Life can be difficult with bad health. Learn how to stay healthy today

अपने सहकर्मियों की कलम से – 23 जुलाई 2022 -डाक्टर चिन्मय पंड्या जी का कनाडा टूर

ऑनलाइन ज्ञानरथ का सबसे लोकप्रिय सेक्शन “अपने सहकर्मियों की कलम से” लेकर हम आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। सप्ताह के अंत में शनिवार को प्रस्तुत किया जाने वाला यह एक ऐसा सेक्शन है जिसमें ऑनलाइन ज्ञानरथ के सहकर्मी अपनी activities, विचार,उपलब्धियां, शुभ समाचार या फिर कोई भी बात जो गायत्री परिवार से सम्बंधित होती है, प्रकाशित की जाती हैं। इस सेक्शन की लोकप्रियता का अनुमान अपने परिजंनों द्वारा भेजा गया कंटेंट होता है जो कई बार इतना अधिक हो जाता है कि हम अगले सप्ताह के लिए शिफ्ट करने पर विवश हो जाते हैं। लेकिन एक बात हम सभी को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि प्रत्येक सहकर्मी का कंटेंट बड़े ही सम्मान के साथ संभाल कर रखा जाता है और समय आने पर प्रकाशित किया जाता है। हाँ, कई बार लोकप्रियता और महत्ता के आधार पर कंटेंट का प्रकाशन आगे पीछे हो जाता है। यही कारण है कि आज सबसे महत्वपूर्ण कंटेंट आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी का कनाडा का संक्षिप्त प्रवास ही है।

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1.जहाँ तक हमारी समरण शक्ति काम करती है 2017 के बाद डॉक्टर साहिब तीसरी बार कनाडा में आए हैं। 2017 में Kingston में और 2019 में लंदन में आये थे। यह लंदन कनाडा का एक नगर है, जो UK वाले लंदन से अलग है। अब 2022 में भी इसी क्षेत्र में आये हैं। 2017 में तो श्रद्धेय डॉक्टर प्रणव पंड्या जी भी आये थे। कनाडा में गायत्री परिवार का विस्तार USA जितना व्यापक तो नहीं है लेकिन दक्षिण एशियाई जनसंख्या के हिसाब से कम भी नहीं है। एक बात और वर्णन योग्य है कि शांतिकुंज से ऋषियों की टोली एक बार कनाडा और एक बार अमेरिका आती है। पड़ोसी देश होने के कारण, दूरी के बावजूद अधिकतर लोगों को हर वर्ष ही शांतिकुंज की ऋषि आत्माओं का दिव्य सानिध्य पाने का सौभाग्य प्राप्त हो ही जाता है।

जैसा कि हम अपने सहकर्मियों के साथ पहले ही शेयर कर चुके हैं की आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी emirates की फ्लाइट से 20 जुलाई, 2022 को टोरंटो एयरपोर्ट पर प्रातः लगभग 10:00 बजे लैंड किये थे। हमारे घर से एयरपोर्ट लगभग 100 किलोमीटर दूर है, एक्सप्रेसवे होने के बावजूद एक घंटा लग ही गया था। इंटरनेशनल फ्लाइट में इमीग्रेशन और baggage लेने में एक घंटा तो लग ही जाता है लेकिन हम 10:10 पर वहां पहुंचे तो चिन्मय जी प्रस्थान करने ही वाले थे। हमारा सौभाग्य ही था कि हमें कुछ समय उनके साथ गुज़ारने को मिल गया। आदरणीय विश्व प्रकाश त्रिपाठी जी और ओमकार पाटीदार जी भी साथ ही थे। त्रिपाठी जी और पाटीदार जी पिछले कई दिनों से अमेरिका के प्रवास पर थे और एक दिन पहले ही वहां से टोरंटो आये थे। हमें जी भी समय मिला,इस थोड़े से समय में उनको welcome किया, कुछ फोटोग्राफी की और वापिस आ गए। इस समय की फोटोज हमने 21 जुलाई के ज्ञानप्रसाद में शेयर कर दी थीं और कल यानि 22 जुलाई शुक्रवार के दिन,जो हमारा वीडियो/ ऑडियो का दिन होता है इसी पर आधारित वीडियो भी अपलोड कर दी थी।इस वीडियो का लिंक यहाँ भी शेयर कर रहे हैं। https://youtu.be/8-94pb6VdUs

इस समय जो हम लिख रहे हैं इसमें कुछ रिपीट सा लग रहा होगा क्योंकि ऐसी चर्चा पहले भी हो चुकी है लेकिन यहाँ पर विवरण अधिक विस्तृत है।

20 जुलाई की शाम को चिन्मय जी ने मिल्टन और वाटरटाउन क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की और कार्यकर्ता गोष्ठी को भी सम्बोधित किया। इस गोष्ठी से सम्बंधित एक फोटो आज के इस स्पेशल सेगमेंट में शेयर कर रहे हैं। इसके बाद का कार्यक्रम जो बहुत ही महत्वपूर्ण है वह है “शांतिवन आश्रम” का भूमि पूजन। Gayatri Pariwar Western Ontario के पुरषार्थ से विकसित हो रहे इस आश्रम की भूमि पर तीन वर्ष पूर्व हमें भी जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उसके बाद अब यानि रविवार को 24 जुलाई को ही जाना संभव हो पाया है। इस समय के दौरान क्या विकास हुआ है जाकर ही पता चलेगा लेकिन GPWO के कार्यकर्ताओं से पता चलता ही रहा है। शांतिवन आश्रम पर हमने अपने चैनल पर वीडियो अपलोड की हुई है, अधिकतर लोगों ने देखि है लेकिन अगर किसी ने मिस कर दी हो तो उसके लिए फिर से लिंक दे रहे हैं।

24 जुलाई को भूमि पूजन के उपरांत 108 कुंडीय यज्ञ का आयोजन होना निश्चित हुआ है। हमने सपरिवार इस आयोजन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की है। वीडियोग्राफी की भी योजना है जिसके माध्यम से हम विश्व भर के गायत्री परिजनों को शांतिवन आश्रम से जोड़ने का प्रयास करेंगें। हमारे घर से यह आश्रम लगभग 400 किलोमीटर दूर है और उस दिन बहुत जल्दी जग कर, ड्राइव करके 10 बजे से पहले पहुँचने का प्रयास है। उसी दिन वापिस भी आना है क्योंकि वहां अभी आवास की कोई सुविधा नहीं है। 24 जुलाई को ही शाम सात बजे Mississauga स्थित Hindu Heritage Centre में डॉक्टर साहिब का एक उद्बोधन फिक्स किया गया है जिसका शीर्षक “आध्यात्मिक शक्तियों का आधार श्रद्धा” है। इस उद्बोधन का आयोजन Divine India Youth Association (DIYA) और गायत्री परिवार युगनिर्माण कनाडा द्वारा किया गया है। इस उद्बोधन में हमारी उपस्थिति संभव न हो पायेगी क्योंकि हमें long-drive के बाद घर पहुंचना होगा।

अगला कार्यक्रम 25 जुलाई को दोपहर 3 बजे Renison University College का उद्बोधन है जिसका शीर्षक “Human Excellence :Foundations of Wisdom Traditions” है। University of Waterloo के इस कॉलेज का Center for Spirituality and Wisdom Practices विभाग इस उद्बोधन का आयोजन कर रहा है। इस उद्बोधन में हमने सपरिवार अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाई है। इस लेक्चर की अंग्रेजी में summary आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

About the lecture

We, as human beings, carry a seed of greater potential within ourselves. We are born, not as slaves of the circumstances but as makers of our own destiny. Unfortunately, very few of us ever live to realize our latent possibility because it is rare to see someone manifesting it to the fullest. And contrary to it, we see other millions of people, who all, are going in the opposite direction, riding the same boat, living their lives as per their unconscious urges and because our minds convince us that so many people cannot be wrong – we follow them and our potential dies even before blossoming. We need to be rooted in our own potential to feel blissful and content in life. Life presents this opportunity to grow to everyone and those who unearth it; are able to acquire what can be called self-actualization. Interestingly, the word for self-actualization in Sanskrit; i.e. Bodh (from where Buddha also comes) actually refers to the one, who has found his home; i.e. he/ she has discovered their divine potential. This concept of acquiring our purpose in the life and translating our sacred possibilities into reality had always been the center of Vedic quest, and is called as Human Excellence – A life lived with excellence in all dimensions of personality has also been the life of a Yogi, as defined in the scriptures; i.e. Yogah Karmasu Kaushalam (Yoga is excellence of all actions). Knowing our purpose and ourselves should have been the easiest thing in the world, but somehow, it has become most difficult. As Confucius said – Life is simple but we insist on making it complicated. And in the similar manner, this talk while being founded on the pillars of ancient Vedic wisdom – uses simple terms of contemporary context so that we all could unearth our divine potentials to make earth a better place to live. This ingenuous presentation is an easy opportunity to discover how to accomplish that.

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2.ज्योति गाँधी : इस विस्तृत विवरण के साथ हम आदरणीय चिन्मय जी के प्रवास को अल्प विराम देंगें लेकिन आदरणीय ज्योति गाँधी जी का एक कमेंट आपके साथ शेयर करना चाहेंगें जो उन्होंने इन गतिविधिओं को respond करते लिखा था : ज्योति जी लिखती हैं कि “पता नहीं मुझे कब मौका मिलेगा इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेने का।” हमने रिप्लाई किया था कि “ गुरुदेव सब कुछ कर देंगें , गुरु तो सुपात्र ढूंढते हुए घर भी आ जाता है ,दादा गुरु की तरह।” इस कमेंट को यहाँ शेयर करने का उद्देश्य यही है कि हम सब देख लें कि बहिन जी के अंदर गुरुदेव के लिए कुछ करने की ज्वाला कितनी प्रचंड धधक रही है। ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के प्रत्येक सदस्य को बहुत ही सौभाग्यशाली मानना चाहिए क्योंकि ऐसा स्वर्ण अवसर बार-बार नहीं मिलता। इस पुण्य पुरषार्थ में अपना अधिक से अधिक योगदान देकर गुरुकार्य का भागीदार होना चाहिए।

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3.कुमोदिनी गौरहा : अंत में 24 आहुति संकल्प सूची तो है ही लेकिन उससे पूर्व कुमोदिनी गौरहा बहिन जी द्वारा भेजी गयी 25 जून की यह लघु कथा: जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये। .वहां पहुँचते ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी। उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी। उसने दायें देखा, तो एक शिकारी तीर का निशाना, उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी, तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी, तो नदी में जल बहुत था। मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ? क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ? वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ? हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा, शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा और शिकारी, शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया। हमारे जीवन में भी कभी-कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, जब हम चारों तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश, हार, जीत, जीवन, मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है। हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

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22 जुलाई 2022 की 24 आहुति संकल्प सूची: (1 ) संध्या कुमार- 25 , (2 ) अरुण वर्मा-26 इस सूची के अनुसार अरुण वर्मा और संध्या कुमार जी, जो ऑनलाइन ज्ञानरथ के स्टार प्रचारक हैं, दोनों ही गोल्ड मैडल विजेता हैं। दोनों को हमारी व्यक्तिगत और परिवार की सामूहिक बधाई। सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिनको हम हृदय से नमन करते हैं, आभार व्यक्त करते हैं और जीवनपर्यन्त ऋणी रहेंगें। धन्यवाद।


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