वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

सिस्टर क्रिस्टीन का 1000 islands park New York में मिलन-लेख शृंखला का 23वां लेख 

हमारे समेत अक्सर अनेकों साथी अपनेआप  को कोसते रहते हैं कि  परम पूज्य गुरुदेव हमें  शांतिकुंज क्यों नहीं बुलाते,हमें शांतिकुंज कब बुलाएंगें आदि आदि। इंसान की फितरत है कि जो कुछ उसके पास है उसे वोह संभाल नहीं पाता,उसका सदुपयोग नहीं कर पाता  और जो नहीं है उसके लिए मृगतृष्णा की भांति पीछे फिरता रहता है। ईश्वरीय सत्ता सबसे ऊपर है, जो जब चाहे, जो चाहे मनुष्य से करवा ले, 2018 और 2019 में one after the other, गुरुदेव ने शांतिकुंज बुलाया,हमें कुछ कार्य सौंपे और फिर कहा कि तुम्हें इन कार्यों को पूर्ण करना है। 

आज के ज्ञानप्रसाद लेख का यह अलग सा शुभारम्भ क्यों हो रहा है ? इसका कारण है, न्यूयॉर्क स्थित Thousand islands  park जहाँ स्वामीजी ने 1895 में सात सप्ताह व्यतीत किये थे। 

जर्मनी में जन्म लेने वाली स्वामी विवेकानंद की शिष्या सिस्टर क्रिस्टीन,जिसे स्वामीजी अपनी बेटी मानते थे, के बारे में आज के लेख के लिए रिसर्च करते समय जब Thousand islands  की बात आयी तो हमारा माथा एकदम ठनका। 2005 में हमने इन्हीं Thousand islands (Exact 1008) का किंग्स्टन से 4 घंटे का क्रूज किया था।  क्रूज में ही न्यूयॉर्क के Boldt Castle देख आये थे लेकिन Thousand islands पार्क, जहाँ स्वामीजी ने साधना की थी उसे मिस कर आये थे। साढ़े चार घंटे का क्रूज तो कर लिए लेकिन मात्र 25 मिंट का यात्रा न कर पाए, इसकी जानकारी ही नहीं थी। 

यह होता है गुरु का आदेश, ईश्वर की शक्ति जो जब होना होता है तभी करवाती है। 

जब यह संस्मरण पढ़ रहे थे तो हम दोनों ने उन दिनों की यादों को पुनर्जीवित तो किया लेकिन साथ में ही स्वयं को दुर्भाग्यशाली भी माना। इतना ही कहकर सांत्वना दी कि Everything happens for a reason and at a specified time. 

इन्हीं घटना को स्मरण करते हुए, हमने न जाने कितने ही ऐसे विभूतिवान व्यक्तित्वों का स्मरण हो आया जिन्हें स्वामी विवेकानंद की शक्ति ने खींच कर अपने सम्पर्क में लाया। सुप्रसिद्ध जर्मन विद्वान् और वेदांती मैक्स मूलर श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद से बारिश और आंधी में रेलवे स्टेशन पर मिलने आये थे। ऑस्ट्रिया में जन्में सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक निकोला टेस्ला के पास खाना खाने का समय तो नहीं था लेकिन स्वामीजी के उद्बोधन सुनने के घण्टों खड़े रह सकते थे। सोमवार के ज्ञानप्रसाद लेख की नायिका सिस्टर क्रिस्टीन अपनी मित्र Mary  Funke   के साथ बारिश और आंधी तूफ़ान में, मीलों यात्रा करके Thousand islands park में स्वामीजी से मिलने आयी थीं और मात्र कुछ ही दिनों में उन्हें स्वामीजी के 18 लेक्चर सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। 

तो साथिओ यह है आज के लेख की पृष्ठभूमि जो Thousand islands park,स्वामीजी की  साधना स्थली को वर्णन कर रहा है। 

प्रत्येक लेख की भांति आज का लेख भी ऐसी दिव्यता से ओतप्रोत है कि जिसे केवल अनुभव ही किया जा सकता है। साथिओं के ऐसी ही अनुभति हो, एक-एक शब्द,एक-एक पंक्ति का चयन बड़ी ही सावधानी से किया गया है/किया जाता है /किया जाता रहेगा। 

लेख छोटा ज़रूर है लेकिन साथिओं से ध्यानपूर्वक,समझकर,अंतर्मन में उतार कर ही कमेंट करने की आशा कर रहा है। 

बहुत बहुत धन्यवाद् एवं लेख का शुभारम्भ 

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मिस मैरी एलिज़ाबेथ डचर (Miss Mary Elizabeth Dutcher)  के बुलावे पर स्वामीजी, उन्हीं के नाम से प्रचलित न्यूयॉर्क स्थित  स्वामी विवेकानंद पार्क में आए थे। मिस मैरी एक आर्टिस्ट और कॉटेज की मालिक थीं। उन्होंने न्यूयॉर्क शहर में उनकी स्पिरिचुअल क्लास में हिस्सा लिया था और स्वामीजी के  इरादे की मज़बूती से वे बहुत प्रभावित हुई थीं।

स्वामी विवेकानंद के आने की तैयारी में, मिस मैरी  ने उनके आराम और प्राइवेसी के लिए अपने कॉटेज में एक अलग विंग बनवाया। इस तीन मंज़िले विंग  में सबसे नीचे वाली मंज़िल में एक गेस्ट रूम, पहली मंज़िल पर एक क्लासरूम और सबसे ऊपर स्वामीजी के लिए एक अलग एकांत में कमरा बनवाया, जो नदी के शानदार नज़ारे वाले एक पोर्च में खुलता था। जब स्वामीजी ने इस कॉटेज में सात हफ़्तों की शानदार शुरुआत के लिए प्रवेश किया तो उनका स्वागत करने वाले बैनर पर लिखा था, “Welcome Vivekananda” आज, 2026 में 131 वर्ष बाद भी कॉटेज वैसा ही खड़ा है जैसा तब था, और उनकी शिक्षाओं को मानने वाले इसे एक पवित्र जगह मानते हैं।

कॉटेज के सामने उद्यान में लगी कांस्य पट्टिका  पर अंग्रेजी में अंकित शब्द स्वामीजी के व्यक्तित्व को स्वयं ही वर्णित कर रहे हैं ,हमने साथिओं की सुविधा के लिए यथासंभव हिंदी अनुवाद किया है :  

विवेकानंद रॉक मेमोरियल 

स्वामी विवेकानंद को  शिकागो में आयोजित 1893 की धर्म संसद में के बाद भिन्न-भिन्न धर्मों के बीच तालमेल स्थापित करने का सबसे बड़ा चैंपियन माना गया। रातों-रात भारत का यह अनजान युवा साधु एक महान विश्व शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध  हो गया। सभी धर्मों के मूल सत्य के उनके प्रेरक संदेश ने Interfaith movement  को जन्म दिया। 1895 की गर्मियों में, स्वामीजी  ने 1000 Islands park  में एलिज़ाबेथ डचर के कॉटेज  में सात हफ़्ते बिताए, और कई सच्चे शिष्यों को अपनी शिक्षाएँ दीं। वे शिक्षाएँ, जो बाद में “Inspired talks”  के नाम से पब्लिश हुईं, दुनिया के कोने कोने में पहुँच गईं, और आध्यात्मिक संतुष्टि चाहने वाले अनेकों  को आज तक प्रेरणा दे रही हैं। 

7 अगस्त,1895 की सुबह इसी जगह (जहाँ पाठक कांस्य पट्टिका  देख रहे हैं) पर स्वामी विवेकानंद 1000 Islands park  में अपने ऐतिहासिक प्रवास के आखिरी दिन गहरे ध्यान में बैठे थे। स्वामीजी  और उनके दो शिष्य उस कॉटेज  से लगभग आधा मील दूर टहलते हुए गए जहाँ चारों तरफ जंगल और एकांत था और एक  छोटी डालियों वाले पेड़ के नीचे बैठ गए, शायद यह दो शिष्या Christine  और Funke  ही थीं।  स्वामीजी  ने अचानक कहा: 

वह Bronze (कांस्य) की मूर्ति की तरह स्थिर हो गए। एक आंधी आई और मूसलाधार बारिश हुई, लेकिन स्वामीजी  को कुछ पता नहीं चला। उस दिन बाद में, 1000 Island park  से विदा लेने के लिए एक स्टीमर पर चढ़ते हुए, उन्होंने कहा:

“मैं इन हज़ार द्वीपों को आशीर्वाद देता हूँ।”

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A welcome retreat 

पूरे U.S. में लगभग दो वर्ष  तक ज़ोरदार लेक्चर देने के बाद थककर, विवेकानंद 1000 Island park  में पनाह पाकर बहुत ही शुक्रगुज़ार थे। चिंतन के लिए यह बहुत ही उत्कृष्ट स्थान था। 1895 में यह पार्क केवल  20 वर्ष  पुराना था, फिर भी इसने पहले ही इतने लोगों को अपनी ओर खींच लिया था कि 600 कॉटेज की एक कम्युनिटी बन गई थी। यहाँ पर निवास करने वाले कुछ हज़ार लोगों ने  गर्मियों में मन और शरीर दोनों के मनोरंजन के लिए इस स्थान को सपोर्ट किया। पार्क से तरोताज़ा हुए विवेकानंद ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति इकट्ठा करके,मात्र सात ही सप्ताह में 12  छात्रों को ट्रेन किया जो उनके विचारों और शिक्षाओं को “Inspired talks” नाम के कलेक्शन में वर्णित है। “Inspired talks” पूरब और पश्चिम को जोड़ने वाले विचारों का एक अद्भुत कलेक्शन है  जिसने रामकृष्ण की आध्यात्मिकता को राजनीतिक आज़ादी और इंसानियत की भौतिक भलाई के लिए उनकी अपनी गहरी चिंता से जोड़ा।

स्वामीजी  ने कहा कि वह Thousand island park  में “अपने सबसे अच्छे रूप में” थे।

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सिस्टर क्रिस्टीन का 1000 islands से सम्बंधित संक्षिप्त विवरण : 

Sister Christine (17 August 1866 – 27 March 1930)[

एक स्कूल टीचर और स्वामी विवेकानंद की करीबी दोस्त और शिष्या थीं। 24 फरवरी 1894 को, क्रिस्टीन ने अपनी दोस्त Mary Funke के साथ, USA के मिशिगन स्टेट के नगर Detroit में विवेकानंद के एक व्याख्यान में भाग लिया, इस व्याख्यान ने क्रिस्टीन के इतना प्रभावित किया कि उन्होंने पत्रों के माध्यम से स्वामी जी  के साथ संवाद करना शुरू कर दिया।1902 में क्रिस्टीन भारत गईं और एक स्कूल शिक्षिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य  करना शुरू कर दिया।

विवेकानंद की एक अन्य समर्पित शिष्या सिस्टर निवेदिता की मृत्यु के बाद, क्रिस्टीन ने निवेदिता गर्ल्स स्कूल का कार्यभार संभाला। विवेकानंद के जीवन के कुछ विद्वानों, जिनमें सिस्टर गार्गी (असली नाम Marie Louise Burke) और प्रव्राजिका व्रजप्राणा (Associate Professor of Literature) शामिल हैं, का मानना ​​है कि विवेकानंद क्रिस्टीन को अपनी बेटी मानते थे।

1895 में न्यूयॉर्क में स्वामी विवेकानंद ने थाउजेंड आइलैंड पार्क में सिस्टर क्रिस्टीन को ब्रह्मचर्य की दीक्षा दी। विवेकानंद के डेट्रॉइट छोड़ने के बाद, कुछ समय के लिए उनके और उन दो युवतियों के बीच संपर्क बंद हो गया। जुलाई 1895 में, क्रिस्टीन और Mary Funke  ने विवेकानंद से मिलने के लिए उत्तरी न्यूयॉर्क राज्य के 1000  आइलैंड पार्क जाने का फैसला किया; स्वामीजी  वहाँ रुके हुए थे और अपने शिष्यों के एक ग्रुप को पढ़ा रहे थे। यात्रा के दौरान दोनों एक तूफ़ान में फँस गयीं  और आखिरकार रात में Thousand islands  park  पहुँचे, गीले, गंदे और पूरी तरह से अप्रत्याशित। विवेकानंद ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। Funke  ने बाद में उस घटना को याद करते हुए कहा, “उन्होंने हमारा इतने प्यार से स्वागत किया, हमारे लिए यह एक आशीर्वाद जैसा था। विवेकानंद ने दोनों को  कुछ दिनों के लिए वहाँ रहने और अपने लेक्चर सुनने के लिए कहा । दोनों युवतियों ने तुरंत न्योता स्वीकार कर लिया। विवेकानंद ने दूसरे  शिष्यों  को बताया कि इन दो शिष्याओं ने उन्हें खोजने के लिए सैकड़ों मील की यात्रा की है । उन्हें 20 जुलाई से 9 अगस्त 1895 तक रहना था; उस दौरान उन्होंने 18 व्याख्यानों में भाग लिया।


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