वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस को समर्पित “विशेष श्रृंखला” का छठा लेख -प्रस्तुतकर्ता OGGP की समर्पित बहिन आद. संध्या कुमार एवं बेटी प्रेरणा कुमारी    

परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस को समर्पित “विशेष श्रृंखला” का छठा लेख -प्रस्तुतकर्ता OGGP की समर्पित बहिन आद. संध्या कुमार एवं बेटी प्रेरणा कुमारी    

11  फ़रवरी 2025,मंगलवार के दिन, सर्वमंगल के साथ लिखी जा रही यह पंक्तियाँ ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के किसी भी साथी को ऊर्जावान किये बिना नहीं रह सकतीं, आद. संध्या बहिन एवं प्रेरणा बिटिया ने हमारे निवेदन को स्वीकार किया जिसके लिए हम ह्रदय से आभार व्यक्त करते हैं। 

आज की प्रस्तुति के साथ संलग्न प्रज्ञागीत आद.पुष्पा बहिन जी ने कल प्रकाशित हुई अपनी अनुभूति में सुझाया था लेकिन बहिन जी द्वारा निम्नलिखित पंक्ति को पढ़ कर हमसे रहा नहीं गया और लेखन को बीच में ही रोक कर, उस प्रज्ञागीत को अटैच किया, वोह प्रज्ञागीत हमारे ह्रदय के बहुत ही निकट है: 

 “ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार समेत समस्त विश्व को गुरु के रूप में भगवान मिल गये।”  

आद. पुष्पा बहिन जी द्वारा सुझाए प्रज्ञागीत को आज प्रस्तुत करने के लिए करबद्ध क्षमाप्रार्थी हैं। 

कल प्रकाशित हुए लेख पर  आद. अरुण वर्मा जी का विस्तृत कमेंट और काउंटर कमैंट्स हमें भाई साहिब से निवेदन करने को बाधित कर रहे हैं कि जो कुछ भी कमेंट में लिखा है उसे एक और अनुभूति की फॉर्म में लिख कर भेज दें, ज्ञानरथ परिवार में बहुत बड़ा योगदान होगा। परिजनों को सहकारिता, संपर्क शक्ति एवं भगवान के खेत में बोने और काटने की अद्भुत प्रेरणा मिलेगी। हमारे भगवान् यही तो कह रहे हैं। 

हमें मालूम है कि व्यस्त दिनचर्या में से अरुण जी के लिए समय निकाल पाना कठिन होगा लेकिन ऐसे अद्भुत संस्मरण ही इस नन्हें से, शैश्वावस्था में पल रहे परिवार के लिए रक्षा सूत्र साबित हुए हैं। इस परिवार के किसी भी कृत्य को हल्के  में नहीं लिया जाना चाहिए      

वर्ष 1926 की वसंत पंचमी का दिन परम पूज्य गुरुदेव के जीवन का एक अति विशिष्ट  दिन था। यही वोह दिन था जब परम पूज्य गुरुदेव के हिमालयवासी गुरु (जिन्हें हम सब दादा गुरु के नाम से सम्बोधन करते हैं) के साथ,आंवलखेड़ा गाँव,(आगरा) स्थित हवेली की कोठरी में, दिव्य साक्षात्कार हुआ था, उनके तीन जन्मों की कथा एक फ़िल्म की भांति दिखाई गयी थी। उसी दिन से,आज लगभग 100 वर्ष (2026 में 100 वर्ष) बाद भी पूज्यवर ने इस दिन को अपना  आध्यात्मिक जन्म दिन घोषित करते हुए,अपने सभी क्रियाकलापों को वसंत पंचमी के दिन ही आरम्भ करने का संकल्प लिया और उसे पूर्ण भी किया।  

ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के अनेकों संकल्पों में एक ही ध्वनि चरितार्थ होती है और वोह ध्वनि है, “क्या हम सही मायनों में अपनेआप को  गुरुवर के चरणों को समर्पित कर पाए हैं?”  साथिओं द्वारा हमारे सभी प्रयासों को पर्याप्त सम्मान मिलना गुरुवर के प्रति समर्पण का मूल्यांकन है, लेकिन सर्वश्रेष्ठ मूल्यांकन तो वसंत पर्व पर ही होता है जब परिजन गुरुवर के चरणों में अपनी अनुभूतियाँ समर्पित करके उनके  विशेष अनुदान प्राप्त करते हैं।

ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार  के मंच से 2021 की वसंत पंचमी से आरम्भ हुए “अनुभूति विशेषांक” का सिलसिला आज  2025 में भी अनवरत चल रहा  है।

उसी प्रथा और संकल्प का पालन करते हुए,हमारी सम्मानीय बहिन संध्या जी और सर्वप्रिय बेटी प्रेरणा गुरुचरणों में अपनी अनुभूतियाँ प्रस्तुत करके दिव्य गुरु-अनुदान प्राप्त कर रही हैं।

आइए देखें वोह क्या कह रही हैं।

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संध्या कुमार:

परमपूज्य गुरुसत्ता को सादर नमन, वन्दन, पूजन गुरुवर के आध्यात्मिक जन्मदिवस पर संस्मरण रूपी पुष्प अर्पित करने का प्रयास कर रहीं हूँ। ऐसे तो गुरुवर से सम्बन्धित अनेक प्रसंग हैँ, किस तरह से गुरुवर ने समस्याओं का समाधान कर संरक्षण प्रदान किया किंतु घटनाओ को शब्दों में व्यक्त करना कठिन लग  रहा है ,फिर भी विश्वास है कि गुरुदेव स्वयं ही हाथ पकड़ कर लिखवा लेंगें। 

यह अनुभव 2008 का है जब  मेरे पति का ट्रांसफर जमशेदपुर से बंगलौर हुआ था। हम  बैंक के मैनेजर कवाटर में शिफ्ट  हो गये। नये आवास हेतु मैंने गायत्री हवन किया, मैंने अपनी दो निकटतम पड़ोसन को भी निमंत्रण दे दिया, दोनों गायत्री पूजन  एवं हवन से बहुत प्रभावित हुईं। जब भी मिलतीं  तो पूजन  एवं हवन के प्रति जिज्ञासा व्यक्त करतीं।  मैंने दोनों को “कर्मकांड भास्कर” पुस्तक   भेंट कर दी, दोनों ही बहुत खुश हुईं l दो दिन बाद मेरे सामने वाली पड़ोसन की 25वीं विवाह वर्षगांठ आने वाली थी अतः उन्होंने पूजन एवं हवन कराने  की इच्छा व्यक्त  करते हुए कहा कि हम पहली बार कर रहे हैँ अतः आप  ही करवा दीजिये।  हम समस्त क्रियाएं,कर्मकांड,विधि आदि ठीक से समझ लेंगे, तब अगली बार से स्वयं कर लेंगें ।  मैंने उन्हें सामग्री लिखा  दी तथा हवन के लिये 9:00 बजे सुबह का समय निश्चित किया  क्योंकि उस समय तक हम दोनों के पति एवं बेटे ऑफिस के लिये निकल जाते हैँ।  मैंने अपने घर पर भी बता दिया कि कल सुबह सामने वाली भाभी जी के यहाँ हवन करवाना है, किसी बाहरी व्यक्ति के घर हवन करवाने का मेरा पहला अवसर था इसके पहले मैंने अपने भाई, बहन,भतीजे आदि के घर हवन करवाये थे l

नये आवास की व्यवस्था एवं मौसम के अन्तर के कारण रात में मुझे तेज बुखार हो गया, पति ने चेक किया तो 103 डिग्री  था,उन्होंने दवा दी एवं कहा कि हवन का विचार छोड़ और शांति से सो जाओ, मैं सुबह भाभी जी को बता दूँगा।  मैंने मन ही मन में कहा वह सब सामग्री ले आयीं हैँ, उन्होंने अपने माँ-पापा को भी निमत्रण दे दिया है, हवन तो अवश्य करवाना ही है। हे गुरुवर मेरी लाज रखना l

सुबह समय से उठकर मैंने अपनी दिनचर्या शुरू कर दी, काम वाली राधा भी समय से आ गयी, मैंने उसे ही बेटे एवं पति का नाशता,खाना बनाने के लिए कह दिया।  पति का कहना था आराम करो, मैं भाभी जी को तुम्हारी तबियत का बता देता हूँ l मैंने कहा मैं ठीक महसूस कर रही हूँ,सब काम राधा देख लेगी,मैं हवन के बाद आराम कर लूँगी, पतिदेव ने पुनः बुखार चेक किया 99.2 डिग्री आया,वह भी शांत रहे l मैंने भाभी जी के घर पर हवन-पूजन करवाया, सब बहुत अच्छे से हो गया।  बोलने में, हवन की क्रियायें एवं   करने में किसी भी प्रकार की कोई बाधा उत्पन्न नहीं हुईं।  ऐसा अनुभव कर रही थी कि गुरुवर साथ ही  हैँ तथा सारे कार्य यथाविधि करवा रहे हैँ, वही संचालन कर रहे हैँ, मैं तो मात्र कठपुतली की भाँति उनका अनुसरण ही कर रही हूँ l 

मेरी तबियत की चिंता से पति कुछ जल्दी ही ऑफिस से आ गये, सारा हाल सुनकर वह भी मेरे साथ बोल पड़े: 

“सब गुरुवर का ही चमत्कार है, वह सदैव बच्चों के साथ हैँ, संरक्षण प्रदान करते हैँ I” 

रात में पुनः 100 डिग्री बुखार आया किंतु अगले दिन से सब ठीक रहा l भक्तवत्सल गुरु ने मेरी लाज रख ली,ऐसे गुरु को पाकर मैं धन्य हो गयी l जय गुरूदेव 

प्रेरणा बिटिया:

सभी को प्रणाम। मेरा विवाह कैसे हुआ उसकी अनुभुति मैं आपके समक्ष रख रही हूं।

मैंने अपने माता-पिता से बोल रखा था कि  मुझे गायत्री परिवार के लड़के से ही विवाह करना है,   चाहे वो दूसरी जाति का भी क्यों न हो। मेरे माता पिता इसके लिए मान भी गए थे और लड़का भी देख रहे थे। बहुत अच्छे अच्छे रिश्ते भी मिले परंतु जब मेरे जीजा जी को दूसरी जाति वाली बात पता चली तो  उन्होंने साफ मना कर दिया और कहने लगे कि यदि दूसरी जाति  में विवाह होगा तो मैं विवाह में शामिल नहीं होऊंगा। इससे मेरे माता पिता बहुत परेशान रहने लगे क्योंकि मेरी जाति में गायत्री परिवार का लड़का मिल ही नहीं रहा था और मेरे माता पिता मेरे जीजा जी के खिलाफ नहीं जा सकते थे, इसीलिए उन्होंने अपनी जाति में ही लड़का देखना शुरू किया।

नवंबर 2023 में जब मैं शांतिकुंज गई थी तब परम आदरणीय चिन्मय भैया जी से देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में मिली। उन्होंने मुझसे पूछा कि  बेटा आप क्या करते हो तो मैंने बोला कि  मैं सीनियर  अकाउंटेंट हूँ । तब उन्होंने कहा कि आप हमारे यहां आओ यहीं  पर काम करना। उन्होंने कहा कि अपना Resume  बाहर जमा करवा देना। अगर सब कुछ ठीक हुआ तो‌ आपके पास फ़ोन जाएगा। जब मैंने यह सुना तो मैं खुशी से पागल हो गई कि मुझे यहाँ  पर काम करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मैं उनके फ़ोन का इन्तज़ार कर रही थी परंतु फ़ोन नहीं आया और इधर मेरे माता पिता मेरे विवाह के लिए परेशान थे। दिसंबर में सूरत से  मेरे लिए एक रिश्ता आया और मेरे माता पिता जनवरी में लड़के का घर परिवार देखने के लिए गए। लड़का गायत्री परिवार से तो नहीं था लेकिन बहुत अच्छा था। माता पिता को लड़का और उसका परिवार बहुत पसंद आया। उन्होंने बोला कि आप घर आकर लड़की देख लीजिये। लड़के वाले  हमारे घर 8 फरवरी, 2024  को आए और एक ही बार में सब फाइनल करके चले गए। 16 फ़रवरी को इंगेजमेंट भी हो गया। 

सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि  कुछ समझ नहीं आया। बाद में मैंने अनुभव किया कि यह सब तो गुरुदेव की ही लीला थी क्योंकि  कुछ दिन पहले ही मैंने अपना Resume  चिन्मय भैया को दिया था और फिर कुछ दिनों के बाद ही मेरा इंगेजमेंट हो गया। मुझे ऐसा लग रहा है कि चिन्मय भैया ने मेरा Resume  जौब के लिए नहीं मांगा था, वो तो मेरे विवाह के लिए मांगा था और ऐसे करके मेरा इंगेजमेंट भी निर्विघ्न संपन्न हुआ और अब विवाह भी। मैं ससुराल में आने से पहले बहुत सोचती थी कि सब कुछ कैसे संभालूंगी लेकिन  गुरुदेव और माता जी ने सब कुछ बहुत सरल बना दिया है। मैं अपने ससुराल में बहुत खुश हूं। यहाँ सभी लोग बहुत अच्छे हैं। 

बस गुरुदेव की कृपा और आप सबका आशीर्वाद ऐसे ही बना रहे ताकि  मैं आगे भी सब कुछ अच्छे से संभाल सकूं। 

घर परिवार में व्यस्त रहने के कारण मैं आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में अपना योगदान ठीक से नहीं दे पा रही हुं इसके लिए मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूं।

जय महाकाल।

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कल  वाले लेख को 561   कमेंटस मिले, 13  संकल्पधारी  साथिओं 24 से अधिक आहुतियां प्रदान की हैं। सभी साथिओं का ह्रदय से धन्यवाद  करते हैं।


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