वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

“सुझाव आद बहिन सुमनलता जी का प्रयास हमारा” का 30 अगस्त 2025 वाला अंक 

आदरणीय बहिन सुमनलता जी के सुझाव एवं साथिओं के  समर्थन से जन्में विशेषांक में प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को हमें अपने बारे में कुछ लिखने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस सुझाव एवं समर्थन से प्रदान किये गए सम्मान के लिए हम अपने प्रिय साथिओं का ह्रदय से धन्यवाद् करते हैं। 

कहने को तो यह सेगमेंट पूर्णतया व्यक्तिगत होता है लेकिन उस व्यक्तिगत योगदान के पीछे भी कुछ न कुछ ज्ञान ही छिपा होता है, गुरुभक्ति ही छिपी होती है।    

पिछले शनिवार के स्पेशल सेगमेंट में लिखा था कि हमारा सदैव प्रयास रहता है कि ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के मंच से प्रकाशित होने वाला प्रत्येक कंटेंट गायत्री परिवार से,गुरुवर से,वंदनीय माता जी से, शांतिकुंज से, गायत्री परिवार से कनेक्टेड अपने साथियों के योगदान को ही समर्पित हो लेकिन आज शायद इस Rule का पालन न हो पाए जिसके लिए अपने साथियों से पहले से ही क्षमाप्रार्थी हैं। माह के अंतिम शनिवार को हमारे लिए रिजर्व कर दिया है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इस सेगमेंट में हम व्यक्तिगत गपशप,जो जी में आए लिखते जाएं। अलास्का(अमरीका) क्रूज का दिव्य वातावरण (मां गंगा जैसा विशाल महासागर, पर्वतराज हिमालय जैसे ऊंचे-ऊंचे पहाड़ एवं सूर्यदेव का संरक्षण) हमसे कौन-कौन से प्वाइंट लिखवा गया हम खुद नहीं जानते। बार-बार अपने फकीर गुरु की 1972 वाली अफ्रीका यात्रा झकझोड़ती रही, उन्होंने तो फटे हुए कुर्ते को टांके लगवा कर पहन लिया था, हम तो आज तक रॉयल ट्रीटमेंट से गौरवान्वित हुए फिरते हैं । जिस फकीर गुरु के बारे में यह उंगलियां लिख रही हैं,उसी ने छोटी पोती में ईश्वर को देखने की शक्ति प्रदान कर दी है।आज तक न जाने कितने ही नवजात शिशुओं को जन्म लेते,घुटनों के बल चलते,तोतली वाणी में,देख चुके हैं/सुन चुके हैं लेकिन न जाने हमारी छोटी पोती ने हमें कौन सी शक्ति प्रदान करा दी कि उसके साथ-साथ हर कोई शिशु ईश्वर का रूप ही दिखने लगा। विज्ञान की ओर रुझान होने के कारण  “इसकी हर गतिविधि के पीछे कोई ईश्वरीय चेतना कार्य कर रही है” जैसे अनेकों  महत्वपूर्ण प्रश्न उठते  ही जा रहे हैं।   

हम जानते हैं कि हम जो कुछ लिख रहे हैं यह पूर्णतया व्यक्तिगत है लेकिन गुरु महिमा का गुणगान किए बिना कैसे रह पाएं। 

Princess cruise lines जिसके अंतर्गत इस 8 दिवसीय क्रूज का आयोजन हुआ था सच में ऐसी आवभगत हमने पहली बार देखी। नगर की Man-driven  रिक्शा यात्रा से लेकर, ट्रेन  यात्रा, हवाई यात्रा आदि न जाने कौन-कौन सी यात्राएं संपन्न हुई लेकिन इसके आगे सभी फीकी ही दिखाई दीं। 

18 मंज़िल शिप की  सबसे ऊपरी मंज़िल का दृश्य इतना दिव्य था कि उसका वर्णन करने की हमारी समर्था नहीं है। इसे तो केवल फील ही किया जा सकता है। साथिओं के साथ पहले भी शेयर कर चुके हैं, एक बार फिर से उस दिव्य वातावरण  का अनुभव करते हुए आनंदित हुए बिना नहीं रहा पायेंगें। भगवान सूर्यदेव का दिव्य तेज़,चारों ओर ऊँचे विशालकाय देवात्मा हिमालय जैसे पर्वत, माँ गंगा की अनुभूति  कराता पैसिफिक महासागर, उसकी लहरों  पर 30-40 मील प्रतिघंटा की गति से भागता हमारा प्रिंसेस शिप (शिप क्या, एक पूरा नगर), इस दृश्य की दिव्यता को अनुभव करने  के लिए दिव्य दृष्टि ही चाहिए, शब्द क्या इस नज़ारे का वर्णन कर पायेंगें। ऐसे दिव्य वातावरण में दैनिक ज्ञानप्रसाद की रचना अपनेआप में ही  एक अजूबा  नहीं तो और क्या है, उन दिनों परम पूज्य गुरुदेव ने हमसे  क्या कुछ लिखवा डाला हमें खुद भी विश्वास नहीं हो  रहा। बस चलचित्र की भांति एक के बाद एक दृश्य चलते ही रहे, अलग-अलग जगहों के  Time difference, दिन रात के  बावजूद यही प्रयास रहा कि भारतीय साथिओं को ज्ञानप्रसाद उसी  नियत समय पर  मिलता रहे क्योंकि 98 प्रतिशत साथी तो भारतीय ही हैं और हम ज्ञानरथ परिवार के साथिओं से जुड़े रहे। जब भी लिखने बैठते तो उस गुरुदेव के 1972 वाले स्टीमशिप की छवि सामने आ खड़ी होती जिसके ऊपरी छत पर गुरुदेव कप्तान डेंगला से वार्तालाप करते दिख रहे थे। है न कितनी अद्भुत, अविश्वसनीय किन्तु सत्य बात। कप्तान सदका डेंगला,जिसका हिंदी अनुवाद “सच्ची ख़ुशी” होता है, और गुरुदेव के बीच जो संवाद हुए हम 21 दिसंबर 2022 वाले लेख में शेयर कर चुके हैं, बहुत ही रोचक  दिव्य लेख था,उसका लिंक फिर से दे रहे  हैं:

अमरीका के जिन 4 नगरों में शिप एक-एक दिन के लिए रुका, बहुत ही छोटे गाँव जैसे थे, कोई अधिक डेवलपमेंट नहीं हुई  दिखती थी, कह ही नहीं सकते थे कि यह अमरीका के नगर हैं, भारतीय व्यापारी वहां पर भी अपनी धाक जमाए हुए थे, लेकिन शिप पर सब कुछ वैसे ही उपलब्ध था जैसे कि हम न्यूयार्क  के Manhattan एरिया में हों। हॉट टब से लेकर स्विमिंग पूल,Banquet हाल से लेकर कैसिनो तक, कांफ्रेंस हाल से लेकर Gym तक,डिस्पेंसरी से लेकर ज्वेलरी बाजार तक सब कुछ उपलब्ध था। सबसे आश्चर्यजनक अनुभव तो Buffet देखकर हुआ जो कुछ चार-पांच घंटे छोड़ कर लगभग 20 घंटे सर्विस प्रदान करता था। 14वीं मंज़िल पर दाएं-बाएं दोनों तरफ स्थित इस हाल को देखकर आश्चर्य होता था कि यह लोग सोते कब होते होंगें। जिज्ञासावश  एक दिन मिज़ोरम  की लगभग 30 वर्षीय Server शारदा को पूछ ही लिया तो उसने अपनी दिनचर्या के साथ-साथ और इतनी जानकारी प्रदान करा दी कि उसका  हम धन्यवाद् किये बिना नहीं रह सकते। मुंबई से 4  वर्ष का होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद उसे इस शिप पर नौकरी मिली। उसी ने बताया कि शिप पर रहना, खाना पीना फ्री होने के कारण सारा पैसा बच जाता है जिसे वह अपनी तीन बहिनों और एक भाई की पढाई के लिए इंडिया भेज रही है। एक बहिन नर्सिंग का कोर्स कम्पलीट कर चुकी है, एक डॉक्टर बन चुकी है, भाई फार्मेसी का कोर्स कर चुका  है लेकिन कोई भी भारत से बाहिर नहीं आना चाहता। शारदा  ने बताया की उसकी लाइफ बहुत ही सख्त है, 12 घंटे का शिफ्ट वर्क है, लगातार शिप पर ही चलते रहना पड़ता है जिसके कारण बैक pain हो गयी है। 12 घंटे सोने के लिए हैं। चौथी मंज़िल पर सभी को कमरे  मिले हुए हैं। इसी तरह 24 वर्षीय  फिलिपिनो युवक से बात, जो Pools की देखरेख करता था,उसने भी कमर दर्द, घुटनों के दर्द एवं पैरों के दर्द की बात की। लेकिन एक बात जिसने हमारा सभी का मन मोह लिया वोह था उनके चेहरे पर “सदैव मुस्कराहट”, बाहिर से देखकर पता ही नहीं चलता था कि यह सभी इन परिस्थितियों में काम कर रहे थे। मात्र 3 महीने पूर्व appoint हुए Serbia के Server  से बातचीत हुई तो ऐसा लगा न जाने कितने दिनों से परिचित हों। शिप पर अधिकतर कर्मचारी Philippines देश से थे।  सभी द्वारा प्रदान की गयी आवभगत को हम Salute किये बिना नहीं रह सकते। 

जब इतनी Hospitality एवं प्रेम की बात कर रहे हैं तो भारतीय कर्मचारी एक Exception थे। कभी भी किसी के चेहरे पर न तो ख़ुशी देखी थी, किसी ने भी आगे बढ़कर सर्विस प्रदान करने की भावना तो दूर, टरकाने की ही कोशिश की। इनकी Customer सर्विस तो इतनी  Low quality की थी कि  क्या कहा जाये। 

जब इस तरह की बात हो रही है तो 50 वर्षीय गुजरात से आए अमरीकन सिटीजन नीरज मोदी जी की बात करना भी उचित ही लगता है। चाय-कॉफ़ी की लाइन में खड़े उनसे बात हुई तो हमने गायत्री परिवार, गुरुदेव की बात करना आरम्भ किया, उन्हें कुछ भी पता नहीं था। उनके हाव-भाव से, बातचीत से, Multi-millions की बात से उनकी अमीरी साफ़ झलक रही थी। वोह किसी अन्य संस्था से जुड़े थे जिसका नाम बताने में झिझक रहे थे। गुजराती होने के कारण हमारा प्रथम अनुमान स्वामीनारायण था लेकिन उसे उन्होंने नकार दिया, इस्कॉन को भी न कर दिया तो फिर हमने पूछा ही नहीं। 

तो साथिओ कहीं आप सब इन पंक्तियों को पढ़कर,चुगलियां सुनकर Bore तो नहीं हो रहे।

आओ कुछ सुन्दर बातें, अनुभव की बातें करें। 

1.क्रूज में अनेकों संस्मरण ऐसे होंगें जो हमारे लिए पहली  बार होने के कारण आश्चर्यजनक थे लेकिन इन आश्चर्यों का श्रेय हमारे बच्चों को जाता है जिन्होंने हमारे लिए एक ऐसा Surprise plan किया जो रहती उम्र तक याद रहेगा एवं हम उनके सदा ही आभारी रहेंगें। चारों इतने उदार हैं कि उन्होंने हमें धन्यवाद् भी नहीं करने दिया, “हमारा कर्तव्य है, हमने कौनसा  कोई बड़ा काम कर दिया” कह कर हमें चुप करा दिया। 

2.होटल के कमरे में जाने के लिए आज तक हमने Card वाली चाबी ही देखी थी जिसे दरवाज़े पर लगे Slot में डालना पड़ता था लेकिन Medallion key हमारे लिए बिलकुल ही नई थी। हैरानगी तो तब हुई जब हमने देखा कि बहुत दूर से ही सेंसर(Green light) काम कर रहा है।

3.हेलीकाप्टर यात्रा का भी अपना ही नया अनुभव था। ग्लेशियर icefield तो पहले भी देखे थे, उन पर पहले भी पैदल चले थे लेकिन हेलीकाप्टर का land/take off एक नया अनुभव था। 

4.इतने पास से Iceberg देख पाना अपने में नया तो था ही लेकिन उनका टूटकर महासागर में गिरना ऐसा था जैसे  पहाड़ गिर रहा हो, बर्फ के पहाड़ ही तो हैं। 

समय देने के लिए धन्यवाद्,जय गुरुदेव                      


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