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अपने सहकर्मियों की कलम से -6 अगस्त 2022

अपने सहकर्मियों की कलम से -6 अगस्त 2022

हर शुक्रवार  को जब हम यह वीकेंड  विशेष सेगमेंट लिखना आरम्भ करते हैं तो एक अद्भुत सी सुखद अनुभूति होती है। यह अनुभूति इसलिए होती है कि  हमारे समर्पित सहकर्मियों की contributions को पढ़ते समय ऐसा अनुभव होता है जैसे कि कई वर्षों का सम्बन्ध हो, हालाँकि बहुतों को तो हमने देखा तक नहीं है, देखना तो दूर की बात हमें उनकी प्रोफाइल फोटो तक भी देखने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है। शायद यह कोई अंतरात्मा का ही सम्बन्ध है जो हम सबको  हृदय के तारों से जोड़े हुए है। अगर हमें परम पूज्य गुरुदेव की शिक्षा पर रत्ती भर भी विश्वास है तो हम सब  “प्यार ,प्यार ,प्यार और समर्पण ,समर्पण ,समर्पण” के सिद्धांत को अपनाने का प्रयास करें। जो भी सहकर्मी ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के साथ पिछले कुछ समय से जुड़े हैं उनकी  ज़िम्मेदारी बनती  है कि नए आने वाले सहकर्मियों के  आगे इस परिवार की ऐसी पिक्चर प्रस्तुत करें कि वह 10  और परिजनों के समक्ष जाकर इसकी विशेषताओं की चर्चा करें। यही प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से अनवरत चल रही है, समर्पित सहकर्मी जुड़ते चले जा रहे है। हाँ कुछ छोड़ के भी चले जाते हैं, इसमें हमारे प्रयास में कोई कमी नहीं होती , उनकी  रूचि कहीं और दिशा में होती है।  ऐसे परिजन ऑनलाइन ज्ञानरथ में “Try and test” की भावना लेकर आते हैं, जब उन्हें इंस्टेंट परिणाम नहीं मिलते हैं तो आगे की राह चलते बनते हैं। इसका एक और कारण यह भी हो सकता है, (जैसे चिन्मय भइया कई बार कह चुके हैं), यह लोग बड़ी शान से बताते फिरते हैं कि हमारे 10 व्हाट्सप्प ग्रुप हैं, 5000 फेसबुक फॉलोवर्स हैं ,ट्विटर ,इंस्टाग्राम और पता नहीं क्या क्या। तो इस स्थिति में समर्पण और श्रद्धा ढूंढ पाना सागर में मोती ढूंढने समान है। लेकिन हम बहुत ही सौभाग्यशाली हैं कि परम पूज्य गुरुदेव चुन चुन कर समर्पित सहकर्मियों को हमारे परिवार में शामिल कर रहे हैं और दिव्य सत्ता की कृपा से इसका विस्तार हुए जा रहा है। बच्चों से लेकर युवाओं तक, युवाओं से लेकर वरिष्ठों तक, पुरषों से लेकर महिलाओं तक, युगतीर्थ शांतिकुंज से लेकर मस्तीचक शक्तिपीठ तक, मसूरी इंटरनेशनल स्कूल से लेकर तपोभूमि मथुरा तक,जन्मभूमि आंवलखेड़ा से लेकर अखंड ज्योति हस्पताल तक -किस किस का नाम लें, गुरुदेव ने कैसे इतने विस्तृत क्षेत्र से परिजनों को यहाँ लाया, परिवार में जोड़ा और उनकी समर्था के अनुसार उनसे कार्य भी करवाया। सच में बोलें तो हम तो किसी भी काम के काबिल न थे, औरों का तो हमें पता नहीं है। गुरुदेव ने हम में क्या देखा हमें कुछ मालूम नहीं है।

यह विचार वैसे ही मन में उठ रहे थे, अपने परिवार से शेयर करने को मन हुआ सो कर दिए।  अगर किसी को कोई भी बात अच्छी न लगी हो You are free to reject it और हम एडवांस में क्षमा प्रार्थी हैं।

हर बार लिखते हैं कि इस सेगमेंट की लोकप्रियता  आपकी contributions पर निर्भर करती है। सभी contributions सुरक्षित रखी  होती हैं और हर एक को यहाँ लाना हमारी ज़िम्मेदारी है, हाँ महत्ता के आधार पर कभी आगे पीछे हो सकती है लेकिन मिस कभी नहीं होती। आज भी इतना कुछ  है कि सभी के बारे में लिखना तो संभव नहीं है लेकिन प्रयास यही है कि रोचकता और प्रयास के साथ बिल्कुल कोई भी compromise न हो। तो हर बार की तरह आज भी pointwise लिखने का प्रयास करते हैं।

1. आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी के कुछ ही घंटो के UAE प्रवास में उन्होंने रेडियो इंटरव्यू दिया जो हमने वीडियो फॉर्म में आप सबके समक्ष प्रस्तुत किया। अन्य  गतिविधिओं को चित्रित करती UAE News 24/7 में प्रकाशित हुई अंग्रेजी न्यूज़ आइटम का हिंदी अनुवाद आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं : 

प्रसिद्ध जीवन कोच डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपनी हाल की दुबई यात्रा के दौरान आत्म-शोषण और सामाजिक उत्थान के दर्शन की रूपरेखा तैयार की। डॉ चिन्मय पंड्या, प्रो-वाइस चांसलर, देव संस्कृति विश्वविद्यालय (डीएसवीवी) और AWGP  के एक प्रमुख संरक्षक ने अपनी हालिया दुबई यात्रा के दौरान AWGP  के 2 प्रमुख दर्शन – आत्म अलंकरण और सामाजिक उत्थान को रेखांकित किया। उनके अनुसार, आत्म-सज्जा के इन दो दर्शनों का अनुसरण करना जो ‘खुद को एक अच्छा इंसान बनाना’ और सामाजिक उत्थान के अलावा और कुछ नहीं है, जो ‘समाज को रहने के लिए एक अच्छी जगह’ बना रहा है। एक व्यक्ति को एक बेहतर इंसान बनाएगा। “वर्तमान विश्व परिदृश्य में हमने देखा है कि अधिक धन अधिक असंतोष लाता है। ऐसा होने पर, इस तरह के दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो पहले के दिनों की तुलना में अधिक सर्वोपरि हो गया है।

वास्तविक परिवर्तन केवल भीतर से ही आ सकता है। यह बाहर से नहीं आ सकता। जब तक लोग अंदर से नहीं बदलते, तब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता। विचार बहुत सरल है। इस तरह हम में से प्रत्येक समाज को रहने के लिए एक अच्छी जगह बनाने में भूमिका निभा सकता है। किसी व्यक्ति को परेशान करने वाली समस्याओं की प्रकृति दुनिया भर में कमोबेश एक जैसी है। अगर कोई व्यक्ति अपने अंदर शांति और सद्भाव महसूस करता है, तो उसे हर जगह शांति और सद्भाव मिलेगा। हम मन की शुद्धता और समाज की पूर्णता बनाना चाहते हैं। हम व्यक्ति के माध्यम से समाज को एक बेहतर स्थान बनाना चाहते हैं।”

2.साधना सिंह जी ने प्रज्ञा बाल विकास विद्यालय जो वह 1998 से चला रही है के बारे में एक छोटी सी( 38 सेकंड की ) वीडियो भेजी थी जिसमें वह बच्चे प्रार्थना कर रहे हैं। नर्सरी से छठी कक्षा तक इस स्कूल का प्रतिदिन गायत्री मन्त्र से आरंभ  होता है और माह के अंत में दीप  यज्ञ होता है। कामना करते हैं कि इस विद्यालय पर गुरुकृपा अनवरत बरसती  रहे।

3.राजकुमारी कौरव जी के अनुसार गायत्री परिवार करेली द्वारा गायत्री चेतना केंद्र की भूमि पर पुनीत आंवले  के पौधे का रोपण किया गया। साथ ही बहिन जी ने सूचित किया है उन्हें  3 दिसंबर से 6 दिसंबर के बीच 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ की अनुमति शांतिकुंज से मिल गयी है।

4. हमारे सहकर्मियों ने हमारी सबकी प्रिय बेटी संजना के यूट्यूब कमैंट्स  अवश्य ही पढ़े होंगें। हम इस बेटी के प्रत्येक कमेंट से अति प्रभावित हैं ,आप भी अवश्य ही होंगें।कुछ एक को हमने सेव भी किया  हुआ है, उन्ही में से एक( बिना किसी एडिट के) 26 जुलाई का कमेंट आपके समक्ष प्रस्तुत है। अपनी आयु से कहीं ऊपर विचार रखने वाली इस बेटी को हम सबका मार्गदर्शन अवश्य मिलना चाहिए ताकि वह किसी रुकावट के  जीवन की उंचाईओं को छूती जाये। 

कमेंट :

आदरणीय डॉक्टर सर आपको हमारा भावभरा सादर प्रणाम एवं हृदय से कोटि कोटि धन्यवाद इस अनमोल प्रसाद के लिए । एकदम सही दुर्बुद्धि ने हमें चारों तरफ़ से घेर लिया है और सबसे अनोखी बात यह कि इस बात से हम बिल्कुल अनजान हैं। युग साधना यानि लोक कल्याण लेकिन व्यावहारिक तौर पर स्वार्थ की भावना प्रबल है।जो व्यक्ति अगर छोटी चौकलेट खुद रखेगा और बड़ी सामने वाले को देखा तो लोग उसे बेवकूफ समझते हैं उसकी भावनाओं को नहीं देखते। अगर कोई सादगी भरे कपड़े पहने हैं तो उसे हम गरीब ही समझ बैठते हैं। इस तरीके से हम अपने विचारों की ग़रीबी का प्रमाण छोड़ जाते हैं। एकदम सही अगर हम सादगी पूर्ण जीवन जीने को संकल्पित हो जाए और अनावश्यक आकांक्षाओं को कम कर देंगे तो अभी कठिन दिखने वाली साधना आसान हो जाएगी। एकदम सही अगर हमारी निष्ठा, आस्था सच्ची है तो स्वल्प साधनों से भी भावनात्मक युग निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं जो बाद में अपना विराट रूप ले ही लेगी , जैसे ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार एक मिसाल है। एकदम सही हमने अपनी प्रायोरिटी सेट की हुई हैं इसलिए हम बहानेबाजी करते रहते हैं कि “हमारे पास समय ही नहीं है”। लेकिन अब तो परम पूज्य गुरुदेव जी ने कह दिया है कि अमीरी के बड़प्पन के सपने देखना बेकार है और हो भी क्यों ना इतनी सारी जनसंख्या हैं और इसमें अपने स्वार्थ को कैसे पूरा कर सकते हैं।

इसलिए हमें युग निर्माण के तीन सूत्र( – व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण एवं समाज निर्माण) को अपनाना होगा , इस पर गहराई से चिंतन मनन करनी होगी। जब हमारी परीक्षा में मन लायक नंबर नहीं आती तब हमारे पास पछताने और रोने के अलावा और कुछ नहीं बचता इसी प्रकार अगर अभी युग निर्माण में हम अपनी भूमिका को लेकर अनदेखी और आलस्य बरतेंगे तो हमारे रोने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचेगा। हमें इस स्वर्णिम अवसर को गंवाने के बजाय इसका लाभ उठाना चाहिए। और जैसा कि परम पूज्य गुरुदेव हमारे महाकाल ने कह दिया है कि “हमें अब बिना आगे पीछे सोचकर, सिर्फ अपने गुरुदेव पर अडिग विश्वास रखकर इस पर चलना आरम्भ कर देना चाहिए। यह एक दिन के साधना से होने वाला नहीं है, इसमें प्रतिदिन अपना समय,श्रम , श्रद्धा और अंश की आहूति डालनी चाहिए । इसमें हमारा ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार एक अहम भूमिका निभाएगा।

ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के सभी आत्मीय परिजनों को हमारा भावभरा सादर प्रणाम एवं हृदय से कोटि कोटि धन्यवाद आपके विचार क्रांति अभियान में दिव्य सहभागिता एवं मार्गदर्शन के लिए ।

आदरणीय डॉक्टर सर को जितना भी धन्यवाद दिया जाए वो कम ही होगा। इस परिवार के संचालक और गार्जियन के तौर पर उन्होंने चाहे परिस्थितियां कैसी भी रही हों हमेशा ही शानदार तरीके से निभाईं हैं।

हमारी परम आदरणीय प्रेरणा दीदी जी को हमारा भावभरा सादर प्रणाम एवं गोल्ड मेडल विजेता बनने के लिए बहुत बहुत बधाई ।

जय गुरुदेव जय शिव शंभू ️️️️️

आज का यह स्पेशल सेगमेंट हम यहीं पर समाप्त करने की आज्ञा लेते हैं लेकिन समाप्त करने  से पहले कमैंट्स के बारे में एक सन्देश शेयर करना चाहते हैं। इस सन्देश के माध्यम से हम कहना चाहते  हैं कि कमेंटस- काउंटर कमैंट्स की प्रक्रिया को और सक्रीय बनाते हुए इसकी महत्ता को समझा जाना चाहिए। अपने गुरु का एकमात्र निर्देश-“हमारे विचारों का विस्तृत प्रचार” हमेशा याद रखना चाहिए। कमैंट्स करके हम सभी ज्ञानप्रसार में अहम् भूमिका निभा रहे हैं।  सभी अपने योगदान का  कुछ महत्वपूर्ण अंश दूसरे  को दे रहे हैं – यही है समयदान ,यही है श्रम दान, यही है विवेकदान।

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अंत में प्रस्तुत है आज की 24 आहुति संकल्प सूची :

आज की 24 आहुति संकल्प सूची में  6  सहकर्मिओं-अरुण वर्मा (37 ),सरविन्द कुमार (37 ),संजना कुमारी  (25),संध्या कुमार (31), विदुषी बंता (31),रेणु श्रीवास्तव (26 ) ने संकल्प पूर्ण किया है।        

इस सूची के अनुसार अरुण जी और सरविन्द जी   गोल्ड मैडल विजेता हैं, सामूहिक शक्ति को नमन एवं  सामूहिक बधाई। सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय  के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिनको हम हृदय से नमन करते हैं, आभार व्यक्त करते हैं और जीवनपर्यन्त ऋणी रहेंगें। धन्यवाद


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