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समाज और की नाक चिंता के बजाए दिमाग और विवेक की चिंता करें
3 नवंबर 2025 का ज्ञानप्रसाद 1977 में प्रकाशित परम पूज्य गुरुदेव की दिव्य रचना “शक्ति संचय का स्रोत-संयम” पर आधरित लेख श्रृंखला का आज 20वां एवं समापन लेख प्रस्तुत किया जा रहा है। मात्र 69 पन्नों में समाहित लगभग 19000 शब्दों को 20 विस्तृत लेखों (36000 शब्दों) में समझना, लिखना, साथिओं संग चर्चा करना बहुत…
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मनुष्य के पास “चमत्कारी विशेषताओं” वाला अल्लादीन का चिराग है
30 अक्टूबर 2025 का ज्ञानप्रसाद पिछले कई दिनों से गुरुकक्षा में गुरुदेव की अद्भुत रचना “शक्ति का स्रोत संचय-संयम” पर आधारित लेख श्रृंखला का अध्ययन हो रहा है, तरह-तरह के संयम पर चर्चा हो रही है। आज का लेख, समय और श्रम पर आधरित कल वाले लेख की ही Extension है। आज के युग की…
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स्पर्श इन्द्रिय(Sense of touch) कैसे समय और श्रम को असंयमित करती है ?
29 अक्टूबर 2025 का ज्ञानप्रसाद आज का दिव्य ज्ञानप्रसाद लेख दो महत्वपूर्ण सन्देश लेकर आया है: 1.आलसी मनुष्य एक जीवित मृतक (Living dead) है। 2.आलस्य एक प्रकार की आत्महत्या है। इन दोनों संदेशों को समझने के लिए “स्पर्श इन्द्रिय(Sense of touch) का सहारा लिया गया है, यह समझने का प्रयास किया गया है कि स्पर्श…
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