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अपने सहकर्मियों की कलम से -24 सितम्बर 2022 

परम पूज्य गुरुदेव, वंदनीय माता जी के सूक्ष्म संरक्षण और मार्गदर्शन में 24 सितम्बर 2022  शनिवार का “अपने सहकर्मियों की कलम से” का यह लोकप्रिय सेगमेंट आपके चरणों में प्रस्तुत है।  इस सेगमेंट की लोकप्रियता का अनुमान आपके कमैंट्स और कॉउंटर कमेंटस से हो ही जाता है।  आपके सुझाव हमारा मार्गदर्शन  करने में बहुत ही सहायक होते हैं, निवेदन करते हैं इसी प्रकार अपनी सहभागिता का प्रमाण देकर हमारा मनोबल बढ़ाने का कार्य करते  रहें।

ऑनलाइन ज्ञानरथ गायत्री परिवार (OGGP) समर्पित सहयोगियों का एक बहुत ही छोटा सा परिवार है। सप्ताह के चार दिन -सोमवार से गुरुवार तक चार ज्ञानप्रसाद लेख, शुक्रवार को वीडियो, शनिवार को “अपने सहकर्मियों की कलम से”, हर रात्रि एक शुभरात्रि सन्देश, आपके लिए प्रस्तुत किये जाते हैं।  रविवार को बैटरी चार्ज करने के लिए अवकाश होता है। सभी सहकर्मियों के सहयोग और सुझावों की ऊर्जा  से यह परिवार अपनी  गति से गिरते-उठते अपनी यात्रा पर चले  जा रहा है।

पिछले एक सप्ताह में सभी सहकर्मियों ने अपनी  प्राण ऊर्जा से ज्ञानरथ फिर से गतिशील किया और कमैंट्स एक नए शिखर पर पहुँच गए जैसे कि 22 सितम्बर -528, 21 सितम्बर-525, 20 सितम्बर- 778, 19 सितम्बर-861, इन  numbers को प्राप्त करने का सेहरा उन सभी सहयोगियों के शीर्ष पर जाता है जिन्होंने  एक दूसरे के साथ सहकारिता दिखाते हुए, एक दूसरे के कमेंट पढ़ते हुए संकल्प सूची को बड़ा करने में योगदान किया। यह संकल्प सूची, जो कभी 1 पर सिकुड़ गयी थी वह all time high 22 तक पहुँच गयी। 

आज के इस स्पेशल सेगमेंट में चार छोटी छोटी अनुभूतियाँ प्रस्तुत करें उससे  पहले कुछ 1-2 बातें  तो कर लें जो हम बार-बार भूलते जा रहे हैं। 

1.स्पेशल सेगमेंट के लिए पिक्चर:

सहकर्मियों के contributions प्रकाशित करने का आकर्षण और लॉजिक कई गुना बढ़ जाता है अगर साथ में फोटो भी हो। इसलिए निवेदन कर रहे हैं कि अगर आप इस सेगमेंट के लिए कुछ प्रकाशित कराने का विचार बना रहे हैं तो अपनी क्लियर सी पिक्चर अवश्य भेज दें। आप यह पिक्चर हमारे व्हाट्सप्प नंबर 519 341 4763 या जीमेल एड्रेस trikha48@gmail.com  पर भेज सकते हैं।

2.जय गुरुदेव लिखने का महत्व:

वैसे तो कमैंट्स का महत्व तभी होता है जब वह लेख से सम्बंधित हो लेकिन कई बार समय के अभाव  में हम केवल “जय गुरुदेव “ ही लिख देते हैं। हमारे विवेक में जय गुरुदेव लिखने का महत्व वैसा ही  है जैसा गायत्री मन्त्र बोलना और लिखना। अगर 861 बार जय गुरुदेव लिखा जाये तो अनुमान लगाएं आपने कितनी बार अपने गुरु की जय बोली और वह भी सुबह की उस मंगल वेला में जब इस ब्रह्माण्ड की समस्त शक्तियां अपने शिखर पर होती हैं। कमैंट्स की tracking के दौरान हमने देखा कि कई सहकर्मी सुबह तीन बजे से लेकर रात 12 बजे तक लिखते ही जा रहे हैं। नमन है ऐसे सहकर्मियों को।  

विश्वास कीजिये गुरु कार्य में आपका योगदान आपको कई गुना multiply होकर वापिस मिल रहा है, आपको तो मालूम ही नहीं है। ज्योति बहिन जी की बेटी सयानी का  उदाहरण अभी-अभी हम सबने देखा। आज की अनुभूतियाँ इसी दिशा में हैं।  यह कोई बढ़ाई, प्रशंसा या विज्ञापन की दृष्टि से प्रकाशित नहीं की गयी हैं बल्कि गुरु की शक्ति का अनुमान लगाने के लिए हैं। 

3. कुछ ही दिनों में हम अपने सहकर्मियों द्वारा अनुभव की गयी गायत्री परिवार या ज्ञानरथ की अनुभूतियाँ प्रकाशित करने की योजना बना रहे हैं, सभी से निवेदन है कि लिखना आरम्भ करें और पिक्चर अवश्य भेजें।

अरुण त्रिखा

प्रातः 4 बजे का समय होगा, हम शुभरात्रि सन्देश के लिए स्लाइड बनाने का प्रयास कर रहे थे। बार-बार प्रयास करने के बाद भी हम असफल ही हुए जा रहे थे। असफलता का यह सिलसिला अनवरत तब तक चलता रहा जब 7 बज गए। जो काम केवल कुछ  मिनटों का होता है, उसे 3 घण्टे में भी न कर पाए। तभी गुरुदेव को याद किया तो उन्होंने गूगल से ही कोई ऐसा मार्गदर्शन दिया और ऐसा सॉफ्टवेयर प्रदान कर दिया जिसे हमने पहले कभी देखा भी न था। अपना रोज़ वाला सॉफ्टवेयर प्रयोग करने में असफलता और नए  सॉफ्टवेयर ने आधे घंटे में ही सब सम्पन्न करा दिया।  यह है गुरु की शक्ति। कैसे न धन्यवाद् करें और शीश नवाएँ। एक दम ऐसे अनुभव हुआ कि हम भाग कर  घर के बाहिर सामने वाली पहाड़ी पर उगते हुए सूर्य को नमस्कार कर रहे  हैं और आकाश में मेरे गुरु की दो आँखें  कह रही है “बेटा  तू मेरा काम कर,मैं तेरा काम करूँगा” उस समय भी और आज लिखते हुए भी अश्रुधारा रुक नहीं रही है। नमन ,नमन एवं नमन है ऐसे गुरु को। 

हमारे परिजनों को याद ही होगा कि  हमने अपने  घर के लिए  शांतिकुंज का विशेषण प्रयोग किया था क्योंकि सामने पहाड़ी पर सूर्योदय का दृशय बिलकुल ऐसा ही है जैसे हम यज्ञशालाओं की ओर मुँह करके समाधि  स्थल पर खड़े हों। 

धन्यवाद् 

रेणु श्रीवास्तव: गुरुदेव की शक्ति का एहसास या चमत्कार

सादर नमन भाई जी।कहाँ से शुरु करें समझ नहीं आता।पल -पल गुरु हमें भवसागर से उबारते हैं।

बात 6-7 साल पहले की है। मेरा दूसरा दामाद दिल्ली में HSBC बैंक मे vice president था।रोज की तरह अपने ऑफिस के लिये जा रहा था। वैसे उसकी drivingअच्छी है और आराम से गाड़ी  चलाता है। घर से करीब दो किलोमीटर ही गया होगा कि पीछे से Army van ने ऐसे  ज़ोर  का टक्कर मारा कि गाड़ी  डिवाइडर पार कर दूसरे तरफ जाकर पेड़ से  टकरा कर रूकी। दिल्ली में डिवाइडर काफी ऊँची है, गाड़ी की हालत तो ऐसी  थी कि वह बड़ी  मुश्किल से निकल पाया। संयोग की बात कहें या गुरुदेव की कृपा उसी समय उनके पड़ोसी  पंजाबी अंकल  जो सामने के फ्लैट में रहते थे उन्होंने देखा तो अपने साथ आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस स्टेशन लेकर गये। मैं तो इसे गुरुदेव की कृपा ही मानूंगी कि उसी समय पड़ोसी भी आ गये। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि गुरुदेव स्वयं पडोसी के रूप में पहुँच गये और दामाद को खरोंच तक नहीं आई। मैं उस समय लखनऊ में थी ,जब मुझे पता चला तो परेशान होना स्वाभाविक था लेकिन  जब मैनें पूछा,”बेटा तुम्हारा क्या हाल है ?तो उत्तर  मिला “मैं बिल्कुल ठीक हूँ।” इस घटना को मैं गुरुदेव की कृपा मानती हूँ। गाड़ी  की तो ऐसी हालत हो गई कि कह नहीं सकती।

हम समझें या न समझें  लेकिन गुरुदेव हर समय साये की तरह हमारी रक्षा करते हैं। किन शब्दों में   कहूँ  और कैसे यह  ऋण  चुका पाऊँगी। जो भी गायत्री परिवार के सदस्य है सबने अपने जीवन में अवश्य गुरुदेव की कृपा  का अनुभव किया होगा। अन्त में यही कहना चाहूंगी:

“वह पुष्प कहाँ से लाऊँ गुरुदेव जो आपके चरणों में अर्पण करूँ। धन्य हैं हमारे गुरु, कहाँ कहौं लघु नाम बड़ाई।”

जय गुरुदेव,जय माताजी तथा जय माँ गायत्री ,चरणों में कोटि-कोटि नमन।

कुमोदनी गौरहा :

भाई साहब बात 1989 की है, मेरे प्रथम पुत्र के ब्रह्मलीन  होने के बाद दूसरी  बार गर्भाधान होने पर हम पुंसवन संस्कार कराने शान्तिकुंज गए थे। संस्कार तों यज्ञशाला में हुआ किन्तु संस्कार होने के बाद हम माता जी से आशीर्वाद लेने ऊपर गए तों माता जी को प्रणाम करने के लिए मैं खीर की कटोरी को माता जी के पास रखने ही वाली थी कि माता जी ने झट से कटोरी अपने हाथ में ले ली और कहने लगीं, “यज्ञ भगवान के प्रसाद को ऐसा नहीं रखतें बेटा” कहते हुए खीर की कटोरी प्रणाम करने के बाद मेरे हाथ में  दें दी

उसी आशीर्वाद का परिणाम है मेरी बेटी सुमति कभी विपरीत परिस्थितियों में भी  विचलित नहीं हुई

और बिना पुस्तक के केवल अपने सहेलियों के सहारे और स्कूल कालेज के पुस्तकालय के सहारे आज M.Sc.,M.Phil.,Ph.D  करके शबरी कन्या महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। हे महाकाल की अर्धांगिनी,जगत जननी मां भगवती ऐसे ही कृपा दृष्टि सदैव बनाए रखना। 

जय गुरुदेव, सदर प्रणाम भैया जी 

एक छोटा सी  अनुभूति शेयर कर रही हूँ 

कल जब हम पटना एयरपोर्ट से उड़ीसा के लिए निकल रहे थे तो भुवनेश्वर में पहंच ही गए तो वहां  क्या हुआ।  मेरे पति एस्क्लेटर में चढ़ गए  लेकिन मुझे  एस्केलेटर में जाने  से बहुत डर लगता है   तो उनको देख कर मैं भी चढ़ गयी तो एक स्टैप के बाद ही मैं गिरने वाली थी। पीछे  से लगभाग आधा  गिर ही चुकी थी तो मेरे मुंह से जय गुरुदेव निकल आई और अचानक से गिरने से बच गई। लग रहा था जैसा कोई अदृश्य  शक्ति ने  मुझे गिरने से बचाया। गुरुदेव ऐसे ही अपने बच्चों को बचाते हैं। 

उस समय मेरी  आँखों में पानी आ गया। पहले तो बहुत सारी अनुभूति हुईं  लेकिन कल जो हुआ मैं  कभी भूल नहीं पाउंगी जय गुरुदेव

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आज की संकल्प सूची में 8 सहकर्मियों ने संकल्प पूरा किया है। संध्या कुमार   जी  गोल्ड मैडल से सम्मानित किये जाते  हैं। 

(1 ) सरविन्द कुमार-24 ,(2 ) रेणु श्रीवास्तव-25 (3 )संध्या कुमार-32 ,(4 )प्रेरणा कुमारी-27 ,(5 )कुमोदनी गौराहा-24,(6)  सुजाता उपाध्याय-26,(7) राजकुमारी कौरव-24,(8) सुमन लता-25 

जय गुरुदेव 


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