प्रत्येक शनिवार का दिन ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में एक उत्सव की भांति होता है। यह एक ऐसा दिन होता है जब हम सब सप्ताह भर की कठिन पढाई के बाद थोड़ा Relaxed अनुभव करते हैं और अपने साथिओं के साथ रूबरू होते हैं, उनकी गतिविधिओं को जानते हैं। हर कोई उत्साहित होकर अपना योगदान देकर गुरुकार्य का भागीदार बनता है एवं अपनी पात्रता के अनुसार गुरु के अनुदान प्राप्त करता हुआ अपनेआप को सौभाग्यशाली मानता है।
तो आइए चलते हैं आज के उत्सव की ओर। अपने साथिओं के साथ सभी बातें एक-एक करके, संक्षेप में, pointwise शेयर करने प्रयास करेंगें।
22 जून 2024 के विशेषांक के बाद, आज 6 जुलाई को यह विशेषांक लेकर आपके समक्ष उपस्थित हुए हैं। पिछले शनिवार 29 जून को हमारी सर्जरी के कारण अवकाश था, इसलिए यह साप्ताहिक विशेषांक प्रस्तुत न किया जा सका। एक दिन की छुट्टी क्या ली कि इतना होमवर्क इक्क्ठा हो गया कि बाल्यकाल के वोह दिन स्मरण हो आए जब छुट्टी तो किसी कारणवश लेनी ही पड़ती थी, लेकिन जब तक सारा छूटा हुआ पिछला होमवर्क पूरा नहीं कर लिया जाता था तो पिताजी से शामत आ जाती थी, हेडमास्टर जो ठहरे। उनसे भी बड़े हेडमास्टर तो हमारे परम पूज्य गुरुदेव हैं। 28 का तो सारा दिन सर्जरी में ही लग गया था, उन्ही की कृपा थी कि इस बार तो ऐसे लग रहा था कि कुछ हुआ ही नहीं है। बार-बार आकर डांट रहे थे कि अगर सब कुछ ठीक है तो ज्ञानरथ को हांकने में क्या दिक्कत है, दो आंखें हैं, एक तो बिलकुल परफेक्ट है- उठो,जागो और चल पड़ो अपनी यात्रा पर। नमन करते है दोनों हेडमास्टरों को।
हमें भी शांतिकुंज की शैश्वावस्था के वोह दिन स्मरण हो आए जब परम पूज्य गुरुदेव घुटने-घुटने पानी में खड़े होकर ईंटों का ट्रक अनलोड कर रहे थे। उनके एकमात्र सेवक आदरणीय श्री रामचंद्र सिंह, यह देखकर दंग रह गए थे। जब सेवक ने कारण पूछा तो गुरुदेव ने जो उत्तर दिया वोह आज तक सार्थक हो रहा है। गुरुदेव ने उत्तर दिया था, “बेटे, शांतिकुंज हमारी श्रद्धा और समर्पण का साक्षात् प्रमाण है जिसके बीज आने वाले दिनों में प्रस्फुटित होकर सारे विश्व में फैल जायेंगें। गुरुदेव की इस मूर्त को देखकर, भला हम कैसे तफरी मार सकते हैं।
जिन साथिओं को आज स्थान नहीं मिल पा रहा उनसे हाथ जोड़कर क्षमाप्रार्थी हैं।
1.आज के इस विशेषांक का सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट संलग्न यूट्यूब Channel analytics की स्लाइड है जिसे देखकर हमारे सभी साथी गौरवान्वित हुए बिना नहीं रह सकते और आदरणीय अरुण वर्मा जी /विनीता बहिन जी की चिंता का निवारण हो सकता है। आप सभी के अथक परिश्रम एवं गुरुदेव की अनुकम्पा का परिणाम है कि पिछले 28 दिनों में लगभग 2 लाख (191200) अतिरिक्त लोगों ने चैनल को विजिट किया जो नार्मल से 145 % अधिक रहा। इसी तरह 2200 अतिरिक्त नए सब्सक्राइबर्स ने चैनल को subscribe किया।
सभी समर्पित साथिओं को हम व्यक्तिगत बधाई दिए बिना नहीं रह सकते। अरुण जी बार-बार चिंतित हुए दिखते हैं कि “कोई सुनता ही नहीं है, हम तो अनेकों को इस मंच पर लाने का प्रयास करते रहते हैं।” इस सन्दर्भ में हम बड़े ही बलपूर्वक, गुरुदेव के ही शब्दों को रिपीट कर रहे हैं “बेटे आप यहाँ आये नहीं हो, आपको लाया गया है।” जो परिजन इस परिवार में आ चुके हैं, उनकी पात्रता देखकर गुरुदेव ने उन्हें एक बहुत बड़ा उत्तरदाईत्व सौंपा है, जो परिजन आकर भी कुछ आनाकानी कर रहे हैं ,यह उनका दुर्भाग्य है।
यह भी कैसा संयोग है कि Channel analytics तो हम आज प्रस्तुत कर रहे हैं लेकिन आदरणीय अरुण जी ने कुछ दिन पूर्व ही ज्ञानरथ को “प्रज्ञावतार” कह दिया था। उसी दिन सुमनलता बहिन जी ने गुरुदेव द्वारा ज्ञानरथ के संचालन का कार्य हमें सौंपने की बात कही थी। बहिन जी ने जिस सन्दर्भ में यह बात की थी वोह हमारे साथी पहले भी पढ़ चुके हैं,एक बार फिर स्मरण कराते हैं कि आद डॉ शर्मा जी को गुरुदेव ने ज्ञानरथ चलाने से मना कर दिया था।
अगर गुरुदेव ने ऐसा किया है तो हमारा परम सौभाग्य है, साथिओं के सहयोग की आशा करते हैं क्योंकि उनके बिना हमारा कोई अस्तित्व है ही नहीं।
इसी सन्दर्भ में अरुण जी का एक विस्तृत कमेंट शेयर कर रहे जिसे देखकर अवश्य ही अनेकों को प्रेरणा मिल सकती है। हमारे गुरुदेव ने हमारे लिए सब कुछ इतना सरल बना दिया है कि कोई घर-घर जाने की आवश्यकता नहीं है, किसी की डाँट खाने की आवश्यकता नहीं है, केवल अपने फ़ोन पर ही कुछ एक परिजनों से संपर्क स्थापित करना है, पात्रता वही चेक कर लेंगें, चुम्बक की भांति खींच भी लायेंगें। अगर कोई काम नहीं करेगा तो उसे Dismiss भी कर देंगें :
अरुण वर्मा जी का 801 शब्दों का विस्तृत ज्ञानमई कमेंट
ज्ञान से भरे कलश से कौन कितना ज्ञान का रसपान कर स्वयं को परिमार्जित (Refine) करने में सफल हो रहा है, यह तो अपने साथियों के अनुभूतियों से ही पता चल रहा है। आदरणीय सुजाता बहन जी का कमेंट पढ़कर ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार व पूज्य गुरुदेव के प्रति श्रद्धा और विश्वास और अधिक परिपक्व हो रहा है। बहन जी की बेटी की सलेक्शन मुंबई में हो गयी , बहुत ज्यादा खुशी हो रही है, साथ ही साथ बेटी को अपने पापा से पूछना है कि आप बताएं कि हम यहाँ अकेले हैं तो कैसे रहेंगे। बेटी ने इस मार्गदर्शन के लिए अपने पापा से पूछा , और पापा ने बेटी को जो बातें उन्हें सुनकर आदरणीय सुजाता बहन अचंभित हो गयीं क्योंकि जो बात पापा कह रहे थे, उसे तो ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में आदरणीय अरुण भैया जी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा था।यह कैसे संभव हो सकता है।
अरुण जी लिखते हैं कि इस विषय में मेरा यही मानना है कि यह अंतरात्मा की आवाज है, जो एक ही साथ हर व्यक्ति को टच करते हुए आगे बढ़ जाती है। जिस मनुष्य का किसी दूसरे मनुष्य से अधिक कनेक्शन होता है उस पर अपना असर दिखाते हुए आगे बढ़ जाती है। सुजाता जी आपके पतिदेव के साथ भी यही हुआ है। आपको/हमको,पूज्य गुरुदेव की कृपा, परम आदरणीय अरुण भैया जी के मिल रहे सही मार्गदर्शन से आपके पतिदेव का कनेक्शन आपकेही द्वारा हुआ जिससे उनके अंतरात्मा में भी वो बातें स्मरण हो आईं जिन्हें उन्होंने अपनी बेटी को बताया।
आदरणीय अरुण जी लिखते हैं कि यह वर्णन हमारे व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है।
हमारा मार्गदर्शन करने वाली सुमनलता दीदी की अनुभूति:-
सुमन लता दीदी तो सबसे पहले यही बोलीं कि हमने तो प्रश्न हल किया ही नहीं है, लेकिन आदरणीय अरुण भैया जी का कहना है कि आपकी अभिव्यक्ति हमारे पास सुरक्षित है, तो इस बीच का क्या मामला है इसे गौर से देखते हैं,
सुमन लता दीदी का कमेंट जो अत्यंत मार्गदर्शन करने वाला था, आदरणीय अरुण भैया जी ने पहले ही सेव कर लिया था, लेकिन दीदी को इसके बारे में पता नहीं था, रहता भी कैसे क्योंकि दीदी ने तो कमेंट लिख दिया था, जज तो प्रधानाध्यापक महोदय जी ही कर सकते हैं।
खैर कोई बात नहीं, लेकिन सुमनलता दीदी के कमेंट को पढ़कर ही हमें लेख को समझने में बहुत मदद मिली थी। मैंने कमेंट में भी लिखा था कि लेख को पढ़ तो लिए हैं लेकिन समझने में कठिनाई हो रही है। आदरणीय दीदी जी के कमेंट को बाद में पढ़े तो हमें लेख का पूरा सार समझ में आ गया। इस प्रस्तुति को प्रस्तुत करने के लिए आदरणीय अरुण भैया जी को एवं आदरणीय सुमनलता दीदी जी को हृदय से बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद करता हूँ,
अंत में यही कहेंगें कि परम आदरणीय नीरा त्रिखा बहन जी की अनुभूति बहुत ही महत्वपूर्ण व दिव्य ज्ञान से भरी हुई है। बहन जी का कहना है कि परम पूज्य गुरुदेव की प्रथम रचना “मैं क्या हूँ?” इस दिव्य रचना बता रही है कि “मैं” वो नहीं हूँ जो सामने दिख रहा हूँ ” मैं ” वो हूँ जो दिख नहीं रहा हूँ और सबों के समीप हूँ, यानि “आत्मा” जो दिखता तो नहीं है पर बिना आत्मा के कोई जीवित भी नहीं रह सकता,उसी आत्मा को पहचानने की जरूरत है, उसी आत्मा-परमात्मा को जानने की जरूरत है। तो प्रश्न उठता है कि इसे हम कैसे जानेंगे? जानने के लिए क्या करना होगा? इसका उत्तर केवल और केवल एक ही है : “ध्यान-साधना”, ध्यान साधना के द्वारा ही आत्मा-परमात्मा को जान सकते हैं, इससे रूबरू हो सकतें हैं। जब ध्यान में बैठते हैं तो बैठे-बैठे एकदम समाधि जैसा प्रतीत होने लगता है ।
2.ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के प्रत्येक परिवारजन के लिए बड़े ही गर्व की बात है कि आदरणीय डॉ ओ शर्मा जी की पुस्तक पर प्रस्तुत किए जा रहे लेखों को उन्हीं से एवं आदरणीय त्रिपाठी से सराहना के साथ-साथ मार्गदर्शन भी मिल रहा है। त्रिपाठी जी का निम्लिखित कमेंट इस बात का साक्षी है :
प्रणाम।आपने बहुत शानदार चयन किया अयोध्या के प्रथम दर्शन 7 जनवरी 1981को ही गुरुकृपा सभी अयोध्या वासियों पर बरसी। 22 जनवरी 2024 को प्रभु श्रीराम रामलला मुंबई में आयोजित 48वें अश्वमेध यज्ञ के उपरान्त अपने भव्य मंदिर में 500 वर्ष बाद प्रतिष्ठित हुए। 32 वर्षों तक गायत्री परिवार अयोध्या क्षेत्र का सघन मंथन, गृहे गृहे गायत्री यज्ञ गायत्री उपासना का क्रम चलता रहा। 500 वर्षो का कलंक धोने में 1970 से 2024 तक 54 वर्ष लगे। मथुरा के विदाई समारोह से पूर्व गुरुसत्ता ने सरयू नदी के तट पर बसे बहराइच नगर( उत्तर प्रदेश) में 1008 कुण्डीय यज्ञ सम्पन्न कराया। पंडित रमेशचंद्र शुक्ला जी(शुक्ला बाबा) उस समय समयदानी थे, 25 वर्ष के थे। परम पूज्य गुरुदेव ने उनसे कहा: नवयुग से पूर्व 2026 से पहले ही श्रीराम मंदिर का निर्माण सम्पन्न हो जाएगा। 1926 से 2026 तक (100 वर्षों में) पूरे विश्व का विज्ञान के माध्यम से आध्यत्मिक जागरण होगा, और पुरे विश्व को हम आध्यत्मिक स्वतंत्रता प्रदान करेंगें।
अब हमें 2026 की ज्योति कलश यात्रा की तैयारियों में लग जाना है।
हमारे साथिओं ने आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी की इस कलश यात्रा से सम्बंधित वीडियो कई बार देख ली होगी, इस लिंक के माध्यम से एक बार फिर देख लेना कुछ भी अनुचित नहीं होगा।
https://www.facebook.com/share/r/wN28gfwJsdvmEQ4Y/?mibextid=D5vuiz
3.आज के इस विशेषांक में चिरंजीव बिकाश बेटे के माध्यम से शेयर कर रहे हैं कि मस्तीचक में गुरुदेव की, विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा बन रही है,शुक्ला बाबा की भूमि और वहां के साधकों की श्रद्धा को नमन करते हैं।
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424 कमैंट्स और 7 युगसैनिकों से आज की 24 आहुति संकल्प सूची सुशोभित हो रही है।आज का गोल्ड मैडल आदरणीय सुजाता जी को जाता है,बहिन जी को गोल्ड मैडल जीतने की बधाई एवं सभी साथिओं का योगदान के लिए धन्यवाद्।
(1)राधा त्रिखा-3,(2)नीरा त्रिखा-31,(3)सुमनलता-37,(4 )सुजाता उपाध्याय-50 ,(5 )चंद्रेश बहादुर-39 ,(6)अरुण वर्मा-40 ,(7 )संध्या कुमार-46
सभी साथिओं को हमारा व्यक्तिगत एवं परिवार का सामूहिक आभार एवं बधाई।

