8 जुलाई 2024 का ज्ञानप्रसाद
सप्ताह के प्रथम दिन, सोमवार को गुरुचरणों में समर्पित होकर,आदरणीय डॉ ओ पी शर्मा जी द्वारा लिखित पुस्तक “अज्ञात की अनुभूति” पर आधारित लेख शृंखला के आठवें अमृतपुष्प की दिव्य वर्षा हो रही है। हम बार-बार कहते आ रहे हैं कि डॉ साहिब द्वारा रचित इस ज्ञान के अथाह सागर में से अमूल्य रत्न ढूंढ कर लाना किसी अमृत-मंथन से कम नही है। हर एक पन्ना, हर एक पंक्ति, हर एक शब्द ऐसा कुछ संजोए हुए है कि हमारे लिए उसे मिस करना संभव नहीं है।
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समर्पित साथिओं के लिए इससे बड़ा सौभाग्य कोई हो ही नहीं सकता कि डॉ साहिब की इस रचना से हम (विशेषकर वोह परिजन जिन्हें गुरुदेव के साक्षात् दर्शन न हो पाए ) स्वयं गुरुदेव का सानिध्य अनुभव कर रहे हैं।
आज के लेख में जिस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का वर्णन किया गया है, गायत्री परिजनों ने अनेकों स्थानों पर पढ़ा होगा, हमने भी पढ़ने के साथ-साथ गूढ़ रिसर्च भी की थी लेकिन डॉ साहिब द्वारा दी गयी इस जानलेवा घटना की जानकारी बहुत ही विस्तृत है। हम तो आदर सम्मान में नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सकते।
इस लेख को लिखते समय सुरक्षा गार्ड भीम सिंह जी की पिक्चर आँखों के आगे घूम गयी।
तो आइए नमामि शमीशान के साथ आज की गुरुकक्षा के साथ शुभारम्भ करें, गुरुदेव की रेगुलर संदेशात्मक वीडियो तो है ही।
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हमलावर को जीवनदान:
8 जनवरी 1984 को शान्तिकुञ्ज के ऊपर वाले कमरे में किसी मनचले ने पूज्य गुरुजी पर प्राणघातक हमला किया। उसी दिन हम प्रात: लगभग 8.00 बजे शान्तिकुञ्ज से लखनऊ वापस आ गये थे। दिन में लगभग 3:00 बजे मेजर खरे जी ने फोन पर परम पूज्य गुरुदेव जी के हाथ पर चोट लगने की सूचना दी, विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। सायंकाल लगभग 7:00 बजे आदरणीय श्री मृत्युञ्जय शर्मा जी एवं आदरणीय पं. लीलापत शर्मा जी, ए- 201,लालबाग, ऑफिसर्स कॉलोनी में पधारे। बिना किसी पूर्व प्रोग्राम के दोनों के दर्शन पाकर हमें बहुत ही ख़ुशी हुई । थोड़ी देर के बाद सारे घटनाक्रम पर चर्चा हुई। घटना दोपहर लगभग 2:00 बजे घटी थी, जब एक शातिर कुख्यात ने परम पूज्य गुरुदेव पर जानलेवा हमला किया था। रात लगभग 10:00 बजे हम स्वयं मुख्यमन्त्री उ.प्र. श्री श्रीपति मिश्र के सरकारी निवास पर, भेंट एवं घटनाक्रम की सूचना देने और उचित कार्यवाही हेतु पहुँचे। उस समय उनके पास उ.प्र. पुलिस के डायरेक्टर जनरल श्री एस.सी. दीक्षित बैठे थे। घटनाक्रम की सारी जानकारी सुनते ही माननीय मुख्यमन्त्री जी का मुख खुला का खुला रह गया। माननीय मुख्यमन्त्री जी ने कहा, “डॉ. साहब हम पूरी कार्यवाही करेंगे और आरोपी पकड़ा जायेगा।” उसी समय 10 मिनट के अन्दर ही सारे उ.प्र. में रेड अलर्ट की घोषणा हो गयी । सहारनपुर कमिश्नरी के आयुक्त एवं डी.आई.जी. श्री त्रिपाठी जी को विशेष सतर्कता बरतने और शान्तिकुञ्ज की विशेष शासकीय व्यवस्था करने का आदेश हो गया ।
दूसरे दिन लखनऊ सचिवालय एनेक्सी में मुख्यमन्त्री, कार्यालय में अग्रिम कार्यवाही हेतु पहुँचे और डायरेक्टर जनरल,दीक्षित जी के सुझाव पर पूर्व चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर श्री जे. पी. त्रिपाठी को घटनाक्रम की जाँच करने के लिए भेजने का सुझाव दिया। मुख्यमन्त्री जी ने सुझाव को स्वीकार किया और जाँच का शासकीय आदेश जारी किया ।
लगभग तीन दिन बाद श्री त्रिपाठी जी हरिद्वार आये, जो उस समय सहारनपुर जिले में था। सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री पाण्डेय जी ने रेलवे स्टेशन पर श्री त्रिपाठी जी को रिसीव किया तथा परम पूज्य गुरुदेव का दर्शन एवं आशीर्वाद लेकर घटनाक्रम को अच्छी तरह समझकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारी कोतवाली, हरिद्वार पहुँचे। श्री शैलेंद्र भारद्वाज हरिद्वार कोतवाली में सब-इन्सपेक्टर पुलिस थे । विशेष रूप से इस जाँच हेतु अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनको यह जिम्मेदारी दी गयी।
उस कुख्यात हमलावर ने परम पूज्य गुरुदेव के ऊपर पाँच बार रिवाल्वर से गोलियाँ चलाई। लेकिन वे रिवाल्वर की नली में ही उलझकर रह गयीं। तब परम पूज्य गुरुदेव ने कहा, “यह क्या करता है?” वह घबरा गया, रिवाल्वर वहीं गिर गया, तब उसने छुरे से पेट और सिर पर प्रहार किया । पूज्य गुरुदेव जी ने दाहिना हाथ बचाकर (क्योंकि उससे उन्हें लेखन करना होता था) अपने बाएँ हाथ पर सारा वार ले लिया। सारे वार तिरछे हो गये। तब परम पूज्य गुरुदेव ने कहा, “अब भाग जाओ।” इस तरह हत्यारे को जीवनदान दे दिया। वह भागकर निकल गया। लोगों ने पीछा किया लेकिन पकड़ नहीं पाए ।
कोतवाली में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ शान्तिकुञ्ज के प्रतिनिधि के रूप में हम भी उपस्थित थे। रिवाल्वर की सील तोड़ी गयी और अधिकारियों जांचा परखा । पाँच गोलियाँ नली में उलझ गयी थीं। पाँच बार अलग-अलग चली थीं, दो और बची हुई थीं। रिवाल्वर को बाद में सील किया गया एवं उसी स्थिति में मुरादाबाद बैलिस्टिक एक्सपर्ट को जाँच के लिए भेज दिया गया । लोकल बनी हुई रिवाल्वर बिलकुल ठीक थी, जो दो गोलियाँ बची थीं, वहाँ चल गयीं। पाँच गोलियाँ क्यों नहीं चलीं, यह सारे अधिकारियों के लिए एक आश्चर्य का विषय बन गया ।
कुख्यात हत्यारे को प्रकृति ने दण्ड दिया :
करुणा की मूर्ति परम पूज्य गुरुदेव ने तो हत्यारे को क्षमा कर दिया लेकिन प्रकृति ने दण्ड दे ही दिया। वाराणसी रेलवे स्टेशन से शाम को लगभग 7:00 बजे वह कहीं जा रहा था। खुफिया पुलिस पीछे लगी थी । उसने खाने के लिए लगभग 5-7 अमरूद खरीदकर एक झोले में रखे, उसी में बम भी रखा था। अपना बाल बगैरह बढ़ाकर बाबा बन गया था। झोले में रखा बम स्वतः ही फट गया, उसकी एक टाँग उड़ गयी। पुलिसवालों ने घटनास्थल पर ही पकड़ लिया। खुफिया पुलिस के सहयोग से पता चला कि वह बिहार के छपरा जिले के, आनन्द मार्ग सम्प्रदाय से सम्बन्धित कई अधिकारियों की हत्या के केस में वाञ्छित था। बाद में वाराणसी जिला कारागार में भेज दिया गया था। वहाँ पूछताछ प्रारम्भ हुई। उसने मौन धारण कर लिया था, लिखकर बताने में अक्षमता प्रकट की, अग्रिम और प्रत्यक्ष कार्यवाही में रुकावट एवं विलम्ब हुआ ।
घटना क्यों घटित हुई ?
घटना का कारण क्या था ? इसमें किसका-किसका सहयोग था, वह हत्यारा किसके निर्देश से आया था, कब आया, कैसे आया, कहाँ रुका आदि जानकारी के लिए मुख्यमन्त्री के आदेश पर विशेष जाँच अधिकारी श्री जमुना प्रसाद त्रिपाठी जी ने तीव्र गति से हत्यारे पर उचित कार्यवाही चल रही थी
परम पूज्य गुरुदेव जी एवं माताजी के आदेश एवं उनकी शक्ति द्वारा, प्रस्तुतकर्ता शासन एवं परम पूज्य गुरुदेव के बीच की कड़ी का कार्य सम्पन्न कर रहे थे। जाँच अधिकारियों द्वारा कोतवाली हरिद्वार का कार्य एक ही दिन में पूर्ण कर लिया गया। उसी दिन शाम को हम लोग लखनऊ चले गये और अतिरिक्त महानिर्देशक CID से भेंटवार्ता की। उन्हें मिशन एवं परम पूज्य गुरुदेव की तपस्या, उनके महान् ज्ञान, स्वतन्त्रता संग्राम में भूमिका, व्यक्ति, परिवार और समाज निर्माण में बिना भेदभाव के सुधारात्मक एवं निर्माणात्मक योगदान के बारे में संक्षेप में बताया। युग निर्माण सत्संकल्प के साथ यथोचित साहित्य का पैकेट भी भेंट किया गया एवं जाँच कार्यवाही में शीघ्रता हेतु अनुरोध किया। सब सुनकर वे बड़े प्रसन्न हुए। पूज्य गुरुदेव के दर्शन की इच्छा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “डॉ साहब ! कार्यवाही करने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।” पुलिस अधीक्षक CID, श्री घिल्डियाल जी एवं श्री एल. पी. मिश्रा, आगे की जाँच के लिए हरिद्वार जा रहे हैं। श्री जे. पी. त्रिपाठी भी जा रहे हैं, अतिरिक्त महानिर्देशक महोदय ने कहा, चाहें तो आप भी चले जाएँ। हमने कार्यालय से छुट्टी ले रखी थी। दूसरे दिन सारे अधिकारियों के साथ शान्तिकुञ्ज, हरिद्वार पहुँच गये। लगभग 11 बजे परम वन्दनीया माताजी के दर्शन के बाद ऊपर के कमरे में गये। पहले श्री त्रिपाठी जी, लगभग दो मिनट बाद, श्री घिल्डियाल जी, अन्त में हम और श्री एल.पी. मिश्रा जी पहुँचे। त्रिपाठी जी ने परम पूज्य गुरुदेव को दण्डवत् प्रणाम किया श्री घिल्डियाल जी ने झुककर चरण स्पर्श किया, हमने चरणों पर सिर रखकर नमन किया और बाद में मिश्रा जी ने नमन किया। वार्ता हुई, लोगों को बाहर एवं अन्दर से विचार एवं दिव्य दृष्टि मिली। बाद में सभी लोग नीचे आ गये ।
मिश्रा जी पदोन्नत होकर पुलिस महानिरीक्षक, गढ़वाल (उत्तराखण्ड) बने। वर्ष 2002 में सेवा-निवृत्त हुए। मिश्रा जी ने जब त्रिपाठी जी को दण्डवत् प्रणाम करते देखा तो बड़ा ही आश्चर्य हुआ कि आचार्य जी कौन हैं। त्रिपाठी जी जो पुलिस विभाग के एक आदर्श और लौहपुरुष के रूप में जाने-माने अधिकारी थे जो गुरुदेव को दण्डवत् प्रणाम कर रहे थे। उसी के बाद उन्होंने दीक्षा ली तथा नियमित 11 माला जप का संकल्प व विशेष सहयोग करने का मन बना लिया । विभिन्न आयामों पर जाँच चलती रही। छपरा की पुलिस एवं खुफिया पुलिस की जाँच के बाद तथ्य सामने आया कि
वहाँ के गायत्री परिवार के लोग उस सम्प्रदाय द्वारा किये जा रहे अनैतिक एवं अराजक कार्यों का विरोध करते थे । उन लोगों ने सोचा, इनको तो दबा देंगे; लेकिन क्यों न इनके मुखिया पर प्रहार किया जाए तो यह लोग स्वयं ही भाग जायेंगे। इसी विचार को लेकर यह ऐतिहासिक हृदयविदारक घटना घटित हुई ।
रिवाल्वर न चलने और जाँच की रिपोर्ट, जो भी हमें मिलती हम परम पूज्य गुरुदेव के समक्ष रख देते। एक दिन परम पूज्य गुरुदेव जी ने कहा:
“बेटा,हम किसी पर मुकदमा नहीं चाहते, यह समाप्त हो जाना चाहिए।”
जब इस बात को हमने खुफिया पुलिस के महानिर्देशक एवं अन्य सम्बन्धित लोगों को बताया,वोह सब परम पूज्य गुरुदेव की उदारता पर आश्चर्यचकित थे । कुछ अधिकारी पूर्ण जाँच पक्ष में थे लेकिन अन्त में उसमें विराम देना पड़ा ।
सारी जानकारी हम गृह सचिव उत्तर प्रदेश को देने को गये । उन्होंने कहा- माननीय मुख्यमन्त्री जी का निर्देश पूज्य आचार्य जी की सुरक्षा के लिए सुरक्षा गार्ड लगाने का हुआ है। दूसरे दिन शान्तिकुञ्ज आकर हमने परम पूज्य गुरुदेव जी के समक्ष पूरा समाचार निवेदित किया। परम पूज्य गुरुदेव जी टहल रहे थे । उन्होंने कहा:
“बेटा ! “रक्षा भगवान् करता है और व्यवस्था इनसान बनाता है।” व्यवस्था तो पूरी बनानी चाहिए। यह सूत्र मन में बैठ गया, भाव उठा,शान्तिकुञ्ज आने से उस पुलिसकर्मी का भी कल्याण हो गया।
परम वन्दनीया माताजी एवं पूज्यवर के दर्शन के बाद सुरक्षा गार्ड श्री भीम त्यागी ने अपनी ड्यूटी प्रारम्भ कर दी। थोड़े ही दिनों में उन्होंने अपनी अवाञ्छनीय आदतें छोड़ दीं, मानवीय मूल्यों का विकास होने लगा। जल्दी ही उनकी पदोन्नति उप-पुलिस निरीक्षक के रूप में हो गयी। बाद में किसी थाने में उनकी नियुक्ति हो गयी।
जाते समय परम पूज्य गुरुदेव एवं वन्दनीया माताजी को नमन करके अपने जीवन को धन्य मानते हुए नम आँखों से विदा हुए।
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531 कमैंट्स और 7 युगसैनिकों से आज की 24 आहुति संकल्प सूची सुशोभित हो रही है।आज गोल्ड मैडल का सम्मान आदरणीय अरुण जी को जाता है, उनको बधाई एवं सभी साथिओं का योगदान के लिए धन्यवाद्।
(1)रेणु श्रीवास्तव-46,(2)नीरा त्रिखा-26 ,(3)सुमनलता-35,(4)अरुण वर्मा-51,(5)चंद्रेश बहादुर-40,(6)संध्या कुमार-36,(7)सुजाता उपाध्याय-46
