वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

1 अप्रैल 2024 का ज्ञानप्रसाद-गुरुदेव कह रहे हैं,”बच्चो अपनी विद्युत शक्ति का ज्ञान प्राप्त करो” 

April 1,2024

Source: मानवीय विद्युत के चमत्कार

आदरणीय पुष्पा बहिन जी ने मोबाइल उपवास से सम्बंधित प्रज्ञागीत भेजा है, सभी के लिए यह गीत लाभदायक सिद्ध हो सकता है, धन्यवाद् बहिन जी 

2011 में प्रकाशित 66 पन्नों की इस दिव्य पुस्तक के दूसरे  एडिशन  में परम पूज्य गुरुदेव हम जैसे नौसिखिओं,अनुभवहीन शिष्यों को मनुष्य शरीर की बिजली एवं उस बिजली से सम्पन्न होने वाले कार्यों से परिचित करा रहे  है। गुरुदेव बताते हैं कि  जिस प्रकार “स्वास्थ्य विज्ञान, Health science”  जानना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार उसे अपनी सबसे मूल्यवान वस्तु “शारीरिक बिजली, Bodily electricity”  के बारे में जानना चाहिए। गुरुदेव कहते हैं कि कितने दुःख की बात है कि हम में से बहुत से सुशिक्षित लोग भी इस “महत्त्वपूर्ण विज्ञान” की मोटी-मोटी बातों से परिचित नहीं हैं। इस अज्ञानता का परिणाम यह होता है कि इस महत्वपूर्ण  जानकारी के अभाव में मनुष्य गलत मार्गों को अपनाकर जीवनभर दुःख उठाता रहता है।

हमारे विचार में इस विस्तृत एवं जटिल विषय को समझना सरल तो नहीं है लेकिन जितना भी समझ आ जाए लाभदायक ही होगा। 

मानव शरीर की  बिजली का  ज्ञान प्राप्त करते हुए हम इस श्रृंखला का चौथा लेख लेकर ब्रह्मवेला में अपने साथिओं के समक्ष प्रस्तुत हुए है। आज के लेख में हम अपने घरों की लेबोरेटरी में ही इस बिजली को प्रतक्ष्य देखने के लिए एक प्रैक्टिकल भी करेंगें। 

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आत्मा को सर्वशक्तिमान इसलिए कहा गया है कि इच्छा के द्वारा आत्मा वोह शक्ति उत्पन्न कर सकती है जो बिल्कुल अविश्वसनीय होती है। यहाँ एक अन्य महत्वपूर्ण  बात देखने और विश्वास करने वाली है कि इच्छा ने आत्मा में अपार शक्ति तो पैदा कर दी लेकिन यदि बुद्धि (सद्बुद्धि) उस शक्ति का सदुपयोग नहीं करती तो वोह शक्ति किसी भी काम की नहीं ,इसी का विपरीत प्रभाव तब देखने को मिलता है जब बुद्धि (दुर्बुद्धि)  का दुरूपयोग होता है तो यही शक्ति भयंकर विनाश का कारण बन सकती है। 

यही कारण है कि परम पूज्य गुरुदेव ने हम बच्चों को गायत्री उपासना के लोए प्रेरित किया। गायत्री उपासना का आरम्भ ही गायत्री मंत्र से होता है जिसका अर्थ ही है कि हम विवेक की देवी माँ गायत्री से सद्बुद्धि का वरदान मांगे और सन्मार्ग हो ओर अग्रसर हों। ईश्वर ने बुद्धि तो सभी को दी है लेकिन सद्बुद्धि का वरदान  किसी-किसी को ही दिया है। बुद्धि के अभाव में शक्ति का दुरूपयोग होता हम प्रतिदिन पग-पग पर देख रहे हैं। ऐसा दुरूपयोग न केवल परिवारों में हो रहा है बल्कि राष्ट्रिय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर बिना रोकटोक हुए जा रहा है।      

आत्मिक शक्ति का उदाहरण बीज से विशाल वटवृक्ष के उत्पादन के लिए भी दिया जा सकता है। नन्हें से, छोटे से बीज में उत्पन्न करने की शक्ति तो अवश्य है लेकिन यदि उसके उत्पादन के लिए बुद्धि का सदुपयोग न किया जाए यानि भूमि में खाद, पानी,गुडाई की व्यवस्था न की जाए तो बीज के सड़ने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता। यदि उचित वातावरण, उपजाऊ भूमि आदि सभी व्यवस्थाएं ठीक से की जाएँ तो उत्पादन अवश्य ही ठीक से होगा और एक महान/विशाल वटवृक्ष उत्पन्न होगा। 

ठीक इसी प्रक्रिया से गुरुदेव के संरक्षण में DSVV में महामानवों की सेना का उत्पादन हो रहा है, इसीलिए इसे महामानवों की टकसाल का विशेषण दिया गया है।  

वृक्ष की अपेक्षा आत्मा अधिक चैतन्य और स्वतंत्र है, इसलिए आत्मा की  कार्य क्षमता भी विस्तृत है और चारों  दिशाओं में फैल  सकती है। हमारे चारों तरफ दिख रही टेक्नोलॉजी क्रांति में मनुष्य का ही योगदान है। मनुष्य ने ही अनेक वैज्ञानिक आविष्कार किये हैं, ज्ञान की खोज की है और प्रकृति पर विजय प्राप्त की है। इस टेक्नोलॉजिकल क्रांति का  कारण कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि मनुष्य की प्रचंड इच्छा-शक्ति और बुद्धि के सामंजस्य का ही परिणाम है और यह दोनों ही आत्मा की प्रचंड विद्युत के उपकरण हैं। 

मनुष्य की शारीरिक- विद्युत -Human body electricity : 

मनुष्य के शरीर में निरंतर एक प्रकार की बिजली  का प्रवाह जारी रहता है। बिजली के इस निरंतर प्रवाह का शरीर और मन के अतिरिक्त बहुत सी  क्रियाओं  में भी उपयोग होता है । यह बिजली जीवन के कठिन कार्य  पूरे करने में सहायक होती है। कई बार तो ऐसा भी देखने में आया है कि एक मनुष्य के शरीर की बिजली किसी दूसरे  मनुष्य के शरीर में प्रवेश करके उसे प्रभावित करती है, और उस मनुष्य से अपनी इच्छा अनुसार कार्य करवा सकती है । विज्ञान द्वारा इस शक्ति का अनेक प्रकार से परीक्षण हो रहा है। अलग-अलग मनुष्यों के शरीर में जो अलग-अलग आकृतियों के तेजोवलय (Aura) देखे जाते हैं, उन्हीं के  आधार पर योगाभ्यासी बिना असली मनुष्य को देखे, उसके निकटवर्ती वातावरण का अनुभव करके ही उसके संबंध में बहुत कुछ बातें जान लेते हैं। 

विज्ञान  के अनुसार साइकोमेटरी (Psychometry) नामक “एक स्वतंत्र विद्या” का आविष्कार हुआ है, जिसके अनुसार आँखें बंद करके दिव्य दृष्टि  के बल से गुप्त और प्रकट बातें बतायी जाती हैं। मानवीय विद्युत कोई कल्पना का विषय या वैज्ञानिक यंत्र से ही देखने की चीज नहीं हैं बल्कि यदि मनुष्य चाहे तो स्वयं ही  अपनी इंद्रियों को केंद्रित करके अनुभव कर सकता है  और आँखों से देख सकता है । 

साइकोमेटरी अपनेआप में ही एक गूढ़ अध्ययन का विषय है, उसे कुछ एक शब्दों यां लेखों में समझना असंभव है इसलिए इसे यहीं पर छोड़ना उचित होगा, लेकिन हम में से अनेकों ने इस विषय को अपने जीवन में बहुत बार प्रतक्ष्य देखा होगा, अनुभव किया होगा। हमारे साथिओं ने कई बार देखा होगा कि विशाल धार्मिक आयोजनों में उच्चकोटि के योगी के समक्ष प्रश्न रखे जाते हैं और योगी अपनी दिव्य शक्ति, दिव्य दृष्टि  से दूर बैठे किसी  के परिवार की  समस्या देख लेते हैं और उसका  उपाय भी कर देते हैं। इसका एक बहुचर्चित उदाहरण कोई मंत्रपूरित ताबीज़, फूल, सूत्र( धागा) आदि है जिसे लोग अपने घर ले जाते हैं , रोगी के बाज़ू पर बांध देते हैं और वोह रोगी बिना योगी को देखे/मिले रोगमुक्त हो जाता है। 

आज के विकासवाद और विज्ञान के युग में इस तरह के टोटकों को अन्धविश्वास कह कर नकारना बहुत ही आसान है लेकिन अगर इसका कोई explanation नहीं है तो अनगनित लोग इसे क्यों अपना रहे हैं। मंदिर में पत्थर की प्रतिमा के समक्ष पूजा करने से,महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने से, उसी पूजा में से एक फूल रोगी के माथे पर छूने भर से मृत्यु तक को जीता जा सकना एक अन्धविश्वास ही लगता है लेकिन शक्ति तो अवश्य ही है। इस शक्ति का कोई साइंटिफिक प्रमाण नहीं है इसीलिए साइंस के इस फील्ड को Pseudoscience कहा गया है।  

उपरोक्त पंक्तियाँ हमने केवल अपने ज्ञान से ही लिखी हैं, पाठकों के लिए इन्हें स्वीकारने यां नकारने की  पूर्ण स्वतंत्रता है।  

परम पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित 66 पन्नों की दिव्य पुस्तक जिस पर हमारी वर्तमान लेख श्रृंखला आधारित है, मनुष्य के शरीर में दौड़ रही बिजली की जानकारी दे रही है। पूर्व प्रकाशित किसी लेख में हमने मनुष्य के शरीर को चलता फिरता बिजली घर कहा था। सभी साथी इस कथन को प्रतक्ष्य देखने के लिए उत्सुक होंगें, इसके लिए परम पूज्य गुरुदेव ने 10  ऐसे प्रैक्टिकल वर्णन किये हैं जिन्हें अपने घरों में ही किया जा सकता है। 

उन 10 Practicals में से आज केवल एक ही का वर्णन किया जा रहा है, बाकी के 9 अगले लेख में बताने का प्रयास करेंगें। 

इस Practical का वर्णन करने से पहले हम कहना चाहेंगें कि शरीर में दौड़ रही बिजली को अनेकों साथिओं ने शरद ऋतू में अवश्य ही अनुभव किया होगा। सर्दियों में जब भी हमें सर्दी से  अपना बचाव करना होता है तो वर्षों से try किया हुआ समाधान “दोनों हाथों को आपस में मलना/रगड़ना” किसे नहीं मालूम, विज्ञान की दृष्टि से तो इसका explanation है ही लेकिन यह शरीर (Molecules) की ही heat है, बिजली है जिससे हमारे हाथ पल भर में ही गर्म हो जाते हैं। तो आइए अब निम्नलिखित प्रैक्टिकल करने के लिए अपने घर की  किसी अँधेरी प्रयोगशाला में चलें।             

(1) मनुष्य के शरीर में दौड़  रही बिजली को काले पर्दे की सहायता से प्रतक्ष्य देखना :  

इस प्रयोग  के लिए एक अँधेरी कोठरी के चयन की आवश्यकता है। उसमें एक कुर्सी रखकर उसकी पीठ पर गहरे काले रंग का कपड़ा लटका दो। एक बहुत क्षीण प्रकाश का दीपक कुर्सी के आगे रख दो ताकि कुर्सी की पीठ पर लटके हुए कपड़े पर प्रकाश न पड़ने पाए और अँधेरा बना रहे। इस कपड़े के पीछे अपने लिए एक चौकी या कुर्सी बिछाओ और उस पर बैठ जाओ। अब अपने दोनों हाथों को इस प्रकार मिलाओ जैसे नमस्कार करने के लिए हाथ जोड़ते हैं। काले कपड़े और तुम्हारे हाथ के बीच एक फुट का फासला रहना चाहिए। कुर्सी के ऊपरी सतह की सीध से एक इंच नीचे हाथों को रखकर उन्हें आपस में धीरे-धीरे रगड़ना आरंभ करो और फिर इस क्रिया को उत्तरोत्तर तेज करते जाओ । ध्यानपूर्वक देखने से पता चलेगा कि झाड़ते समय एक सफेद भाप जैसा पदार्थ उनमें से निकल रहा है। कभी-कभी हथेलियों की चमड़ी चमकती मालूम पड़ेगी और कभी एक दो हल्की चिंगारी सी इधर-उधर बिखरती मालूम देंगी। नाखूनों के किनारों  में चमक विशेष रूप से देखी जाती है। सूक्ष्म चीजों को अच्छी तरह देख सकने की इन स्थूल आँखों में अच्छी योग्यता नहीं होती और कभी- कभी आँखों की रोशनी कम होने से इस प्रवाह को पूरी तरह देखने बाधा पड़ती है, फिर भी बिजली के उस  प्रकाश को इतना तो देखा ही जा सकता है कि हमें उसके अस्तित्व का विश्वास हो जाय ।

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आज 6  युगसैनिकों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है। लगभग सभी ही  गोल्ड मैडल विजेता हैं अतः सभी को बधाई।     

(1),रेणु श्रीवास्तव-37  ,(2)संध्या कुमार-39  ,(3)नीरा त्रिखा-28, (5  ) सुजाता उपाध्याय-39 ,(6  )चंद्रेश बहादुर-38 ,(6)सरविन्द पाल-25       

सभी साथिओं को हमारा व्यक्तिगत एवं परिवार का सामूहिक आभार एवं बधाई।


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