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अपने सहकर्मियों की कलम से -30 जुलाई 2022 

अपने सहकर्मियों की कलम से -30 जुलाई 2022 

एक बार फिर हम आपके लिए वह सेगमेंट लेकर आये हैं जो हम सबका बहुत ही लोकप्रिय है।  इस सेगमेंट की लोकप्रियता दिनोदिन बढ़ती जा रही है। इस बढ़ोतरी के कई कारण हैं लेकिन हमारी समझ में सबसे बड़ा कारण  “समर्पित सहकर्मियों की श्रद्धापूर्ण सहकारिता” है।  यही driving force है जो हम सबको एक सूत्र में बांधे हुए है। परम पूज्य गुरुदेव के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए हम सब  उनकी शिक्षा का पालन कर रहे हैं। गुरुदेव ने बार-बार कहा है कि हमारा  अकेले का कुछ  भी अस्तित्व नहीं है। हम सब एक दूसरे के साथ बंधे हुए हैं और आपकी श्रद्धा ही इस विशाल गायत्री  परिवार को विश्व्यापी बनाये हुए है।  पिछले कुछ दिन जब हम व्यस्त थे तो जैसे-जैसे सभी ने ऑनलाइन ज्ञानरथ के संचालन में योगदान दिया बहुत ही सराहनीय है। ह्रदय से तो यही आवाज़ उठ रही है कि सभी का एक-एक करके नाम लिया जाए, लेकिन शायद यह सम्भव नहीं हो पायेगा।  1957 की बहुचर्चित बॉलीवुड मूवी “नया दौर” का सुपरहिट गीत “साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थक जाये तो मिल कर हाथ बढ़ाना” सहकारिता का सन्देश देते हुए ऑनलाइन ज्ञानरथ में सदैव प्रतक्ष्य देखने में मिलता है। सभी का धन्यवाद्। 

आज के इस सेगमेंट को  जब हम लिखने बैठे तो रह रह कर पिछले सप्ताह की गतिविधियां ही सामने आ रही थीं।चिन्मय जी का कनाडा का संक्षिप्त टूर, शांतिवन आश्रम के दृश्य,  Renison University College में चिन्मय जी का लेक्चर, MOU sign करना, अलग-अलग ग्रुप्स को सम्बोधन करना, हमारे अथक प्रयास के बावजूद चिन्मय जी का  इंटरव्यू संभव न हो पाना   इत्यादि ,इत्यादि।  आने वाले दिनों में यह सभी बातें एक-एक करके आपके समक्ष प्रस्तुत करते रहेंगें। हम सबको अवश्य ही मार्गदर्शन मिलेगा। 

1. क्या समस्या हुई चिन्मय जी का इंटरव्यू में  :

आदरणीय चिन्मय जी 20 जुलाई को यहाँ आये और 27 जुलाई को वापिस चले गए। उनकी व्यस्तता को शब्दों में वर्णन करना लगभग असंभव ही है। आते  ही हमने उन्हें निवेदन कर दिया था कि ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के लिए मार्गदर्शन करता एक इंटरव्यू रिकॉर्ड किया जाए। उन्होंने हमारे लिए समय फिक्स भी कर लिया था और राकेश जी को हमारे  साथ  coordinate करने के लिए मैसेज भी कर दिया था, लेकिन शांतिवन आश्रम का भूमि पूजन और 108 कुंडीय यज्ञ  के आयोजन ने उन्हें इतना व्यस्त कर दिया था कि उन्हें समय ही नहीं मिला। आयोजन था  ही इतना विशाल और भव्य था कि mind से  slip होना कोई बड़ी बात नहीं थी।

फिर उसी दिन शाम को एक और आयोजन था और चिन्मय जी ने वहां पर बुलाया लेकिन एक दी दिन में 900 किलोमीटर ड्राइव करने के कारण हमें इंकार करना पड़ा । अगले दिन चिन्मय जी कॉलेज में लेक्चर के लिए आये थे ,फिर बात हुई कि हम 27 को वापिस इंडिया जा रहे हैं और आप हमारे साथ गाड़ी में आ जाएँ और हम गाड़ी  में ही रिकॉर्ड  कर लेंगें, वैसे तो quality के कारण संभव नहीं था लेकिन फिर भी  हमने मान लिया।  लेक्चर के बाद घर पहुंचे तो राकेश जी का फ़ोन  आया कि आप देवांग जी के घर 1:00 बजे दोपहर आ जाएँ और चिन्मय जी की रात आठ बजे फ्लाइट है और हम सभी उनकी विदाई भी कर देंगें। हमें बड़ी प्रसन्नता हुई ,हमने tripod वगैरह सेट करना आरम्भ कर दिया और नीरा जी ने खीर बनानी (सभी के लिए ) आरंभ कर दी ,लेकिन जब सब कुछ तैयार था तो राकेश जी का फिर से फ़ोन आ गया कि प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ेगा क्योंकि जिनके घर प्रोग्राम था उनके सभी परिवारजनों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। राकेश जी ने हमें कहा की आप भी वरिष्ठ हैं  तो अगर एयरपोर्ट आते हैं तो टेस्ट करके ही आएं।  सारी स्थिति का मूल्याङ्कन करने पर हमने यही निर्णय लिया कि ऑनलाइन ज्ञानरथ के लिए समर्पण और श्रद्धा एक तरफ और सभी का स्वास्थ्य एक तरफ।  हमें अपनी  ही ओर  से बड़े ही दुःखी ह्रदय के साथ प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ा।  हम केवल उन्हें BEST OF LUCK, SAFE JOURNEY ही भेज सके। उन्होंने  अगला विकल्प  शांतिकुंज से ज़ूम इंटरव्यू ही बताया है ,देखें कब संभव हो पाता है।  

2.ऑनलाइन ज्ञानरथ के प्रति हमारे बेटे आशीष का viewpoint :

वैसे तो हम ऑनलाइन ज्ञानरथ प्लेटफॉर्म पर अपनी व्यक्तिगत बातें करने में संकोच ही करते हैं लेकिन बेटे आशीष की इस बात से शायद हमारी युवा पीढ़ी को कुछ मार्गदर्शन मिल सके ,इसलिए आज लिखने का  विचार हो आया। 

बेटे आशीष की आयु 35 वर्ष है , बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजीनियर है ,उसकी पत्नी भी जापान की कंपनी  में उच्च पद पर कार्यरत है।  पिछले कई वर्षों से आशीष हमारे  साथ गायत्री परिवार के कार्यकर्मों में जा रहा है , हालाँकि उसका मुंडन संस्कार शांतिकुंज में ही हुआ था लेकिन वह मुंडन के बाद शांतिकुंज कभी नहीं गया।  शायद परम पूज्य गुरुदेव ही उसे गायत्री परिवार से जोड़े हुए हैं।  रूद्र अभिषेक ,गुरुपूर्णिमा ,श्राद्ध तर्पण जैसे कार्यक्रमों में आशीष जा तो  रहा है लेकिन उसकी श्रद्धा का मूल्यांकन करने का  कभी भी अवसर नहीं मिला। 

इस बार शांतिवन आश्रम के दिव्य पर्व पर कुछ देखने को मिला।  कई दिन पहले से घर में इस विषय पर बात होनी आरम्भ हो गयी थी। पति -पत्नी दोनों काम करते हैं ,छुट्टी की भी समस्या थी ,चाहे यह आयोजन रविवार को था लेकिन फिर भी पक्का कहना कठिन था। 

हम दोनों का तो पक्का ही था।  ज्यों ज्यों दिन करीब आते  गए, हमारी जिज्ञासा बढ़ती गयी। शनिवार को उसके किसी मित्र के घर कोई पार्टी थी और दोनी पति पत्नी ने जाना था। उन्होंने हमें बताया  कि वह  दोनों  पार्टी पर जायेंगें और रात वहीँ पर रहेंगें, हम  अगले दिन शांतिवन आश्रम  जाते हुए उन्हें ले लेंगें  क्योंकि जहाँ पार्टी थी वह  लगभग आधे रास्ते ( 200 किलोमीटर ) पर था। शुक्रवार तक यही प्रोग्राम था।  लेकिन पता नहीं गुरुवर  की कृपा  रही होगी यां मातृ-पितृ  भक्ति,  पति- पत्नी दोनों  ने ही  प्रोग्राम बदलते हुए कहा कि हम रात को वहां रहने के बजाए घर वापिस आ जायेंगें और सुबह 5 बजे घर से ही शांतिवन के लिए प्रस्थान करेंगें। प्रोग्राम के बदलाव के बारे में   हमारे पूछने  पर पता चला कि दोनों नहीं चाहते थे कि हम  इतना लम्बा ड्राइव करें और वह भी पहाड़ी क्षेत्र में ,बारिश और तूफ़ान भी फोरकास्ट हुआ था।  

ऐसी बातों को देखकर हम कैसे  गुरुवर की शक्ति पर विश्वास न करें। जब हम रोज़ पात्रता की बात कर  रहे हैं तो यह एक और उदाहरण है। हमने आशीष को कभी मंदिर जाने के लिए नहीं कहा, कभी गायत्री उपासना के लिए यां ,गायत्री मंत्र जपने के लिए, माला फेरने के लिए कहा। हैरानगी होती थी कि श्राद्ध तर्पण में हम चाहे कोई बात  मिस कर जाएँ ,लेकिन वह पूरी तरह से समझने का प्रयास करता रहा है। शायद गुरुवर उससे कुछ करवाने की पृष्ठभूमि बना रहे हों। 

तो आगे चलते है :

अब दोनों बच्चों ने हमारे साथ ही जाने का निश्चय कर लिया था। जाने से पूर्व रात को आशीष की मम्मी ने कहा, “ बेटा  राकेश  जी ने ईमेल में लिखा  था कि  सभी को भारतीय पोशाक  का पालन करना है तो तुम धोती तो पहनते नहीं हो, पैंट पहन लेना।”  उसने  shorts निक्कर पहनने का मन बनाया था क्योंकि गर्मी बहुत थी।  आशीष ने मम्मी को सीधी न कर दी। लेकिन मम्मी ने कहा कोई बात नहीं , तुम पैंट गाड़ी में रख लो ,वहां जाकर देख लेंगें ,जैसा होगा कर लेना। आशीष इस बात को मान गया।  वहां पहुँचने पर मम्मी ने कहा ,” बच्चों में से भी अधिकतर ने पेंट पहनी हुई है तो तुम भी पेंट पहन लो।” पहले तो उसने रात की भांति न कर दी लेकिन फिर बहाना बनाया कि यहाँ  कैसे चेंज करूँ। माँ बेटे का यह रोचक वार्तालाप मैं  देख रहा था।  मैंने कहा बेटे गाड़ी में ही चेंज कर लो, मुझे भी उसने यह कह कर टाल दिया कि  लोग देख रहे हैं तो मैंने कहा गाड़ी के काले शीशे हैं और बाहिर से कुछ भी दिखाई नहीं देता, तब उसने मान लिया और गाडी के अंदर ही बैठ कर  चेंज किया। 

हमारे पाठक सोच रहे होंगें कि इतना विस्तृत विवरण देने का क्या अभिप्राय है। अभिप्राय अवश्य है। जहाँ हम इस बात पर दुःखी होते रहते हैं कि बच्चे हमारा कहना नहीं मानते, हमारी सुनते नहीं है , उन्हें कुछ पता नहीं है इत्यादि ,इत्यादि, ऐसी बात नहीं है।  चिन्मय जी के लेक्चर में ही एक माँ ने अपने बेटे की शिकायत करते हुए चिन्मय जी से प्रश्न किया था कि मेरा बेटा  केवल एक ही माला करता है ,मैं चाहती हूँ और अधिक करे तो मानता नहीं ,बताएं ,मैं क्या करूँ। युवा शक्ति को channelise करना इस समय की सबसे बड़ी समस्या है और इसमें किसी एक को( केवल युवाओं को ही ) ज़िम्मेदार ठहराना कतई उचित नहीं है। हमारे ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के ही दो युवा, प्रेरणा बिटिया और संजना बेटी कई वरिष्ठों से बुद्धिमान है, उनसे कितना कुछ ही सीखने को मिल रहा है। दोनों बेटियां  कमैंट्स के माध्यम से अपने बारे में बहुत कुछ बताने में सक्षम हैं । सारा परिवार उनके ऊपर अपना  स्नेह और प्यार उड़ेल रहा है। 

परम पूज्य गुरुदेव ने मार्गदर्शन देते हुए  बार -बार माला जपने ,कर्मकांड की महत्ता और एक अच्छा मानव बनने की महत्ता पर ज़ोर दिया है। पहाड़िया जी की कथा आप सबको याद होगी जिन्हे परम पूज्य गुरुदेव ने आवाज़ लगा कर दीक्षा दी थी। वंदनीय माता जी पहली साधक थी जिन्हे गुरुदेव ने दीक्षा दी थी और पहाड़िया जी दूसरे। पहाड़िया जी ने मथुरा यज्ञ में कोई कर्मकांड किया था ,सारे दिन हैंड पंप से पानी पिलाने का ही कार्य किया था। 

यह बातें देखने में  तो बहुत  ही छोटी और साधारण सी लगती है लेकिन “असली ज्ञान” इन्ही में छिपा है। अक्सर जब हम इंडिया आते हैं तो हमें और हमारे बच्चों के देखकर कोई विश्वास ही नहीं करता कि हम इतने वर्षों से विदेश में रह रहे हैं, विदेशी सिटीज़न हैं क्योंकि इंडिया में जो Hi -fi की लहर चल रही है ,आधुनिकरण की लहर चल रही है, हमारी मातृ भूमि को तबाह करके ही छोड़ेगी।  We have to be very careful right now otherwise we will reach to a point of no return. बेहतर है कि सर्वनाश से पहले ही सुधर जाएँ। इसका कहने का अर्थ कतई नहीं लेना चाहिए कि इंडिया में कुछ भी ठीक नहीं है।  बहुत सी बातों पर सदैव नतमस्तक होते रहेंगें।   

इन्ही शब्दों के साथ इस सप्ताह के  लोकप्रिय सेगमेंट का समापन करते हैं  और आप चित्रों के माध्यम से शांतिवन आश्रम के  दिव्य वातावरण को अन्तःकरण में उतारें। सूर्य की प्रथम किरण आपके जीवन को ऊर्जावान बनाये जिससे आप गुरुकार्य में और भी शक्ति उढ़ेल सकें।

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29  जुलाई के वीडियो ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करने उपरांत की 24 आहुति संकल्प सूची निम्नलिखित है :

(1)अरुण कुमार वर्मा -43 , (2 )सरविन्द कुमार-31  ,(3)संजना कुमारी-30  ,(4 )संध्या कुमार-37 ,(5 )  रेणू श्रीवास्तव-31 ,(6 )प्रेरणा कुमारी-28  

सूची के अनुसार अरुण जी, गोल्ड मैडल विजेता हैं। सभी को नमन करते हैं। धन्यवाद् ,जय गुरुदेव


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