4 अगस्त 2022 का ज्ञानप्रसाद-
पिछले कई दिनों से और उससे पहले भी कई बार हम आत्मबल पर बात कर चुके हैं, कई उदाहरण दिए और अपने अनुभवों से भी सभी प्रस्तुतिओं (वीडियो, लेख ,कमैंट्स आदि) को रोचक बनाने का प्रयास करते रहे। अत्यंत प्रसन्नता होती है जब आपके स्नेहसंचित आशीवार्द मिलते हैं, हमारी ऊर्जा कितने ही गुना multiply होकर और अधिक अच्छा कार्य करने की प्रेरणा देती है। जब आपका धन्यवाद् करने के लिए शब्द ढूंढ रहे होते हैं तो शब्द कम पड़ जाते हैं।
आज का ज्ञानप्रसाद एक वीडियो है जो आज के लेखों के साथ बिल्कुल ही मेल खा रही है। 9 मिंट की इस वीडियो में आप सबको बहुत से प्रश्नों के उत्तर मिलने की सम्भावना है।
https://www.youtube.com/watch?v=ry2fPHwCmwI
वीडियो तो आप और भी देखते हैं,अन्य सोशल मीडिया साइट्स से भी आती होंगी, कई आपके दिल को छू भी जाती होंगी लेकिन आपकी भावनाएं हम सभी तक तो नहीं पहुंच पातीं। इस वीडियो को देखना बिल्कुल एक लेख की भांति assignment ही है, बिल्कुल उसी प्रकार के कमैंट्स की आशा रख रहे हैं जैसे कि लेखों में आते हैं। आपके कार्य को सरल बनाने के लिए हमने वीडियो का text part भी शामिल किया है। वीडियो को देखते-देखते लिखने का प्रयास किया है। कार्य तो कठिन था ही लेकिन जब तक अपने सहकर्मियों तक पूरा सन्देश न जा पाए हमें चैन नहीं आता। रेणु श्रीवास्तव बहिन जी ने लेख लिखने के लिए हमारे 6-7 घंटे के प्रयास को सराहते हुए अपने बारे में भी लिखा है जहाँ हमें लेख पढ़ने और एक कमेंट लिखने में 2-3 घण्टे लग जाते हैं तो अवश्य ही यह कठिन कार्य है। इसी कमेंट को ध्यान में रखते हुए आज का ज्ञानप्रसाद केवल वीडियो ही है, लेख नहीं है। सभी सहकर्मियों के समय और श्रम का हमें पूरी तरह से ध्यान है।
कल वाला ज्ञानप्रसाद आदरणीय डॉ चिन्मय जी का ऑडियो सन्देश है। यह ऑडियो सन्देश चिन्मय जी ने 20 जुलाई को कनाडा आने से पहले दुबई में दिया था। एयरपोर्ट पर जब हमने चिन्मय जी के स्वास्थ्य के बारे में पूछते हुए कहा था कि आप कमज़ोर लग रहे हैं तो उन्होंने बताया था कि 14 घंटे दुबई में व्यस्तता के कारण ऐसा है। यह ऑडियो हम वीडियो का तरह अपने चैनल पर अपलोड करेंगें ।
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आज की वीडियो का text पार्ट :
स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं एक बार हम हिमालय में यात्रा कर रहे थे धीरे-धीरे रास्तों की चढ़ाई बढ़ती जा रही थी हमको भी 90 किलोमीटर और चल कर जाना था लंबे रास्ते को देखकर एक साधु कहता है कि मैं अब और नहीं चल सकता लगता है मेरा सीना फट जाएगा। स्वामी जी ने उस साधु से कहा अपने पैरों को देखो इन पैरों के नीचे जो रास्ता चलकर जाता है तुम उस पर चलकर आए हो अपने पैरों के नीचे देखो जिस रास्ते पर चलकर तुम आए हो आगे भी यही रास्ता जाता है अपने पर भरोसा रखो एक एक कदम नापो और देखो यह रास्ता और इसकी कठिनाई हमेशा आपके पैरों के नीचे ही रहेगी।
दोस्तों हममें से कोई भी व्यक्ति शरीर और हालात से नहीं हारता हर कोई केवल अपने मन में बनाई हुई सीमाओं से हारता है। इसीलिए स्वामी जी कहते हैं चाहे जो भी मुश्किल है उसका सामना करो चाहे दुनिया आपके सामने खड़ी हो, या चाहे तारे अपनी जगह छोड़ दे आपको एक कदम भी पीछे नहीं हटना है किसी को भी डरपोक बनकर कुछ नहीं मिला इसलिए अपनी शक्ति पहचानो। इसी बात पर एक और कहानी सुनाते हैं एक बार मैं वाराणसी में था मैं एक संकरी गली से गुजर रहा था स्वामी जी कहते हैं मुझे बंदरों ने घेर लिया मैं जैसे इनसे दूर जाने की कोशिश करता वैसे ही बंदरों का झुंड मेरी और आने लगता मैंने दौड़ना शुरू किया तो बंदरों ने भी लपक कर मुझे काटने की कोशिश की तभी एक आवाज आयी पलट कर बंदरों का सामना करो मैंने पलट कर बंदरों को घूरा तो बंदर पीछे हटने लगे और जैसे ही मैं आगे बढ़ा तो बंदरों ने रास्ता छोड़ दिया। स्वामी जी कहते हैं जो भी तुम्हारे डर हैं जो भी तुम्हारी कठिनाइयां है उनका सामना पूरी दिलेरी से करो क्योंकि जब तुम डर का सामना करते हो तो तुम्हें पता चलता है कि तुम डर से कितने बड़े हो।
दोस्तों जिन्होंने भी अपने जीवन में कुछ बड़ा हासिल किया है सभी ने कमियों और कठिनाइयों का सामना किया है चाहे वह कठिनाई कितनी भी बड़ी या छोटी हो, कोई भी पीठ दिखाकर या चादर ओढ़ कर सफल नहीं हुआ आपने भी देखा होगा कि जब आप भागना छोड़कर प्रोबलम का सॉल्यूशन निकालते हो और उन पर काम करते हो तो आपके डर बादल की तरह हो जाते हैं क्योंकि हमारे डर और चिंता हमारी कल्पना शक्ति के बिना जीवित नहीं रह सकते।
स्वामी जी ने 1893 से 1901 के बीच सौ से ज्यादा लेक्चर दिए एक बार अपने लेक्चर में स्वामी जी कई युवाओं को आत्म बल और आत्म शक्ति का संदेश दे रहे थे एक लेक्चर में स्वामी जी कहते हैं कि मैंने आज तक उपनिषद के बाहर कुछ भी नहीं कहा और उपनिषदों में केवल आत्मबल की बात कही गई है हर कमी हर परेशानी से निपटने के लिए हमें बल चाहिए शारीरिक बल, मानसिक बल और आत्मिक बल।
तो हमें क्या करना चाहिए:
स्वामी जी एक लेक्चर में कहते हैं – क्या आपको पता है कितनी ऊर्जा कितनी शक्ति आपके अंदर छिपी पड़ी है वैज्ञानिक इंसान के बारे में बहुत ही कम जान सके हैं इंसानों को सालों हुए इस धरती पर आए लेकिन अभी तक हमने अपनी शक्ति का बहुत छोटा रूप ही देखा है इसीलिए कभी भी अपने आप को कम मत समझना क्योंकि तुम्हारे भीतर असीम शक्ति और आनंद का महासागर है।
आखिर कैसे पाई जाए वह शक्ति से जिसकी स्वामी जी बात कर रहे हैं:
मन को शांत रखो – और ध्यान को एकाग्र करना सीखो स्वामी जी कहते हैं कि जब आपका मन आपके नियंत्रण में रहता है तो पूरा शरीर अपने आप कंट्रोल में आ जाता है आप इस शरीररूपी मन को अपनी इच्छा का गुलाम बना लेते हो, आपके विचार ही एनर्जी और एक्शन पैदा करते हैं इसलिए सफल जीवन में विचार अहम भूमिका निभाते हैं।
स्वामी जी कहते हैं कि अगर आपको लगता है कि न्यूक्लियर एनर्जी बहुत शक्तिशाली है यानी मैटर में बहुत ऊर्जा छिपी है तो आप यह जानते ही नहीं की आपके विचारों में पूरी सृष्टि की शक्ति छिपी है। स्वामी जी कहते हैं कि जो भी तत्व यानी एलिमेंट जितना सूक्ष्म होता है वह उतना ही शक्तिशाली होता है एकाग्र विचारों की मौनशक्ति में सबसे ज्यादा बल होता है इसीलिए जिस इंसान का मन एकाग्र और मौन रहता है वह बड़ी आसानी से स्थितियों को प्रभावित कर लेता है।
दोस्तों आज तक आप को सबसे ज्यादा साहस किसने प्रदान किया इस पर ध्यान देंगे तो पाएंगे कि आपके खुद के संकल्प ने खुद के डिसीजन ने जब इंसान खुद की ताकत भूलता है तो कमजोर महसूस करता है।
मन को एकाग्र करने का क्या तरीका है?
स्वामी जी एक लेक्चर में कहते हैं कि अपने आप को सर्वोच्च आदर्श से भर दो, जो भी करना चाहते हो उस पर अच्छी तरह विचार करो जब आप ऐसा करते हो तो आपकी सोच और बुद्धि अपने आप प्रखर होती है जिस कारण आपके एक्शन अपने आप सशक्त होते हैं। दोस्तों स्वामी जी कहना चाहते हैं कि अगर आपका purpose नाम और पैसा कमाना है तो इसे और बड़ा कर लो इसमें इंसान और विश्व की सेवा जोड़ लो और देखो कि इसमें अच्छा काम करके अच्छा करियर बनाकर अपने परिवार समाज और देश में कितने लोगों की मदद कर सकते हो।
ऐसे उद्देश्य से आपकी फीलिंग चेंज होती है आप विस्तार की भावना महसूस करते हो और इसी भावना से आपकी एनर्जी बदलती है आप नए तरीके से सोचते हैं और आपके विचार खुद परेशानी को पार कर जाते हैं इसीलिए आपका मन आपके intention और purpose की शक्ति से ट्रांसफॉर्म हो जाता है कुछ बड़ा करने की भावना हम सब अपने जीवन में कभी ना कभी महसूस जरूर करते हैं लेकिन इसे लंबे समय तक बनाए नहीं रख पाते इसीलिए बड़े उद्देश्य के साथ आपको चाहिए Constant practice.
स्वामी जी कहते हैं कि कोई भी डरपोक तोते की तरह बातें कर सकता है लेकिन संकल्प शक्ति वाला ही विचारों को एक्शन में बदल सकता है। हमेशा अपने विचारों को लक्ष्य और उसके कार्य पर बनाए रखो हम लोग लगातार कोशिश करने से, अभ्यास करने से मानसिक बल प्राप्त करते हैं लगातार कोशिश करने और सचेत रहने से ही आंतरिक शक्ति प्रकट होती है।
मद्रास में दिए गए एक लेक्चर में स्वामी जी कहते हैं कि सफल होने के लिए आपको केवल दो चीज चाहिए असीमित आत्मविश्वास और आत्म बल। वे कहते हैं कि लोग समझते हैं कि आत्म बल की जरूरत केवल साधू सन्यासियों को होती है असल में हर शक्ति और बल का एक ही स्त्रोत है जीवन में छोटी से छोटी मुश्किल को पार करने के लिए आपको वही शक्ति चाहिए।
आप 1 मिनट रुक कर सोचो कि आपने आज तक जितनी मुश्किलों को पार किया है उसके लिए दृढ़ निश्चय आइडिया और प्रेरणा कहां से आई उसका सोर्स क्या है, उसका सोर्स है “आप खुद”
स्वामी जी कहते हैं हम ऐसे जवान बनाने चाहते हैं जो अपनी इच्छाशक्ति को एकाग्र करके अपने अंदर असीम आत्मा की शक्ति को छू सकें ऐसी शक्ति से जिसका चरित्र बनता है वह युवा निडर मेहनती आजाद हो होता है स्वामी जी कहते हैं कि इस जीवन में जो भी प्राप्त होता है उसके पीछे महान तैयारी छुपी होती है।
हम जिस कर्मभूमि में है उसमें कुछ गलतियों की धूल भी उठेगी हम सब से जीवन में कुछ गलतियां होती है उन्हें सही और गलत के बोझ में मत दबाओ बल्कि उन्हें धन्यवाद दो क्योंकि वह तुम्हें अपने लक्ष्य की ओर ले जाती हैं।
कर्म महान है लेकिन वह खुद एक महान सोच और एक महान बिलीफ सिस्टम से आते हैं जो दिमाग महान विचार नहीं सोच सकता वो ओरिजिनल विचार भी नहीं सोच सकता, ऐसे दिमाग ने क्रिएटिविटी की शक्ति खो दी है इसीलिए अपने दिमाग को महान विचारों और आइडियाज से भरो, दिन-रात इनको दोहराओ और अपने सामने रखो और सतत कर्म करो इन सभी प्रक्रिया से बेहतरीन रिजल्ट सामने आएंगे।
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आज की 24 आहुति संकल्प सूची :
(1)संध्या कुमार-24,(2)अरुण वर्मा-30,(3)सरविन्द कुमार-25,(4)प्रेरणा कुमारी-28,(5) निशा भारद्वाज-24
इस सूची के अनुसार अरुण जी गोल्ड मैडल विजेता हैं, सामूहिक शक्ति को नमन एवं सामूहिक बधाई। सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिनको हम हृदय से नमन करते हैं, आभार व्यक्त करते हैं और जीवनपर्यन्त ऋणी रहेंगें। धन्यवाद