• 1970s का शांतिकुंज एवं आरंभिक दिनों का विवरण

    महाशक्ति की लोकयात्रा  परमपूज्य गुरुदेव के हिमालय प्रस्थान के बाद माताजी के संपूर्ण जीवन में तप की सघनता छा गई। इस तप की ऊर्जा के स्पंदनों से शांतिकुंज का कण-कण अलौकिक दिव्यता से प्रकाशित  हो गया। भगवान महाशिव की भांति गुरुदेव हिमालय की गहनताओं में अपनी आत्मचेतना के कैलाश शिखर पर तपोलीन थे और  भगवती […]

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  • गुरुदेव और माताजी केवल कहने मात्र को ही दो हैं।  

    महाशक्ति की लोकयात्रा  योग साधना की परम प्रगाढ़ता में शिव और शक्ति का परस्पर अंतर्मिलन दो रूपों में प्रकट हुआ था। अपने पहले रूप में महायोगिनी माताजी की अंतस्थ कुण्डलिनी महाशक्ति परिपूर्ण जागरण के पश्चात् विभिन्न चक्रों का भेदन और प्रस्फुटन करती हुई सहस्रार में स्थित महाशिव से जा मिली थी। योग साधकों के लिए […]

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  • युगतीर्थ शांतिकुंज का भूमि चयन एवं मथुरा से विदाई  

    “महाशक्ति के दिव्य साधना स्थल” के रूप में शांतिकुंज के निर्माण की परिकल्पना परमपूज्य गुरुदेव की दूसरी हिमालय यात्रा (1960-61) के समय ही तैयार हो गई थी। उनकी मार्गदर्शक सत्ता ने इसकी आवश्यकता एवं इस तरह के निर्माण की स्पष्ट रूपरेखा से उन्हें इस विशिष्ट अवधि में अवगत करा दिया था। हिमालय की गहनताओं में […]

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