अपने सहकर्मियों की कलम से: 11 जून, 2022

एक बार फिर हम अपने सहकर्मियों के समक्ष यह शनिवार वाला स्पेशल सेगमेंट लेकर प्रस्तुत हुए हैं। यह सेगमेंट सप्ताह  की अन्य गतिविधियों से थोड़ा हटकर होता है, एक ऐसा सेगमेंट जिसमें सारे का सारा योगदान हमारे सहकर्मियों का ही होता है।  इसीलिए इस सेगमेंट के साथ  स्पेशल यानी विशेष का विशेषण लगा होता है। किसी भी सहकर्मी की कोई भी प्रतिभा, कोई भी गतिविधि इस सेगमेंट में प्रोत्साहित करते हुए प्रकाशित की जाती है।  कई बार अपने सहकर्मियों के कमेंट इतना ज्ञानवर्धक होते हैं कि पढ़ते-पढ़ते हम भावना में बह जाने के कारण उनका इस सेगमेंट के लिए चयन करके रिज़र्व रख देते हैं और समय-समय पर प्रकाशित करते हैं।  इस प्रकाशन का  उद्देश्य दूसरों को प्रोत्साहित करना है ताकि जो  लोग “जय गुरुदेव” और “इमोजी” लिख कर अपना कार्य पूर्ण हुआ समझते हैं, थोड़ा और समय निकालें और अपने गुरु के प्रति अपनी भावना व्यक्त करें ,अपना समर्पण व्यक्त करें ,गुरु भक्ति व्यक्त करें।  हम यह कभी नहीं कहेंगें कि इस प्रकार के लोगों की श्रद्धा गुरु के प्रति कोई कम होगी लेकिन आपको अपनी भावना व्यक्त करने का सुनहरी अवसर मिल रहा है।  अक्सर देखा गया है कि हर कोई यही कहता पाया गया है कि “हमारे पास समय नहीं है। ” गुरुदेव ने हमें डाँटते हुए हज़ारों पर कहा है यह कोरी बहानेबाज़ी है। गुरुदेव के ही शब्दों में कहा जा सकता है कि

 “रोज़ कुआँ खोदने वाले भी यदि आदर्शवादिता को अपना सकें तो आठ घंटा कमाने के लिए ,सात घंटा सोने के लिए और पांच घंटा घर के कार्यों के लिए लगाए जाएँ तो 20 घंटे बनते हैं ,फिर भी हमारे पास 4 घंटे बिना किसी कठिनाई के युग धर्म के लिए नियमित रूप से लगा सकते हैं। रिटायर्ड लोगों के लिए तो यह टाईमटेबल और भी सरल है। रिटायर्ड जीवन  पोतों पोतियों की टट्टी धोते रहना, पुत्रवधु की गलियां खाते  रहना ही जीवन नहीं है, वह चाहें तो वानप्रस्थ परम्परा अपनाकर युग निर्माण में योगदान दे सकते हैं। दुनियादारी तो एक ऐसा दलदल है जिसमें हम न चाहते हुए भी धंसे जाते हैं।”

ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार में  लगातार उठ रही टीस केवल शब्दों में ही नहीं है।  प्रेरणा बिटिया ने यह टीस ऑडियो बुक में व्यक्त कर दी  है, अन्य लोग कमैंट्स में व्यक्त कर रहे हैं ,फ़ोन करके बता रहे हैं।  लेकिन इस टीस का निवारण हमारे अपने ही हाथों में है। केवल  और केवल   समयदान, श्रमदान, ज्ञानदान !!! 

आज के स्पेशल सेगमेंट में हम लगभग  पांच मिंट का एक वीडियो क्लिप शेयर कर रहे हैं जिसमें शिशुओं से लेकर वरिष्ठ सहकर्मी तक इस ज्ञानरथ को चलाने में अपना योगदान प्रदान कर रहे हैं। यह वीडियो हमारी पोती से आरम्भ होकर सुमन लता  बहिन जी पर समाप्त होती है। बीच में ज्योति बहिन जी  द्वारा प्रशिक्षित बच्चे, हमारे युवा सहकर्मी और कुछ अधेड़ आयु सहकर्मी इस वीडियो को सुशोभित कर रहे हैं।इस वीडियो में randomly चयन किया गया है, और भी  बहुत सारे प्रतिभाशाली सहकर्मी हैं, सभी तो शामिल नहीं किये जा सकते।  हम पहले भी बता चुके हैं  ज्योति जी  इंदौर से हैं, माँ भगवती  बाल संस्कार शाला चलाती हैं ओर ऑनलाइन युग प्रवक्ता मीटिंग में भी रहतीं हैं । वह कहती हैं कि  गुरुदेव का एक छोटा सा कार्य करने का प्रयास कर रही हूं। पिछले कुछ समय से 24 आहुति संकल्प सूची के नंबर ऊपर नीचे जा रहे थे लेकिन जो हो रहा है सराहनीय है हम धन्यवाद् करते हैं। आज के सेगमेंट का समापन तो संकल्प सूची से ही होगा लेकिन रेणु  श्रीवास्तव बहिन जी के  शांतिकुंज अनुभव और एक घटना बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक है, अवश्य अमृतपान करें।  

राजकुमारी जी, कुसुम त्रिपाठी बहिन जी से क्षमा प्रार्थी हैं कि इस issue में शब्द सीमा के कारण उनकी contributions शामिल  न हो सकीं ,हम सभी के योगदान को शामिल करने को वचनबद्ध हैं 

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रेणु श्रीवास्तव जी :    परमपूज्य गुरुदेव की कृपा से हम अपने विवाह की 50वीं वर्षगांठ युगतीर्थ शांतिकुंज में मनाने का प्रोग्राम बनाया। ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के समक्ष यह संक्षिप्त सा विवरण शेयर कर रहे हैं ताकि अन्य परिजनों को भी इस युगतीर्थ का बारे में जानकारी प्राप्त हो।

लखनऊ से हरिद्वार सुबह 3:30 बजे ट्रेन पहुँचने पर  मैं अपने पति के साथ बाहर आई, उसके बाद auto से करीब 4:00 बजे  गेट नंबर 5  से स्वागत कक्ष में प्रवेश किया। आधार कार्ड, covid vaccination certificate आदि formalities पूरा करने के बाद नाचिकेता भवन में जगह मिली। उत्तर प्रदेश से ही  एक और परिवार  जो बाद में आये उन्हें भी हमारे  साथ  कमरे में जगह दी गई। इस  कमरे में 6 बेड लगे हुए  थे। प्रथम दिन तो हम  फ्रेश होकर स्नान इत्यादि के बाद canteen, भोजनालय तथा संस्कार पंजीकरण के लिये घूमते रहे। मंदिर में माँ गायत्री को नमन,गुरुदेव और माता जी की समाधि का दर्शन-नमन, आरती ऐसे ही समय बीत गया पता ही नहीं चला। अखंड दीप दर्शन के लिये गए   समय परिवर्तन के  कारण दर्शन नहीं हो सके। दूसरे दिन प्रातः सबसे पहले हम अखंड दीप दर्शन के लिये गए,  उसके बाद विवाह दिवस संस्कार सम्पन्न हुआ ।

वशिष्ठ कक्ष जहाँ पहले भोजन सामग्री का स्टोर हुआ करता था,हमारे जाने से पहले  तर्पण संस्कार चल रहा था।  विवाह संस्कार के बाद हम लोग हवन के लिये यज्ञ शाला गये और हवन करने  के बाद शैल जीजी  से मिलने गये।  हर जगह लम्बी-लम्बी lines थीं, प्रतीक्षा में काफी समय लग जाता था।   

जीजी आजकल  अकेली  ही मिलती हैं। श्रद्धेय डॉक्टर साहिब ने  अस्वस्थता के कारण मिलना बंद कर दिया था। हमारे परिजन शांतिकुंज के अनुशासन के बारे में भलीभांति परिचित तो  होंगें हीं । आरती,ध्यान,हवन, अखंड दीप दर्शन, प्रवचन आदि  करते/ सुनते इस दिव्य तीर्थ में समय का पता ही नहीं चलता। हमें तो बड़ी आयु होने के कारण थकान अनुभव हो जाती थी।शान्तिकुंज के  दिव्य वातावरण का वर्णन करें तो प्रातः आँख खुलते ही माता जी की वाणी  में भजन “वह शक्ति हमें दो दया निधि..” सुनकर ऐसा प्रतीत होता था कि  वंदनीय माता जी  सामने बैठकर गा रही हैं, शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता हुआ अनुभव  होता था। हर क्षण गुरुदेव और माता जी का सानिध्य अनुभव  होता था। गंगा दशाहरा  के लिये नौ दिवसीय जीवन साधना संकल्प (लधुअनुष्ठान) भी  31 मई  को संध्या में  सामूहिक संकल्प कार्यक्रम हुआ। हमने  भी  नौ दिवसीय जीवन साधना सत्र का संकल्प लिया। यहाँ तो केवल पूर्णाहुति ही हो सकी, अनुष्ठान घर जाकर  लखनऊ में ही करूंगी। रात्रि में  वंदनीय माता जी द्वारा गाया हुआ  प्रज्ञा गीत “विधाता तू हमारा है तू ही विज्ञान दाता है” से समापन होता है। भीड़ तो अत्याधिक थी पर गुरुदेव की कृपा से आवास तथा भोजन प्रसाद से  कोई भी वंचित  नहीं रहता। यही  है हमारे गुरुदेव की  आध्यात्मिक शक्ति और साम्राज्य।मेरा आग्रह है कि जो  अभी तक युगतीर्थ शांतिकुंज  नहीं गए हैं, वे  अवश्य शान्तिकुंज जाकर गुरुदेव  की कृपा प्राप्त करें। जाने से पहले पूर्व अनुमति अवश्य लें लें।सभी सहयोगियों को मेरा सादर नमन एवं हार्दिक धन्यवाद।

गुरुदेव का चमत्कार :

बात हमारे  एक जानकार  महापुरुष के बारे में है जो उस समय पुलिस के  निर्माण विभाग मे  सहायक इन्जीनियर के पद पर लखनऊ मे ही तैनात थे।  गायत्री परिवार के समर्पित कार्यकर्ता हैं अब तो   वह किसी senior post से retire भी हो चुके। कोरोना काल से पूर्व प्रत्येक नवरात्रि में पांच कुण्डीय यज्ञ का संचालन करते थे ।

जहाँ तक याद आती है यह घटना  1993.की है जब लखनऊ में अश्वमेध यज्ञ का आयोजन हुआ था। एक दिन अचानक ही  आफिस में उनके पेट में दर्द हुआ कि वे बेहोश हो गये। इलाज के लिये उन्हें लखनऊ स्थित  P.G.I. Medical sciences ले जाया गया। जाँच के बाद पता चला कि दोनों किडनी  में पत्थरी है और  डाक्टर ने सलाह दी कि एक बार में संभव नही है। बारी बारी आपरेशन करना होगा।थोड़ा ठीक हुये तो यज्ञ कार्य के लिये एक माह की छुट्टी के लिये apply किया लेकिन  उनके  incharge  ने  leave sanction करने से मना कर दिया।  भाई साहिब को  गुरुजी का कार्यं करना था अतः यह कहकर कि leave without pay ही   कर दीजिये पर मैं जाऊँगा  अवश्य । भाई साहिब ने प्रमोशन को भी forgo  कर दिया। उसके बाद एक माह तक अश्वमेध यज्ञ में कार्यरत रहे। इनकी पत्नी के कहा कि गुरुदेव का कार्य कर रहे हैं तो उनसे ही प्रार्थना करें कि आप ठीक हो जायें ताकि ऑपरेशन न करवाना पड़े। तब भाई साहिब  ने उत्तर दिया कि जो कार्य डाक्टर का है उसके लिये गुरुजी तो क्यों कष्ट दें। यज्ञ कार्य सम्पन्न होने के बाद आपरेशन के लिये admit हुए  पर  आश्चर्य की बात यह थी कि जब आपरेशन से पहले दुबारा टेस्ट हुआ तो पथरी  गायब थी ।डाक्टरों ने  इन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी। उन्हे विश्वास नहीं हुआ और वह  डाक्टर गायत्री शर्मा जो डा.ओ.पी. शर्मा की पत्नी तथा वेद प्रकाश जी की भाभी हैं  उस समय लखनऊ मे D.G.health services थी उनके पास गये और कहा कि मेरे दोनो किडनी में पथरी थी लेकिन अब डाक्टर कह रहे हैं नहीं है। कृपया दीदी आप अपने सामने x-ray निकाल कर देख लें। इस बार भी कुछ नहीं निकला पर उन्हें विश्वास नही हुआ कि बिना इलाज पथरी गायब कैसे हो सकती  है। उसके बाद भी संतोष नहीं हुआ, फिर से प्राइवेट सेन्टर में जाकर रंगीन x-ray  निकलवया और वहां  भी वही रिजल्ट। जो परिजन शांतिकुंज से  परिचित नहीं है उन्हें यह बताना चाहेंगें की डा. गायत्री शर्मा,डा. ओ पी शर्मा और प्रो. त्रिपाठी जी पिछले कई वर्षों से शांतिकुंज को जीवनदान दे चुके है अर्थात उन्होंने अपनेआप को परमपूज्य गुरुदेव के चरणों में जीवनदानी के रूप में समर्पित किया हुआ है और मिशन को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।   

उपरोक्त घटना की तरह अनगनित घटनाएं हैं जो गुरुदेव की दिव्य शक्ति पर मोहर लगाती हैं। गुरुदेव  कितनों को ही  रोग मुक्त किया और उनके कष्टों का निवारण किया । इसे गुरू का चमत्कार कहें या  शिष्य का  गुरु पर विश्वास। धन्य हैं हमारे गुरु चरणों में कोटि कोटि नमन।

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण के साथ यह स्पेशल सेगमेंट  आपको ऊर्जा प्रदान करे और आप सारा दिन ऊर्जावान  रहें । किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।

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24 आहुति संकल्प 

10 जून  2022 के ज्ञानप्रसाद के अमृतपान उपरांत 4 समर्पित सहकर्मियों ने 24 आहुति संकल्प पूर्ण किया है, यह समर्पित सहकर्मी निम्नलिखित हैं :

(1)अरुण वर्मा -43 , (2 ) संध्या कुमार -25  ,(3) सरविन्द कुमार -24  ,(4 ) रेणु श्रीवास्त्व -24 ,(5) संजना कुमारी  -27  

अरुण वर्मा जी आज भी गोल्ड मेडल विजेता हैं जो हम सबकी बधाई के पात्र हैं। सभी सहकर्मी अपनी अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिन्हे हम हृदय से नमन करते हैं और आभार व्यक्त करते हैं। धन्यवाद्

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