वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

मई माह का विशेष विशेषांक,कमैंट्स प्रथा में संशोधन 

27 अप्रैल 2025 को आरम्भ हुए “सुझाव बहिन सुमनलता जी का, प्रयास हमारा” शीर्षक से आरम्भ हुए “विशेष विशेषांक” का वर्तमान अंक प्रस्तुत करते हुए हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। अपने सभी आदरणीय साथिओं की पूर्व स्वीकृति से इस “विशेष विशेषांक” के शीर्षक में संशोधन करने की जिज्ञासा उठ रही है। हमारे सहकर्मी नए शीर्षक “सुझाव बहिन सुमनलता जी का, स्वीकृति साथिओं की,प्रयास हमारा” पर कमेंट करके बता सकते हैं,कुछ भी अनुचित दिखे तो तुरंत संशोधन करने का प्रयास करेंगें। 

माह के अंतिम शनिवार के प्रकाशन को “विशेष विशेषांक” के डबल Adjective से सम्मानित करने के पीछे हमारी निम्नस्तरीय बुद्धि  यही कहती है यदि माह के पहले तीन शनिवारों के प्रकाशन को विशेष कहा जाता है तो अंतिम शनिवार के प्रकाशन को “विशेष विशेषांक” कहना कोई ज़्यादा  अनुचित नहीं होना चाहिए। 

सभी विशेषांकों में एक तथ्य कॉमन है कि यह एक ओपन फोरम है, जहाँ लेखन के नियमों का पालन किये बिना ही प्रत्येक साथी अपने ह्रदय में उठ रही अभिव्यक्तिओं का वर्णन करता है क्योंकि हम में से कोई भी लेखक नहीं है। ह्रदय की आवाज़ ही सही मायनों में अंतर्मन की आवाज़ होती है जो हमें एक दूसरे  के साथ अपनत्व के अटूट बंधन में बांधती है। 

आज की प्रस्तुति में हमारे ह्रदय में उठ रही इसी वाणी को, दिल खोल कर साथिओं के समक्ष रखने का प्रयास किया गया है। इस प्रस्तुति में व्यक्त किये गए कोई भी विचार अनुचित दिखें तो साथी पूरी  तरह नकारने के लिए स्वतंत्र हैं,जिसके लिए हम पहले से ही क्षमाप्रार्थी हैं। 

तो आइये चलते हैं एक-एक करके ह्रदय में उठ रहे विचारों की परतें  खोलने का प्रयास करते हैं। डर है कि प्याज़ की परतों की भांति ह्रदय की परतों को खोलते-खोलते अश्रुधारा और सिसकियाँ ही अपनी धाराओं में न लपेट लें।

सबसे पहला विषय 23 अप्रैल 2025 को देखे स्वप्न से सम्बंधित है। अक्सर हम कहते  आये हैं कि स्वप्न  हमारी डिक्शनरी में Exist ही नहीं करता। परम पूज्य गुरुदेव के साहित्य की खुमारी ऐसे स्तर की होती है कि बिस्तर तक आने की देर होती है, पता नहीं चलता  कि हम कब नींद की गोद में समा गए। रात को दो तीन बार नींद खुलती अवश्य है लेकिन उसी समय आ भी जाती है। 23 अप्रैल के स्वप्न को जब हमने आद चिन्मय जी के साथ शेयर किया तो उनके विचार भी निम्लिखित अंकित किये हैं। 17 नवंबर 2023 को जब गुरुदेव ने स्वप्न में आकर 4 पन्ने थमाए थे तो बहुत बड़े सन्देश की सूचना दी थी। जब हमारे साथी, हमारी स्वर्गीय दीदी, हमारी स्वर्गीय माता जी स्वप्नों की बात किया करते थे तो हम एक दम नकार दिया करते थे, हमें यह रूढ़िवाद प्रतीत होता था। अब धीरे-धीरे समझ में आ रहा है कि दिव्य सत्ताएं अपने व्यस्त टाईमटेबल में से लोकहित के लिए समय तभी निकालती हैं जब हमसे कोई बड़ा कार्य  करवाना होता है। 

इसी संदर्भ में हम अनेकों बार रिपीट कर चुके हैं गुरुवर को छोटे-छोटे कार्यों के लिए डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए, छींक मारी, गुरुवर उसका निवारण कर देंगें, यह कोरी  दुकानदारी है। ऐसा करके हम गुरुवर का “बोओ और काटो का सिद्धांत” भूल रहे हैं  गुरुदेव ने भी अपने संदेशों में बताया है “हमसे मांगने की कोई आवश्यकता नहीं है, हम पर आपका हक है, हम आपका काम करते ही रहेंगें।”

स्वप्न का संक्षिप्त विवरण:

जब से गुरुदेव के दरबार में नौकरी करना शुरू किया है, आत्मिक शांति के कारण नींद (जो हमारे सबसे बड़ी समस्या थी) ऐसी हो गयी है कि बिस्तर तक पहुंचने की देर होती है, लेटते ही 5 मिंट के अंदर  ही हम इतनी गहरी  नींद में डूब जाते हैं कि क्या कहा जाए। इस गूढ़ नींद का अनुमान तो इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि हमें कभी स्वप्न आया ही नहीं। यदि हम अपनी स्मरणशक्ति पर ज़ोर डालें तो पछले समय में वही स्वप्न आया था जिसमें गुरुदेव हमें कुछ पन्नें देकर ज्ञानप्रसाद वितरण का सन्देश देकर आँखों से ओझल हो गए थे। 

23 अप्रैल 2025  के सपने में हम आदरणीय चिन्मय जी के साथ शांतिकुंज की यज्ञशाला में बैठे कुछ समय तक यज्ञकुंड में  दिव्य आहुतियां प्रदान कर रहे थे, यह दिव्य दृश्य मात्र कुछ मिंट के लिए  ही दिखा, हम कुछ कह पाते,उससे पूर्व ही स्वप्न टूट गया। इस स्वप्न में क्या सन्देश छिपा था,हमें कुछ भी समझ नहीं आया लेकिन आदरणीय चिन्मय जी ने निम्नलिखित सन्देश के माध्यम से हमें समझा दिया : 

प्रणाम भाई साहब,

आपका भावपूर्ण संदेश पढ़कर अंतर्मन गद्गद हो उठा। स्वप्न में शांतिकुंज प्रांगण में यज्ञ की वह दिव्य अनुभूति, और उसमें हमारा सान्निध्य, निश्चय ही यह सब कोई सामान्य बात नहीं है। यह गुरुसत्ता की विशेष कृपा और उनके संदेश का संकेत प्रतीत होता है।

आपने जिस प्रकार पूर्व में ज्ञानरथ मंच की दिव्य प्रेरणा को स्वप्न के माध्यम से पाया और उसे जीवन में मूर्त रूप दिया, वह स्वयं में एक “अद्भुत तपस्या” है। उसी परंपरा में यह नवीन स्वप्न भी किसी विशेष संदेश या दिशा का वाहक हो सकता है। कभी-कभी स्वप्न हमारे भीतर के गहनतम भावों और संकल्पों को उजागर करते हैं और उनका अर्थ गुरुकृपा से ही समझ में आता है।

आपका स्नेह, श्रद्धा और निरंतर साधना वंदनीय है। कृपया परिवार को मेरा सादर प्रणाम कहें। हम सब गुरुदेव की चेतना में जुड़े हैं। यही सबसे बड़ा सत्य और आश्वासन है।

पूज्य गुरुदेव और वंदनीय माताजी के आशीर्वाद से हम लोगों की शीघ्र मुलाक़ात हो, ऐसी प्रार्थना है।

प्रणाम,

चिन्मय

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आज की प्रस्तुति का दूसरा विषय ऐसा है जिसे लिखने के लिए पूरी सावधानी,संयम एवं शब्दावली  का सहारा लेने का प्रयास किया है ताकि अनजाने में भी कहीं कोई ऐसी भावना न व्यक्त हो जाए जिससे हमारे किसी भी साथी के हृदय को चोट लगे। अगर ऐसा होता है तो हम अपनेआप को कभी भी क्षमा नहीं कर पायेंगें। हम पूर्व-क्षमाप्रार्थी हैं। 

यह विषय कमैंट्स और काउंटर कमैंट्ससे सम्बंधित है : 

सभी सहकर्मी जो  हमारे साथ लम्बे समय से जुड़े हुए हैं वह जानते हैं कि कमेंट-काउंटर कमेंट प्रक्रिया का उद्देश्य क्या था। 

पहला उद्देश्य था कि जो कोई भी कमेंट करता है हम उसके आदर-सम्मान हेतु रिप्लाई अवश्य करेंगें अर्थात जो हमारे लिए अपना मूल्यवान समय निकाल रहा है हमारा कर्तव्य बनता है कि उसकी भावना का सम्मान किया जाये। कमेंट चाहे छोटा हो यां  विस्तृत,हमारे लिए अत्यंत ही सम्मानजनक है। 

दूसरा उद्देश्य एक समर्पित परिवार की भावना को जागृत करना था । जब एक दूसरे के कमेंट देखे जायेंगें ,पढ़े जायेंगें ,काउंटर-कमेंट किये जायेंगें ,ज्ञान की वृद्धि होगी,नए सम्पर्क बनेगें, नई प्रतिभाएं उभर कर आगे आएँगी, सुप्त प्रतिभाओं को जागृत करने के अवसर प्राप्त होंगें,परिवार की वृद्धि होगी और ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री  परिवार का दायरा और भी विस्तृत होगा। ऐसा करने से और अधिक युग शिल्पियों की सेना का विस्तार होगा।

इस प्रक्रिया के माध्यम से कम से कम इस बात का अनुमान तो हो ही जायेगा कि कौन हमारे लेखों में समाहित ज्ञान को पढ़ रहा है। यह ज्ञानप्रसाद मात्र लेख नहीं हैं,गुरुदेव की अमृतवाणी हैं और इस अमृत का स्वयं अमृतपान करना, औरों को करवाना, “ज्ञानदान” करना एक बहुत ही पुण्य का कार्य है। अगर कोई इस ज्ञानप्रसाद को पढ़े बिना ही डिलीट कर देता है, हमारे गुरुदेव का इससे बड़ा और कोई निरादर हो ही सकता जिससे हमारे हृदय को बहुत ही आघात पहुँचता है। ज्ञान का प्रचार तो बहुत स्थानों से हो रहा है, लेकिन कितने लोग इस ज्ञान को ग्रहण कर रहे हैं ,यह बहुत ही महत्वपूर्ण है।   

हमारे सहकर्मी जानते हैं कि  किन-किन सुप्त प्रतिभाओं का भाग्य उदय  हुआ है, किन-किन महान व्यक्तियों से हमारा संपर्क संभव हो पाया है। अगर हमारे सहकर्मी चाहते हैं तो कभी किसी लेख में मस्तीचक हॉस्पिटल से-जयपुर सेंट्रल जेल-मसूरी इंटरनेशनल स्कूल तक के विवरण देख  सकते हैं। 

हम इस बात को नकार नहीं रहे हैं कि इन्हीं काउंटर  कमैंट्स के चलते आज सिलसिला इतना विस्तृत हो चुका है कि ऑनलाइन ज्ञानरथ को एक “महायज्ञशाला” की परिभाषा दी गयी है। इस महायज्ञशाला में विचाररूपी हवन सामग्री से कमैंट्स की आहुतियां दी जा रही हैं। सबसे अधिक आहुतियां (कमैंट्स ) प्रदान करने वाले साथी  को गोल्ड मैडल विजेता घोषित किया जाता रहा है जिससे वह सहकर्मी गुरुकार्य में और अधिक सक्रियता से योगदान करता रहा । 

लेकिन पिछले कुछ समय से बार-बार मूल्यांकन करने पर एक तथ्य तो प्रकट हुआ ही है कि Main कमैंट्स की संख्या में भारी गिरावट आयी है। Main कमैंट्स की संख्या आधे से भी नीचे गिर गयी है। टोटल कमैंट्स की संख्या बढ़ाने  की दौड़ में “जय गुरुदेव” यां उसी से मिलते-जुलते कमैंट्स पोस्ट करने की प्रथा अधिक प्रचलित होती दिखी। इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि यदि कोई भी किसी चैनल को विजिट करेगा तो कमैंट्स की गिनती को देखकर आकर्षित तो अवश्य ही होगा  लेकिन जब उसे असलियत का पता चलेगा कि यहाँ तो केवल कमैंट्स का  व्यापर चल रहा है तो वह स्वयं तो भागेगा ही, 10 अन्यों को भी ले जायेगा । पहले भी लिखा था आज फिर लिख रहे हैं कि कमैंट्स की क्वालिटी एवं कमैंट्स की संख्या दोनों का अपना  सामूहिक योगदान है। कमैंट्स को Inflate करने की प्रक्रिया का ही नकारात्मक प्रभाव है कि न तो नए सम्बन्ध बनाए जा सके, न परिवार का  विस्तार हो पाया और न ही ज्ञान-प्रसार की दिशा में सकारात्मकता दिख पायी। 

हमें तो उन सहकर्मियों पर तरस आ रहा है जो 24 आहुति संकल्प पूरा करने के लिए एवं संकल्पधारिओं की संख्या बढ़ाने के लिए अपना दिन रात तक  भूल चुके हैं। जब हम नीरा जी को कमैंट्स के प्रति इतना सीरियस होते देखते हैं तो उन मुट्ठी भर साथिओं के चित्र आँखों के आगे घूमने लगते हैं जो इतनी श्रद्धा से इस प्रक्रिया का पालन करते हुए औरों को भी प्रेरित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। हमें अपने से अधिक अपने साथिओं की चिंता है। गुरुदेव ने बार-बार डाँटते हुए समझाया है, टाईमटेबल बनाकर बताया है, हमने उन्हीं की डांट परिवार में रखने का प्रयास भी किया लेकिन कोई प्रभाव नहीं दिखा। 

इस परिस्थिति में हमारी अंतरात्मा में उठ रहे विचार निम्लिखित शब्दों में व्यक्त करने का प्रयास किया है : 

24 आहुति की प्रथा को समाप्त करते हुए, कमैंट्स की संख्या की चिंता किये बिना, जिसके भी ह्रदय में गुरु के लिए श्रद्धा,प्यार,समर्पण की भावना ठाठें मार रही होगी, वही लेख में दिए गए ज्ञान को धारण करके ह्रदय-भाव व्यक्त करते हुए कमेंट करे तो उचित रहेगा। उस Main कमेंट से किसी को कोई ज्ञान प्राप्त हुआ है, किसी के ह्रदय के तार झंकृत हुए हैं तो वोह काउंटर-कमेंट करने के लिए स्वयं को रोक नहीं पायेगा। 

उपरोक्त सुझाव इसलिए आवश्यक हो जाता है कि आये दिन न जाने “गायत्री” शब्द की आड़ में  कितने ही यूट्यूब चैनल आरम्भ हो रहे हैं जिनके कंटेंट को देखकर आँखें शर्म से झुक जाती हैं, कहीं ऐसा न हो कि झूठी शान शौकत की इस बाढ़ में कहीं हम भी किनारा ढूंढते ही रह जाएँ। 

वर्तमान प्रस्तुति का तीसरा एवं अंतिम विषय आद वंदना बहिन जी का धन्यवाद् करते हुए बताना चाहेंगें उनकी रिसर्च से प्रेरित होकर हमने अश्वमेध यज्ञों की पूरी सूची फिर से Compile की है जिसे इस लेख के साथ संलग्न किया है। लगभग 10  घंटे लगातार परिश्रम करके,एक-एक उपलब्ध वीडियो को देखकर जानकारी चेक करके ही इस सूची में शामिल किया है। 

समापन, जय गुरुदेव

शनिवार वाली वीडियो को 402 कमेंट मिले,7 साथिओं ने संकल्प पूरा किया सभी का धन्यवाद् 


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