वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

अपने सहकर्मियों की कलम से का 27 जनवरी का स्पेशल सेगमेंट- अनेकों साथिओं का योगदान 

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आज शनिवार है और गुरुकक्षा में  आज का दिन ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के साथिओं के योगदान के लिए निर्धारित किया गया है जिसमें कोई भी अपनी गतिविधि शेयर कर सकता है, गुरुकार्य में सहयोग कर सकता है। 

तो जल्दी से pointwise अपनी बात कह दें ताकि आप आज के योगदान का आनंद  प्राप्त कर सकें। 

1.सबसे महत्वपूर्ण विषय तो परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस, 2024 की वसंत पंचमी के उपलक्ष्य में साथिओं के योगदान का स्मरण कराने का है। वही पोस्टर एक बार फिर से शेयर कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक साथी वर्ष में एक बार आने वाले  इस पुण्य कार्य में योगदान देकर सौभाग्य प्राप्त कर सकें। 

2.हमारे साथिओं ने अनुभव किया होगा कि इस सप्ताह में चारों ज्ञानप्रसाद लेख किसी निश्चित लेख  शृंखला के  भाग नहीं थे लेकिन सोमवार से एक बहुत ही रोचक, दिव्य  लेख श्रृंखला का शुभारम्भ हो रहा है जिससे हम सबको बहुत कुछ प्राप्त होने वाला है 

3.आज के इस स्पेशल सेगमेंट के साथ अटैच किया गए  गूगल ड्राइव लिंक में छोटे छोटे नन्हें बच्चों की activities शामिल की गयी हैं। बचपन ही एक ऐसी आयु होती है जहाँ हम कुम्हार की भांति बच्चे के व्यक्तित्व को गला और पका सकते हैं। अंत में सुजाता बहिन जी का योगदान भी शामिल किया है। 

4.स्पेशल सेगमेंट की Body में दो कृतियाँ हैं -एक हमारी असफलता की और दूसरी आदरणीय सरविन्द जी के राम मंदिर से सम्बंधित विचार, भाई साहिब के विचारों को आज ही स्थान मिला है।

अ)कुछ समय पूर्व हमने अपने साथियों के साथ “फ़ोन उपवास” की बात  शेयर की थी। फोन उपवास अर्थात कुछ निश्चित समय के लिए फोन को बिलकुल हाथ नहीं लगाना। स्वास्थ्य को देखते हुए इस संकल्प का विचार हमें किसी बहुचर्चित सात दिवसीय मेडिटेशन कैंप से आया था जहां मेडिटेशन करने वालों को एक प्राकृतिक वातावरण में, रोजमर्रा के जीवन से दूर रखा जाता है, कोई संपर्क नहीं , मनोरंजन के लिए टीवी, रेडियो  जैसा कोई साधन नहीं।

जहां हमें इस कैंप से प्रेरणा एवम मार्गदर्शन मिला था वहीं यह प्रश्न भी मन में उठा था कि यह फ्लेशी, चमकदार दिखने वाली, व्यापारिक वेबसाइट्स कैसे लोगों को  लूट रही हैं, कैसे अनेकों का  ब्रेन वाश कर रही हैं। लोग उस प्रक्रिया के लिए  एक सप्ताह का 4000 डॉलर देने को तैयार हैं जिसे घर में फ्री में आसानी से किया जा सकता है ।यहां कनाडा में हमारे ही प्रदेश में विकसित हो रहे “शांतिवन प्राकृतिक वातावरण” की सुविधा प्राप्त करने के लिए एक भी डॉलर चार्ज नहीं किया जाता। 

हमारा संकल्प सप्ताह में मात्र कुछ समय के लिए  “फोन से तिलांजलि लेना” था  लेकिन उसी में असफल रहे, तो यह है हमारी संकल्प शक्ति, स्वयं पर ही अनेकों प्रश्न चिन्ह लगने शुरू हो गए और अपने मन को समझाते हुए इस संकल्प से किनारा कर लिया ।यही विचार आया कि  अगर फोन उपवास से इतनी बैचैनी और स्वास्थ्य अधिक खराब हो रहा तो इस संकल्प को क्यों अपनाया जाए? इस संकल्प के संबंध में  सबसे पहले आदरणीय सुमनलता बहिन जी ने पूछा कि हमारी सेहत की कोई समस्या तो नहीं है, बहिन जी का धन्यवाद करते हैं। पिछले शनिवार आदरणीय रेणु बहिन जी को पता चला कि हमारा संकल्प असफल रहा तो उन्होंने “राम काज कीन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम” वाली चौपाई लिखकर हमारा साहस बंधाया लेकिन हम ही जानते हैं कि हमारी संकल्प शक्ति और पात्रता किस स्तर की है। यही चौपाई आज अरुण जी ने भी अपने कॉमेंट में लिखी  और हमारी कार्यप्रणाली और संकल्प शक्ति की तुलना  रामभक्त हनुमान जी से की ।अरुण जी का हृदय से धन्यवाद करते है लेकिन एक बार फिर वही बात दोहरा रहे हैं जो कई बार पहले भी कह चुके हैं: 

”यह सब परम पूज्य गुरुदेव ही कर रहे हैं, उन्ही का साहित्य, उन्ही की विडियोज, उन्ही का शुभरात्रि संदेश, उन्ही का रचा हुआ ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार” 

अगर इसमें कुछ भी होता  तो हमने पहले क्यों नहीं कर लिया? यह सब समय का चक्र है, जब जब, जो जो कुछ होना होता है सब पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत समय आने पर ही  होता है।

जिन परिजनों को गुरुदेव की शक्ति के बारे में तनिक भी संदेह/शंका है, उन्हें निम्नलिखित पंक्तियां अवश्य ग्रहण करनी चाहिए, भटकन दूर हो जायेगी और सभी समस्याओं  का समाधान मिल जायेगा:

फोन उपवास जैसे छोटे से,सरल से संकल्प में असफलता के कारण पर विचार करते हुए जब जीवन भर के संकल्पों के बारे में सोचते हैं तो निष्कर्ष यही निकलता है कि सप्ताह में एक दिन छुट्टी का कोई औचित्य नहीं है। गुरुदेव सब जानते हैं, वोह हमारे पिछले कठिनतम संकल्पों में मिली सफलता से भलीभांति अवगत हैं।

परमपूज्य गुरुदेव हमारी अंतरात्मा में विराजमान है, यह उन्हीं का निर्देश एवम मार्गदर्शन है कि अगर गुरुकार्य से दूर रहने पर बैचैनी होती है तो क्यों न इसे इसी में व्यस्त रखा जाए। गुरुदेव यह भी जानते हैं कि हमारे लिए गुरुकार्य के बढ़कर और कोई रोचक/ऊर्जावान कार्य है ही नहीं, किसी Hobby  में भी मन नहीं लगता,सैर सपाटे, पारिवारिक गतिविधियां आदि मन बहलाने के बजाए upset ही  करती हैं । 

ग्रहस्थ में रह कर परिवार/समाज आदि से दूर रहना तो कठिन है लेकिन इन गतिविधियों में मन बैचेन ही रहता है। भरे पूरे परिवार में कोई न कोई आयोजन, डिनर आदि तो होते ही रहते है लेकिन इन सब में हमारी कोई भी रुचि नहीं होती है। अनमने मन से चले तो जाते हैं लेकिन वहां बैठे भी ज्ञानरथ और गुरुकार्य का ख्याल आता रहता है। कई बार लंबी ड्राइव होती है तो बच्चे गाड़ी चलाते हैं और हमारा  लेखन कार्य गाड़ी में ही चलता रहता है क्योंकि निर्धारित समय पर जो कुछ भी पोस्ट होना होता है अगर न हो तो फिर भी बैचनी होती है। बेटे के पास वैंकूवर जाते हैं तो प्लेन में ही लेखन करते रहते हैं। शुभरात्रि संदेश तो अक्सर गाड़ी से ही पोस्ट होता है। कहने का अर्थ यही है कि हर समय स्वयं को समझाते रहते हैं कि यह दुर्लभ सौभाग्य बार-बार  प्राप्त नहीं होता, बहती गंगा में हाथ धो ले, संसाररूपी वैतरणी नदी से किनारा कर ले, इस वैतरणी में  दुःख,चिंता,कष्ट आदि के इलावा कुछ भी नहीं है।

अब तो बच्चों को भी हमारी आदत का पता चल गया है, हमसे पूछ कर ही सब प्रोग्राम बनाते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि ज्ञानरथ कर्तव्य में कोई बाधा न आए । उन्हें पता चल गया है कि हमें ज्ञानरथ से कितनी प्रसन्नता मिलती है, वोह प्रसन्नता जिसके लिए मनुष्य दर दर ठोकरें खा रहा है।

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आ) रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा :– सरविन्द कुमार पाल 

आज बड़े ही हर्ष का दिन है, भारत के स्वर्णिम इतिहास में चार चाँद लगाने का दिन है।  हम सबका परम सौभाग्य है कि शताब्दियों की प्रतीक्षा, कई पीढ़ियों के संघर्ष और पूर्वजों के व्रत को सफल करते हुए सनातन संस्कृति के प्राण रघुनंदन राघव मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अपनी जन्मभूमि अयोध्या में नव्य-भव्य-दिव्य मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं l लगभग 500 वर्षों  के लम्बे समयांतराल के बाद आए इस पावन अवसर पर आज सम्पूर्ण विश्व  भावविभोर है  l हर रामभक्त श्री राम जन्मभूमि की ओर आता नजर आ रहा है और हर आँख आनंद व संतोष के आंसुओं  से भीगी है, हर जिह्वा पर राम-राम है, समूचा राष्ट्र राममय है। आज केवल श्री रामलला के बालरूप विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा  ही नहीं हो रही है, बल्कि लोकआस्था और जनविश्वास भी पुनः प्रतिष्ठित हो रहा है l अयोध्यानगरी अपने खोए हुए गौरव को फिर से पाने के लिए  सज चुकी है l श्री राम जन्मभूमि मुक्ति महायज्ञ न केवल सनातन आस्था व विश्वास की परीक्षा का काल रहा, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधने के लिए राष्ट्र की सामुहिक चेतना जागरण के ध्येय में भी सफल सिद्ध हुआ है l शायद विश्व में ऐसा पहला ऐसा अनूठा प्रकरण रहा होगा, जिसमें किसी राष्ट्र के बहुसंख्यक समाज ने अपने ही देश में, अपने ही आराध्य की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण के लिए इतने वर्षों तक इतना कठिन संघर्ष किया हो l समाज के हर वर्ग ने जाति-पाँति, विचार-दर्शन, पंथ-उपासना पद्धति से ऊपर उठकर रामकाज के लिए स्वयं को  समर्पित किया l संतों ने आशीर्वाद दिया और सनातन संस्कृति के सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों ने रूपरेखा तय की और सफल बनाने के लिए जनता को एकत्रित कर एकजुट किया l आखिरकार संकल्प सिद्ध हुआ, व्रत पूर्ण हुआ l 

यह कैसी विडंबना थी कि जिस अयोध्या को “अवनी की अमरावती” और “धरती का बैकुंठ” कहा गया, वह सदियों तक अभिसप्त रही और सुनियोजित तिरस्कार झेलती रही l जिस देश में रामराज्य शासन और समाज की आदर्श अवधारणा के रूप में स्वीकार्य किया जाता रहा हो उन्हीं भगवान् राम को अपने आस्तित्व का प्रमाण देना पड़ा l जिस देश में रामनाम सबसे बड़ा व सर्वमान्य भरोसा हो, वहीँ  मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की जन्मभूमि के सबूत माँगे गए, यह बहुत ही अद्भुत व आश्चर्यजनक बात है  लेकिन प्रभु श्री राम के भक्तगणों ने धैर्य नहीं छोड़ा,मर्यादा नहीं लाँघी और अपना संघर्ष जारी रखा l सदियों की प्रतीक्षा के बाद भारत में हो रहे इस नव्य-भव्य-दिव्य नवविहान को देख अयोध्या समेत पूरे देश का वर्तमान आनंदित हो उठा l 

इस रामकाज के साक्षी बन रहे सभी लोग बहुत ही सौभाग्यशाली है और इससे भी ज्यादा भाग्यशाली वे हैं जिन्होंने अपना सर्वश्व जीवन रामकाज के लिए समर्पित कर दिया l 22 जनवरी 2024 का दिन विश्व भर के भारतियों  के लिए बड़े आनंद और सौभाग्य  का दिन है l श्री रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के इस अलौकिक अवसर पर जो लोग व आत्माएं स्थूलरूप से इस दिव्य शक्तियों से ओतप्रोत दिव्य महायज्ञ में साक्षी नहीं बन पा रहे हैं, निश्चय ही उनकी भी आत्माओं को संतोष व असीम आत्मानंद की आत्मानुभूति हो रही होगी l  

ऐसे उल्लास एवं आनंदमय वातावरण का दूसरा उदाहरण शायद ही कई शताब्दियों में देखने को मिले जहाँ शैव, वैष्णव, शाक्त, गणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, घिसापंथ, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निंबार्क, रामसनेही, गरीबदासी, अकाली, निरंकारी, गौड़ीय, कबीरपंथी सहित भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म सम्प्रदाय, पूजा-पद्धति परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परम्पराओं के संतगण, 50 से अधिक वनवासी, गिरिवासी, द्वीपवासी परम्पराओं के प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति हो, जहाँ एक छत के नीचे राजनीति, विज्ञान, उद्योग, खेल, कला, संस्कृति, साहित्य आदि विविध विधाओं के प्रमुख लोग एकत्रित हों l भारत के इतिहास में पहली बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों व द्वीपों आदि के निवासियों द्वारा एक जगह पर किसी समारोह में हिस्सा लिया जा रहा है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर की स्थापना भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आध्यात्मिक अनुष्ठान है, रामराज्य की स्थापना की घोषणा है अर्थात परम पूज्य गुरुदेव की भविष्यवाणी सही साबित हो रही है l

जय गुरुदेव 

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आज  14  युगसैनिकों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है। सुजाता  जी  को गोल्ड मैडल प्राप्त करने की बधाई एवं  सभी साथिओं का  संकल्प सूची में  योगदान के लिए धन्यवाद्।   

(1)सरविन्द कुमार-27,(2)संध्या कुमार-41,(3) अरुण वर्मा-26 ,(4)नीरा त्रिखा -28 ,(5 ) सुजाता उपाध्याय-56,(6) रेणु श्रीवास्तव-24   ,(7) सुमनलता-45 ,(8) चंद्रेश बहादुर-35   ,(9 )प्रेरणा कुमारी-28 ,( 10) वंदना कुमार-34 ,(11) पिंकी पाल -25,(12) निशा भरद्वाज-26,(13) पूनम कुमारी-25,(14)  राम लखनपाल-47                            

सभी साथिओं को हमारा व्यक्तिगत एवं परिवार का सामूहिक आभार एवं बधाई।


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