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वाणी संयम से वाणी शोधन (Purification of speech) होता है
14 अक्टूबर 2025 का ज्ञानप्रसाद आज के ज्ञानप्रसाद लेख में वाणी संयम को वाणी शोधन से जोड़कर समझने का प्रयास किया गया है। जितना महत्व “वाणी संयम” यानि सोच समझ कर बोलने का है उतना ही महत्व “परिष्कृत वाणी”, सही शब्दावली का भी है। शब्दों की शक्ति एवं उसके पीछे छिपे ज्ञान को समझने के…
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“अपने सहकर्मियों की कलम से” का 11 अक्टूबर 2025 का विशेषांक
https://www.facebook.com/share/v/17RzW6tqV8/ (तेरे साथ तेरी माँ जो है ) https://archive.org/details/pita-ji-ki-pustak (पिताजी की पुस्तक की साथिओं ने भी सराहना की ) हमारे समर्पित साथी इस तथ्य से भलीभांति परिचित हैं कि प्रत्येक शनिवार वाला अंक हमारे लिए एक बहुत बड़ी चुनौती लेकर आता है। साथिओं द्वारा भेजे गए सन्देश,वीडियोस,संकेत आदि लेकर एक डाक बाबू की भूमिका निभानी…
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अपनी उपलब्धियों पर गर्व करें, त्रुटियों के सुधार पर चिंतन करें
8 अक्टूबर 2025 का ज्ञानप्रसाद शब्द सीमा की बेड़ियाँ आज मजबूर कर रही हैं कि आज का लेख बिना किसी भूमिका के आरम्भ कर दिया जाए। मनुष्य का अति महत्वपूर्ण दुर्व्यसन “अहंकार” आज के लेख का विषय है। *************** तृष्णा एवं वासना की ही तरह ही अहम भी मानासिक असंयम का ही दुष्परिणाम है। अहंकार…
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