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यज्ञों पर आधारित लेख श्रृंखला का चतुर्थ लेख
परम पूज्य गुरुदेव ने नरमेध यज्ञ के समापन पर अगले दो वर्षों में 108 स्थानों पर यज्ञ आयोजन का आह्वान किया था लेकिन उनकी शक्ति इतनी दिव्य कि यह संकल्प चार माह में ही पूर्ण हो गया। सात दशक पूर्व प्राप्त हुई इस सफलता को “यज्ञ आंदोलन” का नाम दिया गया था। आज तो यह…
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यज्ञों पर आधारित लेख श्रृंखला का तृतीय लेख
परम पूज्य गुरुदेव का उद्बोधन- ब्राह्मणत्व का आवाहन उस दिन का अग्रिहोत्र संपन्न होने के बाद आचार्यश्री ने साधकों को संबोधित किया। उस उद्बोधन में “ब्राह्मण धर्म” की व्याख्या और नरमेध के महत्व की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे देश की संस्कृति का क्षरण हो रहा है। उसका कारण यही है कि हमारे यहां…
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अपने सहकर्मियों की कलम से -“गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस का reminder”
सप्ताह का सबसे लोकप्रिय सेगमेंट “अपने सहकर्मियों की कलम से” लेकर हम अपने समर्पित सहकर्मियों के बीच आ चुके हैं, इसे लोकप्रिय बनाने में सहयोग देने के लिए आपका जितना भी धन्यवाद् करें कम है।अपने सहकर्मियों द्वारा पोस्ट की गयीं सभी contributions ही हैं जिन्होंने इस स्पेशल सेगमेंट को “सबसे लोकप्रिय” की संज्ञा देने में…
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