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आज के  अपडेट में  सहकर्मियों के प्रति हमारी भावनाएं  

17 अगस्त  2021- आज के  अपडेट में  सहकर्मियों के प्रति हमारी भावनाएं  

लगभग एक 100  views प्रति  घंटे की रफ़्तार से कल वाली अद्भुत वीडियो अपनी दिव्य यात्रा पर चल रही है। 200 से ऊपर  कमेंट करके आप सबने अपनी श्रद्धा और समर्पण का एक उदाहरण दिया है।  बहुत बहुत धन्यवाद।  हमारे परमपूज्य गुरुदेव की अंतरात्मा से निकली दिव्य वाणी जब तक आपकी भावना के तारों को झकझोड़ नहीं देती, तब तक हम सब ,ऑनलाइन ज्ञानरथ के सहकर्मी और प्रतिदिन जुड़ रहे नए सहकर्मी चैन से नहीं बैठेंगें -ऐसा हमारा संकल्प है।  यह संकल्प ऊपर दिए गए नम्बरों से पूरी तरह से दर्शित हो रहा है। इस अपडेट के लिखने समय तक  2100  के लगभग लोगों ने इस वीडियो को देखा ,कोई ज़रूरी नहीं कि सभी कमेंट करें ,कोई ज़रूरी नहीं कि सभी viewers ने सारी  वीडियो देखी, कोई ज़रूरी नहीं कि हर कोई बड़े -बड़े कमेंट करे य कर सके लेकिन हर कोई viewer हमारे लिए आदरणीय है। आदरणीय क्यों है ? इसलिए कि वह अपना समयदान कर रहा है ,समयदान कर रहा है हमारे लिए , समयदान कर रहा है एक दिव्य और विशाल मिशन के लिए ,समयदान कर रहा है अपने गुरु के लिए , समयदान कर रहा है गुरुदेव के विचारों को घर -घर तक  पहुँचाने के लिए। तो हम उसके ऋणी हुए न, इतने परिजनों के ऋण- बोझ से  कहीं हम  दब न जाएँ , हम निर्धन हैं – कर्ज़दार,ऋणी नहीं होना चाहते  हैं।  हमारा  प्रयास रहता है क़ि किसी प्रकार अपने  ऋण का निवारण कर  सकें । इस प्लेटफॉर्म से,हम सबके ऑनलाइन ज्ञानरथ के प्लेटफॉर्म से कुछ अच्छा कार्य करके हमारा ऋण कुछ कम अवश्य ही होता है।ऑनलाइन ज्ञानरथ के परिजनों से बातचीत करके ,उनके परिवार के बारे में जानकर, उनकी सहायता करके,उनके दुखों का निवारण करके  कुछ कमअवश्य ही  हो जाता  है।  

कल आने वाली वीडियो में आप स्वयं देख लेना कि गुरुदेव की अपने बच्चों से क्या उपेक्षाएँ हैं।  यह वीडियो भी बहुत ही छोटी सी ,केवल पांच मिंट की है।  गुरुदेव कह रहे हैं कि अपने परिजनों के पास यह किताब  ले जाना  और कहना हम आपका कुशलक्षेम लेने आये हैं ,आपका परिवार कैसा है ,कोई चिंता तो नहीं है ,हम आपके लिए क्या कर सकते हैं  आदि आदि। गुरुदेव ने कई वीडियोस में कहा है यज्ञ के बहाने से हम अपने परिजनों से मिल सकने में सफल होते हैं ,उनके साथ अपनत्व के ,स्नेह के, प्यार के तार जोड़ सकने में सफल होते हैं।  यही फार्मूला मृतुन्जय तिवारी जी ने बिहार की उन बच्चियों के लिए अपनाया जिनके लिए  घर से निकलना  ही अस्मभव था।  From football to eyeball वाले कांसेप्ट ने उन बच्चियों का जो  कायाकल्प किया इसे  आप हमारी अखंड ज्योति नेत्र हस्पताल वाली वीडियोस में देख सकते हैं।  बिल्कुल उसी लीक पर हम ऑनलाइन ज्ञानरथ के माध्यम से अपने परिजनों तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं। क्योंकि आज जिस युग में हम रह रहे हैं वहां स्नेह ,प्यार ,अपनत्व ,सहानुभूति ( हमारे स्तम्भ ) कहीं दूर -दूर तक भी दिखाई नहीं देते। और अगर कोई इन मानवीय मूल्यों को दर्शित भी करता है तो उसे शंका से देखा जाता है।  यही सोचा जाता है कि -अवश्य ही इसका अपना कोई स्वार्थ होगा। क्या हम इतने अमानुष हो चुके हैं ?  क्या हम इतने डरपोक हो चुके हैं?  हमें तो यही लगता है कि ऐसे लोगों की अंतरात्मा ही मर चुकी है। लेकिन हम शायद  भूल चुके हैं  कि इन मानवीय मूल्यों का पालन करना ही मानवता की रक्षा करना है। इन्ही मूल्यों की रक्षा करते हुए हम अपनी बिटिया रानी ,प्रेरणा बिटिया से  शनिवार को लगभग 77  मिंट तक बात करते रहे।  जो संतुष्टि हमें मिली उसका शब्दों में वर्णन करना तो असंभव ही है लेकिन फ़ोन बंद करने के तुरंत बाद ही बिटिया ने मैसेज किया – “आपसे बात करके जो ख़ुशी मिली है हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते। मैंने गुरुदेव से कभी बात नहीं की लेकिन आपसे बात करके ऐसा प्रतीत हुआ गुरुदेव से ही बात कर रहे हैं”  धन्यवाद बेटी।  कहाँ गुरुदेव और कहाँ हम ,कोई भी comparison तो  नहीं हैं। नवंबर 2019 में हम शांतिकुंज के संक्षिप्त प्रवास पर थे।  गेट नंबर 5 के पास स्थित  लोपा मुद्रा भवन में हम  ठहरे हुए  थे।  हमारे साथ वाले कमरे में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो से आये एक साधक ठहरे हुए थे। वह अक्सर देखते रहते थे कि हम जब भी फ्री होते वह हमारे पास आ जाते। उन्होंने तो गुरुदेव को देखा नहीं था लेकिन  हमसे गुरुदेव के बारे में जानकार उन्हें बहुत ही संतुष्टि होती थी।  अक्सर हमसे गुरुदेव के साहित्य और उनके बारे में चर्चा करने की जिज्ञासा रहती। और बात यहाँ तक पहुँच चुकी  कि उन्होंने हमें इतना आदर सम्मान देना आरम्भ कर दिया कि सदैव हमारे  चरणस्पर्श करते।  हम नहीं जानते की परमपूज्य गुरुदेव की शक्ति है यं युगतीर्थ  शांतिकुंज  का दिव्य वातावरण। हमने भी विश्व भर में से जहाँ से भी कोई भी गुरुदेव के समय का मनुष्य मिला, जिसने गुरुदेव के साथ कार्य किया हो, संपर्क बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी- चाहे वह नैरोबी में विद्या परिहार जी हों ,मस्तीचक में मृतुन्जय तिवारी भाई  साहिब हों , किशोर जी दार ए सलाम अफ्रीका में हों ,शशि संजय शर्मा जयपुर में हों ,सरोज वर्मा हों आदि आदि। 

जब अपनत्व और सम्पर्क साधना की बात चल ही रही है तो आप सबने हमारी सहकर्मी प्रीती भारद्वाज  बहिन का कमेंट तो देखा ही होगा। उन्होंने अपनी  मम्मी के  महाप्रयाण के दुःखित  दिनों में सहकर्मियों द्वारा दिए गए सहयोग  की सराहना की है। हमारे रिप्लाई का भी उन्होंने बहुत आभार  व्यक्त किया है।  हम यही कहेंगें कि              

“शिष्टाचार,स्नेह,समर्पण,आदर,श्रद्धा ,निष्ठा,विश्वास ,आस्था,सहानुभति , सहभागिता,सद्भावना एवं अनुशासन हैं ऑनलाइन ज्ञानरथ  के  स्तम्भ। ऑनलाइन ज्ञानरथ के स्तम्भ जिन पर यह भवन खड़ा है इसकी रक्षा करना हमारा परम् कर्तव्य है।”

इन मानवीय मूल्यों के देखते हुए  हम कह सकते हैं कि  हम इंसान हैं कोई देवता नहीं – हमसे गलती तो  हो ही सकती है, लेकिन  गलती न करने  का प्रयास करना हमारा सबका कर्तव्य है।  फिर भी अगर हो जाती है तो उसको correct  करने का प्रयास भी हमने ही करना है। 

पिछले कुछ समय से ज्ञानगंज , सिद्धाश्रम ,शांगरिला  पर हमारी रिसर्च चल रही है। Britisher आर्मी ऑफिसर , LP Farrel द्वारा  1942 की घटना अखंड ज्योति में भी वर्णित है और उसके द्वारा ही लिखित पुस्तक तो है ही। Farrel द्वारा  हिमालय योगियों की शक्तियों का वर्णन हमारे गुरुदेव की शक्तियों के साथ connect अवश्य करता है। जल्द ही यह रोमांचकारी ,दिव्य ,अविश्वसनीय किंतु सत्य कथा आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगें। साथ में ही गुरुदेव के वाराणसी के सहयोगी निखिल और महावीर स्वामी की हिमालय में पाण्डुकेशवर ग्राम  में भेंट  भी आपके समक्ष लाने का प्रयास करेंगें। बद्रीनाथ क्षेत्र में पांडुकेश्वर पांडवों के साथ सम्बंधित है। 

इन सभी लेखों से पहले हमारी इच्छा है कि आप हमारे  साथ 4-5  छोटी -छोटी वीडियो देख लें ताकि परमपूज्य गुरुदेव  के प्रति आपकी श्रद्धा ,निष्ठां,समर्पण और प्रगाढ़ हो सके।  इन वीडियोस में आप ऐसे -ऐसे संस्मरण देखेंगें जिन्हे देखकर  आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगें जैसे हमारी प्रेरणा बिटिया रानी ने व्यक्त किया है। हर  बार की तरह हम आज फिर कहते हैं कि  महेंद्र जी की पूरी की पूरी वीडियो का लिंक हम आपको दे सकते हैं और कह सकते हैं कि आप देख लीजिये लेकिन हमें  विश्वास नहीं है।  गुरुदेव भी तो यही कह रहे हैं “ बेटा ,मुझे विश्वास नहीं है कि तुम मेरे बारे में लोगों को बताओगे कि मेरे गुरु के पास इतनी शक्तियां हैं” और फिर साथ -साथ में देखने का अपना ही आनंद  है।  आपके कमेंट बता देते हैं कि आपने न केवल देखि है औरों को भी भेजी है।  हमें ऐसा लगता है कि हम साथ -साथ ही देख रहे हैं।  बहुत बहुत धन्यवाद्।       

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं  कि आज प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका  आने वाला दिन सुखमय हो। जय गुरुदेव

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