वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

“अपने सहकर्मियों की कलम से” का 11 अक्टूबर 2025 का विशेषांक 

https://www.facebook.com/share/v/17RzW6tqV8/ (तेरे साथ तेरी माँ जो है )

https://archive.org/details/pita-ji-ki-pustak (पिताजी की पुस्तक की साथिओं ने भी सराहना की )

हमारे समर्पित साथी इस तथ्य से भलीभांति परिचित हैं कि प्रत्येक शनिवार वाला अंक हमारे लिए एक बहुत बड़ी चुनौती लेकर आता है। साथिओं द्वारा भेजे गए सन्देश,वीडियोस,संकेत आदि लेकर एक डाक बाबू की भूमिका निभानी होती है, एक समर्पित गृहिणी की भूमिका निभानी होती है जो दाल चावल के एक-एक दाने को चुन कर पत्थर-कंकड़ आदि निकाल कर ऐसी उत्कृष्ट रेसिपी प्रस्तुत करती है जिससे  परिवारजनों के पेटभरण के साथ-साथ आत्मा भी  तृप्त  होती है, एक अभिभावक की भूमिका निभानी होती है कि  परिवार के किसी भी सदस्य को यदि कोई समस्या आ रही हो तो  उसका समाधान करना होता है, एक अनुशासित नौकर की भांति सभी कार्य ऐसी श्रद्धा और समर्पण के साथ सम्पन्न करने होते हैं कि  किसी भी सहकर्मी की भावना आहत न हो,कोई अपशब्द न लिखा जाये, इस बात का भी ख्याल रखना होता है कि यदि अनजाने  में भी कुछ गलत लिखा गया हो तो क्षमा याचना करनी होती है, माह के पहले  तीन शनिवारों  में व्यक्तिगत बात लिखने का परहेज़ किया जाए क्योंकि साथिओं ने सम्मानपूर्वक अंतिम शनिवार तो पूर्णतया हमें  दिया ही हुआ है। 

तो इन सभी सावधानियों का पालन करते हुए Sequence Wise आज के विशेषांक की ओर चलते हैं। 

आज के Sequence में सबसे पहली पायदान पर हमारे आद अरुण वर्मा जी,आद सरविन्द जी,आद संध्या जी और आद मंजू मिश्रा जी के व्हाट्सप्प मैसेज हैं जब उन्होंने डॉ सुधांशु जी की वीडियो व्हाट्सप्प पर न पोस्ट करने के लिए सूचित किया था। आदरणीय सुमनलता जी का  कमेंट स्मरण हो आया जब उन्होंने हमारे रात दिन/सोने जागने आदि की चर्चा की थी। रात को बाथरूम जाने के लिए उठे तो यह सन्देश देखते ही हमने अपनी तरफ से व्हाट्सप्प पर वीडियो पोस्ट कर दी लेकिन सुबह आँख खुलने पर ही पता चला कि यह ग्रुप में पोस्ट नहीं हुई थी। उस दिन भी सुमनलता जी ने यही कहा था कि अगर व्हाट्सप्प पर नहीं भी आती है तो यूट्यूब पर होगी ही, वहीँ देख लिया करें। हम समझ सकते हैं कि साथिओं ने हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब नहीं किया हुआ है, यदि किया हो तो हमारी ओर से पोस्ट होते ही उन्हें  नोटिफिकेशन आनी चाहिए, ऐसा भी हो सकता है कि सब्सक्राइब तो किया होगा लेकिन नोटिफिकेशन Turned off हो यां नोटिफिकेशन की Volume down हो, जो भी हो एयरलाइन्स की भाषा में इतना ही कह सकते हैं: असुविधा के लिए खेद है, क्षमाप्रार्थी हैं। 

Sequence की दूसरी पायदान पर भी वीडियो की ही बात है। बात करनी है वीडियो से सम्बंधित प्राप्त हुए कमेंट पर। डॉ सुधांशु त्रिवेदी जी की वीडियो में, नीचे Scroll  होता सन्देश बता रहा था कि “विचारों पर चिंतन हेतु दर्शक पूर्णतया स्वतंत्र हैं” लेकिन दीपज्योति नामक ID से कमेंट “Stop posting political- – -” एक पुलिसमैन की भावना व्यक्त कर रहा था। साफ़ दिख रहा था कि भाई साहिब के पास  मात्र 11 मिंट की वीडियो देखने का समय तो है नहीं लेकिन दूषित भावना फैलाकर वाहवाही लूटने की प्रवृति अवश्य है। ऐसे कभी कभार आने वाले पर्यटकों को ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मानवीय मूल्यों का ज्ञान कैसे हो सकता है? हमने उनके दोनों ही कमेंट डिलीट करके,चैनल को ब्लॉक कर दिया है लेकिन साक्षात् दिख रहा है कि मानसिकता क्या है। डॉ सुधांशु जी, शिवराज चौहान जी, रविशंकर प्रसाद जी आदि सभी राजनेता हमारे रिश्तेदार तो हैं नहीं लेकिन ज्ञान कहीं से भी मिले उसे शीश नवा कर ग्रहण करने में ही समझदारी है। राजनेता, वैज्ञानिक(जिन्हें अक्सर नास्तिक समझा जाता है), बच्चे, युवा आदि कई बार  ऐसा ज्ञान दे जाते हैं जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर पाते। आप किसी भी राजनैतिक पार्टी से जुड़े हों, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन जिस प्रकार आप अपनी पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं, हमारा भी अपने गुरु के प्रति निष्ठावान होना परम कर्तव्य बनता है।   

तीसरी पायदान पर आद पूजा सिंह जी का बहुत दिनों बाद पोस्ट हुआ कमेंट है जिसे अनेकों ने पढ़ा होगा। बहिन जी ने हमें Messenger of Gurudev कहकर सम्बोधित किया था, इस संदर्भ में हम बार-बार कहा हुआ वाक्य फिर से दोहराना चाहेंगें कि हम तो गुरुदेव के बहुत ही निम्न स्तर के, तुच्छ से नौकर, दास, सेवक हैं। हमारा सौभाग्य है कि गुरुदेव हमें कान पकड़ कर, डाँट डपट कर हमसे वोह कार्य करवा रहे हैं जिसमें (उन्होंने देखा) हम 5-6 दशक से विद्यार्थी हैं, एक ऐसे विद्यार्थी जिसकी ज्ञान के प्रति तृष्णा बढ़ती ही जा रही है, हमारी अज्ञानता इस तथ्य से भी अनजान बनाए हुए है कि ज्ञान तो अनंत है।  गुरुदेव से सम्बंधित जब भी कोई लेख लिखते हैं, पढ़ते हैं,गायत्री मंत्र लेखन करते हैं,वीडियो आदि बनाते हैं, कमेंट करते हैं, काउंटर कमेंट करते हैं तो उस दिन की रील एकदम रिवाइंड हो जाती है जब तख़्त पर बैठे उस फकीर गुरु ने वर्षों पूर्व हम दोनों पर कृपा बरसाई  थी। 

“अहंकार” आधारित लेख पढ़कर पूजा बहिन जी ने अपने दिल की बात खोल कर बताई,हमारे समेत कुछ साथिओं ने कमेंट करके ऐसे सहयोग किया जैसे कोई अपना ही, परिवार का सदस्य हो। यही है “ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार” में परिवार की परिभाषा। यह ज्ञानप्रसाद लेखों की ही शक्ति है कि गुरुज्ञान किसी का भी ह्रदयपरिवर्तन करने में सक्ष्म है। गुरुदेव को सभी का पता है, किसको किस समय परिवार में लाना है, उससे क्या कुछ करवाना है, किसको परिवार से बाहर करना है क्योंकि उनका तो सन्देश ही बहुत सिंपल है: तू मेरा कार्य कर,मैं तेरा न करूँ फिर कहना।” हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमें  ऐसा गुरु मिला जो खाने को एक तरफ छोड़ कर हमें कंधे पर उठाकर हॉस्पिटल ले जाने वाला है। 

यह सभी पंक्तियाँ आद पूजा बहिन जी के लिए लिखी हैं,गुरुदेव ने उनकी डोर पकड़ी हुई है तभी तो वह इस परिवार से जुड़ी  हैं। आशा करते हैं कि वोह इन पंक्तियों को पढेंगीं, अगर नहीं भी पढ़ें तो अन्य कोई जो भी पढ़ेगा,उसके परिवार में प्रकाश की किरण अवश्य उदय होगी। 

चौथी पायदान  हमारे सबके प्रिय आद अरुण वर्मा जी से सम्बंधित है। हमने  भाई साहिब को व्हाट्सप्प पर सुझाव दिया कि हम आपके साथ हुए कायाकल्प को “सुरभित स्मृतियाँ” जैसी वीडियो बनाने में दिलचस्पी रखते हैं। भाई साहिब ने एकदम रिप्लाई किया कि  भैया जी उसके लिए तो लिखना पड़ेगा, हमने भी रिप्लाई कर दिया कि ठीक आप लिखिए लेकिन हमें क्या मालुम था कि  अरुण जी जैसे श्रद्धालु भक्त उसी समय लिखना शुरू कर देंगें। जब  उन्होंने हमें लिखकर कुछ भेज दिया एवं अभी भी लिख रहे थे तो हमने देखा कि भारत में 12:45 का समय था। हमने  उसी समय उन्हें मैसेज किया कि अभी के अभी सो जाइए, आप सुबह भी बहुत ही जल्दी जाग जाते हैं, काम पर भी जाना है। यह तो हुई उस दिन की बात। हमें शंका  थी कि कहीं अरुण जी इस सारे कंटेंट की एक बहुत बड़ी सी वीडियो बनाना न शुरू कर दें। हमने उन्हें फ़ोन करने को कहा। सोने से पहले लगभग 10 बजे उनका फ़ोन आया, हमने वीडियो क्वालिटी, बैकग्राउंड नॉइज़, ग्रीन स्क्रीन आदि की बातें की लेकिन अरुण जी इतने उत्सुक थे कि कहने लगे भैया  जी इसमें तो बहुत समय लग जायेगा, अगले शनिवार को कहीं जाना है और उससे अगले शनिवार धन तेरस है, ऑफिस फिर से व्यस्त होगा। तो हमने उन्हें इस विषय को अल्प विराम देते हुए इतना ही कहा कि अब आपको सो जाना चाहिए और जब भी समय मिलेगा, इस कार्य को पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण से करना उचित रहेगा। 

हमारे साथिओं को स्मरण हो आया होगा कि प्रत्येक वर्ष गुरुदेव के  आध्यात्मिक जन्म दिवस पर हमारे साथी अपनी स्मृतियाँ लिखते हैं,यह उसी तरह का ऑडियो/वीडियो फॉर्म में प्रयास है। 

टेक्नॉलजी के युग में अगर Survive करना है तो थोड़ा-थोड़ा सीखना बहुत ही लाभदायक है। औरों को तो हम देख नहीं सकते लेकिन गुरुकुल की ही विद्यार्थी आदरणीय नीरा जी ने पिछले कुछ ही समय में जितना सीखा है वह आश्चर्यजनक, अविश्वसनीय किन्तु सत्य है।

हमें विश्वास है कि अरुण जी के प्रयास से और भी साथिओं को प्रेरणा मिलेगी। 

अगली पायदान पर हमारी आद बहिन पुष्पा सिंह से सम्बंधित अपडेट है ,जब हम यह पक्तियां लिख रहे है तो बहिन जी ट्रेन   में यात्रा करते हुए शांतिकुंज जा रही हैं। वह नौ दिवसीय और 1 माह युग शिल्पी सत्र में भाग लेंगीं, उन पर गुरुकृपा बनी रहे, परिवार की यही सामूहिक कामना है।  

आज के इस स्पेशल सेगमेंट की अंतिम पायदान पर हम साथिओं के साथ हमारे पिताजी की पुस्तक के सम्बन्ध में पोस्ट हुए केवल ज्ञानरथ परिवार के ही कमेंटस  शेयर कर रहे हैं। कमैंट्स को देखकर साक्षात् देखा जा सकता है कि एक तरफ तो ऐसे साथी हैं जिनके पास “जय गुरुदेव” से अधिक लिखने का समय नहीं है और दूसरी तरफ वोह साथी हैं जिन्होंने अपना ह्रदय ही निकाल कर रख दिया हो ,सभी का बहुत बहुत धन्यवाद् एवं नमन। 

इन्हें शेयर करने में सतर्कता एवं सावधानी  की भावना है कि कहीं कोई यह न समझ ले कि यह कोरी विज्ञापनबाजी है, ऐसा हरगिज़ नहीं है, एकमात्र उद्देश्य मार्गदर्शन,शिक्षा एवं प्रेरणा ही है जो हर किसी के भाग्य में नहीं होती । सारा  ब्रह्माण्ड ज्ञान से भरा पड़ा है लेकिन अभागों को एक बूँद भी नसीब नहीं होती। 

इसी के साथ आज के  स्पेशल सेगमेंट का समापन होता है। 

जय गुरुदेव, धन्यवाद् 

सभी की सुखशांति के लिए कामना                                           


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