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गायत्री तपोभूमि मथुरा की स्थापना- पार्ट 1 

28 फ़रवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद – गायत्री तपोभूमि मथुरा की स्थापना- पार्ट 1 

फ़रवरी माह के अंतिम दिन की ब्रह्मवेला में यह ज्ञानप्रसाद आपके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। हमारे सहकर्मी अवश्य ही Monday Blues को त्याग कर ज्ञानप्रसाद के अमृतपान की प्रतीक्षा कर रहे होंगें। हमें अटल विश्वास है कि जहाँ हम अपने सहकर्मियों का आज की क्लास में अंतरात्मा की गहराईयों से स्वागत कर रहे हैं, वह भी ज्ञानप्रसाद का स्वागत करने को आतुर होंगें । 

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को ध्यान में रखते हुए हम चाहते थे कि “आत्मबल” के विषय पर चर्चा की जाये क्योंकि अभी-अभी समापन हुए इन्द्रियों के ताज़ा ज्ञान की पृष्ठभूमि में आत्मिक शक्ति और बल की अत्यंत आवश्यकता है। हमने इस विषय पर काफी स्वाध्याय किया लेकिन लेख लिखने की स्थिति में पहुंचना संभव नहीं हो पाया। हम सभी सहकर्मियों से निवेदन करते हैं कि आत्मबल बनाये रखें, विश्वशांति के लिए प्रार्थना करें, सर्वशक्तिमान प्रकृति अपना कार्य कर रही है। 

आज के ज्ञानप्रसाद में हम गायत्री तपोभूमि मथुरा की स्थापना का आँखों देखा हाल प्रस्तुत कर रहे हैं। दो भागों में प्रकाशित होने वाले इस लेख के प्रथम भाग का अमृतपान आज होगा और कल द्वितीय भाग प्रस्तुत किया जायेगा। 

तिरहार उत्तर प्रदेश के पंडित रामदयाल परिहार जी की यह प्रस्तुति बहुत ही रोचक है । लगभग सात दशक पूर्व जुलाई 1953 की यह प्रस्तुति, 2022 में आज भी अति महत्वपूर्ण है। इन सात दशकों में दुर्वासा ऋषि की तपस्थली के बारे में, जिस पर तपोभूमि की स्थापना की गयी थी कितना कुछ ही लिखा जा चुका है। इतना कुछ लिखने के बाद भी ऐसा ही लगता है कि अभी बहुत कुछ और लिखा जा सकता है क्योंकि जिस गुरु के बारे में लिखने का तुच्छ प्रयास हम कर रहे हैं वह स्वयं ही अनंत हैं -जिनका कोई अंत नहीं है।

परमपूज्य गुरुदेव ने 1953 की अखंड ज्योति में “अपनों से अपनी बात” और अन्य लेखों में तपोभूमि के बारे में बहुत विस्तार से लिखा है। हमने स्वयं नवंबर 2019 में निर्माणाधीन (Expansion) तपोभूमि की कुछ वीडियोस और लेख अपने चैनल पर अपलोड किये थे। आदरणीय ईश्वर शरण पाण्डे जी, जो तपोभूमि के व्यवस्थापक और युग निर्माण पत्रिका के सम्पादक हैं, के सहयोग से रिकॉर्डिंग संभव हो पायी थी। उन्होंने अपने दो इंटरव्यू भी रिकॉर्ड करवाए थे। हम पाण्डे बाबू जी का ह्रदय से अभार करते हैं। हमारे सहकर्मी 66 वर्ष पूर्व और 2019 की तपोभूमि के comparison के लिए हमारे channel को विजिट कर सकते हैं। 

तो आइये चलें आँखों देखा हाल की ओर :

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गायत्री तीर्थ का निर्माण, माता के मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा, तथा पूर्णाहुति महायज्ञ का आयोजन 20, 21, 22 जून,1953 को सानन्द सम्पन्न हो गया। उस अवसर पर केवल 250 सज्जनों को ही आमन्त्रित किया गया था इसलिए कि उस मनोहर दृश्य का लाभ कुछ थोड़े से बड़भागी ही ले सके। पर वे हजारों गायत्री प्रेमी जो उस अवसर पर उपस्थित नहीं हो सके, अवश्य ही इस यज्ञ में सूक्ष्म रूप से सम्मिलित रहे होंगे। उनके लिये इस उत्सव का आँखों देखा संक्षिप्त विवरण नीचे की पंक्तियों में उपस्थित करते हैं।

समारोह को सफल बनाने के लिये कितने ही महानुभाव लगभग 10 दिन पूर्व मथुरा आ गये थे।18 और 19 जून को तपोभूमि में काफी चहल पहल आरम्भ हो गई थी। रात को प्रवचन होने आरम्भ हो गये थे। श्री स्वामी देवदर्शनानन्द जी सरस्वती का प्रवचन दोनों दिन हुआ। परम पूज्य गुरुदेव का लिखित भाषण 21 जून को पढ़ कर सुनाया गया जिसे सुनकर श्रोतागण गदगद हो गये। पंडित मुकुट बिहारीलाल जी शुक्ल वकील, के तीनों दिन महत्वपूर्ण प्रवचन हुए। 20 जून को प्रातःकाल से कार्य आरम्भ हुआ। आचार्य श्री. लालजी कृष्ण पण्डया की अध्यक्षता में पंचमुखी यज्ञ का कार्य आरम्भ हुआ। वेदपाठी विद्वान ब्राह्मणों ने पूर्ण शास्त्रोक्त रीति से कुण्ड तथा वेदियों की रचना की थी। वैदिक विधि विधान के साथ देव पूजन तथा यज्ञ हुआ।

लगभग 250 व्यक्ति देश के कोने कोने से आये हुए थे। मद्रास को छोड़कर भारतवर्ष के प्रत्येक प्रान्त का प्रतिनिधित्व मौजूद था। आगन्तुकों में 16 वकील, 41 ग्रेजुएट, 1 इंजीनियर, 3 डॉक्टर तथा अनेकों संस्कृत एवं धर्मशास्त्र के सुयोग्य ज्ञाता महानुभाव उपस्थित थे। सभी विचारधाराओं के व्यक्ति अपने तुच्छ मतभेदों को भूल कर अनेकता में एकता अनुभव करने के लिए एकत्रित थे।अधिकांश महानुभाव सनातन धर्मी थे पर आर्य समाजों के उच्च पदाधिकारी तथा कई बातों में मतभेद रखने वाले अन्य अनेकों महानुभाव उतनी ही श्रद्धा और तत्परता के साथ भाग ले रहे थे। 40 से अधिक महिलाएं बाहर से आई थीं, यह सभी गायत्री उपासना में बहुत समय से निष्ठावान रही थीं।

प्रायः सभी आगन्तुकों ने तीन दिन के विस्तृत कार्यक्रम में भाग लिया। तीन दिन में गायत्री महामंत्र का 24 लक्ष जप पुरश्चरण, 60 हजार आहुतियों का हवन, 1 हजार गायत्री चालीसा का पाठ, यजुर्वेद तथा गीता के पारायण, भागवत दशम स्कन्द तथा रामायण सुन्दरकाण्ड के पाठ, श्री सूक्त, पुरुष सूक्त, गायत्री सहस्र नाम, गायत्री कवच, रुद्राष्टाध्यायी, दुर्गासप्तशती पाठ, महामृत्युंजय का जप आदि का सुव्यवस्थित कार्यक्रम तीनों दिन चलता रहा। सभी आयोजन बड़ी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए।

प्रातः साढ़े 3 बजे जागने की घण्टी बज जाती थी। सभी लोग उठकर शौच, स्नान, से निवृत्त होकर 5 बजे से पूर्व ही उपासना में लग जाते थे। 8 बजे सबको पंच गव्य दिया जाता था। गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर के पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधि की मान्यता है। साढ़े 11 बजे तक विविध कार्यक्रम चलते रहते। मध्याह्न को फलाहार दिया जाता। दो घण्टे का विश्राम देकर 2 बजे से फिर सब कार्यक्रम आरम्भ हो जाते और सायंकाल 5 बजे तक चलते रहते। इसके बाद लोग शौच स्नान से निवृत। सायं काल को फिर थोड़ा स्वल्प फलाहारी जल पान मिलता। रात्रि को 8 बजे से कीर्तन तथा प्रवचन होते और प्रायः 11 बजे तक समाप्त होते। 21 जून की रात्रि को परिचय सम्मेलन हुआ। सब लोगों ने अपने अपने परिचय खड़े होकर स्वयं दिये, गायत्री परिवार का प्रत्येक सदस्य इस अवसर पर बहुत ही प्रसन्न दृष्टिगोचर हो रहा था। अपने इतने भाई बहिनों को सामने देखकर उत्साह और हर्ष से सबके मन भरे हुए थे। महिलाओं का पंडित अलग था, उन्होंने बड़ी ही श्रद्धा तथा तत्परता के साथ भाग लिया। पहले दिन उन्होंने सवा हजार से अधिक गायत्री चालीसा के पाठ किये। दूसरे दिन उनके लिए सवा लक्ष गायत्री जप का आयोजन था उन्होंने उससे भी अधिक जप किये। तीसरे दिन उनके द्वारा हवन का आयोजन था। सेवा कार्यों में उनका सहयोग सराहनीय रहा।

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव आज का लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं। 

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26 फ़रवरी 2022 वाले लेख के स्वाध्याय के उपरांत 4 सहकर्मियों ने 24 आहुति संकल्प संकल्प पूर्ण किया है। यह सहकर्मी निम्नलिखित हैं :

(1) प्रेरणा कुमारी 27,(2 )अरुण वर्मा-30,(3 )सरविन्द पाल -26,(4) संध्या कुमार- 26

अरुण वर्मा जी 30 अंक प्राप्त करते हुए गोल्ड मैडल विजेता घोषित किये जाते हैं। अरुण वर्मा जी तो हर रोज़ इस रेस में सबको पीछे छोड़े जा रहे हैं लेकिन हम तो कहेंगें की सभी सहकर्मी अपनी अपनी समर्था और समय के अनुसार expectation से ऊपर ही कार्य कर रहे हैं जिन्हे हम हृदय से नमन करते हैं और आभार व्यक्त करते हैं। धन्यवाद्


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