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तीर्थ सेवन का महत्व
अखंड ज्योति जुलाई 1982 तीर्थ शब्द का स्मरण आते ही ह्रदय के तार झंकृत हो उठते हैं, इच्छा उठती है कि उड़ कर तीर्थ सेवन करने पंहुच जाएँ। वैसे तो सभी तीर्थ अतिसम्मानीय हैं लेकिन अगर इस लेख का आधार युगतीर्थ शांतिकुंज बना लिया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि हम सब गायत्री…
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हमारी समर्पित सहकर्मी स्नेहा गुप्ता का माँ गायत्री में अटूट विश्वास(Editable)
“मन की गठरी कैसे खोल दूं आपके सामने ? मेरी बातें तंदुल की तरह हैं, मैं सुदामा की तरह…..” यहां हिंदी साहित्य की इन पंक्तियों को लिखने का बस इतना सा प्रयोजन है कि ये पंक्तियां सदा से ही मेरे मनोभावो से मेरी स्थिति से मेल खाती हैं । दो चार पंक्तियों में खुद…
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