वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

शनिवार का स्पेशल सेगमेंट -6 मार्च 2026

शनिवार के स्पेशल सेगमेंट को आज 6 पॉइंट्स में प्रस्तुत किया है। सरविन्द जी का  2 मार्च वाला लेख, हमारे लिए सबसे सटीक टाइटल, संजना बेटी और पूनम जी का कमेंट, आद चंद्रेश जी की अनुभूति  I

हर बार की भांति आज भी लिख रहे हैं कि OGGP का मंच एक ऐसा परिवार है जहाँ मानवीय मूल्यों का पालन करते हुए किसी को भी अपने विचार रखने की पूर्ण स्वतंत्रता है।   

1.आद चंद्रेश जी ने युगनिर्माण योजना का अक्टूबर 2025 का अंक डिजिटाइज़ किया जिसके लिए हमारा आभार है।आद निशा भारद्वाज  जी  ने सितम्बर 2024 का अंक डिजिटाइज़ करवाया, कुछ समस्या थी, उन्होंने कहा कि  फिर से भेज देंगें। हमने 14 घण्टे लगातार लगाकर समस्या फिक्स करने का प्रयास किया, कुछ कुछ हुई है लेकिन उनसे मिल जाए ठीक रहेगा।   

2.ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार एक बहुत ही खुला और पारदर्शी परिवार है। इसी भावना का सम्मान करते हुए बिना किसी स्वार्थ के 

2 मार्च 2026 को अनुभूति श्रृंखला में सरविन्द कुमार जी का उत्कृष्ट लेख प्रस्तुत किया गया था। परिवार की भावना का सम्मान करते हुए भाई साहिब ने बड़े ही खुले मन से सब कुछ विस्तार से बताया। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में “परिवार शब्द” की परिभाषा हम पहले ही बता चुके हैं। यदि यह परिवार अन्य यूट्यूब चैनल्स से अलग होकर न चले तो फिर क्या लाभ, Uniqueness इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। अधिकतर लोग तो यही सोचते होंगें कि  अन्य चैनल्स की भांति यह भी पैसे कमाने का, मार्केटिंग का,वाहवाही लूटने का जरिया होगा लेकिन ह्रदय खोल कर बताना चाहते हैं कि इस मंच पर केवल गुरुदेव की आत्मा को जाग्रत करने का प्रयास किया जा रहा है, गुरुदेव के प्राण आप सबके अंदर उतारने के भांति भांति के प्रयास किये जा रहे हैं। कभी इस सन्दर्भ में भी अपने ह्रदय के किवाड़ खोलने का प्रयास करेंगें।

आज जिस विषय की बात हो रही है उसी पर टिके रहें तो उचित होगा।    

सरविन्द जी के लेख पर सभी ने खुले मन से अपने मन की भावनाएं व्यक्त की, सुझाव दिए, अपने अनुभव बताये लेकिन सारा दिन जब कोई भी रिप्लाई न मिला तो हमने अपने मन को कोसना शुरू कर दिया कि शायद हमने कोई गलती कर दी है। 

सभी साथिओं ने अपना समयदान,श्रमदान,विवेकदान और यहाँ तक कि  अपना “अनुभव-दान” तक देकर परिवार के लिए कमेंट किये लेकिन देख कर बड़ी हैरानगी हुई कि जिस परिवार की चिंता OGGP के एक-एक सदस्य को थी, उस परिवार के एक भी सदस्य, यहाँ तक कि सरविन्द पाल जी ने भी कोई कमेंट नहीं किया। 

हमारा निम्नलिखित सोचना कितना ठीक है, साथी स्वयं ही निर्णय कर सकते हैं। हम किसी की भी भावना एवं सम्मान को ठेस नहीं पंहुचना चाहते, स्वप्न में भी हमसे ऐसी गलती न हो : 

यह साफ़ दर्शाता है कि जो बच्चे अपने से, स्वयं से सम्बंधित लेख के लिए भी कमेंट नहीं करते, वोह गुरुदेव का साहित्य कहाँ पढ़ते होंगें । यदि हम गलत हैं तो तीनो बच्चों को Assignment देते हैं कि आने वाले दिनों में ज्ञानप्रसाद लेखों को पढ़ें, समझें,अंतर्मन में उतारें और आत्मा से निकले शब्दों से कमेंट लिखें। ऐसी भाषा गुरुदेव कई बार प्रयोग कर  चुके हैं हम भी उन्हीं के सन्देश को प्रसारित कर  रहे हैं ताकि कोई शंका,संदेह भ्र्म न रहे। 

सरविन्द जी के लेख पर नीरा जी ने दोनों बेटों की एजुकेशन का वर्णन किया,लिखा कि  दोनों अपने पापा की भांति बचपन से ही आत्मनिर्भर हैं। यहाँ कनाडा में एजुकेशन इतनी एक्सपेंसिव है तो उन्होंने Co-op  करके अपनी पढाई का हम पर कोई भी खर्चा नहीं डाला। सुमनलता जी ने दोनों बच्चों के बारे में लिखा। बेटी ने 12वीं के बाद ही नौकरी शुरू कर दी,बेटे को  होटल मैनेजमेंट में डिग्री के बाद कैंपस इंटरव्यू में जॉब मिल गयी। चंद्रेश जी ने बच्चों को काम करने पर ज़ोर दिया। रेणु जी ने डॉलर का मूल्य समझाते  हुए अपनी नातिन की बात की। अपनी बेटी की ट्यूशन  वाली बात भी लिखी। बेटी Msc बॉटनी की topper  है। विदुषी जी ने “जो प्राप्त है वही पर्याप्त”  है के  सिद्धांत का पालन करने की बात की। 

अगले दिन आदरणीय सरविन्द जी के विस्तृत कमेंट का कुछ भाग(शब्द सीमा के कारण) निम्नलिखित पोस्ट कर रहे हैं  : 

कल दिनांक 02/03/2026 दिन सोमवार के दिव्य ज्ञानप्रसाद में हम अपनी सहभागिता सुनिश्चित नहीं कर पाए, इसके लिए हम आप सबसे भावपूर्ण हृदय से करबद्ध क्षमाप्रार्थी हैं। सुबह अपने समय पर उठकर प्रकाशित ज्ञानप्रसाद का गंभीरतापूर्वक पयपान किया लेकिन कमेंट न्युवेस्ट में चले जाने के कारण नहीं किया, फिर दिन में अपने व्यापार में चला गया और दोपहर लगभग एक बजे घर वापस आ गया लेकिन हमारे पड़ोस में रहने वाली एक माता जी का आकस्मिक निधन हो गया तो उनके अंतिम संस्कार में गंगा-घाट चला गया और शाम काफी लेट घर वापस आए जिसके कारण हम आनलाइन ज्ञान रथ गायत्री परिवार में कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं कर पाए हैं। आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप लोग हमें माफ कर देंगे। 

आप सबका सामुहिक आशीर्वाद व सुझाव हमें व हमारे परिवार के लिए सर्वश्रेष्ठ व सर्वसुलभ है और सर्वोपरि व सर्वमान्य भी है। 

3.अगर हमारे लिए परिवार में ज़रा सा भी सम्मान है तो एक बात जो पहले अनेकों बार लिख चुके हैं,फिर से रिपीट कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में परिवार का कोई एक सदस्य सूचित कर सकता था। बहुत दुःख होता है कि हम अपने परिवारजनों को दिनों/महीनों ढूंढते रहते हैं, बिना बताये चले जाते हैं, फिर आ जाते हैं, क्या गुरुदेव के प्रति इतनी  निष्ठुरता ठीक है ? आने वाली पंक्तियों में दी गयी बेटी संजना कि चैट हिस्ट्री सबसे अलग है, एक सेकंड से भी काम समय में respond कर रही थी।  

बहिन सुमनलता जी,एवं अन्य साथिओं ने हमारे सम्मान में न जाने कितने ही अलंकार प्रयोग किये हैं लेकिन सबसे सटीक टाइटल सबने भुला दिया है। वोह टाइटल है “भिखारी” जो सुबह सवेरे विश्व के एक-एक घर में जाकर समयदान की भीख मांगता है। अधिकतर घरों से फटकार के इलावा कुछ भी नहीं मिलता, यह भिखारी सारा दिन भूखा,प्यासा दर-ब-दर भटकने के बाद थका हारा अपने बिस्तर पड़ता है तो स्वप्न भी गुरुज्ञान के प्रचार का ही आता है। अगले दिन उठते  ही फिर वही प्रयास। जब कभी इस भिखारी के खाली पात्र में कोई भोजन का टुकड़ा डाल  देता है तो उसकी प्रसन्नता की सीमा केवल अनुभव ही की जा सकती है, शब्द व्यक्त नहीं कर पायेंगें। 

4.ऐसी ही प्रसन्नता हमारी समर्पित बेटी संजना ने प्रदान की जब वह कल अपने घर से वापिस यूनिवर्सिटी आने के लिए ट्रेन में यात्रा कर रही थी। सभी साथिओं का धन्यवाद करने के लिए कमेंट कर रही थी लेकिन यूट्यूब पर पोस्ट नहीं हो रहे थे। शायद नेटवर्क की समस्या थी। हमारे पास वही विकल्प था, तुम हमारे व्हाट्सप्प पर भेज दो, हम यूट्यूब पर पोस्ट कर देंगें।  हमारे समय के अनुसार सुबह 5:42 बजे थे, आधे घंटे में बेटी ने आठ विस्तृत कमेंट कर दिए, हमने कुछ एक पोस्ट भी किये, उसी समय नेटवक ठीक हो गया और उसने वहीँ पर पोस्ट करने शुरू कर दिए। हमने यह कह कर कि हम अगले तीन घंटे के लिए साधना, दिनचर्या आदि में व्यस्त रहेंगें, सम्पर्क समाप्त कर दिया। 

संपर्क स्थापित करने के बाद काफी देर तक चैटिंग होती रही, आखिर में उसने 11:42 पर निम्नलिखित कमेंट लिख कर बंद किया :  

आज के ज्ञानप्रसाद पर मेरा कमेंट : 

आदरणीय डॉ सर विचारक्रांति अभियान के🙇‍♀️ एक सच्चे ब्रैंड एम्बैसडर के रूप में हमारी  अनुभूतियों को पंख देकर गुरुसत्ता 👳🔮  के प्रति हमारा 🙏💕विश्वास कई गुना बढा दिया है क्योंकि विश्वास टूटने में वक्त नही लगता परंतु बनाने के लिए जो संघर्ष किया है उसके साक्षात मिसाल  हैं आदरणीय डॉ सर।  उनका समर्पण, उनका संघर्ष, उनकी अनुशासनात्मक निष्ठा व साथ ही झर-झर बरसता उनका पितृ प्रेम वात्सल्य❤ सचमुच धन्य हैं हम कि हमें गुरुसत्ता ने इस अद्भुत, अनोखे, सच्चे परिवार से मिलाया।  जहाँ सभी इस स्वार्थ और निर्मम दुनिया में एक दूसरे पर बस प्रेम आशीर्वाद और शुभ मंगलकामनाये ही बरसाते रहते, अंधभक्त और चापलूसी पूर्वक  🔥नहीं, क्योंकि इसके सूत्र संचालक आदरणीय एक प्रोफेसर हैं जो बच्चों के भावनात्मक परिष्कार और प्रज्ञा विस्तार के लिए अनुशासन पूर्वक जी जान से अनवरत लगें हैं जिनको हर वक़्त गुरु साहित्य के reliability and validity की चिंता होती है जिससे यह महान प्रज्ञाअमृत कलश की 🙇‍♀️🙏 एक भी बूंद यानि सद्विचार का अपमान न हो और गुरु जी के अंदर धधक रही उस प्रचंड शोलों के  🔥महत्व (value) में कहीं भी गिरावट नहीं आए❤बल्कि दिनों ☀दिन बढता ही जाए। 

5.संजना की मम्मी ने उसके बारे में जो कमेंट किया है उसे भी शामिल करना उचित समझते हैं, अनेकों को प्रेरणा मिल सकती है : 

गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस पर लेखों की  श्रृंखला में आज संजना बिटिया की अनुभूति प्रस्तुत की गई है जो अत्यंत दिव्य और प्रेरणादायक है । वो साक्षात कोई पवित्र और दिव्य आत्मा है जिसे इस धरती पर विशेष कार्य के लिए अवतरित किया गया है । बचपन  से ही उसके अंदर सारे दैवीय गुण मौजूद हैं ।परम पूज्य गुरुदेव के विचारों को न सिर्फ पढ़ना बल्कि उसको आत्मसात करना और कितनों की  विचारधारा भी बदल देती है । जब नवोदय में पढ़ती थी जब एग्जाम के टाइम में भी उसके अंदर इतनी  बेचैनी रहती थी। सिलेबस को छोड़  गुरुदेव के साहित्य को पढ़ते रहती थी। बाकी लड़कियां बोलती थी कि तुम पागल तो नहीं हो गई हो अपना सिलेबस नहीं पढ़ रही है क्या कर रही हो । अलीगढ़ शक्तिपीठ पर हम सभी के आने पर जब ज्योति कलश आई थी तब उसके अंदर ऐसे विचार आए कि  नारी जागृति के लिए रैली निकालना चाहिएऔर उसने अपने विचारों को नारी जागृति रैली अभियान के तहत प्रस्तुत कर एक नई दिशा धारा में प्रस्तुत कर दिया। कई लड़कियों को अपने जैसा पहनावा और अपने विचारों में रंग कर सबको प्रेरणा के स्रोत बनी। एक लड़की जींस पहने थी, उसके लिए शक्ति पीठ से पीली साड़ी खरीदी, मैंने पहनाई  फिर रैली में गई। आदरणीय महेंद्र बाबू जी के पास जाना और उनसे तीन प्रश्न पूछना कोई साधारण बात नहीं है । कोई दिव्यशक्ति ही बाबूजी के पास ले गई होगी। अपने घर को स्वर्ग बनाने में उसका बहुत बड़ा योगदान है । हम लोग भी लोभ-मोह में फंसे हुए थे, जैसे ही उसका त्याग किया और शक्ति पीठ पर आए तो हमारा जीवन धन्य हो गया, हमारे जीवन का कायाकल्प हो गया। परम पूज्य गुरुदेव के कार्यों को करने पर  बहुत हीआत्मानंद और आत्मशांति की अनुभूति हो रही है। OGGP के सभी सदस्यों का प्यार और आशीर्वाद पाकर हम सभी का जीवन निहाल हो गया है।

6.श्रद्धेय डा साहेब सपरिवार को सादर नमन।

परम् पूज्य गुरुदेव जी के आध्यात्मिक जन्म दिवस से संबंधित इस दिव्य परिवार के आत्मीय के अनुभूतियों के क्रम में आज अति सक्रिय सदस्य बेटी संजना जी की अनुभति बहुत ही प्रेरक एवम् सराहनीय है। इसे अन्तिम अनुभूति के रूप में माना जा रहा है।

इस वर्ष जबकि परम पूज्य गुरुदेव जी का यह सौवां आध्यात्मिक जन्म दिवस था तो इस बार बहुत अधिक अनुभति होनी  चाहिए़। इनकी संख्या इतनी कम क्यों है यह चिन्तन का विषय है।

इस सम्बन्ध में जहां तक मेरी बात है तो परम पूज्य गुरुदेव जी की कृपा से मेरे पास अनुभूतियों का भण्डार है।

उन अनुभूतियों से एक नवीनतम अनुभूति को साझा करने से मैं अपने को रोक नहीं पा रहा हूं। अभी पिछली आठ फरवरी को एक बारात से रात को लगभग साढ़े चार बजे अमेठी से अर्टिगा कार से प्रतापगढ़ वापस आ रहा था। कार को हमारे छोटे वाले दामाद जी ड्राइव कर रहे थे।

एक ट्रक खड़ा था, सामने से कोई कार आ रही थी वह काफी दूर थी यह सोच कर दामाद जी द्वारा डिपर दिया गया कि वह रुक जाए, मेरी कार पार होने पर उसे आना था।

लेकिन न जाने सामने वाले ड्राइवर को क्या सूझा कि वह रुका नहीं।

अब दो ही विकल्प थे या तो बाईं ओर घूमता तो ट्रक में घुस जाता और यदि दाहिने ओर मुड़ते तो कोई निश्चित नहीं था कि गड्ढा है या समतल।

मैं उस समय परम पूज्य गुरुदेव जी से ज्ञानप्रसाद के माध्यम से कृपा प्राप्त कर रहा था।

अचानक से जब दामाद जी द्वारा गाड़ी दाहिनी ओर झटके से लेकर रुकी तो उनकी कृपा से ही थोड़ी भी खरोच न गाड़ी में बैठे किसी को लगी और न ही गाड़ी को एक खरोच आई।

उस घटना को जब भी स्मरण करते हैं तो मेरे रोम खड़े हो जाते हैं।

पचास साठ की स्पीड में इस प्रकार से पूर्णतया सुरक्षित बच जाना परम पूज्य गुरुदेव जी के सुरक्षा कवच का ही कमाल है।

जय माता गायत्री जी की।


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