वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष


  • मानवी काया काँच की नहीं,अष्ट धातु से बनी है। 

    2 जून 2025 का ज्ञान प्रसाद मार्च 1972 की अखंड ज्योति में प्रकाशित सभी लेख इतने उत्कृष्ट हैं कि हम वंदनीय माता जी को महाशक्ति कहे बिना नहीं रह सकते। गुरुवर हिमालय में साधनारत थे, माता जी शांतिकुंज के आरंभिक दिनों में लगभग अकेली ही थीं, ऐसी स्थिति में इतने उत्कृष्ट लेखों से हम सबका…

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  • मई माह का विशेष विशेषांक,कमैंट्स प्रथा में संशोधन 

    27 अप्रैल 2025 को आरम्भ हुए “सुझाव बहिन सुमनलता जी का, प्रयास हमारा” शीर्षक से आरम्भ हुए “विशेष विशेषांक” का वर्तमान अंक प्रस्तुत करते हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। अपने सभी आदरणीय साथिओं की पूर्व स्वीकृति से इस “विशेष विशेषांक” के शीर्षक में संशोधन करने की जिज्ञासा उठ रही है। हमारे सहकर्मी नए…

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  • मैं एकाकी हूँ, शरीर से भिन्न हूँ। आत्मा हूँ। 

    29 मई 2025 का ज्ञानप्रसाद आज का ज्ञानप्रसाद लेख ही वह उत्कृष्ट लेख था जिसने मार्च 1972 की अखंड ज्योति की ओर  ऐसा आकर्षित किया कि न जाने हमने कितने  ही लेख पढ़ डाले। जीवन के सत्य को परिभाषित करता लेख “आत्मा और काया” की इतना सटीक विश्लेषण है कि सभी पाठक कहेंगें कि हमें…

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