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महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती जी का परिचय 

29 अगस्त 2022 का ज्ञानप्रसाद

आज सप्ताह का प्रथम दिन सोमवार  है और हम सब एक नई  ऊर्जा के साथ अमृतवेला में एक नवीन लेख श्रृंखला का आरम्भ कर रहे हैं।  यह लेख श्रृंखला महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती जी की पुस्तक “यह धन किसका है” पर आधारित है। यह लेख श्रृंखला बहुत ही बहुत ही रोचक होने वाली है क्योंकि इसमें धन से सम्बंधित उन तथ्यों पर चर्चा होने वाली है जिनकी मूक सहमति हम हर किसी  के समक्ष व्यक्त तो  करते फिरते हैं लेकिन मानते नहीं हैं,अपनाते नहीं हैं। 

आज के ज्ञानप्रसाद का आरम्भ करने से पूर्व कुछ बातें शनिवार के स्पेशल सेगमेंट के कमैंट्स पर करते हैं। 

आदरणीय रेणु श्रीवास्तव लिखती हैं :

“इस निष्कर्ष पर पहुँची कि सबके सहयोग से आपका मनोबल बढ़ता है।गुरुदेव के साहित्य और विचार को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हैं ताकि जो पुस्तक नहीं पढ़ पाते उनमें  ज्ञान का  प्रसार हो।गुरुदेव हमारे गायत्री परिवार के स्तम्भ है।उनके विचारों के प्रसार के लिये हमें समर्पित होकर जुट जाना है। आपने सभी सहयोगियों की सराहना की तो ये आपकी महानता है।आप परिश्रम कर  गुरुदेव के साहित्य से लेख compile कर, सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हैं ताकि सभी आसानी से समझ सकें और यह संभव होते दिख भी रहा है। आपने video upload  में संकोच जाहिर की बात कही  तो इसमें संकोच न करें।सभी की रुचि भी है तथा ज्ञान भी बढ़ेगा। नियाग्रा फाल का video अवश्य  upload करें। मैं बहुत जगह गई हूँ पर नियाग्रा फाल नहीं जा सकी सिर्फ हिन्दी बुक में शायद तीसरी या चौथी क्लास में नियाग्रा जल प्रपात पर  लेख पढ़ी थी। मेरी बेटी  जा चुकी हैं।

आपने अपनी वेदना जाहिर की, वह मुझे भी महसूस होता है।कुछ समर्पित सहयोगी ही नियमित कमेंट लिखते हैं। यह तो उनकी मनःस्थिति पर निर्भर है,दबाव तो नहीं डाल सकते हैं। इस विषय पर पहले भी लिख चुकी हूँ कि सभी सहयोगी उदारता पूर्वक कमेंट डालें। कुछ सहयोगी नियमित कमेंट अवश्य करते हैं। लेख पढ़कर जो भाव समझते हैं अपने सरल शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास करते हैं। यह भी सही है कि जिसके अन्दर जो भाव संवेदना है उसके लिये थोड़ी भी प्रेरणा क्रान्तिकारी परिवर्तन ला  सकती है।”

सहयोगियों को  आग्रह है कि हम एक दूसरे के कमेंट पढ़ने का प्रयास करें, संभव  है कि 24 आहुति संकल्प सूची को गति प्रदान करने में सहायता एवं प्रेरणा मिले। 

आदरणीय सुमनलता बहिन जी ने भी बहुत ही अच्छी और सार्थक चर्चा करके प्रेरणा दी है :

“हम आपकी व्यस्तता का अनुमान लगा सकते हैं।आप एक हैं और हम अनेक।हम अनेकों के एक।यदि प्रति सहकर्मी आपको दस मिनट के लिए भी फोन करें तो हमारा दस मिनट ही लगा ।अगर छः लोग फोन पर बात करेंगे तो आपका एक घंटा पूरा हो जाता है। हम हमेशा ये विचार करते हैं कि एक ज्ञानप्रसाद को पूरे मनोयोग से तैयार करना, फिर यूट्यूब और व्हाट्सएप पर पोस्ट करना फिर सभी के कमेंट पढ़ कर रिप्लाई करना,ये तो अति व्यस्तता हो गई। इन सबको प्रतिदिन देख रहे हैं, इसीलिये हमारे लिए आप गुरुदेव के वो सच्चे साधक शिष्य हैं, जिनका बहुत बड़ा नाम नहीं है, लेकिन काम पूज्यनीय प्रशंसनीय है।”

आदरणीय संध्या बहिन जी लिखती हैं : 

“आप परिश्रम तो पूरा कर रहे हैं अतः इसका कुछ हल निकलना चाहिये, सभी परिजन बहुत प्रतिभाशाली हैं,उपयुक्त समाधान बता सकते हैं I आपने हम परिजनों के संकल्प सूची में थोड़े से प्रयास का बहुत मान रखा, आकाश के सितारे, अमावस की रात में जिनके सामुहिक प्रयास से हाथ को हाथ सूझता है,आदि नाम दिये हैं, आपके बड़प्पन ने भाव विभोर कर दिया भाईजी,आपको सादर नमन। यह सही है कि कभी-कभी 24 आहुति संकल्प सूची में सक्रियता बहुत कम होती है, उसकी सक्रियता अवश्य बढ़नी चाहिए,सभी परिजन यथा संभव योगदान दे रहे हैं, लगता है, इस हेतु प्रत्येक परिजन को और अधिक प्रयास करना उचित रहेगा I” 

विशाल आकाश में कुछ एक चमकते सितारे इस OGGP को ज्योति प्रदान करने में बहुत ही सक्रियता से कार्य कर रहे हैं। उन्हें  हम नमन करते हैं। 

अरुण जी ने भी कमैंट्स पर अपने विचार व्यक्त किये  हैं। 

संध्या बहिन जी ह्रदय से नमन करते हैं जिन्होंने हमारे जन्म दिवस पर बेल का पौधा रोपा है।  बेटी प्रेरणा ने वीडियो बना कर भेजी ,रेणु  बहिन जी ने सबसे पहले बहुत ही सुंदर कार्ड भेजा था। और भी बहुत से परिजनों  के बारे में लिखना चाहते हैं लेकिन  इस विषय का  समापन यहीं  करते हैं और निवेदन करते हैं शुक्रवार के  वीडियो सेक्शन को अवश्य देखें। जन्म दिवस की बहुत ही छोटी छोटी वीडियोस शूट की गयी हैं जिनमें यज्ञ के भिन्न भिन्न प्रक्रियाओं का explanation दिया हुआ है।  यह explanation आपको पुस्तकों में तो मिल ही जायेगा लेकिन वीडियो के माध्यम से समझना बहुत ही सरल है। कर्मकांड समझ कर किये जाएँ तभी उनका लाभ है नहीं तो एक आटोमेटिक मशीन जैसा ही है। 

तो आइये महात्मा जी की इंट्रोडक्शन  से इस लेख श्रृंखला का आरम्भ करें। 

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महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती का जन्म 15 अक्टूबर 1882 को पंजाब के जलालपुर जट्टा गांव (अब पाकिस्तान) में हुआ था। आर्यसमाज से प्रभावित होकर उन्होंने युवावस्था में ही वैदिक धर्म के प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित करने का संकल्प लिया। लाहौर में महात्मा हंसराज जी के साथ  “Arya Gazette weekly”  के संपादकीय विभाग में प्रवेश किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी शुरुआत की।  उन्हें undivided पंजाब में  पत्रकारिता के जनक कहना  कोई अतिश्योक्ति होगी। राष्ट्रीय जागरूकता और वैदिक धर्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, उन्होंने 13 अप्रैल, 1923 को बैसाखी  उत्सव में दैनिक उर्दू ‘मिलाप’ का प्रकाशन शुरू किया। उस समय उन्हें  Khushal Chand Khursand के नाम से जाना जाता था। बाद में उन्होंने Khursand नाम को महाशय, स्वामी आदि नामों में बदल दिया। आज उन्हें हम महाराज आनंद स्वामी सरस्वती के नाम से जानते हैं। आर्य समाज के कार्यों के कारण उन्हें सारे विश्व में बहुत ही पहचान मिली है। 

1921 में जब मालाबार ,केरला प्रदेश में मोपला मुसलमानों ने हिंदुओं पर अमानवीय अत्याचार किया, तो वे आर्य युवाओं के साथ मालाबार गए और अत्याचारियों के खिलाफ चेतना जगाई।  1939  में जब हैदराबाद के निज़ाम ने हिंदुओं पर हमला किया, तो वह सत्याग्रही जत्थे के साथ हैदराबाद पहुंचे और निज़ाम  की जेल में सात महीने तक लड़ाई लड़ी। सन् 1949 में वे सन्यास अपनाकर ‘महात्मा-आनन्द स्वामी सरस्वती’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनके बारे में एक बहुत ही वर्णन योग्य तथ्य है कि उन्होंने उस समय सन्यास लिया जब वह सफलता के चरम पर थे। विश्व में बहुत ही कम लोग मिलेंगें जो इस तरह का  निर्णय लेने का  साहस  रखते हों। केवल भारत में ही नहीं, विदेशों में भी जाकर महात्मा जी के द्वारा वैदिक धर्म के प्रचार का  योगदान  हम कैसे भूल सकते हैं। 

महात्मा आनंद स्वामी अपने समय के सबसे महान गायत्री साधकों में से थे। उन्होंने समय-समय पर आर्य समाज में कई उच्च पदों पर कार्य किया और अपनी पत्रकारिता की उपलब्धियों के लिए भी जाने जाते थे।स्वामी जी 92  वर्ष की आयु तक देश के भीतर और बाहर गायत्री माता के संदेश का प्रसार करते रहे और 24 अक्टूबर 1977 को उनका निधन हो गया। गायत्री की उनकी व्यक्तिगत साधना उच्चतम कोटि की थी और उनके व्यक्तित्व के सभी आयामों – उनके शब्दों, विचारों और कार्यों में समान रूप से परिलक्षित होती थी। स्वामी जी के सम्मान में देश के विभिन्न स्थानों पर कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है। 

महात्मा आनंद स्वामी ने गायत्री महामंत्र, आनंद गायत्री कथा और आध्यात्मिकता पर कई अन्य पुस्तकें लिखीं। 122 पन्नों की  “आनंद गायत्री कथा” पुस्तक  में गायत्री साधना के कई चमत्कारों का वर्णन है जो उन्होंने अपने जीवन के दौरान व्यक्तिगत रूप से अनुभव किए थे। इनमें से कुछ अनुभव  उन्हीं के शब्दों में हम 24 अक्टूबर 2021 को अपने लेख में दे चुके हैं।

स्वामी जी की लेखनी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके समस्त संस्मरण उनकी अपनी ही कथाएं हैं और ऐसा विदित होता है कि हम उनके सामने बैठे उन्ही से सुन रहे हैं। पंडित लीलापत शर्मा  जी की लेखनी भी इसी तरह की रोचक है।    

युगतीर्थ शांतिकुंज के वर्तमान व्यवस्थापक आदरणीय महेंद्र शर्मा जी अपनी वीडियो में बताते हैं कि स्वामी जी को जब परम पूज्य गुरुदेव की शक्ति का आभास हुआ तो उन्होंने गुरुदेव के चरण पकड़ लिए थे। इस वीडियो को देखने के लिए आप इस लिंक https://youtu.be/eppn-BC_VJU को क्लिक कर सकते हैं।  

उन्ही द्वारा लिखित पुस्तक “यह धन किसका है ?” का चौथा एडिशन आज के ज्ञानप्रसाद का आधार है। जब हमने 258 पन्नों की  इस पुस्तक के  कुछ पन्ने पढ़ने  का प्रयास किया, ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई ख़ज़ाना हाथ लग गया हो। इस पुस्तक का एक-एक शब्द इतना प्रैक्टिकल है कि अगर हम उसका कुछ थोड़ा सा भाग ही अपने जीवन में धारण कर लें तो हमारा जीवन सुखमय हो सकता है। यह हम इतनी दृढ़ता से इसलिए कहने का साहस कर रहे हैं धन के कारण उठ रही समस्याओं से  हम सब भली भांति परिचित हैं। कहने को तो हम सभी एक दूसरे के साथ “हाँ में हाँ” मिला देते हैं लेकिन सभी इसी मृगतृष्णा में लिप्त हैं। अधिकतर लोग “और अधिक और अधिक” की दौड़ में अपना मूल्यवान जीवन गँवा  रहे हैं।  अभी कुछ दिन पहले ही लिखा था “धन बहुत कुछ है लेकिन धन ही सब कुछ नहीं है” हमने पूर्ण विश्वास है कि हमारा प्रयास इस लेख शृंखला को रोचक एवं मार्गदर्शक बनाने में सफल होगा। स्वामी जी जैसे महापुरषों की, सन्यासियों की चुंबकीय शक्ति को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते  हुए  नतमस्तक हैं। 

कामना करते हैं कि सुबह की मंगल वेला में आँख खुलते ही इस ज्ञानप्रसाद का अमृतपान आपके रोम-रोम में नवीन ऊर्जा का संचार कर दे और यह ऊर्जा आपके दिन को सुखमय बना दे। हर लेख की भांति यह लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। धन्यवाद् जय गुरुदेव।

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आज की 24 आहुति संकल्प सूची:

आज की संकल्प सूची में उत्तीर्ण हो रहे सभी सहकर्मी हमारी व्यक्तिगत  बधाई के पात्र है। (1 )अरुण कुमार वर्मा -29  ,(2 )संजना  कुमारी – 30, (3) संध्या कुमार-24, (4) रेणु श्रीवास्तव-28, (5 ) सरविन्द कुमार -24 ने संकल्प पूर्ण किया है। संजना बेट  गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उसे  हमारी व्यक्तिगत एवं परिवार की सामूहिक बधाई।  सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय  के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिनको हम हृदय से नमन करते हैं, आभार व्यक्त करते हैं और जीवनपर्यन्त ऋणी रहेंगें। थोड़े से प्रयत्न से यह सूची और सक्रीय हो सकती है।  जय गुरुदेव,  धन्यवाद।


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