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हमारी शक्ति का पांचवां भाग
12 अगस्त 2025 का ज्ञानप्रसाद कल वाले लेख में इस आकर्षित शीर्षक “हमारी शक्ति का पांचवां भाग” वाले लेख का संकेत दिया था। अखंड ज्योति 1942 के सितम्बर अंक में प्रकाशित हुए लेख में परम पूज्य गुरुदेव ने मनुष्य की धर्मिक एवं आर्थिक शक्ति को औसत भारतीय की शक्ति का “पांचवां भाग” कह कर समझाया…
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हमारी कितनी ही रातें रोते सिसकते बीती हैं
11 अगस्त 2025 का ज्ञानप्रसाद अखंड ज्योति फरवरी 1971 में “अपनों से अपनी बात, हमारे दृश्य जीवन की अदृशय अनुभूतियाँ” शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित दिव्य लेख का आज समापन अंक प्रस्तुत किया जा रहा है। परम पूज्य गुरुदेव के दृश्य जीवन की अदृश्य अनुभूतियों का साक्षात् अनुभव करवाने के लिए हमसे अपने तुच्छ प्रयास एवं…
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स्वयं को अति समझदार समझने वाला मनुष्य इतना नासमझ क्यों है?
7 अगस्त 2025 का ज्ञानप्रसाद वर्तमान लेख श्रृंखला अखंड ज्योति पत्रिका के जनवरी और फ़रवरी 1971 के अंकों में “अपनों से अपनी बात” के अंतर्गत प्रकाशित हुए कंटेंट पर आधारित है। “अपनों से अपनी बात’ हमारे ह्रदय के इतने करीब है कि जब भी हम अखंड ज्योति की कोई भी प्रति खोलते हैं तो इस…
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