सूखे वृक्षों में नवजीवन भर देता है, वैसे ही आपकी कृपा हमारे गृहस्थ जीवन को सदा पुष्पित और पल्लवित करती रहे और आपका हाथ आशीष के रूप में सदा हमारे परिवार के सिर पर बना रहे, यही हमारी मौन प्रार्थना है। परम पूज्य गुरुदेव से विनम्र स्वर में बस एक ही निवेदन है कि तीनों बच्चों का भविष्य उज्जवल करें, जिससे दुनिया में उनका नाम रोशन हो। धन्यवाद, जय गुरुदेव
कल एक और ज्ञानप्रसाद लेख आपके ध्यान की प्रतीक्षा कर रहा है।