वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस 2024 को समर्पित सातवां  अनुभूति लेख-प्रस्तुतकर्ता पुष्पा सिंह 

March 6,2024

“संसार है इक नदिया, दुःख-सुख दो किनारे हैं, न जाने कहाँ जाएं, हम बहते धारे हैं” 

आज 6 मार्च 2024 के ज्ञानप्रसाद का आरम्भ रफ़्तार मूवी के सुप्रसिद्ध गीत की इस पंक्ति से करने के पीछे भी एक कारण है।

परम पूज्य गुरुदेव एक तरफ तो हमें कह रहे हैं कि हमारी सबकी आदरणीय बहिन जी रेणु श्रीवास्तव जी के भाई भाभी आदरणीय डॉ अरुण कुमार वर्मा-आदरणीय रंजना जी को उनकी 50वीं मैरिज एनिवर्सरी की शुभकामनाएं प्रदान की जाएँ, वहीँ हमारी दूसरी बहिन आदरणीय कुसुम त्रिपाठी अपनी 6 माह की नातिन के लिए प्रार्थना के लिए कह रही हैं। हमने कुसुम बहिन जी को मैसेज भी किया, यूट्यूब पर भी लिखा लेकिन कोई रिप्लाई न प्राप्त होने के कारण उनका व्हाट्सप्प मैसेज यथावत पेस्ट कर रहे हैं। 

“जय  गुरुदेव आज 6 माह की बच्ची मुंबई  अस्पताल में एडमिट  जिसे जन्म के समय  ही दिल मे छेद था गुरुदेव  की कृपासे अब दुसरा 6 मार्च को होना है  गुरुदेव की कृपा से ही आठ साल शादी के बाद हुआ  ।हमारी छोटी कृति की बच्ची है। मुंबई में इन्जीनियर हैं आप सभी गुरुदेव  से प्रर्थना करें।”

साथिओं से निवेदन है कि गुरु परंपरा का पालन करते हुए शुभकामना और प्रार्थना अवश्य की जाए। 

जल्दी से एक बात और कर लें, फिर आदरणीय पुष्पा बहिन जी की अनुभूति का अमृतपान करेंगें। 

प्रत्येक शुक्रवार को यूट्यूब पर कोई न कोई समस्या आती रहती है, इसके लिए हमारे मन मस्तिष्क में अनेकों विकल्प आते रहते हैं, हमारे साथिओं ने देखा ही होगा कि हम इस समस्या से झूझने के लिए कुछ एक प्रयोग भी कर चुके हैं लेकिन कुछ सार्थक समाधान नहीं निकल पा रहा। पिछले 10 सप्ताह की वीडियोस को देखा जाए तो केवल 5 जनवरी 2024 की वीडियो को ही 25000 व्यूज मिले हैं, इसलिए एक और प्रयोग करते हुए आने वाले शुक्रवार को परम पूज्य गुरुदेव की ही एक वीडियो अपलोड करके देखेंगें, सहयद कुछ समझ आ जाए। 

इन्हीं  शब्दों के साथ प्रस्तुत है आदरणीय पुष्पा बहिन जी की अनुभति।  

परमपूज्य गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्मदिन मनाने हेतु ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवारजनों द्वारा लिए संकल्प  का दूसरा  पार्ट “अनुभूति विशेषांक” है जिसके अंतर्गत इस  परिवार के समर्पित साथिओं द्वारा एक एक पुष्प चुन कर एक ऐसी माला अर्पण की जा रही है जिसकी सुगंध हम सबके अंतःकरण को ऊर्जावान किये जा रही है।  

आज इसी शृंखला का आठवां अंक प्रस्तुत किया गया है जिसमें हमारी बहिन आदरणीय पुष्पा सिंह  अपने दिव्य विचारों से हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। बहिन जी की अनुभति से सम्बंधित हमें कुछ clarifications की आवश्यकता थी, हमने व्हाट्सप्प पर मैसेज भी किया था लेकिन कोई रिप्लाई न प्राप्त हुआ। निवेदन है कि अगर बहिन जी को हमारे द्वारा एडिट किये गए विवरण में कोई समस्या दिखाई दे तो कमेंट करके हमारा सही मार्गदर्शन कर दें, बड़ी कृपा होगी। 

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पुष्पा सिंह बहिन जी की अनुभूति 

बहिन जी लिखती हैं : 

आपके अध्यात्मिक जन्मदिवस पर आपसे मिले प्रेरणा प्यार अनुभूति को आज सबसे साझा करने की इच्छा हो रही है । बात 2008 की है जब मैं अपनी मां के कहने पर अपने होम टाउन में हो रहे 51  कुण्डीय यज्ञ में डरते-डरते दीक्षा ले ली। डर इस बात का था कि  पता नहीं मैं संकल्प पूरा कर पाउंगी या नहीं, लेकिन भीतर धार्मिक भावना उमड़ रही थी।  चाहे 1 -2  बज जाएँ  मैं एक माला जप, चालीसा पाठ और सूर्य अर्घ्य दिये बिना अन्न नहीं ग्रहण करती  थी। देर होने का  एक कारण  तो यह था  कि मैंने घर में ही  ब्यूटी पार्लर खोला हुआ  था और दूसरा यह कि घर की अकेली महिला भी मैं ही थी। तीन बच्चे, पति और आने-जाने वाले लोगों को संभालने की जिम्मेदारी भी मेरी ही थी। 

खैर धीरे-धीरे मेरी रूचि पूजा-पाठ में बढ़ने लगी किसी तरह समय निकाल कर, विशेष दिनों में मंदिर भी  हो आती । पहली बार जब शारदीय नवरात्र में जप का संकल्प लेना था तो मंदिर के कार्यकर्ता द्वारा कहा गया कि  सभी लोग अपना-अपना संकल्प रजिस्टर पर लिख दें कि कौन कितने जाप  का संकल्प ले रहा है। मैं तो  सोच में पड़ गई कि  24000  तो शायद मुझसे नहीं हो पाएगा, रजिस्टर पर लिखना  भी है। परम पूज्य  गुरुदेव का स्मरण करते हुए 11000 जाप का संकल्प लिख दिया। 

जब संकल्प कराया जाने लगा तो आंखें बंद करके  संकल्प दोहराने को कहा गया और जैसे ही मैंने  गुरुदेव जी को याद करते हुए सूर्य का ध्यान किया, संकल्प दोहराने लगी तो  एक चमकदार रोशनी की धारा सूर्य से निकलकर मेरे माथे में प्रवेश करने लगी और मेरी आँखों  से अश्रुधारा बहने लगी।  मैं थोड़ी देर के लिए एकदम खो सी गई, ऐसे लगा जैसे मैं हूँ  ही नहीं।  जब संकल्प दिलाने वाले भाई साहिब  ने ज़ोर  देकर कहा कि सभी अपनी आंखें खोलें, तब मेरे बगल में बैठी बहन ने मुझे हिलाया। मुझे एक  झटका सा लगा और फिर मैं सहज हो पाई। 

मेरे ऊपर यह गुरुकृपा पहली बार हुई। मैंने  घर के सारे काम करते हुए, बहुत अच्छे से नवरात्र को पूरे किए और फिर 24000  का जाप भी बहुत अच्छे से पूरा करने लगी। गुरुदेव माता जी कोटि-कोटि प्रणाम करती हूँ और उनकी ही कृपा हर संकट से निपटने में मदद करने लगी।

पहली बार जब जमशेदपुर में बेटे की नौकरी लगी तो उसके साथ ही मैं भी आ रही थी तो दानापुर स्टेशन से गाड़ी पकड़ने के दौरान पाकेटमारों ने बेटे का पाकेट मार लिया, पैसा टिकट इत्यादि  सब निकाल लिया। सीट देखने के लिए जब बेटे ने टिकट के लिए जेब में हाथ डाला तो पता चला कि जेब  तो खाली है। खैर, नम्बर याद था तो सीट पर आकर बैठ गए लेकिन दिमाग काम नहीं कर रहा था कि अब कैसे क्या होगा, मेरे पास कुछ पैसे थे।   हम दोनों अगल बगल में बैठे लोगों को  सुन रहे थे, वोह कह रहे थे कि अगर  लिस्ट में नाम होगा तो फिर कोई बात नहीं है, TTE  कुछ नहीं कहेगा , जनरल  टिकट बना देगा और  प्राब्लम नही होगा।  लेकिन TTE  तो पैसा खाने के चक्कर में था, उसने हमें बहुत डराया। मैं बस गुरुदेव को याद कर रही थी लेकिन  बेटा एकदम नर्वस हो गया था।

अगले ही स्टेशन पर एक साधु बाबा आकर हम लोगों के सामने की  सीट पर बैठ गए। वोह  सीट किसी और की थी, जब वो आया तो बाबा जी को देखकर उपर वाली खाली बर्थ पर चला गया। पता नहीं क्यूं मैं बार- बार नज़र बचाकर बाबा जी को देखती और  वो भी मुझे देखते। इसी तरह कुछ समय बीता, फिर बाबा जी दूसरी  तरफ मुँह  करके सो गए और हम लोग भी सो गए । मन में कितनी बार यह  ख्याल आया कि यह बाबा जी  कौन हो सकते हैं लेकिन उस समय मैं सोच ही नहीं  पा रही थी कि  ये गुरुदेव भी  हो सकते हैं।  खैर इसी तरह रात बीती, सुबह हो गई।  आसनसोल स्टेशन आया,TTE फिर आया और उसने हमसे पैसे ऐंठने की कोशिश की लेकिन जब हमने बोल दिया कि हमारे पास  पैसा नहीं है, तो वो साइन करके थोड़ा बहुत बोलकर चला गया। इसी समय बाबा जी भी उठ गए, हालांकि वो एक शब्द भी नहीं बोले लेकिन वोह  जब भी मेरी ओर देखते तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता। फिर उठ कर दातून वाले के पास गए और मेरी नज़र थोड़ी देर के लिए ही उनसे हटी और वो पता नहीं किधर चले गए। तब मुझे अचानक ही प्रेरणा मिली कि  यह  तो गुरुदेव ही थे। मैं पहचान नहीं पायी लेकिन एक जुड़ाव महसूस हो रहा था, सबसे  बड़ी बात थी कि  उनके आते ही हम लोगों का डर/ घबराहट एकदम दूर हो गया था। यह  भी बाद में ही समझ में आया कि जब जब मैं मुसीबत में पड़ी, तब तब आप दौड़े चले आए।  अहोभाग्य हमारा  

10 दिसंबर 2023 को मैं रजत जयंती यज्ञ में शामिल होने के लिए पटना गयी।  वहां भी गंगाघाट पर गुरुदेव माता जी दो लोगों के कहने से उनके ही कपडे पहन कर गंगा स्नान भी किया, लेकिन जैसे ही मैंने भीगे कपड़े उतारे  और अपने कपड़े पहने तो उन  माता जी ने खुद से उतारे हुए  कपड़े खंगाले और दोनों लोग कपड़े लेकर पता नहीं किधर निकल गये।  एक बार फिर मैं फिर से मैं  गुरुदेव/माता जी को पहचानने में चूक गई। गंगा जी के दर्शन करने आ रही थी तो मन में बस यही लग रहा था कि  यहां आकर भी गंगा स्नान नहीं कर पाऊँगी  क्योंकि मेरे साथ वाले  लोग पहले ही नहा कर चले गए थे। माता जी ने मुझ से कुछ घरेलू बातें भी पूछी थीं लेकिन मैंने उनसे कोई बात की ही नहीं थी। इसी वजह से मुझे समझ में आया कि  बिना बताए यह बातें  उनको कैसे मालूम हुईं। बाद में समझ आया कि जिनको मैंने  साधारण समझने की भूल, वोह लोग कौन थे, कैसे उन्होंने  मेरे मन की बात जानकर मुझे अपने कपड़े देकर गंगा स्नान करवाया जय हो  माता जी, कोटि-कोटि प्रणाम। 

ये मेरी अनुभूति है। गुरुदेव  ने अपना प्रकाश देकर मुझमें भी अध्यात्म की ज्योति जगा दी  नहीं तो इतनी समझ कहाँ  से आती। गुरुदेव की अनुकम्पा मिलती रहे यही शुभकामना है।  जय मां गायत्री 

ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार ने फ़रवरी का पावन माह गुरुदेव को समर्पित करने का संकल्प लिया था लेकिन साथिओं के उत्साह को देखते हुए इसे मार्च में भी जारी किया हुआ  है। वसंत पंचमी  गुरुदेव का अध्यात्मिक जन्मदिवस है जब उनको अपने गुरुदेव (दादा गुरुदेव) का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था लेकिन हम लोग को तो गुरुदेव  बिना बताए ही दर्शन दे देते हैं, यह हमारे लिए बहुत सौभाग्य की बात है। 

जय गुरुदेव माता जी 

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आज 14    युगसैनिकों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है। आदरणीय रेणु बहिन  जी को गोल्ड मैडल जीतने की बधाई एवं सभी साथिओं का योगदान के लिए धन्यवाद्।      

(1),रेणु श्रीवास्तव-52,(2)संध्या कुमार-46,(3)अनिल मिश्रा-26,(4  )सुमनलता-37 ,(5 ) नीरा त्रिखा-24,(6  )सुजाता उपाध्याय-46  ,(7 ) अरुण वर्मा-36 ,(8 )निशा भारद्वाज-28,(9 ) सरविन्द पाल-30 ,(10)चंद्रेश बहादुर-24,(11)राधा त्रिखा-29,(12)मंजू मिश्रा-27,(13) विदुषी बंता-30,(14)वंदना कुमार-26                  

सभी साथिओं को हमारा व्यक्तिगत एवं परिवार का सामूहिक आभार एवं बधाई।


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