Life can be difficult with bad health. Learn how to stay healthy today

भगवान् से साथ सम्बन्ध जोड़ने की सरल सी प्रक्रिया। 

28 जुलाई 2022 का ज्ञानप्रसाद -भगवान् से साथ सम्बन्ध जोड़ने की सरल सी प्रक्रिया। 

कल वाले लेख की ही तरह आज का लेख भी बहुत ही सरल है, जाना पहचाना है लेकिन निवेदन फिर वही -अंत तक पढ़ें, कमेंट के द्वारा चर्चा करें और औरों को समझाएं। शुक्रवार और शनिवार बहुत ही  रोचक होने वाले हैं। Please stay tuned.

तो आइये करें ज्ञानप्रसाद का अमृतपान।

******************  

परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि हमने आपको यहाँ  स्वच्छ मन, स्वस्थ-निरोग शरीर बनाने के लिए  बुलाया गया है, ताकि आप भगवान से जुड़ सकें। आपको हम गायत्री महापुरश्चरण करा रहे हैं। हमें प्रसन्नता है कि आप बहुत प्रात:काल ही उठकर पूजा, ध्यान, जप, प्राणायाम में लग जाते हैं। यह सब देखकर हमें खुशी होती है। अगर आप इन करने वाले कर्मकांडों से कुछ प्रेरणा ले सकें तथा अपनी पात्रता का विकास कर सकें, तो आप यकीन रखें कि आपका विवाह भगवान से हो जाएगा तथा आप जिन ऋद्धियों ,सिद्धिओं के लिए ,वैभव के लिए ,प्रतिभा के लिए दिन रात परेशान रहते हैं आपके पास  स्वत: ही आ जायेंगीं। परम पूज्य एक लड़की के रिश्ते की बात बताते हैं। किसी लड़की का रिश्ता तय हो गया  उसकी गोद में लड़के वालों ने नारियल भी दे दिया लेकिन बाद में किसी कारणवश लड़के वालों ने विवाह करने से इंकार कर दिया  दे दिया। लड़की को यह बात बहुत ही बुरी लगी लेकिन केवल बुरी लगने से तो कुछ भी हासिल नहीं होने वाला था। माता पिता का टूटा हुआ ,दुःखित हृदय लड़की ने देखा, उससे यह सहन नहीं हुआ ,उसने कमर कसी और लाठी लेकर लड़के के  गाँव में पहँच गई। गांव में पहुंच कर लड़की ने लड़के तो ललकारते हुए कहा कि विवाह कर,नहीं तो लाठी के सामने आ जा। सारा गांव लड़के की तरफ था, पुरुष प्रधान समाज जो ठहरा। लड़की टस से मस न हुई और अपनी बात पर,ज़िद पर कायम रही – कह रही थी “विवाह कर नहीं तो लाठी के सामने आ।” हालात इतने गंभीर हो गए कि मामला पंचायत तक पहुँचा। पंचायत में पहुँच कर लड़की ने सभी के समक्ष सारी  बात बता दी।  लड़की ने कहा कि लड़के ने  ही शादी पक्की की, माता पिता के साथ हमारे घर आया था और नारियल भी दिया था  और अब इंकार  कर रहा है। पंचों ने लड़की की बात को बड़े ध्यान से सुना, पंचायत में चर्चा की। गहन चर्चा के उपरांत पंचायत ने फैसला किया कि  लड़के को इसी लड़की से  विवाह करना होगा। अगर लड़का विवाह नहीं करता है तो लड़की के साथ घोर विश्वासघात होगा जिसे सहन करना उसके लिए संभव न होगा। 

गुरुदेव ने भी हमारा  विवाह भगवान से कराने का निश्चय किया है। उस लड़की की तरह अगर  हमने भी दृढ़ निश्चय कर लिया है  और  अपनी पात्रता  विकसित कर ली है तो भगवत प्राप्ति में कोई  भी अड़चन आने की सम्भावना नहीं है। हमारी सब  परेशानियों, समस्याओं का निवारण हो जायेगा। भगवान के पास सम्पदाओं का अम्भार लगा हुआ है। वह सम्पदाएँ जिनके लिए आप/ हम सारा दिन-रात मंदिरों में नाक रगड़ते नहीं थकते, चढ़ावे चढ़ाते हैं, भगवान्  की खुशामद करते रहते हैं,उलाहने देते हैं,धमकियाँ भी देते हैं (अगर तूने मेरे बेटे को IAS अफसर नहीं बनाया तो मैं इस मंदिर सीढ़ियों पर जान दे दूँगी). भगवान् बेचारे डर भी जाते हैं, कभी  कभार माँ की धमकी सुन भी लेते हैं ( माँ जो ठहरी) लेकिन शायद इसमें पूर्वजन्म के संचित कर्मों का फल य बेटे की योग्यता (पात्रता ) का बड़ा हाथ होता है। डरने की बात तो ऐसे ही की है।  समर्पण,निष्ठां ,श्रद्धा ,विश्वास आदि कौन सा factor काम कर जाता है यह सब वही जानते हैं जिनके साथ हमारा विवाह हो रहा है। जब हमारा विवाह ही हो गया तो सारा की सारी ज़िम्मेदारी, बिना कहे ही वह अपने ऊपर ले लेते हैं, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह एक पति अपनी पत्नी के दुःख सुख की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले लेता है। यही है समर्पण।  

आज के युग की तो बात ही  कोई और है। पहले कई-कई वर्ष डेटिंग, फिर कई वर्ष live-in, फिर विवाह, और विवाह भी क्या, केवल खानापूर्ति,नौकरी के कारण कई वर्ष हज़ारों किलोमीटर दूर अकेले रहना, परिवार बढ़ाने की तो बात ही नहीं सोचना, आदि आदि।  आज के मानव ने अपने जीवन को इतना जटिल, complex क्यों बनाया हुआ है।  केवल झूठी शान के लिए ? अगर इस तरह का विवाह आप भगवान्  के साथ करना चाहते हैं तो परिणाम भी ऐसे ही आयेंगें ,जिन्हे हम दिन-प्रतिदिन देख रहे हैं, break-up ,divorce ,court cases ,property-settlement so on. List goes on and on .    

परम पूज्य गुरुदेव भगवान् के साथ हमारा इस प्रकार का विवाह नहीं कराना चाहते। वह ऐसा विवाह करवाना चाहते हैं जिसमें कोई घाटा नहीं है, केवल लाभ ही लाभ है।  हमारे पाठकों ने वह वीडियो भी देखि होगी जिसमें  गुरुदेव इस बात पर ज़ोर से बार-बार कह रहे हैं, यह घाटे का सौदा नहीं है लेकिन गुरुदेव एक बात और भी कहते हैं और वह है समर्पण की, निभाने की। समर्पण वाली बात तो जीवन के हर पहलु में विदित है। पति-पत्नी के समर्पण की  बात की है लेकिन business deal में भी जब लिखा-पढ़ी होती है तो terms लिखी जाती हैं और दोनों पार्टियां committed होती हैं, दोनों पर यह शर्तें binding होती हैं। सौदा तभी सफल होता है जब तक सच्चा होता है। इसीलिए इसे “सच्चा सौदा” का नाम दिया गया है।  परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि अगर आप इस सच्चे सौदे को निभाएंगें तो   हमें बहुत  प्रसन्नता होगी। 

सच्चे सौदे वाली गुरुनानक देव जी की दिव्य कथा को कौन नहीं जानता।  गुरुनानक देव जी के पिता  ने गुस्से में आकर उन्हें 20 रूपए दिए और कहा जा जाकर व्यापार कर और अपने पैरों पर खड़ा हो।  गुरुनानक देव तो संत थे, उन्होंने बीस रुपये की हींग खरीदी और वहाँ आए जहाँ पर संतों का एक भंडारा चल रहा था। उस समय दाल बन रही थी,उन्होंने उस दाल में  हींग का छोंक लगा दिया। लंगर में  सभी के आगे दाल परोसी गयी और सबने बड़े ही प्रेम से भोजन किया तथा प्रसन्न हुए। अगले दिन प्रात:काल जब गुरुनानक घर पहुँचे, तो उनके पिता काफी गुस्से में  थे। उन्होंने पूछा कि मैंने जो  20 रूपए दिए थे उसका क्या किया ? गुरुनानक ने पिताजी को सारी बात बता दी और कहा कि पिताजी हमने ऐसा व्यापार किया है, जो भविष्य में हज़ार गुना होकर वापस आएगा। गुरुनानक देव जी की  कही बात शत प्रतिशत साबित हुई, जो हम सब प्रतक्ष्य देख रहे हैं। अमृतसर स्थित  स्वर्णमंदिर  करोड़ों-अरबों रुपए  का है। मित्रो, यह है भगवान् के साथ व्यापार करने का लाभ। गुरुदेव कहते हैं ऐसा कौन सा मंदिर है, करोड़ों-अरबों का मंदिर जिसमें गुरुनानक सोये हुए हैं। मित्रो, यह महत्त्व है भगवान के साथ जुड़ने का, उससे संबंध बनाने  का, रिश्ता बनाने का। एक और कहानी श्रीनगर (जम्मू कश्मीर) से सम्बंधित है। श्रीनगर स्थित हज़रतबल मस्जिद पवित्रता का प्रतीक है और कहा जाता है कि यहाँ पैगम्बर  मोहम्मद  साहब के पवित्र बाल रखे हुए हैं। हज़ारों-करोड़ों रुपयों से बनी इस मस्जिद में भी भगवान् का ही हाथ है। आज अगर  गुरुनानक देव जी यां  मोहम्मद साहब आ जाएँ तो इतने भव्य, मूल्यवान निवास  देख कर आश्चर्यचकित तो अवश्य ही  होंगें। 

मित्रो, यह होता है आध्यात्मिकता का मूल्य। किसी और की बात ही क्यों करें ? अपने गुरुदेव को ही देख लें। जन्मभूमि आंवलखेड़ा स्थित गायत्री शक्तिपीठ,जन्मस्थली स्मारक, तपोभूमि मथुरा, युगतीर्थ शांतिकुंज आदि के विस्तार का ही लेखा जोखा करें तो कई अरब- खरब रुपए  हो जाएँ। यह तो केवल तीन जगहों की ही बात की है ,सारे विश्व में फैले गायत्री परिवार की बात करें तो exponential growth की बात ही आती है। केवल तीन वर्ष पूर्व आरम्भ हुए शांतिवन आश्रम की बात देखें तो विश्वास ही नहीं होता, हो भी नहीं सकता क्योंकि भगवान् के कार्य आश्चर्यजनक,अविश्वसनीय किन्तु सत्य होते हैं। आवश्यकता है तो केवल विश्वास की और वह भी अटूट विश्वास की। इस सारे  विस्तार के पीछे जिस शक्ति की, जिस व्यक्तित्व की बात करते हैं उन्होंने सारा जीवन एक फकीर की भांति, एक दरवेश की भांति व्यतीत किया।        

भगवान से संबंध बनाने के बाद मनुष्य  कितना मूल्यवान हो जाता है,यह विचार करने का विषय है। गुरुनानक, विवेकानंद, मोहम्मद साहब सब  महान हो गए, सब ,मूल्यवान हो गए।

हमने कुछ दिन पूर्व अपने लेखों में अमीर एवं बड़े मनुष्य के साथ विवाह होने की बात की थी। आज फिर से कर रहे हैं।  

अगर किसी स्त्री  का विवाह सेठ  के साथ होता  है तो  वह आते ही  सेठानी बन जाती है। सेठ की सम्पूर्ण सम्पति की मालकिन बन जाती है। डॉक्टर की पत्नी डॉक्टरनी, वकील की पत्नी वकीलनी, पंडित की पत्नी पंडितानी बन जाती है, चाहे वह पाँचवीं क्लास ही क्यों न पास हो। ऐसा होता है भक्त और भगवान का रिश्ता।  जिस प्रकार धर्मपत्नी बनकर आत्मा से संबंध जुड़ते ही स्त्री पति की सारी संपत्ति की मालकिन बन जाती है, उसी प्रकार भगवान से संबंध जुड़ते ही आप भगवान् की सारी सम्पदाओं के मालिक बन जाते हैं। 

गुरुदेव कहते हैं कि हमने  आपको यहाँ इसलिए बुलाया है कि आपका विवाह  भगवान से करा दें। इसके लिए हमने आपसे  अनुष्ठान प्रारंभ कराया है। यह अनुष्ठान आपके विवाह के समय हल्दी लगाने तथा बाल सँवारने, वस्त्र आदि से सजाने के बराबर है। हम आपकी आत्मा का परमात्मा से मिलन कराना चाहते हैं।हम आपका संबंध भगवान से कराना चाहते हैं, ताकि आपका संबंध मालदार से हो जाए, ऐसा  मालदार जिसके पास सब कुछ उपलब्ध है। मालदार से संबंध बना लेने से मनुष्य  को हर समय लाभ  ही लाभ  रहता है। भगवान के यहाँ अनंत वैभव, कृपा, अनुदान भरा पड़ा है। वह केवल ऐसे मनुष्य  को मिलता है, जिसकी पात्रता है। भगवान आते हैं, तो मनुष्य के सोचने का, विचार करने का, कार्य करने का ढंग बदल जाता है। उसकी वाणी  बदल जाती है। सारे लोगों के प्रति श्रद्धा-निष्ठा हो जाती है, सभी  को प्यार देता है, दूसरों के दुःखों को देखकर द्रवित होता है। भगवान की खुशामद करने से कोई काम नहीं चलेगा। पात्रता ही महान तत्त्व है। जिसमें पात्रता होती है, qualification होती है ,eligibility होती है, employer भी उसे घर बुलाने आ जाता है। दादा गुरु, गुरुदेव के employer भी तो घर पर ही आकर उन्हें job देकर गए थे ,एक ऐसा job जो जीवनभर का  था और  जिसमें दिनोदिन प्रमोशन ही होती गयी।     

मित्रो! प्रतिभाओं की माँग, योग्यता की माँग, गुणों की माँग हर जगह होती है। गुरुदेव  चाहते हैं कि हमारे अंदर भी वे प्रतिभाएं आ जाएँ, भगवान आ जाएँ और हमारा  विकास हो जाए। इसीलिए गुरुदेव ने हमारा विवाह  भगवान से कराने का निश्चय किया है, परंतु मित्रो, अगर कन्या अस्वस्थ हो, बीमार हो,कमज़ोर  हो, तो उसका विवाह अच्छे लड़के के साथ कैसे हो सकता है। उसी तरह अगर आपकी पात्रता कमजोर हो, तो आपको भगवान कैसे अपनाएंगें,  कैसे स्नेह, प्यार देंगें ? अगर राजकुमार से विवाह करना हो, तो लड़की भी तो अच्छे परिवार की  होनी चाहिए। भगवान्  के साथ विवाह करने के लिए हमें स्वस्थ, निरोग- शरीर एवं  स्वच्छ पवित्र मन की आवश्यकता है। 

इन्ही शब्दों के साथ अपनी लेखनी को आज के लिए विराम देते हैं और आप देखिये 24 आहुति संकल्प सूची। हर बार की तरह आज का लेख भी बहुत ध्यान से तैयार किया गया है, फिर भी अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा प्रार्थी है। सूर्य की प्रथम किरण आपके जीवन को ऊर्जावान बनाये जिससे आप गुरुकार्य में और भी शक्ति उढ़ेल सकें।

24 आहुति संकल्प सूची:

(1)सरविन्द कुमार (24), (2)संजना कुमारी-26 ,(3)संध्या कुमार-24 

हमारे विचार में सभी ही  गोल्ड मैडल विजेता हैं। जय गुरुदेव


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s



%d bloggers like this: