वेदमाता,देवमाता,विश्वमाता माँ गायत्री से सम्बंधित साहित्य को समर्पित ज्ञानकोष

युगतीर्थ शांतिकुंज को शक्तिपुंज के रूप में कैसे विकसित किया गया, पार्ट 3  

17  अप्रैल 2023 का ज्ञानप्रसाद

प्रत्येक सोमवार की भांति आज भी हमारे सभी साथी रविवार के अवकाश के उपरांत सम्पूर्ण ऊर्जा लेकर ज्ञानप्रसाद की पाठशाला में आ चुके हैं। सभी के प्रति अभिवादन,आभार, धन्यवाद् व्यक्त करते हैं।

मई 1972 की अखंड ज्योति के एक लेख के शीर्षक  ने हमें इतना आकर्षित किया कि हम आपके समक्ष प्रस्तुत किये बिना न रह पाए। आज उस शीर्षक का  पार्ट 3 और अंतिम भाग प्रस्तुत है। वंदनीय माता जी ने नारी जागरण के लिए कैसे-कैसे परिश्रम किया, कैसे सारी planning की, उन सबसे बहुत से परिजन परिचित हैं। परम पूज्य गुरुदेव भी नारी जागरण और “शांतिकुंज को शक्तिपुंज” बनाने में पूरी तरह गंभीर हैं और अनवरत मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। शांतिकुंज में नारी शक्ति के जाग्रत उदहारण तो अनेकों ही मिल जायेंगें लेकिन प्रतिदिन देवमंच पर विराजमान बहिनों द्वारा यज्ञशाला एवं दैनिक यज्ञ का संचालन  गुरुदेव माता जी के परिश्रम  का अद्भुत एवं गौरवशाली  परिणाम है। 

तो आइए विश्वशांति की प्रार्थना करें और  आरम्भ करें आज का ज्ञानप्रसाद : 

“ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः ।सर्वे सन्तु निरामयाः ।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥” 

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वंदनीय माता जी बता रही है कि कन्याओं को अखंड जप में लगाने का उद्देश्य आने वाले समय में नारी  जागरण की दिशा में  एक बहुत बड़ा कदम है ।

आगे चलकर सम्भवतः पाँच वर्ष बाद,जब अपना वर्तमान अखण्ड जप और शक्ति प्रत्यावर्तन का कार्य पूरा हो जायगा तो शाँतिकुंज  में विवाहित नारियों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जायगी। विवाहित गृहस्थ नारियों के लिए परिवार की जिम्मेदारिओं से ज़्यादा देर के लिए दूर रहना संभव नहीं होता, इसलिए ऐसी नारियों की  शिक्षा तीन महीने में ही पूरी करनी होगी। इनकी स्थिति देखते हुए पाठ्यक्रम अलग  बनाना होगा । इस प्रकार गृहस्थ नारियां इस थोड़ी अवधि में ही इतना बौद्धिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगी  कि अपने परिवार के लिए “वरदान” सिद्ध हो सकें। ऐसी शिक्षा की आवश्यकता तो तुरन्त थी लेकिन साधनों के अभाव के कारण  उसे देर से  ही आरम्भ किया जा सकेगा। अभी तो भावी योजना को ध्यान में रखने भर की और तत्सम्बन्धी तैयारी करते रहने भर की है।

नारी जागरण एक स्वतन्त्र विषय है। नारी का अपना स्थान है और अपना ही कार्यक्षेत्र। उसे अलग ढंग से जागृत, समर्थ और समाज के योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका सम्पादित करने के लिए तैयार किया जायगा। नारी आँदोलन की अपनी दिशा होगी और अपनी  ही कार्य पद्धति। वह सर्वथा मौलिक होगी। इस संदर्भ में भी गुरुदेव का चिन्तन स्पष्ट है और इस कार्य पद्धति की  रूप-रेखा  भी उनके सामने है। 

यह  अभियान नारियों द्वारा ही चलाया जाना है, इसके लिए संगठन, प्रचार, आन्दोलन आदि नारियों को ही अपने हाथ में लेना है। इस स्थिति में वंदनीय माता जी बता रही हैं कि मेरे पास न तो समय था और न ही इतना बोझ उठाने की क्षमता,यही कारण था कि  नारी जागरण का कार्य थोड़ी देर बाद आरम्भ किया गया था।  

जब शाँतिकुंज  को नारी जागरण का केन्द्र ही बनना है तो वहीँ से देशव्यापी, विश्व्यापी नारी उत्कर्ष का सर्वांगपूर्ण आंदोलन भी सुसंचालित किया जा सकेगा।  जब वह योजना काम में आवेगी तब नारी संगठन का केन्द्र भी यही रहेगा और प्रचारिकाएं एवं प्रशिक्षिकाएं भी यहीं से तैयार की जायेंगी जो जगह-जगह जाकर इसी मिशन के अनुरूप विद्यालय खड़े करेंगीं  और इसी प्रकार के एक-एक वर्ष के पाठ्यक्रम चलाएँगीं।  तीन महीने के नारी शिविर भी वे प्रशिक्षिकाएं ही  चलायेंगी। आज जो 4000 शाखाओं के रूप में खोलने का विचार है थोड़े समय में ही 40000  शाखाएं बन जायेंगीं। सर्वत्र नारी शिक्षा के लिये विद्यालय खड़े करने की आवश्यकता अनुभव की जाने लगेगी।  ऐसी दशा में अनुभवी प्रशिक्षिकाओं की सबसे पहली आवश्यकता पड़ेगी उसकी पूर्ति भी इसी अभियान के अंतर्गत शान्तिकुंज  को ही करनी पड़ेगी।

तब एक सर्वांगपूर्ण नारी पत्रिका, “नारी साहित्य” की भी आवश्यकता अनुभव की जायगी और वह एक अतिरिक्त विभाग ही “नारी जागरण योजना” के अंतर्गत काम करेगा। अभी तो इस दृष्टि से देखा-सोचा ही नहीं गया लेकिन जब आवश्यकता अनुभव होगी तब इस आन्दोलन में स्वयं  को खपा देने वाली जीवन्त महिलाएं भी आगे आ जायेंगी जैसे गायत्री तपोभूमि में सुयोग्य और सेवाभावी आत्मदानी एकत्रित हो गये।

युग परिवर्तन की महान प्रक्रिया में नारी का असाधारण योगदान होगा और वह भावी संसार का हर क्षेत्र में नेतृत्व करेगी। भले ही पुरुष श्रम अधिक कर सकता हो लेकिन भावनात्मक वर्चस्व नारी में ही अधिक है अर्थात पुरुष की तुलना  में नारी अधिक भावनाशील है।   नव समाज की रचना भावनात्मक आधारों पर होती है। इस विशेषता की दृष्टि से नारी का स्थान सदा से आगे रहा है और अभी भी आगे ही  है। अगले दिनों तो विश्व नेतृत्व का भार नारी के कन्धों पर आने वाला है। इस तथ्य को गुरुदेव अनेक बार प्रकाश में ला चुके हैं। ईश्वर की इच्छा इसी दिशा में अनुकूलता उत्पन्न कर रही है। 

1970s के वर्षों के राजनीति क्षेत्र पर दृष्टि दौड़ाएं तो हम पायेंगें कि विश्व में कितनी ही महिलाओं का बोलबाला था, दबदबा था,वर्चस्व था। आज 2023 में भी जब उन दिनों को स्मरण करते हैं तो मस्तक गर्व से ऊँचा हुए बिना नहीं रह सकता।  

इसराइल की प्रधान मन्त्री गोल्डा मेयर ऐसी महिला हैं जिन्होंने अविवेक से भरपूर  मध्य पूर्व के समस्त देशों की आक्रमणात्मक चुनौतियाँ स्वीकार की हैं और वे अपने छोटे से देश को कितनी समुन्नत एवं समर्थ स्थिति में रख रही हैं। इसे देखकर लोगों को दांतों तले उँगली दबानी पड़ती है। भारत की प्रधान मन्त्री इन्दिरा गाँधी का उभरता हुआ नेतृत्व चमत्कार उत्पन्न कर रहा है। इन्दिरा की आँधी चुनावों की सफलता में ऐतिहासिक स्थान प्राप्त कर चुकी । लंका की प्रधान मन्त्री श्रीमती भण्डार नायके का नेतृत्व भी सहज भुला देने योग्य नहीं है। नारी जगत की यह उदीयमान तारिकाएं यह पूर्व संकेत करती हैं कि हवा का प्रवाह किस दिशा में बहने को चला है । 

जब हम विश्व भर की नारियों का गुणगान गा रहे हैं तो ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार की नारियां कैसे पीछे रह जाएँ। जिस प्रतिभा,परिश्रम और श्रद्धा से इस छोटे से परिवार की नारियां मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं, हम सब गर्व किये बिना नहीं रह सकते।  

अगले दिनों इस दिशा में प्रगति और भी तेजी से होगी। परिवर्तन चक्र में नारी दिशा प्रदान करेगी, नेतृत्व सँभालेगी और नर को अपनी कर्मठता का सहयोग देकर उसे नव निर्माण के लिए कुछ और अधिक  करने में सफल और  समर्थ बना सकेगी। यह मात्र  कल्पना ही नहीं यथार्थता है जो अगले ही दिनों साकार होने जा रही है। उसकी विधिव्यवस्था का आत्मिक सूत्र संचालन भी आवश्यक है। यह कार्य अगले दिनों शाँतिकुंज  द्वारा सम्पादित हो सकेगा। 

ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के पाठक स्वयं देख सकते हैं जिन दिनों के बात इस लेख में हो रही है उनके 50 वर्ष वर्ष बाद गुरुदेव के संकल्प पूरे हुए हैं कि नहीं। गुरुदेव के  संकल्प न तो अवास्तविक होते हैं और न अधूरे रहते हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार के कार्यक्रमों पर एक दृष्टि दौड़ाने से ही गुरुदेव के कार्यों की सार्थकता स्पष्ट दिखाई  दे जाती है 

गुरुदेव की ऐसी मान्यता है कि  कन्याओं का प्रशिक्षण,नारी जीवन को सफल बनाने वाली विद्या का विस्तार तो लोक कल्याण की दृष्टि से आवश्यक है ही, लेकिन इससे भी बड़ी बात है: नारी प्रतिभा का जागरण और उसको साहित्य, कला, राजनीति, समाज निर्माण आदि विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व एवम उत्तरदायित्व उठा सकने में समर्थ बनाना। यह कार्य नारियों के द्वारा आत्मबल सम्पन्न होने पर सँभाला जायेगा। अगले दिनों हर क्षेत्र में ऐसी ही प्रतिभावान महिलाओं का उत्पादन आवश्यक होगा। इसके लिए परामर्श, प्रशिक्षण, आन्दोलन ही नहीं कुछ ऐसा “विशेष” भी करना होगा जिससे उन्हें आत्मबल सम्पन्न बनाया जा सके। अगले दिनों सर्वतोमुखी नेतृत्व जिसके कन्धों पर आने वाला है उस नारी के आत्मिक जागरण का कुछ विशेष प्रयास किया ही जाना चाहिए । गुरुदेव इस दिशा में आशावान् ही नहीं, प्रयत्नशील भी हैं।

शाँतिकुंज इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण भूमिका सम्पन्न कर सके इसी का श्रीगणेश कन्याओं द्वारा अखण्ड जप के माध्यम से किया गया है। इसी बीज में फूट रहा अंकुर प्रशिक्षण व्यवस्था की दिशा में सार्थक हो रहा है। 

आशा की जानी चाहिए कि यह प्रगति क्रमशः अग्रगामी होगी और वट वृक्ष की तरह नारी जागृति का अभियान निरन्तर सुविस्तृत होता चला जायगा । शाँतिकुंज अगले दिनों ‘शक्तिपुंज के रूप में परिणत होगा और वह नव निर्माण की महान भूमिका सम्पादित करेगा। गुरुदेव का ‘डाक बंगला’ यह स्थान अगले पाँच वर्ष तक अभी और भी बना रहेगा इसका कारण परिजनों का मार्गदर्शन एवं शक्ति प्रत्यावर्तन ही नहीं, ‘शाँतिकुंज’ को शक्तिपुंज’ के रूप में परिणत करने की भव्य योजना का सूत्रपात आरम्भिक मार्गदर्शन एवं गति प्रदान करना भी है। आशा की जानी चाहिए कि वह संस्थान अगले दिनों नारी जागरण की अभिनव भूमिका सम्पादित करेगा।

महिला जागरण के महान अभियान में यों पुरुष भी सहयोग देंगे पर प्रधान रूप से यह भार महिलाओं को अपने ही कन्धों पर उठाना पड़ेगा। आगे उन्हें ही आना होगा। अपने क्षेत्र में तो गृहस्थ महिलाएं ही थोड़ा-थोड़ा समय बचाकर यह कार्य करेंगी, लेकिन कुछ संचालिका वर्ग की प्रभावशाली महिलाएं भी अपने को इस कार्य में पूरी तरह खपा दें तभी यह आन्दोलन गति पकड़ेगा और देशव्यापी तथा विश्वव्यापी बनेगा। जिनके ऊपर गृहस्थ की जिम्मेदारियाँ न हों तथा जिन्होंने लोभ-मोह एवं तृष्णा लालसा पर काबू पा लिया हो ऐसी शिक्षित महिलाओं को अपना पूरा जीवन ही इस कार्य के लिए अर्पण करना चाहिए । ऐसी महिलाएं शाँतिकुंज हरिद्वार के पते पर पत्र व्यवहार कर लें।

शाँतिकुंज के भविष्य के बारे में ऐसी ही चर्चा गुरुदेव से होती रही और लगा कि वे इस संदर्भ में गंभीर हैं। वर्तमान जप साधना, कन्या शिक्षण, शक्ति प्रत्यावर्तन तो मात्र पाँच वर्ष ही आगे और चलना है। उसके बाद शान्तिकुंज, को शक्ति केन्द्र के रूप में ही परिणत कर दिया जायगा। 

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आज के  24 आहुति संकल्प में 12  युगसैनिकों की भागीदारी रही है।अरुण जी  ने सबसे अधिक अंक प्राप्त करके गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। भाई साहिब बहुत बहुत बधाई। 

(1) सरविन्द कुमार-38,(2)चंद्रेश बहादुर-25 ,(3) सुजाता उपाध्याय-24,(4) अरुण वर्मा-54  ,(5) रेणु श्रीवास्तव-37,(6) सुमनलता-30 ,(7)संध्या कुमार-38,(8)निशा भारद्वाज-32,(9 ) स्नेहा गुप्ता-24 ,(10 )मंजू मिश्रा-29,(11) नीरा त्रिखा-26,(12) पूनम कुमारी-26        

सभी विजेताओं को हमारी  व्यक्तिगत एवं परिवार की सामूहिक बधाई।

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