वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

24  अगस्त 2024,शनिवार का “अपने सहकर्मियों की कलम से” का साप्ताहिक विशेषांक

ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में शनिवार का दिन  एक उत्सव की भांति होता है। यह एक ऐसा दिन होता है जब हम सब  सप्ताह भर की कठिन पढाई के बाद थोड़ा Relaxed अनुभव करते हैं और अपने साथिओं के साथ रूबरू होते हैं, उनकी गतिविधिओं को जानते हैं। हर कोई उत्साहित होकर अपना योगदान देकर गुरुकार्य का भागीदार बनता है एवं अपनी पात्रता के अनुसार गुरु के अनुदान प्राप्त  करता हुआ अपनेआप को सौभाग्यशाली मानता है। 

यह एक ऐसा दिन होता है जब (हमारे समेत) लगभग सभी  साथी कमेंट करने का महत्वपूर्ण कार्य भी थोड़ा Relax होकर ही करते हैं, आखिर वीकेंड और छुट्टी जैसा वातावरण जो ठहरा। हम बहुत प्रयास करते हैं कि शनिवार के दिन फ़ोन उपवास करते हुए, एक कुशल सैनिक की भांति अपने अस्त्र-शस्त्र (फ़ोन-लैपटॉप, saved फाइल्स आदि) की  धुलाई-सफाई, oiling करके up-to-date कर दें, क्योंकि सोमवार के ज्ञानप्रसाद के लिए रविवार को ही तो कार्य आरम्भ होना है लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाता। ऐसा इसलिए है कि हमारे साथी/सहकर्मी इस परिवार की सबसे बड़ी सम्पति है, उनके साथ बातचीत करना हमारे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात होती है। 

तो आइए चलें Tutorial room में जहाँ हमारी शनिवार की कक्षा होती है, कुछ अपनी  कहें, कुछ साथिओं की सुने और गुरुसत्ता का आशीर्वाद प्राप्त करें। 

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1.सबसे पहले हमारे बेटे आयुष की आस्था की बात करनी है : 

पिछले शनिवार के लिए जब हम विशेषांक लिख रहे थे तो सरविन्द जी ने अपने बेटे आयुष  के बारे में एक मैसेज भेजा जिसका सारांश निम्नलिखित शब्दों में वर्णित है : 

बेटे का मन कुछ विचलित था, पिता-पुत्र दोनों में बात हुई, विचारों का आदान-प्रदान हुआ, मार्गदर्शन हुआ। सरविन्द जी ने कुलश्रेष्ठा बेटी का वीडियो भेजा जिसमें बहुत ही सकारात्मक बातें, गायत्री मन्त्र की शक्ति आदि का वर्णन था। यह भी संयोग  ही है कि वीडियो उस समय प्राप्त हुई जब बेटे को ज़रुरत थी। यह गुरु की शक्ति नहीं तो और क्या है। बेटे को संपर्क एवं वीडियो से जिस सकरात्मक ऊर्जा का लाभ हुआ उसे शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। इस वीडियो का लिंक भी यहाँ शेयर कर रहे हैं https://youtu.be/2S44ZinHEzc?si=BDl5ThSzzDDYyGVL  

साप्ताहिक विशेषांक के पिछले अंक में गुरुदेव का अति बलशाली सूत्र “कमैंट्स-

काउंटर कमैंट्स प्रक्रिया” का संपर्क और सम्बन्ध की दिशा में विस्तृत विश्लेषण किया था। उसी प्रक्रिया को दर्शाता यह  पिता-पुत्र संवाद हुआ और समस्या का समाधान भी हो गया।

यहाँ आयुष बेटे के विचार शेयर करना भी उचित समझते हैं : 

पापा आपने  जो वीडियो भेजा है उससे हमें बहुत सहायता मिली। जो आज थोड़ा माइंड डायवर्टेड था, वीडियो से रिलैक्स हो गया। भगवान से यही प्रार्थना  करते हैं कि जल्दी U14, U16 और  U19 में प्रोफेमन्स करके आईपीएल जैसी बड़ी  स्टेट में मौका मिले ताकि आपका और  मम्मी का,ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ,अपने कोच अपने  गांव, डिस्ट्रिक्ट, स्टेट/ इंडिया रिप्रेजेंट करें।आपका बेटा कभी भी गलत लाइन पे नहीं जाएगा, मैं अपने रोज के टाइम टेबल पे काम  करुंगा, आपका सिर  कभी झुकने नहीं दूंगा।  ये मेरी  नहीं, मेरे अंदर के गुरुदेव की आवाज है। 

2.कमैंट्स की शक्ति को बल देता हमारी सबकी आदरणीय बहिन रेणु जी का कमेंट भी बहुत कुछ कह रहा है : 

ऊं श्री गुरुसत्तायै नमः। गुरु चरणों में कोटि कोटि नमन वंदन। प्रत्येक शनिवार हम-सब के लिए एक उत्सव की भांति है।इस दिन की बड़ी आतुरता से प्रतीक्षा रहती है, सहयोगियों की गतिविधियों तथा उनके मनोभावों से रूबरू होने का अवसर जो मिलता है। सहयोगियों को उनके योगदान के लिए हार्दिक धन्यवाद एवं शुभकामनाएं।आज के सत्संग का मुख्य विषय है …”कमेंट्स का उद्देश्य”।

त्रिखा भाई जी ने विस्तार से बताया है। इसका मुख्य उद्देश्य “एक दूसरे से सम्पर्क स्थापित करना है।”  गुरुदेव ने भी सम्पर्क पर बल दिया है। जहां सम्पर्क समाप्त होते हैं वहां संबंध समाप्त होते हैं। गुरुदेव ने अखंड ज्योति में “अपनों से अपनों की बात” सेक्शन इसी उद्देश्य से आरंभ किया था। निश्चय ही गुरुकार्य करने से आत्मिक संतुष्टि और शांति का आभास होता है। हम सब भी तो आपके OGGP पर आपके लेख ,गुरुदेव के प्रति समर्पण और श्रद्धा के कारण ही चुम्बक की तरह खिंचते चले आए थे । न‌ कोई विज्ञापन,न कोई पहचान, हम-सब के लिए गुरु नाम ही सबसे बड़ा सम्पर्क साधन है, फिर भी यह सम्बन्ध एवं अपनत्व, खून के रिश्ते से बढ़कर है । इसे गुरुदेव ‌की दिव्य शक्ति या प्रेरणा कह सकते हैं, स्वयं ही जुड़ते गए और कारवां बनता गया। डाक्टर ओ पी शर्मा जी की दिव्य रचना “अज्ञात की‌ अनुभूति” पर आधारित लेख श्रृंखला हम सब के लिए प्रेरणादायक एवं मार्गदर्शक हैं। त्रिखा भाई जी ने लेख लिखकर सभी पर बड़ा उपकार किया। जिन्हें गुरुदेव के दर्शन का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ,  गुरुदेव ‌की शक्ति या गुरुदेव को जानने का अवसर मिला, उनके लिए शर्मा जी के पुस्तक पर आधारित लेख वरदान से‌  कम से हैं।

शर्मा दम्पत्ति के समर्पण, श्रद्धा के लिए तो मेरे पास शब्द नहीं कि कुछ लिखूं। अपने भगवान जिन्हें पिताजी कहकर संबोधित करते रहे अपना जीवन, सर्वस्व गुरु चरणों में समर्पित कर उनके आदेशानुसार कार्य  करते रहे।

निश्चय ही त्रिखा भाईजी, आपने शर्मा जी के अनुभूति ज्ञान को OGGP के मंच पर प्रस्तुत कर सभी के दिलों तक पहुंचाने का पुनीत कार्य किया तो सराहना तो होनी ही चाहिए। शर्मा जी जैसे ‌समर्पित सरल व्यक्तित्व विरले ही मिलते हैं।

गुरुदेव ने पात्रता देखकर ही चयन किया तो श्रेय आपको ‌ही मिलना है। इस मंच पर सभी को अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए रीछ,वानर बनना है।

अरूण वर्मा जी की अनुभूति पढ़कर दिल भर आया। उन्होंने जो संकल्प लिया वह भी गुरुदेव ‌की प्रेरणा थी । कलश यात्रा,यज्ञ आदि का फोटो देख कर अत्यधिक प्रसन्नता हुई। गुरुदेव पात्रता देखकर ही कार्य सौंपते हैं, किया सब कुछ गुरुदेव ने और श्रेय मिला  अरुण जी को। हम सब भी तो यही कहते रहे कि यह गुरुदेव का कार्य है,सारा प्रबंध वहीं करेंगे।साधन भी वही जुटाएंगे, पण्डाल भी वही भरेंगे। हुआ भी वैसा ही और सभी से सराहना भी मिली। 

“करते हो गुरुवर आप, लेकिन नाम मेरा हो ‌रहा है “। यह सब गुरुदेव ‌की कृपा और शक्ति का ही प्रभाव है। गुरुदेव का कहना: 

 “तू  एक कदम आगे बढ़ा तो सही, दस कदम आगे न ले जाऊं तो कहना”

3. चिरंजीव बिकाश शर्मा का कमेंट:

शिष्य शिरोमणि शुक्ला बाबा की वीडियो पर कमेंट करते हुए हमारे बेटे बिकाश शर्मा ने जो निम्नलिखित कमेंट किया वोह भी किसी अपनत्व से कम नहीं है। स्मरण  आता है कि मात्र एक कमेंट ने शिष्य शिरोमणि शुक्ला बाबा का ऑनलाइन सानिध्य तो प्राप्त कराया ही, न जाने अखंड ज्योति नेत्र हस्पताल की कितनी ही दिव्य आत्माओं से हमारा मिलन करा दिया। इन सभी के बारे में  हम स्वयं से पूछते हैं, “क्या  यह सभी इसी लोक के वासी हैं ?” हम तो धन्य हो गए। 

बिकाश बेटे  का कमेंट :   आदरणीय बाबू जी को कोटि कोटि प्रणाम एवं धन्यवाद। आपके अंदर मस्तीचक के प्रति जो श्रद्धा और भाव भरा हुआ  है वह आपकी  लेखनी में सदैव प्रदर्शित होता   है। 

आप मस्तीचक कभी नहीं आए परंतु मस्तीचक के प्रति जो आपका स्नेह मैं देखता हूं शब्दों में नहीं लिख सकता हूं। शुक्ला बाबा और गुरुवर की  लीला अपरंपार हैं। 

“गुरुदेव  राम हैं तो बाबा हनुमान हैं

गुरुदेव  शिव हैं  तो बाबा नंदी हैं”

पूज्य शुक्ला बाबा अपना सम्पूर्ण जीवन गुरुवर को समर्पित करने वाले प्रथम शिष्यों में से एक है। मिशन के प्रारंभिक चरणों में संपूर्ण भारत में शक्तिपीठों की स्थापना एवं यज्ञों के संचालन में गुरुदेव के अभिन्न अंग के रूप में शुक्ला बाबा ने कार्य किया है।

पूज्य शुक्ला बाबा जी ने  अपने पैतृक गांव में परम् पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीय माता जी के निर्देश पर 300  वर्ष से जागृत तपस्थली में गायत्री शक्तिपीठ मस्तीचक का निर्माण किया और पीड़ित मानवता की सेवा करने वाला  विश्वप्रसिद्ध अखंड ज्योति नेत्र अस्पताल की स्थापना की।

आज गायत्री शक्तिपीठ मस्तीचक में उपासना-साधना-आराधना के साथ-साथ सप्तसूत्री  आंदोलन पर नियमित रूप से कार्य चल रहा  है। प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक गरीब परिवारों  को नेत्र ज्योति प्रदान करने का लक्ष्य एवं  2026 तक 1000 ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब/असहाय परिवार की  बेटियों को निशुल्क  पैरामेडिकल (ऑप्टोमेट्री) की पढ़ाई करा कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा हैं।

आग्रह करते हैं कि जिन्हें भी मौका मिले, एक बार मस्तीचक धाम अवश्य आएं ।

4.आज के विशेषांक का अगला पॉइंट युवासाथिओं से सम्बंधित है। एक बार पहले भी स्मरण करा  चुके हैं, आज फिर बता रहे हैं कि अगला शुक्रवार 30 अगस्त को है, यह शुक्रवार अगस्त माह का अंतिम शुक्रवार है और  इस दिन को  युवासाथिओं के लिए रिज़र्व किया हुआ है। अभी तक किसी भी युवासैनिक का कोई भी योगदान प्राप्त नहीं हुआ है, निवेदन है कि अपना योगदान भेजने की कृपा करें। 

5 . आज के इस विशेषांक का अंतिम पॉइंट हमारे द्वारा एवं किसी भी साथी द्वारा होने  वाली टाइपिंग मिस्टेक्स से संबंधित है। यहाँ एक बहुचर्चित Proverb स्मरण हो आती है “To err is  human” यानि इंसान गलती का पुतला है।  गलती होना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन उसे जानते हुए भी ignore कर देना बहुत बड़ी बात है। निश्चय तो यह होना चाहिए कि गलती जब भी नोटिस हो उसे तुरंत ठीक किया जाए। 

हम अपने साथिओं का  ह्रदय से आभार व्यक्त करते हैं कि  वोह ध्यान से पढ़कर, जब भी कोई गलती नोटिस होती है उसे तुरंत शेयर करते हैं और संशोधन का प्रयास भी करते हैं। 

इस प्रक्रिया से एक और महत्वपूर्ण बात उभर कर आती है कि गलती तो उसे ही नोटिस होगी जो पढ़ेगा, बहुत से ऐसे साथी भी हैं जो बिना पढ़े ही कमेंट किये जाते हैं। आजकल टेक्नोलॉजी ने इस स्तर की प्रगति कर ली है कि कमैंट्स के कंटेंट से तो पढ़ने/नहीं पढ़ने का सन्देश मिल ही  जाता है लेकिन analytics से भी पता चल जाता है कि किसने, कितने बजे लेख को पढ़ा। 

जो भी हो, साथिओं का ह्रदय से धन्यवाद् करते  हैं कि अपने समय एवं दिनचर्या को देखते हुए, परिवार में involvement दिखा रहे हैं एवं इस योगदान से उनके जीवन में सुधार हो रहा है ,आखिर यही तो गुरुवर का सपना है। 

हर शुक्रवार की भांति, आज भी यूट्यूब में कुछ समस्या आती ही  रही लेकिन उसके  बावजूद  510 टोटल कमेंटस ,31 मेन कमैंट्स  और 10  संकल्पित कमैंट्स ने आज इस परिवार की शोभा बढ़ाई जिसके लिए सभी बधाई और धन्यवाद् के पात्र हैं। 

इन्हीं समापन शब्दों के साथ अपने परिवार से सोमवार के लिए विदा लेते हैं, कल का दिव्य सन्देश तो होगा ही।        


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