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ढ़ाई वर्ष बाद हमें निर्धारित तपश्चर्या के लिए जाना होगा
14 जनवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद – ढ़ाई वर्ष बाद हमें निर्धारित तपश्चर्या के लिए जाना होगा पिछले कुछ दिनों से हम सब 1969 की अखंड ज्योति में “विदाई की घड़ियां और हमारी व्यथा-वेदना” शीर्षक से प्रकाशित हुए लेखों का अध्यन कर रहे हैं, आपके कमैंट्स (जो communication का अद्भुत साधन हैं) इस तथ्य के साक्षी…
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आत्मीयता शरीर से नहीं, आत्मा से होती है।
13 जनवरी 2021 का ज्ञानप्रसाद – आत्मीयता शरीर से नहीं, आत्मा से होती है। परमपूज्य गुरुदेव जब परिजनों के पत्रों के उत्तर देते थे तो लिखते थे “ प्रिय आत्मीय जन।” कितनी आत्मीयता और अपनत्व है इस शब्द में। आज के लेख में हम अध्यन करते हुए यह जानने का प्रयास करेंगें कि आत्मीयता का…
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मृत्यु से पहले ही हमारे अंग ज़रूरतमंदों के लिए सुरक्षित कर लिए जाएँ ।
11 जनवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद – मृत्यु से पहले ही हमारे अंग ज़रूरतमंदों के लिए सुरक्षित कर लिए जाएँ । आज का ज्ञानप्रसाद कल वाले मार्मिक वृतांत का ही अगला भाग है। हम देख रहे हैं कि कैसे-कैसे बड़ी ही कठिनता से परमपूज्य गुरुदेव अपनेआप को परिजनों से बिछड़ने के लिए तैयार कर रहे हैं।…
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