20 मार्च 2024
परमपूज्य गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्मदिन मनाने हेतु ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवारजनों द्वारा लिए गए संकल्प का दूसरा पार्ट “अनुभूति विशेषांक” है जिसके अंतर्गत इस परिवार के समर्पित साथिओं द्वारा एक-एक पुष्प चुन कर एक ऐसी माला अर्पण की जा रही है जिसकी सुगंध हम सबके अंतःकरण को ऊर्जावान बना रही है।
आदरणीय संध्या बहिन जी के दो ज्ञानप्रसाद लेखों के बाद एक बार फिर हम “अनुभूति विशेषांक” में प्रस्तुत किये जा रहे लेखों की कड़ी जोड़ने का प्रयास करेंगें। हमारे आदरणीय सरविन्द पाल जी द्वारा प्रस्तुत आज का लेख इस कड़ी का 13वां लेख है जिसका शीर्षक “उच्चस्तरीय आत्मविश्वास व प्रगाढ़ संकल्प शक्ति का प्रभाव” स्वयं ही सब कुछ कह रहा है। सरविन्द जी की प्रस्तुति देखने में बिल्कुल ही साधारण सी दिख रही है लेकिन “यह तो गूँगे का गुड़ है”, उनके लिए यह साधारण कतई नहीं है। लेख में लिखा गया एक-एक शब्द उस भयानक रात में उनके अंतर्मन की स्थिति के वर्णन का प्रयास है। ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के अन्य प्रयासों की भांति इस प्रस्तुति से भी अनेकों पाठकों का कायाकल्प होने की सम्भावना है, ऐसा हमारा अटूट विश्वास है।
अगर और कोई अनुभूति लेख हमें नहीं मिलता तो कल वाला लेख “अनुभूति शृंखला” का अंतिम लेख ही होगा। कल प्रस्तुत होने वाले लेख में आदरणीय विदुषी बहिन जी की अनुभूति ने हमें उन दिनों का स्मरण करा दिया जब हमारी आयु मात्र 10 वर्ष की थी। बहिन जी ने जिस स्थिति का वर्णन किया है, वैसी ही स्थिति का सामना हम प्रतिवर्ष, उसी स्थान पर करते रहे हैं, वाह रे गुरुदेव, कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुम्बा जोड़ा। प्रयास करेंगें कि बहिन जी की अनुभूति के साथ हम अपना बाल्यकाल जोड़कर एक रोचक कथा वर्णन कर पाएं।
तो आइए इन्ही शब्दों के साथ गुरुचरणों में समर्पित हो जाएँ।
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परम पूज्य गुरुदेव ने अपने साहित्य में लिखा है,
“लक्ष्य जितना बड़ा होगा, मार्ग भी उतना ही बड़ा होगा और बाधाएं भी अधिक आएंगी l इस परिस्थिति में हम सबका दृढ़ आत्मविश्वास व प्रगाढ़ संकल्प शक्ति ही काम आती है l सामान्य आत्मविश्वास व संकल्प शक्ति नहीं बल्कि उच्चस्तरीय दृढ़ आत्मविश्वास व प्रगाढ़ संकल्प शक्ति का होना बहुत जरूरी है l यदि एक पल के लिए भी निराशा आयी तो वहीं लक्ष्य कठिन और दूर होता चला जाता है। यह निराशा ही है जो हमारी संकल्प शक्ति और विश्वास में रोड़े अड़ाती रहती है और हमारे दुर्भाग्य का कारण है। मनुष्य की सबसे बड़ी भूल व अज्ञानता यही है। ज्ञानार्जन मनुष्य को क्या से क्या बना देता है।”
मनुष्य का सबसे बड़ा और सच्चा साथी जो उसे हर परिस्थिति में सँभालता है, वोह है उसका “आत्मविश्वास।”आत्मविश्वास ही मनुष्य की बिखरी हुई समस्त चेतना और ऊर्जा को संगठित करके नियत लक्ष्य की दिशा में लगाता है। आत्मविश्वास के अभाव में, स्वयं को छोड़ कर दूसरों पर निर्भर रहने से आत्मिक दुर्बलता तो आती है, साथ ही साथ छोटी-मोटी ऐसी बाधाएं भी आती हैं जो पल भर में हमें विचलित कर देती हैं l
परम पूज्य गुरुदेव की शिक्षा का पालन करते हुए हमें स्वयं पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि सँसार में ऐसा कुछ भी नहीं जो आत्मविश्वास व दृढ संकल्प शक्ति से प्राप्त करना कठिन हो ,तभी तो कहा गया है Impossible is a word to be found only in the dictionary of fools.नेपोलियन बोनापार्ट का यह कथन आज भी कितना बहुचर्चित है हम सब भलीभांति जानते हैं। इतिहास की क्या बात करें, गुरुदेव द्वारा रचित साहित्य संकल्प शक्ति के अनेकों संस्मरणों से भरा पड़ा है।
इन्हीं संस्मरणों के नियमित स्वाध्याय एवं ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के अनवरत प्रेरणा ने हमें क्या से क्या बना दिया, वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं।
इसी दृढ़ आत्मविश्वास और प्रगाढ़ संकल्प शक्ति का ही प्रतिफल है कि हम हर कार्य आत्मनिर्भर होकर निडर व निस्वार्थ भाव से करते हैं और यह अजस्त्र अनुदान व वरदान हमें परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से एवं आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के सामुहिक आशीर्वाद व शुभकामनाओं से अनवरत प्राप्त हो रहे हैं जिनसे हम लाभान्वित भी हो रहे हैं l
ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार एवं परम पूज्य गुरुदेव से जुड़ने से पहले हम बहुत ही डरपोक व आलसी प्रवृत्ति के मानव थे, गुरुदेव की शरण में आने से लेकर अब तक आत्मिक दृष्टि से हमारा कायाकल्प हो चुका है। सबसे बड़ा प्रतक्ष्य परिवर्तन जो हम अनुभव करते हैं वोह है सभी से अच्छा ही करने का प्रयास l
यह सब गुरुदेव की शक्ति का ही परिणाम है कि आज हमारे समक्ष कितनी भी विषम परिस्थितियाँ क्यों न हों, हम उनसे मुँह नहीं मोड़ते हैं और डटकर मुकाबला करते हैं l निम्नलिखित घटना इन्हीं तथ्यों की साक्षी है :
बात 19 जनवरी, 2024 शुक्रवार की है जब हमें गेहूँ के खेत में पानी लगाना था। ट्युबवेल मालिक ने हमें लगभग रात 2:00 बजे पानी देने का समय दिया। जनवरी माह की शीतलहर व घने कोहरे से हम भलीभांति परिचित थे और जानते भी थे कि रात 2:00 बजे का समय बहुत ही खराब होगा। यह सब कुछ जानने के बावजूद हमने हिम्मत नहीं हारी और वही समय स्वीकार कर लिया l गाँव से हमारा खेत लगभग एक किलोमीटर दूर है और राम गंगा नहर का किनारा है जो कि बहुत ही भयानक व डरावनी जगह है। भयानक स्थान, कड़ाके की सर्दी एवं घने कोहरे का प्रकोप जैसी विषम परिस्थिति का हमें सामना करना था और किया l निर्धारित हुए समयानुसार हम रात 2:00 बजे गेहूँ के खेत में पानी लगाने के लिए पहुँच गए। सर्दी और घने कोहरे के कारण सम्पूर्ण शरीर काँप रहा था l इतना अधिक घना कोहरा था कि बहुत ही पास की कोई वस्तु भी दिखाई नहीं दे रही थी। टार्च की रोशनी से दूर-दूर तक कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था l भौतिक दृष्टि से इस भीषण सर्दी व घने कोहरे के बीच गाँव से एक किलोमीटर दूर हम बिल्कुल अकेले थे जिसके कारण मन में नकारात्मक विचारों का आना स्वाभाविक था लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से हम अकेले नहीं थे। परम पूज्य गुरुदेव, परम वन्दनीय माता जी व आद्यिशक्ति जगत् जननी माँ गायत्री माता हमारे साथ थीं जिनकी कृपा से नकारात्मक विचारधारा को हमने तिलांजलि दे दी और अंतःकरण में सकारात्मक विचारों का समावेश हो गया। इस विचार परिवर्तन के साथ ही उस अंधेरी रात में मन से सूनेपन व अकेलेपन का भय बिल्कुल समाप्त हो गया हम और निडर होकर खेत में पानी लगाते रहे। मन ही मन गायत्री मंत्र का जाप करते रहे जिसका प्रतिफल हमें यह मिला कि शरीर से सर्दी बिल्कुल दूर हो गई थी और ऐसा अनुभव हो रहा था कि सर्दी बिल्कुल है ही नहीं, कुछ देर बाद कोहरा भी कम हो गया था l इस प्रकार जब तक हम खेत में रहे तब तक सर्दी बिल्कुल नहीं लगी l आग जलाने के लिए माचिस भी ले गए थे लेकिन पूरी रात उसकी भी आवश्यकता नहीं पड़ी l
हमारे लिए यह बहुत बड़ा चमत्कार है क्योंकि उस अंधेरी रात में परम पूज्य गुरुदेव की सूक्ष्म उपस्थिति का आभास हो रहा था। इसी उपस्थिति के आभास के परिणामस्वरूप खेत में पानी लगाने का काम बिना किसी घटना के कुशलपूर्वक सम्पन्न हुआ l हमारे कहने का तात्पर्य यह है कि परम पूज्य गुरुदेव का सूक्ष्म संरक्षण व दिव्य सानिध्य अपने बच्चों पर सदैव बरसता रहता है, साथ ही साथ गुरुदेव परिवार के प्रत्येक सदस्य की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन भी करते रहते हैं l
परम पूज्य गुरुदेव साक्षात महाकाल हैं और जिनके सिर पर महाकाल का हाथ होता है उसका कभी अमंगल नहीं हो सकता है। यह एक ऐसा सत्य है जिसमें तनिक भी संदेह व संशय नहीं है। परम पूज्य गुरुदेव पर जिसने भी विश्वास किया है, उसके साथ कभी विश्वासघात नहीं हुआ है, कर्मफल को छोड़कर l कर्मफल का सिद्धांत अटल है और परम पूज्य गुरुदेव की शरण में आकर उसको भी टाला या कम किया जा सकता है l
हम जब से परम पूज्य गुरुदेव की शरण में आए, हमने विश्वास को कभी भी कम नहीं होने दिया और निष्ठा व लगन से परम पूज्य गुरुदेव के प्रति श्रद्धा व समर्पण की भावना से आत्मविश्वास बनाए रखा। इसी विश्वास के साथ हमने संकल्प शक्ति को भी महत्व दिया। दृढ़ आत्मविश्वास व प्रगाढ़ संकल्प शक्ति के नियंत्रण में रहकर हम हर काम परम पूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि व आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के सामुहिक आशीर्वाद से कर रहे हैं जो विषम परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक सम्पन्न हो रहे हैं।
यह हमारा परम सौभाग्य है और हम गृहस्थाश्रम में रहकर पारिवारिक परम्पराओं का पालन करते हुए जीवन का कायाकल्प कर स्वयं को कृतार्थ कर रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं l हम गृहस्थाश्रम में कुल पाँच सदस्य हैं, हम और हमारी पत्नी श्रीमती मीरा देवी, बड़ी बेटी कु. पिंकी पाल, छोटी बेटी कु. अनुराधा पाल व बेटा आयुष कुमार पाल l पाँचों सदस्य परम पूज्य गुरुदेव के श्री चरणों में समर्पित हैं और सभी पर परम पूज्य गुरुदेव का सुरक्षा कवच काम कर रहा है।
यहां हम जो कुछ भी लिख रहे हैं वह सब परम पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा व मार्गदर्शन से प्रेरित होकर लिख रहे हैं। यह सब लिखने की हमारी कोई पात्रता नहीं है और अंधेरी रात में शीतलहर व घने कोहरे के बीच गेहूँ के खेत में पानी लगाने का जो प्रसंग लिखा गया है, यह परम पूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि से हमारे अंतःकरण की आवाज है जिसे हम आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में आप सबके समक्ष साझा कर रहे हैं क्योंकि हमने संकल्प लिया है कि जो भी हमारी अंतर्वेदना व अनुभूति होगी, उसे हम अपने आनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार में अवश्य साझा करेंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को प्रेरणा व ऊर्जा मिले और परम पूज्य गुरुदेव के प्रति आत्मविश्वास बढ़े एवं आत्मसंतुष्टि का प्रसाद मिले l
जीवन में उतार-चढ़ाव का आना स्वाभाविक व सुनिश्चित है, इससे विचलित नहीं होना चाहिए और गुरुदेव की शरण में आकर परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक व क्रान्तिकारी विचारों का नियमित गम्भीरतापूर्वक स्वाध्याय कर अपने जीवन का कायाकल्प कर अपनेआप को कृतार्थ करें ताकि सुखी व समुन्नत जीवन जी सकें और परिवार में समयानुकूल सुखमय व शांतिमय वातावरण अनवरत बना रहे l
इसी आशा व विश्वास के साथ हम अपनी लेखनी को विराम देते हुए अपनी हर किसी गलती के लिए आप सबसे क्षमाप्रार्थी हैं। परम पूज्य गुरुदेव से सभी परिवारजनों के अच्छे स्वास्थ्य व उज्जवल भविष्य की शुभ मंगल कामना करते हैं।
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आज 10 युगसैनिकों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है।आदरणीय सरविन्द जी को गोल्ड मैडल जीतने की बधाई एवं सभी साथिओं का योगदान के लिए धन्यवाद्।
(1)अरुण वर्मा-34,(2)संध्या कुमार-38 ,(3)सुजाता उपाध्याय-31,(4 )सरविन्द कुमार-41,(6)राधा त्रिखा-26, (7) नीरा त्रिखा-24 ,(9) रेणु श्रीवास्तव-25 , चंद्रेश बहादुर-33,मंजू मिश्रा-25, सुमनलता-25
सभी साथिओं को हमारा व्यक्तिगत एवं परिवार का सामूहिक आभार एवं बधाई।
