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अपने सहकर्मियों की कलम से -2 जुलाई 2022 

अपने सहकर्मियों की कलम से -2 जुलाई 2022 

एक बार फिर हम सप्ताह का वोह सेगेमेंट लेकर आए  हैं जिसकी आप  सभी को बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है।  इस सेगमेंट का नाम “अपने सहकर्मियों की कलम से” पूर्णतया self-explanatory है, एक ऐसा सेगमेंट जिसमें सारे का सारा योगदान ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के समर्पित  सदस्यों  का होता है। हमारा प्रयास केवल  इतना ही होता है कि सप्ताह भर में आ रहे कंटेंट को, आपकी गतिविधिओं को, फोटोज़ को ,वीडियोस को, कमैंट्स का अपने विवेक अनुसार  चयन करके, एडिट करके,कवर फोटोज़ लगाकर एक रोचक सी receipe के माध्यम से प्रातः मंगलवेला में इस प्रकार आपके समक्ष परोसें कि प्राप्त हुई  ऊर्जा से  आप दिनभर पूरी तरह तरोताज़ा रहें, हम इस प्रयास में कितने सफल हो रहे हैं आपके कमैंट्स हमारे रिपोर्ट कार्ड पर श्रद्धा और समर्पण की मोहर लगाए जा रहे हैं। आप सबका धन्यवाद् करने के लिए हम निशब्द हैं। 

इस सेगमेंट की लोकप्रियता का मापदंड आपके द्वारा भेजी गयी contributions हैं। जैसे हम हर बार कहते आ रहे हैं कि contributions और यूट्यूब की शब्द सीमा के साथ समन्वय बनाना हमारी विवशता है, इस बार भी  कुछ एक contributions अगले सेगमेंट के लिए बचा कर रख ली हैं। 

आज के सेगमेंट में पांच परिजनों ने योगदान दिया है।

आदरणीय राहुल आचार्य जी पिछले लगभग 2 वर्ष से हमारे साथ व्हाट्सप्प पर जुड़े हुए हैं।  कुछ दिन पूर्व हमने उन्हें मैसेज किया कि एक-दो  पैराग्राफ में अपने बारे में लिख कर भेजें, हमें तो आपके बारे में जानकारी मिलेगी ही, अन्य परिजनों को भी प्रेरणा मिलेगी। तो उन्होंने prompt मैसेज करके जो लिखा आपके समक्ष है। हम तो सभी को लिख रहे हैं, सभी से सहयोग  की आशा  रखते हैं, समर्पित परिवार जो ठहरा। पहले-पहले तो राहुल जी केवल हाथ जोड़े इमोजी ही भेजते थे लेकिन अब बहुत कुछ शेयर कर रहे हैं ,लिख रहे हैं। बहुत बहुत धन्यवाद् राहुल जी। 

कुमोदिनी गौरहा जी के बारे में कौन नहीं जानता , वह स्वयं एक अध्यापक है और जिस प्रकार उन्होंने हेडमास्टर लक्ष्मी विश्वकर्मा जी को प्रेरित किया, उन्हें रिटायरमेंट पर गुरु साहित्य दिया, हम सबके लिए  सहायक हो सकता है। अरुण वर्मा भाई साहिब और बिटिया प्रेरणा ने कई बार फ़ोन पर हमसे बात की है कि “कोई सुनता ही नहीं है, क्या करें ” हमें तो एकदम आदरणीय रेणु बहिन जी का वाक्य स्मरण हो आता है Rome wasn’t built in a day . करोड़ों का विश्व्यापी गायत्री परिवार भी तो आप  जैसों ने ही खड़ा किया है, कठिन तो है लेकिन असंभव नहीं। कुमोदिनी जी का धन्यवाद् करते हैं। 

आदरणीय रामनारायण कौरव जी भी अध्यापक हैं और उन्होंने जो संक्षिप्त सी जानकारी भेजी है उससे मैडम वर्मा जी का गुरुदेव के प्रति समर्पण प्रतक्ष्य दिखाई दे रहा है। बहुत बहुत धन्यवाद् कौरव जी 

हमारी सबकी बिटिया संजना का “घमंड किस बात का” वीडियो पर कमेंट उसकी आयु से कहीं ऊपर है। विश्वगुरु स्वामी विवेकानंद के quote की अधूरी पंक्ति को हमने पूरा करते बहुत ही प्रसन्नता हो रही है।  

“This is a great fact: strength is life; weakness is death. Strength is felicity, life eternal, immortal; weakness is constant strain and misery, weakness is death.”

Swami Vivekananda      

बहुत बहुत धन्यवाद बिटिया 

आदरणीय रेणु श्रीवास्तव बहिन जी का 408 शब्दों का ईश्वर के प्रति कमेंट बहुत ही ज्ञानवर्धक है। ईश्वर की  इसी कड़ी में आदरणीय सुमन लता बहिन जी ने एक रचना भेजी है जिसका योग्य स्थान सोमवार सुबह का ज्ञानप्रसाद ही है। लेख आरम्भ करने से पहले यह रचना आपके समक्ष प्रस्तुत की जाएगी ,आप प्रतीक्षा कीजिये। दोनों बहनों के योगदान को नमन करते हैं। 

इन्ही  शब्दों और summary के साथ अपनी लेखनी को विराम देते हैं लेकिन समापन 24 आहुति सूची से ही होगा। 

तो मिलते हैं सोमवार की मंगलवेला में ज्ञानप्रसाद पाठशाला में,आज रात को  शुभरात्रि  सन्देश भी होगा। धन्यवाद्, जय गुरुदेव  

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1.आदरणीय राहुल आचार्य जी :

मेरे घर का नाम राहुल है। पूरा नाम रवि कुमार आचार्य है। पिता जी का नाम श्री दिलीप आचार्य है। राजकीय सेवानिवृत हैं , 4 वर्ष पूर्व प्रिंसिपल के पद से  रिटायर्ड हुए है। माता जी का नाम  श्रीमती रेखा आचार्य है। वह  एक कुशल गृहणी हैं । मेरी शादी हो चुकी है, एक बेटा 3 साल का और एक बेटी 8 साल की है। पत्नी जी सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रही है । मैंने  मैकेनिकल इंजिनियरिंग में डिप्लोमा किया है। विदेश में 5 साल कार्य किया है, 4 वर्ष  तंजानिया में और 1 वर्ष   रवांडा में । हमारा कार्य पावर प्लांट ऑपरेशन  इंजीनियर का है। पिता जी के उच्च कोटि के गायत्री साधक होने के कारण और माता जी की पूर्ण कृपा से मैं जन्म से ही गायत्री परिवार से जुड़ा हुआ हूँ। जीवन की ज़िम्मेदारी  निभाते हुए गुरु कार्य करना ही लक्ष्य रहा है।अब जो जैसा जितना होता है जरूर करते हैं।  गुरू सत्ता से यही प्रार्थना है ऐसा अवसर बार-बार मिलता रहे।  शांतिकुंज 3 बार गया हूँ। 9 दिवसीय  सत्र भी किया है। और कोई प्रश्न हो, जिज्ञासा हो, तो अवश्य बताएं। 

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2.आदरणीय कुमोदिनी गौरहा जी :

हमारी समर्पित सहकर्मी आदरणीय कुमोदिनी गौरहा एक अध्यापक हैं और गायत्री परिवार  के साथ अत्यंत निष्ठां से जुड़ी हुई हैं। 36गढ़ के ज़िला  बिलासपुर में  स्थित ग्राम पंचायत मदनपुर शासकीय प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक (हेडमास्टर ) श्रीमती लक्ष्मी विश्वकर्मा से 2014 में  उनका  पहला परिचय हुआ था जब उनकी ट्रांसफर  रमतला से मदनपुर हुई थी। कुमोदिनी बहिन बताती हैं कि उस समय मैडम विश्वकर्मा को गुरुदेव के बारे  में कोई जानकारी नहीं थी। मैं समय-समय पर उन्हें पढ़ने के लिए  गुरुदेव का   साहित्य देती थी लेकिन फिर  भी मेडम कोई विशेष रुचि नहीं लेती थीं । 2020 में  जब मैडम  को करोना हुआ और अकेले रहना पड़ा तब उन्होंने कुछ रुचि दिखाई। मैडम  के पास रुपया पैसा  बहुत हैं लेकिन  दान पुण्य करने में हमेशा पीछे रहती हैं इसलिए  मैं उन्हें उसी तरह का साहित्य भेंट करती  हूँ। 

बहिन जी ने श्रीमती  लक्ष्मी विश्वकर्मा को रिटायर होने पर विदाई समारोह में  गुरुदेव का साहित्य- (1)धन का सदुपयोग कैसे करें (2) अवांछनीयता से कैसे बचें- भेंट किया जिसकी फोटो हम पाठकों में शेयर कर रहे हैं।   

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3.आदरणीय रामनारायण कौरव जी :

विगत दिवस अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा संचालित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रांत प्रभारी (Province-in-Charge)  श्री सारांश वर्मा जी एवं पत्नी जी का सपत्नीक घर आगमन हुआ,उनकी मां स्व. श्रीमती राजेश्वरी वर्मा DEO  पद से रिटायर्ड हुई थी जिन्होंने गुरुदेव के सानिध्य में लखनादौन शक्तिपीठ निर्माण में अपने गहने सौंप  कर गुरु चरणों में समर्पण किया, श्री वर्मा जी गुरुदेव की गोद में खेले हैं ।  उनके संस्मरण सुनकर हृदय भाव विभोर हो गया। 

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4.बिटिया संजना कुमारी:

आदरणीय डॉक्टर सर आपको हमारा हृदय से भावभरा सादर प्रणाम एवं कोटि-कोटि धन्यवाद , इस अनमोल तोहफ़े के लिए ️। आदरणीय पंकज सर और आदरणीय रेणु मैम को इस अद्भुत सुझाव के लिए  हमारा सादर प्रणाम एवं हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद । Strength is life and  weakness is death, यह चैनल सचमुच हम सभी के लिए ऊर्जा और उत्साह का स्रोत हो गया है। इस विडियो का ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार में शामिल होना हमारे लिए एक महत्वपूर्ण  संदेश है कि अगर हम सकारात्मक हैं, जिज्ञासु हैं और हम अंदर से निर्मल हैं तो हम कहीं भी, कभी भी, सीख सकते हैं और जीवन को श्रेष्ठतम ऊंचाईयों पर ले जा सकते हैं।  जय गुरुदेव जय शिव शंभू। 

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5.आदरणीय रेणु श्रीवास्तव जी :

ऊँ श्री गुरुसत्तायै नमः।सभी सहयोगियों को प्रातः नमन।आज के ज्ञान प्रसाद का विषय थोड़ा जटिल है जो ईश्वर के अस्तित्व,स्वर्ग-नरक पर आधारित है।ईश्वर के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता पर कुछ का कहना है कि हम ईश्वर को नहीं मानते ।ईश्वर को पाने के लिये मन की शुद्धता,जिज्ञासा और लगन चाहिये। स्वर्ग-नरक भी कहीं और नहीं सब यही है।अच्छे कर्म का फल सदा अच्छा और बुरे कर्म का फल सदा बुरा मिलता है।पूर्व लेख में भी स्वर्ग का वर्णन किया गया है  जिसमें हिमालय के दिव्य और रमणीय क्षेत्रों की तुलना स्वर्ग से किया गया है।वहाँ मन की शान्ति तथा असीम सुख काअनुभव होता है।हम ईश्वर को तो नहीं देख पाते पर उनके अस्तित्व को हर क्षण अनुभव करते हैं।मन में यह भाव तो आता है कि इतने बड़े संसार को चलाने वाली  कोई शक्ति अवश्य है।ऐसा कहा जाता है कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस को मां काली ने साक्षात दर्शन दिये। गुरुदेव का जीवन भी गायत्री मय था उन्हें भी गायत्री मां का दर्शन अवश्य प्राप्त था। ईश्वर को पाने के लिये वह शक्ति,ललक प्रबल हो तो भगवान दिखते हैं। समय-समय पर भगवान अवतरित होकर मनुष्य रूप में  धरा का उद्धार करने के लिये जन्म लेते हैं।गुरुदेव भी इसी उदेश्य से हमारे बीच आये।तुलसीदास ने  भी रामायण मे लिखा है “जब-जब होई धरम की हानि,बाढ़हि असुर अधम अभिमानी, तब -तब भगवान को पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है। भगवान राम और कृष्ण प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।भगवान के दर्शन के लिये दिव्यचक्षु चाहिये।सूरदास जी ने मन की आँखों  से प्रभु का दर्शन किया  और महिमा का गुणगान किया।चित्रकूट के जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने  भी मन की आँखों से भगवान का दर्शन किया था। सुप्रीम कोर्ट में उनकी  गवाही के बाद ही जज को मजबूर होकर राम मंदिर के पक्ष में फैसला देना पड़ा। अर्जुन को महाभारत की लड़ाई में कृष्ण भगवान ने दिव्य चक्षु से विश्व ब्रह्माण्ड का दर्शन कराया था। मन में ईश्वर का वास हो इसके लिये मन की शुद्धता,यानि मन के अन्दर की कलुषित विचार को मिटाना होगा तभी हम परमात्मा का अनुभव कर सकेंगे। प्रेम रूपी मन ही आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। हमें सदा शुभ और पुण्य कर्म करना चाहिये। ईश्वर का वास हर प्राणियों में है। भगवान ने भी कहा है…”कण-कण में है वास जिसका वही आत्मा सच्चिदानन्द मैं हूँ।तारों -सितारों में, हर जीवों में मैं ही हूँ।” यह विषय बहुत ही वृहत है हममें इतनी क्षमता नहीं, न विस्तृत जानकारी है।अतः अब विराम देती हूँ।

१ जुलाई   2022  की 24 आहुति संकल्प सूची: 

(1 )अरुण वर्मा-28 , (2 ) रेणु श्रीवास्तव -28 , (3)  पूनम  कुमारी-26 ,(4) संध्या कुमार – 26  (5) सरविंद कुमार – 26 ,(6) संजना कुमार – 27, (7) प्रेरणा कुमारी -26   

इस सूची के अनुसार अरुण वर्मा जी गोल्ड मैडल विजेता हैं, उन्हें हमारी व्यक्तिगत और परिवार की सामूहिक बधाई। सभी सहकर्मी अपनी-अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिनको हम हृदय से नमन करते हैं, आभार व्यक्त करते हैं और जीवनपर्यन्त ऋणी रहेंगें। धन्यवाद


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