वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

अपने सहकर्मियों की कलम से 4 मार्च, 2023 I पांच सहकर्मियों के कमैंट्स 

1 मार्च 2023 के ज्ञानप्रसाद की भूमिका लिखते समय हमने अपने सहकर्मियों के कमैंट्स प्रकाशित करने का प्रस्ताव रखा था जिसे आज इस लेख में पूर्ण कर रहे हैं। हमारे लिए सभी साथियों  के कमैंट्स इतने मूल्यवान होते हैं कि पढ़ते समय कई बार अश्रुधारा का प्रवाह रोक पाना कठिन होता है। कमेंट चाहे 2 शब्द का  “जय गुरुदेव” हो यां विस्तृत अनेकों शब्दों का हमारे ह्रदय में सीधा उतरता जाता है और जब communication ह्रदय स्तर की  होती  है,आत्मा स्तर की होती है तो अश्रु बह  ही जाते हैं। 

आज के इस स्पेशल सेगमेंट में हम पांच सहकर्मियों के कमेंट आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारी छोटी बेटी संजना कुमारी, नई बेटी उपासना भारद्वाज, भाई अरुण जी,और बहिनें सुमनलता, रेणु श्रीवास्तव जी इस लोकप्रिय सेगमेंट की शोभा बड़ा रही हैं। हमने इन पांच कमैंट्स का चयन किस आधार पर किया है यह तो हम आप पर ही छोड़ते हैं लेकिन प्रतिभा, लेखनी,समर्पण,निष्ठा,नियमितता, सम्मान कुछ एक parameters हैं जिन्होंने हमारा मार्गदर्शन किया है। हमारा विश्वास है कि सभी साथियों को आज के इस स्पेशल सेगमेंट से प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा जिससे वह और अधिक  सक्रिय होकर ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में योगदान देने का संकल्प लेंगें 

आज का स्पेशल सेगमेंट विश्वशांति की प्रार्थना से आरम्भ करें उससे पूर्व एक बात करना चाहते हैं, अगर आप सबकी की आज्ञा हो तभी। 

शायद महाशिवरात्रि वाली वीडियो के बारे में हम अपनी बात ठीक से कह न पाए क्योंकि views और comments में कोई अधिक वृद्धि नहीं देखि गयी है। केवल संध्या बहिन जी का ही कमेंट देखने को मिला। 

“ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

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 1.संजना कुमारी:

सफलता आपके कारण हैं,आप सफलता के कारण नहीं हैं। क्या अद्भुत लाईन है।आज जीवन प्रबंधन की कक्षा में आदरणीय चिन्मय सर ने भी यही बताया कि अगर परम पूज्य गुरुदेव जी और विवेकानंद जी जैसी महान आत्माओं को बनाकर भगवान का काम खत्म हो जाता तब वो फिर हमें क्यूं बनाते ! इसलिए हमें अपने अंदर के परमात्मा को प्रवाहित होने देना चाहिए “Every divine soul has a unique potential which can’t be copy”। आज आदरणीय चिन्मय सर की और ज्ञानप्रसाद की विषय एक ही हैं इससे पता चलता है कि सारे souls आपस में कितनी आत्मीयता से जुड़े हैं। धन्य हैं परमात्मा और उनकी बनाई व्यवस्था एवं हर एक चीज़। आज यह लाइन हमें बहुत ही अच्छा लगी”अगर संकल्प रूपी बीज को आत्मविश्वास की भूमि में सकारात्मक सोच के साथ रोपा जाए और श्रम की बूंदों से सिंचा जाए तो जो परिणाम प्राप्त होते हैं वह सच में अविश्वसनीय ही होते हैं”।हम बहुत ही सौभाग्यशाली हैं कि इन वचनों को पाठन कर सकें ,श्रवण कर सकें।हर अंधेरी रात के बाद स्वर्णिम एवं आशा की किरणों के साथ सूरज हर रोज़ उगता है,यह अमृत तुल्य ज्ञान प्रसाद जरुर हमारे मन को झंकृत करने आता है तो जब परमात्मा की व्यवस्था हर पल हमें जागृत करना चाहती है तो हम इस साझेदारी में क्यूं चूकें? आदरणीय डॉ चाचा जी और सभी आत्मीय वरिष्ठ परिजनों को हमारा भाव भरा सादर प्रणाम एवं हृदय से कोटि कोटि धन्यवाद आपके असिम प्रयास, अटूट विश्वास और श्रद्धा भक्ति से हमें हमेशा मार्गदर्शित करने के लिए ️।परम पूज्य गुरुदेव जी से यही भाव भरी प्रार्थना है कि वह सभी पर अपना प्यार आशीर्वाद संरक्षण बनाएं रखें । किसी त्रुटी के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं । जय गुरुदेव जय शिव शंभू 

2.उपासना भारद्वाज :

सुप्रभात सभी गुरुजनों और बड़ों को, छोटों को मेरा प्यार आज इस भगवान नारायण की ब्रह्म बेला कुछ अद्भुत ही है यह ब्रह्मबेला और नारायण की यंत्र ओम नमो नारायणाय नमः इस धुन के साथ अपनी सुबह को एक नया रूप देना और अरुण अंकल जी के ज्ञानरथ के प्रसाद से सुबह की इस बेला में इस प्रश्न को जानते हुए उठना कि” मैं स्वयं क्या हूं”  एक अलग से अद्भुत एहसास है।जब हमें अपने प्रश्नों का उत्तर मिलता है तो हमारे अंदर नई इच्छाएं जागृत होती हैं , ऐसा लगता है कि यह इच्छा  तो पहले से थी लेकिन कहीं ना कहीं मन में या दिमाग में वह दब गई थीं । आज इन सब को जानने की इच्छा से एक नया एहसास हुआ: इस ज्ञानरथ के   ज्ञानप्रसाद को पढ़ते हुए मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं गुरुदेव के समक्ष अपनी इच्छाओं को रख रही हूँ।  यह इच्छा पूरी होगी या नहीं, यह मैं नहीं जानती थी ना अब जानती हूँ  लेकिन अपनी इच्छा को जानना उसे अपने समीप देखना यह अलग ही एहसास हो रहा है।  इस अनुभव  के लिए मैं अगर अरुण अंकल जी को धन्यवाद भी देती हूँ  तो  बहुत ही कम होगा क्योंकि जिस तरह से मैं हर एक दिन गुरुदेव से अपना मंत्र जाप करते हुए लिखते हुए कहती रहती हूँ , “हे प्रभु मुझे अपने उज्जवल भविष्य की मार्ग पर आगे बढ़ाना”  ऐसा लग रहा है कि मैं उज्जवल भविष्य की राह  पर अब तो आगे बढ़ रही हूँ। शायद एक परसेंट ही सही लेकिन अब रास्ता दिख रहा है, मुझे इस रास्ते पर लाने के लिए अरुण अंकल जी का बहुत-बहुत धन्यवाद। 

कहते हैं भगवान हमारे समक्ष नहीं है पर हमारी देखने की इच्छा ही नहीं होती कि इसमें सबसे पहली हमारी मां है। आज मैं अपनी मां को इस ज्ञानरथ के प्रसाद में शामिल  करती हूं जिन्होंने मुझे यहां खड़ा किया है।  मैं कह रही हूं कि मैं अपनी मां को इस पुरषार्थ  में शामिल कर रही हूं पर यह शामिल शब्द  शायद मैंने अपनी मां से ही सीखा है जिन्होंने मुझे यहां खड़ा किया, इस ज्ञानरथ परिवार में जोड़ा,  ज्ञानरथ परिवार  के इतने सारे लोगों से आशीर्वाद दिलाया।  हर एक दिन माँ  यही कहती रही कि बेटा तुम्हारे में भी कुछ है, कुछ इच्छाएं हैं उनको अपने सामने रखो, अपने आपको जानने की कोशिश करो, बहुत कुछ मिलेगा  और गुरुदेव के मार्ग पर आगे बढ़ने का रास्ता जरूर मिलेगा।  आप सबके साथ शेयर करके आज यह एहसास मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि  मैं इस मार्ग पर अब आगे आ रही हूं मैं अपनी मां का कोटि-कोटि धन्यवाद करती हूं कि आप  मुझे यहां तक लाए हो। मुझे ऐसे ही  हमेशा आपका साथ ही चाहिए, मां धन्यवाद। 

3.अरुण वर्मा  : अगर औनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के सत्संग से किसी परिजन का हृदय और विचार परिवर्तन नहीं हुआ तो हमारा विचार है  कि उसका  इस जन्म में तो शायद ही कोई ऐसा जन्म  मिलेगा जिससे उसका  भला हो।  इस औनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार एक नहीं अनेकों को अनगढ़ से सुगढ़  बनाया है, कितनों  को उनकी प्रतिभा को उजागर कर उन्हें सर्वोच्च स्थान प्राप्त करवाया है,यहाँ पर आने वाला  हर व्यक्ति एक अनगढ़ की भांति ही आया और  यह परिवार उसे तराशता ही  चला गया।  इस प्लेटफार्म का ही  कमाल है कि आज इस मंच पर मैं  जो कुछ लिख रहा हूँ हमारे परम आदरणीय अरुण भैया जी का ही उत्तम योगदान रहा है। आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक अभिनंदन व स्वागत है

4.सुमन लता  : गुरुदेव के क्रांतिधर्मी साहित्य से ऐसा ज्ञान प्राप्त हो रहा है ,जो गायत्री परिवार के लिए एक मार्गदर्शन है।स्वयं को भगवान का एजेंट प्रचारित कर लोगों की मनोकामना की पूर्ति करने प्रपंच रचने वाले तो आज बहुत से मिल जाएंगे। ऐसी एक घटना हमारे साथ लगभग 20 वर्ष पहले घटित हुई थी।कार्यालय में हमारे एक सहकर्मी के रिश्तेदार थे।उन्होंने हमारी जन्म कुंडली बनाने का अभिनय सा किया ।सब बातें होने के बाद बोले एक स्टोन है ,जो 20000/-का आएगा।आपको दिल की बीमारी है।आप उसे अपने गले में पहन लो। यदि आप इसे avoid   करोगे तो आप छः महीने से अधिक नहीं जिंदा रहोगे।हमने सुना तो थोड़ी चिंता होना स्वभाविक था।वो अपने रिश्तेदार हमारे सहकर्मी से अपनी बातचीत कर रहे थे तो उन्हें बता रहे थे कि उनके बेटे को बहुत major accident हुआ है।उनकी ये बात सुनकर हमारे विवेक ने कहा, जो व्यक्ति अपनी (तथाकथित) साधना के बल पर अपने बेटे का एक्सीडेंट नहीं रोक सका वो हमारी मृत्यु को टालने का दावा कर रहा है।जीवन मृत्यु देने वाले वाले तो भगवान हैं।अगर हमारी मृत्यु होनी होगी तो स्टोन (रत्न)पहनने से टलेगी नहीं ,और अगर जीवन है तो कोई मार नहीं सकता। हमने कोई रत्न धारण नहीं किया।और आज गुरुदेव की कृपा से दिल की बीमारी भी ठीक हो गई।

यह  है वास्तविक आध्यात्म की वास्तविक शक्ति । हमें अनुभव होता है कि जब हम गुरुदेव से अनभिज्ञ थे तब भी उनकी सूक्ष्म दृष्टि हमें राह दिखा रही थी, क्योंकि हमें उनकी शरण में आना था।हमें बाद में पता चला कि वो राशि रत्न बेचते थे, ऐसे ही लोगों को मिथ्या भय दिखा कर। आज की तारीख में ऐसे अनेकों मिल जाएंगे। जिन्होंने आध्यात्म को बदनाम करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। हम सब अहोभागी हैं कि गुरुदेव की शरण मिली और सच्चा मार्गदर्शन भी। जिन्होंने आध्यात्म की सही परिभाषा बताई। ऐसे गुरु को बारंबार नमन है। गुरु वंदना में एक पंक्ति है, “हे प्रभु तुम्हीं विविध रूपों में हमें बचाते भवकूपों से” ऐसे परम उदार।यही सत्य है।

5.रेणु श्रीवास्तव: 

हमारी सबकी परम आदरणीय रेणु बहिन जी का अधूरा कमेंट पोस्ट हुआ देखा तो हमने एक दम रिप्लाई किया।  बहिन जी ने जो बताया उससे उन्हकी ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के प्रति श्रद्धा को नमन करते हैं  हम सब जानते हैं कि बहिन जी के कमेंट कितने विस्तृत ,ज्ञान से भरपूर और मार्गदर्शन प्रदान करने वाले होते हैं।  तो  ऐसे कमेंट का बिना पूरा किये, यूट्यूब से गायब हो जाना कितना stressful हो सकता है हम अनुभव कर सकते हैं। यही हुआ था बहिन जी के साथ। हम होते तो इस स्थिति में फिर से, नए सिरे से लिखने का साहस  ही न कर पाते, लेकिन बहिन जी ने फिर से लिखना आरम्भ किया लेकिन फिर उनकी छोटी सी, नन्ही सी नातिन ने  जो अभी कुछ ही महीनों की है ,  रोना शुरू कर दिया, फिर लेखन को रोकना पढ़ा, उसके बाद तीसरी शिफ्ट में एक बार फिर  कोशिश की और पूरा किया।  क्या कहें ,ऐसी श्रद्धा और निष्ठां को ? कोई शब्द नहीं है, केवल अंतर्मन से सम्मान ही व्यक्त कर सकते हैं।

भाव विभोर होकर जो हमने लिखा था वोह निम्नलिखित  है:

यही हैं कमेंट- काउंटर कमेंट प्रक्रिया के positive साइड इफेक्ट्स।  ऐसी छोटी-छोटी बातें, पारिवारिक बातें, कमैंट्स-काउंटर कमैंट्स की प्रक्रिया  के माध्यम से हमें एक दूसरे के करीब लाते हुए, अपनत्व का अनुभव करवाते हुए, सही मायनों में गुरुदेव के सपने को पूरा करने में सहायक हो रही है । इसी को “युग परिवर्तन” कहते हैं। एक तरफ तो किसी के पास बात करने को समय नहीं है और हम सब परिवारजन हैं कि एक दूसरे को सुनने के लिए व्याकुल रहते हैं। परम पूज्य गुरुदेव ने ऐसे ही परिवार को “सतयुग की वापसी” का नाम दिया है।

आज की 24 आहुति संकल्प सूची में 10   सहकर्मियों ने संकल्प पूरा किया है, सुजाता और सुमनलता बहिन जी गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उन्हें परिवार की सामूहिक एवं हमारी व्यक्तिगत बधाई।*****************   

(1) वंदना कुमार-31,(2)चंद्रेश बहादुर-29,(3) मंजू मिश्रा-28,(4)संध्या कुमार-35,(5 )स्नेहा गुप्ता-27,(6) साधना सिंह-24,(7) सुजाता उपाध्याय-37,(8) सुमनलता-37,(9) कुमुदनी गौराहा-30,(10) निशा भारद्वाज-26                 


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