वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस 2024 को समर्पित पांचवां अनुभूति लेख-प्रस्तुतकर्ता अरुण वर्मा  

4 मार्च 2024

गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस 2024 को समर्पित छठा अनुभूति लेख-प्रस्तुतकर्ता अरुण वर्मा  

परमपूज्य गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्मदिन मनाने हेतु ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवारजनों द्वारा लिए संकल्प  का दूसरा  पार्ट “अनुभूति विशेषांक” है जिसके अंतर्गत इस  परिवार के समर्पित साथिओं द्वारा रचे गए व्यक्तिगत अनुभव प्रकाशित किये जा रहे हैं। 

आज इसी शृंखला का पांचवां अंक प्रस्तुत किया गया है जिसमें आदरणीय अरुण वर्मा जी पांच अनुभूतियाँ बता रहे हैं, जिन्हें  गुरुदेव की शक्ति पर विश्वास नहीं है वोह तो चप्पल का न मिलना, जीजी से मिलना आदि को नार्मल सी बात समझ सकते है, लेकिन अरुण जी जैसों अनेकों ने अपना सर्वस्व गुरुदेव को ही समर्पित कर दिया है। 

गुरुदेव ने हम जैसे साधारण मनुष्य को उँगलियाँ प्रदान कर दीं जिनसे सदैव प्रयास रहता है कि शब्दों का चयन और लेखनी से ऐसी माला की रचना हो पाए जिसकी सुगंध सीधा पाठकों के ह्रदय में उतर जाए। 

तो आज के ज्ञानप्रसाद  का शुभारम्भ होता है। 

*********************

अनुभूति नंबर 1:

हमारी दीदी और जीजा जी भगिनी की शादी के बारे में बहुत ही चिंतित थे क्योंकि लड़की की आयु करीब 30 वर्ष हो रही थी।  हमने  ऑनलाइन  ज्ञानरथ गायत्री परिवार के प्लेटफार्म पर भी  लिखा था। हमारे जीजा जी पिछले 10‌ साल से इस शादी के लिए परेशान थे।अनेकों लड़के देखे लेकिन  बात बन नहीं पाई। आश्चर्यजनक बात तो तब हुई जब यह समस्या इस मंच पर रखी तो चार दिन बाद ही  सूचना मिली कि शादी फिक्स हो गई है। 11 फरवरी को लड़के वालों के छेका लेकर गये थे और 13 फरवरी को लड़के वाले हमारे भगिनी के छेका लेकर आए ।

हम इसे चमत्कार न कहें तो और क्या कहें: 

करीब 7-8 माह पूर्व जब मैं दीदी के घर गया तो  अचानक मेरे मुंह से निकल गया “2024 में शादी हो जायेगी।” कह तो दिया था  लेकिन डर  भी लग रहा था कि जहाँ कहीं भी लड़का देख रहे थे बात बन नहीं रही थी ।

इसी बीच मेरा जागृत तीर्थस्थल शांतिकुंज जाने का प्रोग्राम बन गया, मैंने  दीदी से कहा कि जो भी परेशानी है आप एक कागज़ पर लिखकर हमें दे दीजिए, गुरुदेव के चरणों में समर्पित कर देंगे,आगे गुरु इच्छा। 

हमें डर था कि अगर 2024 में शादी न हुई तो गुरुदेव की शक्ति पर प्रश्नचिन्ह उठेंगे, लेकिन हमें अपने गुरु पर अटूट विश्वास था/है। वापिस आकर  करीब दो महीने लगातार गुरुदेव से प्रार्थना करता रहा कि गुरुदेव आप अपने बच्चे की लाज बचाइए। हमें शत प्रतिशत विश्वास था कि गुरुदेव जरूर हमारी प्रार्थना सुनेंगे और समस्या का समाधान करेंगे।

गुरुदेव को लाखों करोड़ों बार धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने एक अनगढ़ बच्चे की लाज रख ली। 

अनुभूति नंबर 2:

बात उस समय की है जब मैं युगतीर्थ शांतिकुंज गया था। मेरे  साथ छोटा भाई, उसकी पत्नी व दो बच्चे भी गये थे ।

“गुरुदेव का चमत्कार कब कहाँ और कैसे हो जाता है पता नहीं चलता।” 

पहले दिन जब हम सभी श्रद्धेय जीजी से मिलने के लिए गए तो समय समाप्त होने के कारण मिलना संभव न हो पाया। दूसरे  दिन भी भीड़ बहुत ज्यादा होने के कारण प्रवेश नहीं मिल पाया। हमें लगा कि जीजी का आशीर्वाद नहीं मिल पायेगा, सबसे ज्यादा दुःख इस बात का था कि हम तो बहुत बार जीजी का आशीर्वाद प्राप्त कर चुके थे लेकिन हमारा छोटा भाई व उनका परिवार पहली बार शांतिकुंज आए थे,उनका मिलना बहुत जरूरी था । 

यह उधेड़-बन चल ही रही थी कि हमारे भाई ने तीसरे दिन बहुत ही पहले जाकर लाइन में लगने का निर्णय लिया। हड़बड़ी में उनका  कार्ड कमरे में ही छूट गया । कार्ड न होने के बावजूद  कार्यकर्ता भाई साहब ने आगे जाने को कह दिया ।

यहाँ पर गौर करने वाली बात यह  है कि यह गुरुदेव की ही  लीला  है । बिना कार्ड  किसी को प्रवेश नहीं मिलता है लेकिन यहाँ प्रवेश मिल गया। इतना ही नहीं कार्यकर्ता भाई साहिब ने  उन सभी को सबसे आगे बुला लिया। हमारे भाई के परिवार ने  सबसे आगे जाकर जीजी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। 

अनुभूति नंबर 3:

जब मैं और भतीजा माता जी के चौके, माता भगवती भोजनालय में खाना खाने गए  तो भतीजा अपनी चप्पल स्टैंड से बाहर उतारकर भोजनालय में चला गया। करीब एक घंटा  बाद जब आया तो देखा कि चप्पल गायब है। हम दोनों ने बहुत खोजा लेकिन कुछ पता नहीं चला। आखिरकार हम कमरे में आ गये, लेकिन डर लग रहा था कि  भाई साहब पहली बार आये हैं वो क्या सोचेंगे। हमारी चिंता को गुरुदेव ने भांप लिया, इसे दूर करने के लिए और मिशन को  बदनामी से बचा लिया। 

हुआ यह कि थोड़ी देर के बाद जब हमारे भाई साहब खाना खाने भोजनालय में गये तो जब उन्होंने स्टैंड में अपनी चप्पल रखी तो बेटे की चप्पल वहीं पर थी। समझ नहीं आया कि यह सब कैसे हो गया। मैंने और मेरे भतीजे ने अच्छी तरह से खोजा था, तब तो नहीं थी लेकिन अब कैसे मिल गयी। 

इसे गुरुदेव का चमत्कार नहीं तो और क्या कहा जाए? 

और सबसे बड़ा चमत्कार तो तब हुआ जब युगतीर्थ शांतिकुंज से आने के बाद, हमारे भाई साहिब सपरिवार हमारे साथ हवन करने को तैयार हो गए और आज तक कर रहे हैं।  हमारे परिवार में  हर रविवार को हवन करने की प्रथा है लेकिन आज तक कभी भी हमारे भाई साहब हवन करने नहीं आए थे। 

तो मित्रो यह है युगतीर्थ शांतिकुंज की पावन माटी की शक्ति और परम पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में व्यतीत किए गए कुछ एक पल की संचित ऊर्जा।

अनुभूति नंबर 4:

अक्टूबर 2023 का चमत्कार:

हमारी बड़ी बेटी बंगलूरु में B.Tech. कर रही है,अचानक तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन हमारे लिए अचानक ही हुआ।  बेटी को पहले से पता था कि काॅलेज की फीस  जमा करने के लिए सूचित किया  गया था, लेकिन वो हमें बताना भूल गयी थी। अचानक जब  काॅलेज से  नोटिस आया  कि एक सप्ताह के अंदर फीस जमा नहीं हुई तो प्रतिदिन 500 रुपये फाइन लगेगा। हम तो घबरा गए और पर्सनल लोन के लिए  बैंकों के चक्कर लगाने  शुरू कर दिए। सब इंतज़ाम हो गया लेकिन जब एग्रीमेंट साइन करने का समय आया तो बैंक अधिकारी ने  पूछा कि आपकी  सैलरी “बैंक ऑफ़ इंडिया” में ही आती है न, तो हमने कहा कि नहीं “स्टेट बैंक ऑफ़  इंडिया” में आती है। इस कारण हमारा approove हुआ  लोन रिजेक्ट हो गया। एक सप्ताह का समय नजदीक आ रहा था,कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। 

परम पूज्य गुरुदेव द्वारा संचालित एवं रचित ऑनलाइन  ज्ञानरथ गायत्री परिवार के कार्यकर्त्ता आदरणीय अरुण भैया जी के मार्गदर्शन में हमने यह समस्या ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के प्लेटफार्म पर शेयर कर दी। अरुण भैया हमेशा कहते हैं  कि कोई भी समस्या हो, OGGP के  मंच पर ज़रूर शेयर करा करें, कोई न कोई समाधान निकल ही आएगा, हुआ भी वैसा ही।  

जैसे ही इस मंच पर शेयर किया, साथिओं के सांत्वना भरे मैसेज आने  शुरू हो गए। सभी ने हमारी सहायता के लिए परम पूज्य गुरुदेव से प्रार्थना करना शुरू कर दिया लेकिन गुरुदेव ने  आदरणीय सुमनलता दीदी को अपना देवदूत बनाकर भेज दिया। बहिन जी बिना कोई जांच पड़ताल किये  हमें 1.5 लाख रुपये देने के लिए तैयार हो गए।  एक RD तोड़ने से हमारे पास 60000 रुपए का इंतज़ाम  हो गया था और लगभग 15000 रुपए  सैलरी आती थी। सब मिलाकर 75000 रुपए इक्कठे हो गए और 75000 रुपए कम पड़ रहे थे। सुमनलता दीदी ने बिना कुछ विचार किए  एक बार में ही हमारे एकाउंट में 75000 रुपए जमा करा दिए। हमने दीदी को पहले ही बता  दिया था कि मैं हर महीने 5000 रुपए  से ज्यादा नहीं लौटा सकूंगा। ऐसा जानते हुए भी कि 15 महीनों में पैसा चुकता हो सकेगा, दीदी ने तनिक भी परवाह नहीं की और आड़े समय में  हमारी सहायता की। दीदी को कोटि कोटि नमन करता हूँ एवं गुरुदेव से प्रार्थना करता हूँ कि दीदी को अपना  सूक्ष्म संरक्षण प्रदान करते रहें। 

इसके साथ ही एक और चमत्कार हुआ:

जैसे ही दीदी का पैसा जमा हुआ, बेटी का एक कंपनी में सलेक्शन भी हो गया। यह सब गुरुदेव का चमत्कार नहीं तो और क्या है ? आदरणीय सुमनलता दीदी व ऑनलाइन  ज्ञानरथ गायत्री परिवार के समर्पित साथिओं के सामूहिक आशीर्वाद का  फल नहीं तो और क्या है ? 

अनुभूति नंबर 5:

कुछ दिन पूर्व मैंने OGGP के मंच  पर लिखा कि मन बहुत बेचैन है इसलिए न कमेंट्स पढ़ने में मन लग रहा है और न ही काउंटर कमेंट्स करने के लिए कोई शब्द मिल रहा है, मैं क्या लिखूँ। 

यह भी पैसे की ही समस्या थी । पैसा तो उतना ही मिलना है जितना मिल रहा है,अगर एक दो दिन ड्यूटी नहीं गये तो उसका भी पैसा कट कर ही आता है और किसी कारण से कुछ ज्यादा खर्च हो गया तो तंगी का सामना करना पड़ता है । इस महीने 3000 रुपए  बजट से ज्यादा खर्च हो गए हैं  अब कैसे किया जाये समझ में नहीं आ रहा था, इसी में दिमाग बेचैन था, क्योंकि हमें जो भी पैसा मिलता है सब एम आई में चला जाता है। अंत में हमारी पत्नी बोली कि दीदी को बोल दीजिये कि इस महीने पैसा नहीं दे सकते हैं, लेकिन हमें अच्छा नहीं लग रहा था, यह चर्चा उस समय चल रही थी जिस समय रात को खाना  खाने के लिए हम दोनों बैठे हुए थे और परम पूज्य गुरुदेव सामने में ही थे। हमने कहा कि अब ( गुरुदेव के तरफ ईशारा करके) वही करेंगे, जो करेंगे सब अच्छा ही करेंगे। यह बात 25 जनवरी 2024 की रात की  है, और 26 जनवरी को हमारी  कंपनी बंद रहती  है। तो मैं अखंड ज्योति लेकर मामा जी के यहाँ पहूंचाने गया और फिर गांव चला गया। वहाँ पड़ोस में एक बाबू जी, जो दादा लगते हैं उनको भी अखंड ज्योति देना था वो भी सदस्य बन गये हैं। जैसे ही गांव  गया तो हमारे चाचा जी ने  खेत वाला पैसा जो करीब 4000 रुपए था हमें दे दिया और हमारा काम हो गया। इस पैसे के मिलने की हमें कोई उम्मीद नहीं थी।हमें तो यह पैसा बिना मांगे ही मिल गया ।हम कैसे इस घटना को गुरुदेव का चमत्कार न कहें।

जिसने भी गुरुदेव पर श्रद्धा और विश्वास बनाये रखा उसका काम कभी भी नहीं रूक सकता है, यह गुरुदेव का वचन है।   

इन्हीं शब्दों के साथ में अपनी  लेखनी को विराम देता हूँ,ऑनलाइन  ज्ञानरथ गायत्री परिवार को कोटि कोटि नमन करता हूँ और परम आदरणीय अरुण त्रिखा  जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने ऐसा मंच प्रदान किया जहाँ हर कोई अपनी समस्या रख सकता है और सामूहिक प्रयास करने से  कोई न कोई उचित समाधान भी निकल ही आता है। 

******************

आज 9   युगसैनिकों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है। संध्या जी को गोल्ड मैडल जीतने की बधाई एवं सभी साथिओं का योगदान के लिए धन्यवाद्।      

(1)विदुषी बंता-31,(2)संध्या कुमार-42  ,(3) रेणु श्रीवास्तव-28 ,(4  )सुमनलता-35,(5 ) नीरा त्रिखा-25 ,(6  )सुजाता उपाध्याय-32 ,(7 ) मंजू मिश्रा-31,(8 )निशा भारद्वाज-37  ,(9 )वंदना कुमार-28            

सभी साथिओं को हमारा व्यक्तिगत एवं परिवार का सामूहिक आभार एवं बधाई।


Leave a comment