कल रिलीज़ हो रही वेबसीरीज़ का teaser-trailer  

19  दिसंबर 2022 का ज्ञानप्रसाद

आज सप्ताह का प्रथम  दिन सोमवार है, आज के ज्ञानप्रसाद का आरम्भ आदरणीय अरुण वर्मा जी के सराहनीय कदम से करते हैं और ह्रदय से धन्यवाद् देते हैं कि उन्होंने  हमारे निवेदन को सम्मान देते हुए इतनी तत्परता दिखाई जो हम सबके लिए उदाहरणीय तो है ही परम पूज्य गुरुदेव  के प्रति अटूट श्रद्धा की  प्रतीक भी  है। 17 दिसंबर 2022, शनिवार  के स्पेशल सेगमेंट में “अनुभूतियों के निमंत्रण” के प्रति  अरुण जी ने इतनी श्रद्धा व्यक्त की कि लगभग 650 शब्दों की अपनी बेटी की अनुभति कुछ ही घंटों में लिख कर हमें पोस्ट भी कर दी। ऐसे समर्पण को हम नमन करते हैं। इस श्रद्धा ने हमें भी प्रेरणा  दी और हमने इसकी एडिटिंग पूर्ण कर डाली। यह तो दैनिक कमेंट की तरह ही हुआ जो सबसे पहले ही पोस्ट होता है।  यही कारण है कि गोल्ड मैडल की दौड़ में अरुणजी  सबसे  आगे ही होते हैं। परम पूज्य गुरुदेव से निवेदन करते हैं कि हम सबको अपार शक्ति का अनुदान दें। 

 “इतनी  शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो न।”     

हम सब जानते हैं कि ब्रह्मवेला का यह  समय दिव्य ज्ञानप्रसाद के  वितरण का शुभ अवसर होता है, यह अवसर होता है ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के सहकर्मियों की  चेतना के  जागरण का, इक्क्ठे एक परिवार की भांति परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीय माताजी के श्रीचरणों में बैठ कर दिव्य ज्ञानामृत के पयपान का, जीवन को उज्जवल बनाने का। आइये आज के दिन का शुभारंभ भी  सूर्य भगवान की प्रथम किरण की ऊर्जावान लालिमा  से करें और  अपने  एवं  सभी के  मंगल की कामना  करते हुए विश्व शांति के लिए प्रार्थना करें। 

“ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः ।सर्वे सन्तु निरामयाः ।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत् ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

तो आइये अब बात करें कल से आरम्भ हो रही धारवाहिक वेबसीरीज़ के टीज़र ट्रेलर की, कितने  एपिसोड की आज्ञा मिली है, वह तो हमारे मार्गदर्शक ही बता सकते हैं क्योंकि हमारे हाथों में थमी हुई कलम उन्ही के आदेश से चल रही है। ओह आजकल तो कीबोर्ड और फ़ोन /लैपटॉप का युग है, तो लैपटॉप पर उंगलिया भी वही चला रह हैं,कई बार तो उचित शब्द और वाक्य भी वही सुझा देते हैं,शत शत नमन करते हैं ऐसे दिव्य गुरु को। 

परम पूज्य गुरुदेव ने आदेश दिया है कि हमारी एवं माताजी को समर्पित वेबसेरीज़ जिसका समापन अभी-अभी हुआ है, उसके बाद हमारे बच्चे हमारी 1973 की विदेश यात्रा को जानने के लिए बहुत ही उत्सुक हैं। हमारे बच्चे जानना चाहते हैं कि अफ्रीकी देशों में प्रवासी भारतियों ने कैसे गायत्री परिवार और गुरुदेव के संदेशों का, शिक्षा का उद्घोष किया। तो अपने गुरु के किसी भी निर्देश का  सम्मानपूर्वक आदर करना न केवल हमारा कर्तव्य है बल्कि परम धर्म है। 

 हमारे सहपाठी जानते हैं कि आज से 4 माह पूर्व हमने दो वेबसेरिएस  का शुभारम्भ  किया था। 18 सितम्बर को आरम्भ हुई प्रथम  सीरीज़ के 31 एपिसोड प्रस्तुत किये गए जो परम पूज्य गुरुदेव के जन्म के पूर्व से आरम्भ होकर स्थूल शरीर त्याग तक 9 नवंबर को समाप्त हुई। दूसरी सीरीज 10 नवंबर को आरम्भ हुई और 15 दिसंबर को इसका 17वां एवं अंतिम एपिसोड प्रस्तुत किया गया।  यह सीरीज़ वंदनीय माताजी को समर्पित थी। दोनों ही सीरीज़ (श्रृंखलाओं) को हमारे सहकर्मियों ने कमैंट्स/काउंटर कमैंट्स, सुझावों से सराहा जिसके लिए हम ह्रदय से धन्यवाद् करते हैं। दोनों सीरीज़  का आधार परम पूज्य गुरदेव द्वारा लिखित अलग-अलग साहित्य,वीडियोस एवं अनेकों स्रोतों का अध्यन  ही कहा जा सकता है लेकिन “चेतना की शिखर यात्रा पार्ट 1 और महाशक्ति की लोकयात्रा” दिव्य पुस्तकें बहुत ही सहायक रहीं। 

कल आरम्भ हो रही वेबसीरीज़ “चेतना की शिखर यात्रा पार्ट 3 के चैप्टर 5” पर आधारित है और हम इसके चित्रण का प्रयास दूसरी बार कर रहे हैं। वैसे तो इन पुस्तकों का अध्यन कई बार कर चुके हैं लेकिन उस समय प्रकाशित किये गए दो लेख लिखते समय यही धारणा थी कि उसी  कंटेंट का ही चयन किया जाए जो अधिक महत्वपूर्ण है। यह हमारी बहुत बड़ी भूल थी क्योंकि परम पूज्य गुरुदेव का एक-एक शब्द दिव्य है। भूल के साथ ही हमारी धारणा  थी कि एक ही विषय पर इतने लंबे समय तक चर्चा करने से  शायद हमारे पाठक ऊब (bore ) ही न जाएँ। हमारी  इस धारणा को भी आप सबने ग़लत प्रमाणित कर दिया जिसके लिए हम आपका धन्यवाद् करते हैं। यही है संपर्क साधना जो हमें एक दूसरे को जानने का अवसर देती है, जिसके आभाव में हम एक दूसरे से दूर हुए जा रहे हैं।  आज का मानव अपने ही ivory tower में ,pigeon hole में, किले में बंद होकर रह गया है जो बहुत ही घातक है। ऑनलाइन हमारी presence 24 घंटे हो सकती है, लाखों followers और friends हो सकते हैं लेकिन एक कमरे में रहने वाले दो मानवों के पास बात करने को समय नहीं है। यही है आधुनिक युग की, विज्ञान की, विकास की देन। 

नई सीरीज को प्रस्तुत करने के लिए हम तो बहुत ही excited हैं,आप भी अवश्य ही होंगें। बहुत से प्रश्नों के उत्तर मिलने की सम्भावना  है जैसे कि परम पूज्य गुरुदेव ने समुंद्री जहाज़ पर इतने लंबे दिन कैसे व्यतीत किये, गुरुदेव समुंद्री मार्ग से ही क्यों गए, क्या उनके लिए विमान यात्रा संभव नहीं थी, समुंद्री यात्रा से होने वाले स्वास्थ्य नुक्सान का क्या हुआ था, अफ़्रीकी देशों में जाने का अभिप्राय क्या था, अफ्रीकी देशों के आदिवासियों का गुरुदेव से क्या सम्बन्ध था, गुरुदेव ने उन देशों की भाषाएँ  कैसे सीख लीं, आदिवासियों ने गुरुदेव के उद्बोधन कैसे समझ लिए, एक ही समय पर 4-5 स्थानों पर  गुरुदेव कैसे उपस्थित हो गए आदि आदि। 

कुछ वर्ष पूर्व कहे जाने वाले ट्रेलर को आजकल teaser-trailer कहा जाता  है जिससे पिक्चर की आमदनी,लोकप्रियता वगैरह का अनुमान लगाया जी सकता है। हमारे द्वारा प्रकाशित हो रहा ट्रेलर भी इसी दिशा में एक प्रयास है, हाँ लोकप्रियता और आमदनी का मापदंड बिल्कुल  ही अलग है। यहाँ किसी भी वित्ति लाभ की यां Television Rating Points( TRP) की बात नहीं हो रही, बात हो रही है ज्ञानयज्ञ में आहुतियों  के points और gold medal की ( न कि Oscar की ), ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार के लेखों के लिए ट्रेलर शब्द  की खोज भी हमारे अरुण भाई साहिब ने ही की थी।  

परम  श्रद्धेय डॉक्टर प्रणव पंड्या जी  एवं आदरणीय ज्योतिर्मय जी द्वारा सम्पादित  “चेतना की शिखर यात्रा” के तीनों खंड अति दिव्य हैं।  इनका एक-एक चैप्टर पाठक को चेतना के उस शिखर पर ले जाता है जिसका अनुभव केवल पाठक ही कर सकता हैं। वेदमाता गायत्री ट्रस्ट शांतिकुंज  ने गीता जयंती 26 दिसंबर,2001 को प्रथम खंड, गुरुपूर्णिमा 13 जुलाई 2003 को दूसरा खंड और गुरुपूर्णिमा 15 जुलाई 2011 को तीसरा खंड प्रकाशित हुए।  लगभग 1200 पन्नों में इतने विशाल व्यक्तित्व को सीमाबद्ध करना एक बहुत ही बड़ा कार्य है जिसके लिए हम सदैव आभारी रहेंगें। इन खण्डों को ऐसे समय में compile करना जब technology इतनी विकसित नहीं थी जितनी आजकल है, अपनेआप में एक बहुत बड़ा प्रश्न है, नमन करते हैं ऐसे प्रयास को। 

तो यही है आज का ज्ञानप्रसाद जिसका समापन संकल्प सूची के साथ करते  हैं। 

आज की  24 आहुति संकल्प सूची में 11 सहकर्मियों ने संकल्प पूरा किया है।अरुण जी  को गोल्ड मैडल प्राप्त  करने के लिए बधाई और उन सभी का धन्यवाद् जिन्होंने गोल्ड मैडल दिलवाने में सहायता की।    

(1)संध्या कुमार-37,(2)अरुण वर्मा-60,(3)वंदना कुमार-27,(4) सरविन्द कुमार-48,(5) सुजाता उपाध्याय-32,(6) रेणु  श्रीवास्तव-30,(7) प्रेरणा कुमारी-26,(8) सुमनलता-26,(9 ) पूनम कुमारी-32,(10 ) निशा भारद्वाज-29,(11) संजना कुमारी-25        

सभी को  हमारी व्यक्तिगत एवं परिवार की सामूहिक बधाई।  सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय  के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिन्हें हम हृदय से नमन करते हैं।  जय गुरुदेव

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