हमारे समर्पित,आदरणीय साथी हमारी कार्यप्रणाली से भलीभांति परिचित हैं कि जब भी किसी नए चैप्टर का शुभारम्भ होता है तो उसकी Summary एवं भूमिका प्रस्तुत करने का प्रयास रहता है। ऐसा करने से आने वाले लेखों में रोचकता के साथ-साथ एक Connectivity बनी रहती है,उत्सुकता रहती है कि मूवी के अगले सीन में क्या होने वाला है।
तो साथिओ आने वाले कुछ दिन हमारे आदरणीय सरविन्द पाल परिवार और हमारी सबकी बेटी संजना के योगदान को समर्पित रहेंगें। सरविन्द जी ने एक अद्भुत समयदान करके,आठ टॉपिक्स में लगभग 6000 शब्दों का कंटेंट भेजा है, उन्हीं में से एक लेख आज के इस दिव्य ज्ञानप्रसाद का हिस्सा बन रहा है। वसंत पर्व के इलावा,उन्होंने अपने सभी परिवारजनों की भावनाओं का विवरण भेजा है। हम करबद्ध क्षमाप्रार्थी हैं कि फ़ोन में स्टोरेज लॉक होने के डर से हमें उनका सारा कंटेंट पहले वापिस करना पड़ा था। 1600 शब्दों और कुछ क्लिप्स का, संजना बेटी का कंटेंट भी अति रोचक एवं प्रेरणादायक होने वाला है, ऐसा हम विश्वास कर सकते हैं।
1 नवयुग चेतना के सूर्य का उदय
2.पावन योजना है-गृहस्थ धर्म
3.बसंत पर्व पर एक आत्मानुभूति-सरविन्द कुमार पाल
4.बसंत पर्व पर एक आत्मानुभूति-आयुष कुमार पाल
5.बसंत पर्व पर एक आत्मानुभूति- पिंकी पाल
6.बसंत पर्व पर एक आत्मानुभूति-अनुराधा पाल
7.बसंत पर्व पर एक आत्मानुभूति-मीरा पाल
आज के लेख में एवं आने वाले लेखों में कुछ ऐसे तथ्यों का विवरण दिया गया है जिनसे आद सरविन्द जी की परमपूज्य गुरुदेव के प्रति अटूट श्रद्धा साफ़ दिख रही है। आप सबके समक्ष यह कंटेंट प्रस्तुत करने से पूर्व हमने कम से कम 10 बार इस कंटेंट को बार-बार पढ़ा, अपने जीवन साथी के साथ चर्चा की,अनेकों प्रश्न मन में उठे, उनके उत्तर प्राप्त करने की भी इच्छा प्रकट हुई लेकिन न जाने कौनसी झिझक ने सारे प्रश्नों को अपने अंदर ही दबाए रखने का संकेत दिया। भाई साहिब का परिवार अपना ही परिवार होने के कारण ऐसा अनुभव हुआ कि कुछ गलत हो रहा है, परिवार के लिए इतना अधिक बलिदान करना कुछ अनुचित सा दिखा। कर्ज़दार होना, लगातार कर्ज़ा बढ़ता जाना, तीन Grown up युवाओं के होने के बावजूद, भाई साहिब सारा बोझा स्वयं ही उठाये हुए हैं। उचित रहा होता कि परिवार के सभी सदस्य मिल जुल कर परस्पर आर्थिक सहायता करते। पिंकी बेटी के साथ हमारी फ़ोन पर बात हुई थी, उसे हमने आर्थिक सहायता के कुछ विकल्प सुझाये थे, हमारे सुझाव का कितना पालन किया, कोई जानकारी नहीं। ज्ञानप्रसाद लेखों में अपनी व्यक्तिगत बातें करना उचित नहीं है लेकिन हमें स्मरण आता है कि जब हम कनाडा आये थे तो हमारा छोटा बेटा मात्र 13 वर्ष का था, स्कूल आरम्भ होने में पांच माह थे तो दोनों भाइयों ने काम करके कमाना शुरू कर दिया था, यह प्रश्न नहीं है कि कितना कमाते थे लेकिन गुरुदेव के आत्मनिर्भर के सिद्धांत ने उन्हें जीवनभर के लिए इंडिपेंडेंट बना दिया।
हम यह पंक्तियाँ इस कारण लिख रहे हैं कि इस मंच से सार्थक सन्देश प्रसारित हों और भाई साहिब एवं उनके परिवार की समस्या इस परिवार की अपनी समस्या है। कई बार सही निर्णय न लेने के कारण ही जीवन की प्लानिंग में अड़चने आती हैं। आत्मनिर्भरता के लिए गुरुदेव ने हम सबके लिए स्वावलंबन का कितना शक्तिशाली सूत्र बनाकर छोड़ दिया है। क्षमाप्रार्थी हैं कि हमें कठोर शब्दों में कहना पड़ रहा है कि जो मनुष्य आज के युग में कुछ करने में असमर्थ है,उसमें स्वयं में ही कुछ कमी हो सकती है। यह कठोरता कुछ उसी तरह की है जैसे हम बार-बार गुरूसाहित्य को पढ़ाने के लिए बरतते हैं, केवल जय गुरुदेव यां Thumbs up लिखना गुरुकार्य नहीं है। यह सरासर धोखेबाज़ी है। एक बार फिर से इस कठोरता के लिए क्षमाप्रार्थी हैं।
आइये आज के दिव्य लेख का शुभारम्भ करें :
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
अर्थात शान्ति: कीजिये प्रभु ! त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में,अन्तरिक्ष में, अग्नि – पवन में, औषधियों, वनस्पतियों, वन और उपवन में,सकल विश्व में अवचेतन में,शान्ति राष्ट्र-निर्माण और सृजन में, नगर , ग्राम और भवन में प्रत्येक जीव के तन, मन और जगत के कण – कण में, शान्ति कीजिए ! शान्ति कीजिए ! शान्ति कीजिए
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विषम परिस्थितियों में भी परिवार का कुशल नेतृत्व, गुरुदेव की दिव्य कृपा से ही संभव है, प्रस्तुतकर्ता सरविन्द कुमार पाल
परिस्थितियाँ हर मनुष्य के सामने आती हैं और उसे उनका सामना करना पड़ता है, चाहे हंसकर करो या रोकर। सभी परिजन परिचित हैं कि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार जैसे अंतर्राष्ट्रीय परिवार को छोड़कर, हमारे अपने व्यक्तिगत परिवार में पाँच सदस्य हैं: दो बेटियाँ पिंकी पाल और अनुराधा पाल व एक बेटा आयुष कुमार पाल हैं, सभी दीक्षित हैं अर्थात दीक्षा लिए हुए हैं और दिव्य गुरुचरणों में समर्पित हैं। तीनों बच्चे आध्यात्मिक जीवन जीकर गुरुदेव के दिव्य निर्देश पर अपने कैरियर की तैयारी कर रहे हैं। बड़ी बेटी पिंकी पाल सिंगिंग और डांसिंग की तैयारी कर रही हैं और बेटा आयुष कुमार पाल क्रिकेट मैच की तैयारी कर रहा है। “धन के अभाव” में छोटी बेटी अनुराधा पाल की तैयारी में बाधा आ रही है लेकिन पूर्ण विश्वास है कि बहुत ही जल्द यह बाधा भी दूर हो जाएगी।
पिंकी पाल हर कंपटीशन में गुरुदेव की दिव्य कृपा से प्रथम स्थान प्राप्त करती है लेकिन अपने लक्ष्य तक पहुँच पाने में असमर्थ हो जाती है। इस असफलता का मुख्य कारण भ्रष्टाचार है। प्रदर्शन कितना भी अच्छा हो, “पैसा नहीं तो सेलेक्शन नहीं”,
यह सब हमसे संभव नहीं है, बस परम पूज्य गुरुदेव पर विश्वास है कि एक दिन बेटी की मेहनत रंग लाएगी और सफलता कदम चूमेगी। बेटी द्वारा चयन किया गया फील्ड अध्यात्म जगत से हटकर है जिसके कारण हम बेटी की प्रतिभा और प्राप्तियां दिव्य परिवार में साझा नहीं करते हैं, जिसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। बेटी के इस लाइन में जाकर कैरियर बनाने को हमारा बिलकुल भी समर्थन नहीं था लेकिन गुरुदेव की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन ने हमें सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि बच्चों की लगन एवं रुचि पर अड़चन के बजाये सहयोग करना ही उचित होगा। अपनी मर्यादा से मर्यादित जीवन जीने वाले का कायाकल्प होता है और कभी अमंगल नहीं हो सकता है। हम बेटी के कैरियर में पूरा सहयोग कर रहे हैं और वह भी निष्ठापूर्वक आगे बढ़कर तैयारी कर रही है।
बेटा पूर्ण निष्ठा से क्रिकेट मैच की तैयारी कर रहा है। क्रिकेट में भी हमारी रुचि नहीं थी लेकिन आज वह गुरुदेव की दिव्य कृपा एवं आप सबके सामुहिक आशीर्वाद से अद्भुत चमत्कार करते हुए कैरियर बना रहा है। उसकी अथाह मेहनत और लगन को देखकर आँखों में आँसू आ जाते हैं लेकिन हमें पूर्ण विश्वास है कि बेटे की मेहनत जरूर रंग लाएगी जिससे हमारे एवं इस दिव्य परिवार का नाम रोशन होगा ।
बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए हम अपनी “आय से अधिक व्यय” कर रहे हैं जिसके कारण हम निरंतर कर्जदार होते जा रहे हैं लेकिन हमें विश्वास है कि हम बहुत ही जल्द कर्जमुक्त भी हो जाएंगे।
यह सब गुरुदेव की दिव्य कृपा दृष्टि एवं आप सबके सामुहिक आशीर्वाद से ही संभव हो पा रहा है, हमारी इतनी क्षमता कहाँ कि हम इतना बड़ा खर्च उठा सकें।
हमारी आर्थिक स्थिति को देखकर किसी को भी विश्वास नहीं हो सकता कि हम इतना बड़ा खर्च कैसे झेल रहे हैं। ऐसे चमत्कार केवल गुरुदेव की शरण में आने से ही होते हैं जिन पर अक्सर लोग यकीन नहीं करते।
अक्सर यह Misconception बनी हुई है कि गुरुदेव की शरण में आने वाले को उम्रकैद हो जाती है और सीधे धनवर्षा होने लगती है, लेकिन ऐसी धारणा सरासर गलत है। गुरु की शरण में आने वाले को प्रेरणा/मार्गदर्शन मिलता है जिससे आत्मबल जागृत होता है, छोटी सोच बड़ी बनने लगती है, शरणार्थी हर प्रकार की परिस्थितियों का हंसकर सामना करता चला जाता है और हर दिव्य कार्य में निर्विघ्न सफलता प्राप्त करता चला जाता है।
आज हम सबको सही मार्गदर्शन चाहिए तभी हम सब आगे बढ़कर अपना और अपने परिवार का भविष्य उज्जवल बना सकते हैं। इसके लिए हमें धैर्य के साथ, एकाग्र मन से ध्यान केंद्रित कर अपने कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए। हम कर्त्तव्य धर्म को अपना मूल मंत्र समझकर इसका निरंतर पालन कर रहे हैं, आशा की किरण दिखाई दे रही है जो भविष्य में प्रकाशित जरूर होगी।
आय से अधिक व्यय के बावजूद भी हम अपने कर्त्तव्य पथ से विमुख नहीं हैं, हर परिस्थिति का सामना कर अपने कर्त्तव्य पथ पर चल रहे हैं। यह कटु सत्य है कि परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य शरण में आकर हर कोई अपने परिवार का कुशल नेतृत्व कर महाकाल के महाविनाश से बचा सकता है।
आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार का दिव्य मंच ऐसी परिस्थितिओं के लिए अति उत्कृष्ट विकल्प है। इस मँच पर नियमितता से गुरुदेव के दिव्य साहित्य का स्वाध्याय करने का सौभाग्य मिलता है जिससे पाठकों का दृष्टिकोण बदलता है और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है।
हम अपने स्वयं के अनुभव से कह सकते हैं कि यदि हम ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार से न जुड़े होते तो किसी गहरे गड्ढे में पड़े होते, अपनी प्रत्यक्ष आँखों से महाकाल का महाविनाश देख रहे होते या फिर जीवन-लीला ही समाप्त हो गई होती। आज हमें कोई घाटा नहीं है, लाभ ही लाभ है। अपने व्यक्तिगत परिवार का कुशल नेतृत्व कर अपने पारिवारिक कर्त्तव्यों का पूर्णता पालन कर रहे हैं, सारा परिवार खुश है। “जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है” के सिद्धांत का पालन करते हुए गृहस्थ धर्म निभा रहे हैं एवं विचारक्रांति अभियान के प्रचार-प्रसार में अनवरत रूप से गिलहरी की भाँति लगे हैं।
आज हम जो इतना बड़ा सपना साकार करने में लगे हैं तो यह परम पूज्य गुरुदेव की ही दिव्य कृपा का दिव्य आशीर्वाद है। हम जैसे तुच्छ प्राणी हैं की इतनी बड़ी औकात कहाँ लेकिन फिर भी सब संभव हो रहा है। परिवार में कमाने वाले एकमात्र हम ही हैं लेकिन फिर भी “आय से अधिक व्यय” होना एक चमत्कार ही तो है। यह सब गुरुकृपा ही है।
अपने स्वयं के अनुभव से, अपने इस परिवार के साथिओं के लिए 2026 के वसंत का निम्नलिखित सन्देश है:
अगर जीवन को बंधनमुक्त कर शुद्ध व पवित्र बनाना है तो निस्वार्थ भाव से परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य शरण में आकर, इस दिव्य मंच से प्रकाशित होने वाले ज्ञानप्रसाद लेखों का नियमितता से, गंभीरतापूर्वक स्वाध्याय करें। लेखों में दिव्य ज्ञान को समझकर, आत्मसात कर अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित करें जिससे आपकी पात्रता विकसित होगी, आप पर गुरुदेव की अनुकम्पा बरसेगी और आपका जीवनयापन सुखमय होगा। ऐसा जीवन केवल गुरुदेव के प्रति पूर्ण, बिना किसी बनावट के, श्रद्धा-विश्वास से ही संभव है। मंच तो अनेकों उपलब्ध हैं लेकिन ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार की Uniqueness का अपना ही विशेष स्थान है।
धन्यवाद। जय गुरुदेव
कल एक और जागृत सन्देश की आशा है।