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“मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यम्” अर्थात गुरु वाक्य ही मूलमंत्र है
2 जुलाई 2024 का ज्ञानप्रसाद कल वाले ज्ञानप्रसाद में किये गए वचन का पालन करते हुए आज का लेख आदरणीय डॉ शर्मा जी की पुस्तक से न होकर “मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यम्” की चर्चा कर रहा है। “मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यम्” का अर्थ है गुरु वाक्य ही मूलमंत्र है, इसकी साधना से ही सब कुछ स्वयं ही हो जाता…
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डॉ ओ पी शर्मा जी द्वारा लिखित पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का पांचवा लेख
1 जुलाई 2024 का ज्ञानप्रसाद आज के ज्ञानप्रसाद लेख का शुभारम्भ अपने साथिओं के धन्यवाद् से किया जा रहा है जिनकी शुभकामना से हमारी बाईं आँख की सर्जरी बहुत ही सहजता से सम्पन हो पायी। परम पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद ऐसा बरसा कि तीन घंटे के बाद जब हम घर आये तो ऐसा लग रहा…
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डॉ ओ पी शर्मा जी द्वारा लिखित पुस्तक पर आधारित लेख श्रृंखला का चौथा लेख
27 जून 2024 का ज्ञानप्रसाद आदरणीय डॉ ओ पी शर्मा जी द्वारा लिखित पुस्तक “अज्ञात की अनुभूति” पर आधारित लेख शृंखला का आज चौथा लेख प्रस्तुत है। इस लेख श्रृंखला से सम्बंधित सभी लेखों के बारे में कहना उचित होगा कि गुरुदेव द्वारा रचित विशाल साहित्य की भांति यह रचना भी इतनी दिव्य है कि…
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